जब आने वाला हो नन्हा मेहमान

प्रेग्नेंसी का पता चलने के बाद अक्सर महिलाएं कुछ बातों की कम जानकारी होने की वजह से ऐसे कदम उठा लेती हैं, जो आगे चलकर डिलिवरी के दौरान मुश्किल पैदा कर सकते हैं। कुछ एहतियात बरतकर इन कठिनाइयों से बचा जा सकता है। प्रेग्नेंसी एक ऐसा वक्त होता है, जो हर महिला के लिए बहुत खुशियां लेकर आता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए यह थोड़ा क्रिटिकल टाइम होता है। अब आप पर एक और जान की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ बातों का खास ध्यान रखकर इस दौरान आने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है।
एकदम न बढ़ाएं डाइटः- अक्सर प्रेग्नेंसी की खबर मिलते ही घरवाले महिला की अधिक केयर करने लगते हैं। ऐसा करना ठीक है, लेकिन कुछ बातों को ध्यान रखने की जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी के शुरुआती तीन महीनों में महिलाओं को जी-मचलाना, उल्टी, बदहजमी और गैस जैसी शिकायतें आम होती हैं। इसलिए इन महीनों के दौरान खाने की मात्रा को बढ़ाने की जरूरत नहीं होती। इसके स्थान पर डाइट में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल वाले हल्के खाने को शामिल करना चाहिए।
नाश्ते को न करें दरकिनारः- प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में अक्सर महिलाएं ऑफिस या घर के कामकाज में सामान्य तौर पर लगी रहती हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन प्रेग्नेंसी का पता चलने के बाद नाश्ते को बिल्कुल अवॉइड नहीं करना चाहिए। पोषक तत्वों से भरपूर नाश्ता लेने के बाद यदि महिलाओं को दिन के आहार में थोड़ा कम पोषण मिले, तो यह होने वाले बच्चे की सेहत पर ज्यादा असर नहीं डालता। इसके साथ ही सुबह के समय थोड़ा-बहुत खाने से दिनभर गैस और एसिडिटी की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
लालच पर नियंत्रण रखेंः- महिलाओं में चटपटा खाने की आदत पुरुषों के मुकाबले ज्यादा होती है। यह आदत प्रेग्नेंसी के दौरान और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में महिलाएं चुपचाप चाट, पानीपुरी, भेल जैसी चीजें खाने की कोशिश करती हैं। ये चीजें आने वाले नन्हे मेहमान की सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा मसालेदार और चटपटी चीजों का सेवन करने से महिलाओं को कई तरह की परेशानी हो सकती है।
कभी न भूलें एक्सरसाइज करनाः- प्रेग्नेंट महिलाओं को अपने खानपान के साथ ही फिजिकल फिटनेस की तरफ भी विशेष ध्यान देना चाहिए। एक बार प्रेग्नेंसी का पता चल जाने के बाद नियमित एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी होता है। इससे बॉडी आने वाले मेहमान को संभालने के लिए तैयार हो जाती है। एक्सरसाइज के साथ हल्का योग और प्राणायाम भी लाभकारी होगा। दिन में कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए।

लड़कियों को पसंद आते है दाढ़ी वाले लोग

आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि ज्यादातर लड़कियों को दाड़ी वाले पुरुष ही आकर्षित करते हैं। यह तो सही है कि दाड़ी को रखना अपने आपमें मेहनत का काम है, क्योंकि इसकी देखभाल और साफ-सफाई में बहुत समय देना होता है। अब सोचने वाली बात है कि आलसी कहे जाने वाले पुरुष भी दाड़ी कैसे रख लेते हैं और ऐसा शौक क्यों पालते हैं। दरअसल हाल में हुआ एक रिसर्च के परिणाम बताते हैं कि बड़ी हुई दाढ़ी वाले पुरुष लड़कियों को खूब भाते हैं। रिसर्च बताता है कि अधिकांश लड़कियां जीवनसाथी के तौर पर बड़ी दाढ़ी वाले पुरुषों को ही पसंद करती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि चेहरा रौबदार और सीधे निर्णय लेने की स्थिति वाला प्रतीत होता है। इसलिए सलाह देने वाले तो यहां तक कहते हैं कि यदि आप लड़कियों से अपना संबंध लंबे समय तक रखना चाहते हैं तो दाढ़ी बढ़ा लिजिए, आपकी मुराद पूरी हो जाएगी। यह दावा रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने किया है। इसलिए इसमें गंभीरता नजर आती है। वैज्ञानिकों की मानें तो महिलाएं जीवन भर साथ निभाने के लिए ही दाढ़ी वाले पुरुषों को चुनती हैं। क्या आप भी ऐसा ही सोचती हैं, अगर हां तो जानना जरुरी है कि आखिर ये मर्द दाढ़ी क्यों रखते हैं। ऐसा तो नहीं कि रोज-रोज दाढ़ी साफ करने की झंझट से बचने के कारण उन्होंने दाढ़ी बढ़ा ली हो। अतः ऐसा करने वाले पुरुष आपकी सोच पर खरे नहीं उतर सकते हैं। जबकि शोध बताता है कि पुरुषत्व और दाढ़ी के बीच में गहरा संबंध है। इस अध्ययन में बताया गया है कि रिलेशनशिप के लिहाज से देखा जाए तो काफी ज्यादा मैस्क्युलिन और काफी ज्यादा फेमेनाइन दिखने वाले पुरुष कम आकर्षक होते हैं। बताते चलें कि महिलाओं को बड़ी दाढ़ी वाले पुरुष क्लीन सेव पुरुषों की तुलना में ज्यादा स्ट्रॉन्ग लगते हैं। उन्हें दाढ़ी वाले पुरुष मैच्योर लगते हैं। दाढ़ी से किशोरवय और पुरुषों में अंतर पता चल जाता है। कुछ महिलाएं तो यहां तक कहती हैं कि दाढ़ी में पुरुष ज्यादा सेक्सी और हॉट लगते हैं। अब यदि आप दाढ़ी वाले पुरुष में ये सब पाती हैं तो यह शोध को प्रमाणित करने जैसा होगा, वर्ना अपनी-अपनी सोच वाली बात ही चरितार्थ होती है।

पांच मिनट में संवारे कर्ली हेयर

कर्ली हेयर एक ऐसा हेयरस्टाइल है जो कभी भी फैशन से बाहर नहीं होता है। कुछ के बाल तो प्राकृतिक रूप से कर्ली होते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे बाल पाने के लिए खासतौर पर प्रयास करते हैं। जो भी हो, पर आपको कर्ली हेयर की देखभाल के बारे में पता होना चाहिए। सीधे बाल के उलट कर्ली हेयर को शानदार दिखाने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास करने होते हैं। अगर आप अपने कर्ली हेयर पर इतराते हैं तो निश्चित रूप से आप इसकी देखभाल के तरीके जानना चाहेंगे। आप यह जान लीजिए के कर्ली हेयर का रखरखाव सीधे बालों जितना आसान नहीं है। हालांकि ऐसे कई टिप्स हैं जिसे अपना कर आप न सिर्फ कर्ली हेयर का अच्छे से रखरखाव कर सकते हैं बल्कि इसे और बेहतर भी बना सकते हैं। तो आइए जानते हैं कुछ टिप्स जिनकी सहायता से आप अपने कर्ली हेयर को एक नयी स्टाइल प्रदान कर सकते हैं।
तेल लगानाः- कर्ली हेयर को ज्यादा तेल लगाने की जरूरत होती है, क्योंकि सीधे बालों की तुलना में इसमें रूखापन ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए है कि बाल मुड़े होने से स्किन आयल बालों के सिरे तक नहीं पहुंचता है। रूखा बाल ज्यादा कमजोर होता है और ज्यादा टूटता है। आप जैतून का तेल, नारियल का तेल, बादाम का तेल और दूसरे नेचुरल हेयर आयल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हेयर पैकः- कर्ली हेयर की देखभाल में कई तरह के हेयर पैक भी आपकी मदद कर सकते हैं। मेयोनेज, अंडा, दूध, दही, शहद और नींबू कुछ ऐसे हेयर पैक हैं जो असरदार होने के साथ साथ प्राकृतिक भी हैं।
शैंपू करनाः- बालों में शैंपू करें, क्योंकि बाल में कई सारे ट्विस्ट और टर्न होने से बालों के छल्ले में गंदगी की संभावना काफी बढ़ जाती है। इससे बाल भद्दे भी नजर आने लगते हैं। आपने बालों को साफ करने के लिए आप नेचुरल मेथड भी अपना सकते हैं।
कंडीशनिंगः- कर्ली हेयर की देखभाल में कंडीशनिंग बेहद जरूरी है। आप चाहें तो कंडीशनर बाजार से खरीद सकते हैं या फिर इसे घर पर बना सकते हैं। शहद, अंडा, सेब, सिरका और चाय कुछ बेहतरीन प्राकृतिक कंडीशनर हैं।
कंघी करनाः- कर्ली बालों के लिए कंघी का चुनाव करते समय सावधानी बरतें। चौड़े दांत वाली कंघी का चुनाव करें क्योंकि यह आपके बालों के छल्ले में फंसेगी नहीं। पतले दांत वाली कंघी कर्ली हेयर पर आसानी से नहीं चलेगी। साथ ही इससे बालों को नुकसान भी पहुंचेगा।

कैसे बनाएं रखे आंखों की खूबसूरती

सुंदर और स्वस्थ आंखे चेहरे का आकर्षण बढ़ा देती है। अगर आपकी आंखों की बनावट सुंदर और आकर्षण है तो आप बहुत भाग्यशाली हैं। लेकिन अगर किसी की आंखे प्राकृतिक रूप से सुंदर नहीं हैं तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। उचित देखभाल और सही मेकअप के जरिये उन्हें भी आकर्षण बनाया जा सकता है।
आइए हम आपको बताते है कि आज की जीवनशैली में आखों की देखभाल कैसे करेंः-

  •  पेट की बीमारी से भी आंखों की समस्या पैदा हो सकती है। इसके लिए सुबह-सुबह एक ग्लास गर्म पानी में एक नींबू का रस निचोड़कर पीने से पेट साफ रहता है।
  •  हफ्ते में एक दिन आंखों पर ठंडे पानी में टी बैग को डुबोकर आंखो पर 10-15 मिनट तक रखें। इसके अलावा खीरे के पतले गोल टुकड़े करके फ्रिज में आधे घंटे के लिए रख दें, फिर लेट कर आंखो पर एक टुकड़ा रखकर बीस मिनट तक आंखे बंद करके आराम करें। ऐसा करने से आंखों का बहुत आराम मिलेगा और आप तरोताजा महसूस करेंगी। इससे आंखों में चमक भी आने लगेगी।
  • आंखो को स्वस्थ और सुंदर बनाने के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है।
  •  थकी हुई और लाल आंखो को ताजगी प्रदान करने के लिए खीरे के गोल टुकड़े काटकर आंखों पर दस मिनट तक रखें, फिर गुलाबजल में रूई भिगोकर आंखो पर लगाएं। एक मिनट बाद ठंडे पानी से छीटें मारकर साफ करें।
  •  आंखो के नीचे काले घेरे हों तो एक कच्चे आलू को कसकट काले घरों पर लगाएं। आधे घंटे के बाद ठंडे पानी से आंखे धो ले और मायस्चराइजर लगा लें।
  •  रात में सोने से पहले आंखों के नीचे अंडर आई क्रीम या जेल लगाकर सोएं।
  •  धूप में बाहर जाना हो तो सनग्लासेज लगाएं और सनब्लाक लगाना न भूलें।
  •  डाइटीशियन कहते हैं कि आंखो की सेहत के लिए आपका आहार भी बहुत महत्वपूर्ण है। अपने आहार में विटमिन ‘ए’ प्रचुर मात्रा में ले। यह दूध और दूध से बने पदार्थो, मछली, अंडे, पीले फलों और सब्जियों, गाजर, पालक, आडू और पपीते आदि में पाया जाता है।
  •  अगर आंखो के आसपास झुर्रियां नजर आने लगी है तो प्रतिदिन सैलेड और हरी सब्जियों में एक टी स्पून वेजटेबल ऑयल डालकर खाएं।
  •  आंखों पर एंटी रिंकल क्रीम लगाएं। इसके लिए कैस्टर ऑयल, ऑलिव ऑयल और पेट्रोलियम जेली को बराबर मात्रा में अच्छी तरह मिलाकर एक जार में अच्छी तरह मिलाकर एक जार में रख लें। इसे रोजाना आंखों पर और उसके आसपास लगाकर हल्की मालिश करें।
  •  पानी में एक चुटकी बोरिक एसिड़ मिलाकर उबालें। ठंडा करके इस पानी से आंखों को धोएं, ऐसा करने से आंखों को आराम व ठंडक मिलेगी।
  •  अगर आपकी आंखों में जलन होती हो तो एक टी स्पून उबले पानी में दो टेबल स्पून गुलाबजल मिलाएं। इससे आंखे साफ करें।
    आंखों के लिए एक्सरसाइज भी है बेहद जरूरी
  •  फिटनेस एक्सपर्ट के मुताबिक आंखों को आराम देने और सुंदर बनाने के लिए नियमित एक्सरसाइज भी जरूरी है। इसके लिए एक शांत कमरे में लाइट बंद करके दोनों हाथों को आंखों पर रखें, पांच मिनट तक आंखें बंद करें, फिर आंखें खोलकर फैलाएं और अंधेरे में देखने की कोशिश करें। आंखों को आराम मिलेगा।
  •  अगर आपकी आंखे कमजोर हैं और आप चश्मा लगाती हैं तो काम के हर एक घंटे बाद चश्मा उतार कर आंखे कर आंखे बंद करके पांच मिनट के लिए उन्हें आराम दें।
  •  आराम की मुद्रा में बैठ जाएं। अपनी आंखों को गोलाइ्र में घुमाएं। पहले एक दिशा में फिर दूसरी दिशा में घुमाएं।
  •  अपनी चार उंगलियों को आंखों के सामने लांए फिर धीरे-धीरे दूर ले जाएं। यह प्रक्रिया कम से कम पांच बार दोहराएं।
  •  आप जब भी बाहर जाएं तो पेड़-पौधों को ध्यान से देखते रहें। हरियाली या हरा रंग आंखों को बहुत सुकून देता हैं।
    कैसा करें आंखों का मेकअपः- सौंदर्य विशेषज्ञ कहते हैं कि आंखों के मेकअप के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भौहें सही आकार में बनी होनी चाहिए। भौहें बनाने का सबसे सही समय नहाने के बाद होता है। भौहें सही आकार में और साफ-सुथरी न हों तो आई मेकअप बहुत खराब लगता है। भौहें नेचुरल रखें। ‘सी’ आकार वाली बौर बेहद पतली भौहें चलन से बाहर हैं। जो बाल आकार से बाहर हों, बस उन्हीं फालतू बालों को हटवाएं। चेहरे पर बेस लगाने के बाद सबसे पहले आंखों का मेकअप किया जाना चाहिए।
  •  आईशैड़ो से शुरूआत करें- आजकल लाइट शिमरी कलर्स चलन में हैं। पलकों पर पहले अपने कपड़े और त्वचा के रंग से मेल खाता हुआ आईशैड़ो ब्रश की सहायता से लगाएं। फिर थोड़ा हाइलाइटर आइशैडो में मिलाएं। इसके बाद आइलैशेज को कर्ल करें। वाल्यूमाइजिंग या ट्रांस्पेरेंट मस्कारा के दो कोट लगाएं।
  •  सबसे अंत में आइलाइनर से आंखों को खूबसूरत आकार दें। आंखों का मेकअप करने के बाद अपनी आइब्रोज को कोंब करें। अंत में आईब्रो पेंसिल से उन्हें हल्का गहरा करें।
  •  रात में आंखों का मेकअप उतारना न भूलें। अगर आप कृतिम बरौनियां लगाती हों तो सबसे पहले उन्हें हटाएं। फिर क्लींजिंग जेल और गीली रूई की सहायता से आईलाइनर और आइशैड़ो हटाएं।
  •  आंखे बंद करके गीली रूई से भीतरी कोने से बाहरी कोने तक हल्के से पोंछे। ध्यान रखें त्वचा पर खरोंच न आए।
डैंड्रफ जब समस्या बनने लगे

डैंड्रफ यानी रूसी की एक सामान्य मात्रा हर एक के बालों में होती है। लेकिन अगर डैंड्रफ इतना बढ़ जाए कि कंघी और कपड़ों पर गिरने लगे तो समस्या विकट हो जाती है। डैंड्रफ सिर की त्वचा की मृत कोशिकाएं होती हैं, जो लगातार बनती रहती है। अगर बालों की देखभाल तरीके से न की जाए तो डैंड्रफ की समस्या बढ़ने लगती है। नेचर्स एसेंस् की सुप्रसिद्ध सौंदर्य विशेषज्ञ सुनीता अरोड़ा, डैंड्रफ की समस्याओं पर कुछ उपयोगी सुझाव दे रही हैं।
ऽ डैंड्रफ का असर :- डैंड्रफ बालों की जड़ों को कमजोर करता है, फलतः बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। डैंड्रफ सिर की त्वचा की सतह पर चिपक जाता हैं, जिससे जड़ों की ओर हवा का प्रवाह बाधित होता है। परिणामस्वरूप, बालों की जड़े कमजोर और बालों पर इनकी पकड़ ढीली पडती है।

  •  डैंड्रफ का कारण :- इस क्षेत्र में अध्ययनों से कुछ बात सामने आई है जैसे कि पचास फीसदी से अधिक युवा इस समस्या से कभी ना कभी पीड़ित रहते हैं। यह माना जाता है कि सिर की त्वचा पर हुआ फंगल इनफेक्शन भी डैंड्रफ का कारण हो सकता है। इस समस्या के उपजने का एक बहुत बड़ा कारण उपापचय प्रक्रिया में गड़बड़ी होना भी है। सिर की त्वचा में नई कोशिकाएं लगातार बनती रहती है और उसी अनुपात में मृत कोशिकाएं भी तैयार होती रहती है। उपापचय प्रक्रिया में असंतुलन पैदा होने पर नई कोशिकाएं तेजी से बनने लगती हैं, जिसके कारण मृत कोशिकाएं यानी डैंड्रफ तेजी से बनने लगते हैं। उपापचय प्रक्रिया में असंतुलन के निम्न कारण हो सकते है-
  •  ड्रग्स
  •  भवानात्मक तनाव
  •  युवावस्था के शारीरिक बदलाव
  •  मौसम या खानपान में अचानक आया परिवर्तन
    क्या आपको वास्तव में डैंड्रफ की समस्या है?
    डैंड्रफ का उपचार करने से पहले ये सुनिश्चित कर लें कि आपके बालों से वाकई डैंड्रफ है भी या नहीं। क्योंकि कभी-कभी सिर की त्वचा पर डैंड्रफ नुमा छोटे-छोटे कण तेज धूप या हेयर ड्रायर के अत्यधिक इस्तेमाल से भी हो जाते है। बालों में साबुन या आसानी से न साफ होने वाले शैंपू के इस्तेमाल से भी ऐसा हो जाता है।
     आपका कंघा ब्रश और डैंड्रफ
    कभी भी डैंड्रफ से पीड़ित व्यक्ति का इस्तेमाल किया हुआ कंघा या ब्रश इस्तेमाल न करें। इससे आप भी डैंड्रफ की चपेट में आ सकते है। हर बार शैंपू करने के बाद अपने कंघे और ब्रश को अच्छी तरह साफ करना न भूलें। डैंड्रफ से बचाव के लिए बालों पर ब्रश का इस्तेमाल करें और सप्ताह में कम से कम एक बार शैंपू का प्रयोग करें। बालों का धोते समय ध्यान रखें कि सिर से पानी चेहरे पर न गिरे क्योंकि यह मुहासों का कारण बन सकता है।
    डैंड्रफ के कुछ घरेलू उपचारः- छह चम्मच पानी में दो चम्मच शुद्ध सिरका मिला लें और सोने से पहले रूई से सिर की त्वचा में लगा लें। तकिये को गंदा होने से बचाने के लिए सिर पर तौलिया बांध कर लेटें। दूसरी सुबह शैंपू करने के बाद एक बार फिर सिरके से बाल धोएं। यह प्रक्रिया सप्ताह में एक बार तीन महीने तक लगातार करें।
  •  मेथी के बीज डैंड्रफ, बालों को गिरने गंजेपन और बालों को लंबे, काले और घने बनाने में बहुत लाभदायक होते हैं। मेथी के बीज को पानी में भिगो कर रात भर रखें। सुबह इसे पीस कर पेस्ट बना लें। बाल धाने के पहले आधे घंटे तक इस पेस्ट को सिर की त्वचा पर लगाएं। आधे घंटे बाद बालों में शैंपू कर लें।
    डैंड्रफ में उपयोगी मसाज :- गर्म नारियल या कैस्टर के तेल से सप्ताह में दो बार सिर की त्वचा पर अच्छी तरह मसाज करें।
  •  अपनी उंगलियों से पोरों से कम से कम आधे घंटे तक गोलाकार गति से मसाज करें।
  •  अगली सुबह शैंपू कर लें।
  •  इस तरह की मसाज से सिर में रक्त प्रवाह तेज होता है। फलस्वरूप बाल रूखे नहीं होते और इनकी जड़े मजबूत होती है। डैंड्रफ के नियंत्रण के लिए यह काफी लाभप्रद होता है।
    डैंड्रफ में उपयोगी, अंडे का पैकः- दो कच्चे अंडे में दो छोटे चम्मच पानी मिला लें। बालों को गीला करके इस मिश्रण को बालों पर लगाएं। अब सिर पर मसाज करते हुए दस से पंद्रह मिनट तक छोंड़ दें। इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से बालों को धो लें। यह आपको डैंड्रफ और बाल झड़ने, दोनों समस्याओं से दूर रखेगा।
सबसे खतरनाक है मोबाइल एडिक्शन

युद्ध और मोहब्बत के दौरान सनक ही सब कुछ कराती है। प्रेम करना गुनाह नहीं। गुनाह है प्यार में अंधा हो कर सब कुछ भूल जाना। भक्ति में शक्ति होती है। प्रेम करना ही है तो वतन से करो, प्रकृति से करो, ईश्वर से करो। प्रेम रोगी बन कर हिंसक बन जाना प्रेम का अपमान करना ही है। एडिक्ट होना घातक हो जाता है फिर चाहे आप किसी भी चीज के एडिक्ट क्यों न बनें। चर्चा में ड्रग एडिक्ट ही आते हैं। लव एडिक्शन के कारनामे भी रोंगटे खड़े कर देते हैं। प्रेम रोगियों की केमिस्ट्री कम खतरनाक नहीं होती। आधुनिक युग में टीवी एडिक्शन के शिकार हैं तो कुछ मोबाइल एडिक्शन के। दुष्परिणाम पड़ रहा है घरेलू औरतों और विद्यार्थियों पर। औरतें आक्रामक हो रही हैं तो विद्यार्थियों का रूझान पढ़ाई से हटता जा रहा है। किताबों के पन्नों में प्रेमी प्रेमिका की तस्वीरें और खत रहेंगे तो कहां से पढाई में मन लगेगा। करोड़ों हाथों में मोबाइल पकड़ा कर कई कंपनियों ने अरबों का कारोबार कर लिया किंतु उपयोगिता के दृष्टिकोण से यदि हम मोबाइल फोन की समीक्षा करें तो लाभ कम, हानि ज्यादा नजर आयेगी। मोबाइल फोन ब्लैकमेलिंग का सुलभ साधन जो बन गया है। घंटों मोबाइल फोन पर अपनी उंगलियां चलाने वालों की निराली दुनिया यही बता रही है कि मोबाइल स्टेटस सिममबल बन गया है। लोग इसका सदुपयोग कम और दुरूपयोग ज्यादा कर रहे हैं। अश्लील तस्वीरें और संदेश के प्रसारण में मोबाइल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गप्प मारने में महारथियों के लिए तो मोबाइल फोन वरदान साबित हो रहा है। स्कूली विद्यार्थियों को भी मोबाइल लत लग रही है। कंप्यूटर के गेम्स बच्चे मोबाइल में खेल रहे हैं। गाने सुन रहें है, फिल्में देख रहे हैं। ब्लू फिल्में तक बड़ी आसानी से बन रही हैं। मोबाइल एडिक्ट पतन के मार्ग पर बढ़ चुके हैं। अपनी जिंदगी हैण्डसेट तक सीमित कर युवा वर्ग ने मोबाइल रोग पाल कर स्वयं को बर्बादी का मार्ग प्रशस्त किया है। मोबाइल एडिक्ट न दिन में अपना ध्यान अपने कार्यक्षेत्र में केंद्रित कर पा रहे हैं और न ही रात में चैन की नींद सो पा रहे हैं। एसएमएस से पीड़ितों का इलाज संभव नहीं। इसी तरह मोबाइल टू मोबाइल घंटों बातें करने वालों का भी इलाज मुश्किल है। मोबाइल फोन का उपयोग जानना जरूरी है। दुर्भाग्य यह है कि लोग दुरूपयोग का आनंद लूट रहे हैं। मोबाइल झूठ बोलने वालों के लिए तो मानो वरदान साबित हो रहा है लेकिन चिंता किसे है? सभी मस्त हैं मोबाइल-मोबाइल खेलने और बेचने में। मध्यम वर्ग पर मोबाइल का बड़ा गहरा प्रभाव पड़ रहा है। पेट में रोटी न रहे चलेगा, जेब में मोबाइल जरूरी है। टॉपअप जरूरी है। रिचार्ज कूपन जरूरी है। स्कूल-कॉलेज पढ़ने वालों के पास लंच बॉक्स न रहे चलेगा, मोबाइल जरूरी है। पालकों ने प्रतिस्पर्धा को गलत अर्थ में लिया और खरीद दिया बच्चों का कलर मोबाइल हैन्डसेट्स। होस्टल में रह कर पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए तो एक बार मोबाइल की उपयोगिता मायने रखती है किंतु घर में रह कर गांव अथवा शहर के शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए मोबाइल की अनिवार्यता समझ के बाहर की बात है। क्लासरूम में ही रिंग टोन बनजे लगती है। बच्चे म्यूजिक सुनने में मस्त है। पढ़ाई की किसी को काई फिक्र नहीं है। घर पर भी पढ़ाई के समय मोबाइल हाथ में नजर आए तो इसे दुर्भाग्य ही कहना पडेगा। मोबाइल के द्वारा टीनएजर्स अपराध के नये-नये गुर सीख रहे हैं। मोबाइल एडिक्शन एक खतरनाक रोग बनता जा रहा है।

अनिंद्रा के है अनेक प्रकार

आज के बढ़ते औद्योगिक तथा भौतिक दौर में अनिंद्रा एक आम बीमारी हो गयी है। तरह-तरह की नींद की गोलियां भी पूरी तरह आराम नहीं दे पाती। इनकी आदत पड़ने पर प्रायः गोलियों की मात्रा बढ़ाते रहने से ही नींद आती है और इसका परिणाम होता है अनेक रोगों से घिर कर अपने जीवन को कंटकीय बना डालना। अनिंद्रा के अनेक प्रकार होते है।
इनीटार्डियाः- जिसकी वजह से तुरंत सो सकना संभव न हो, उसे इनीटार्डिया कहा जाता है। यह एक प्रकार की वैयक्तिक अक्षमता है, जो अक्सर उन लोगों में पायी जाती है जो शो बिजनेस से संबंध रखते हैं। इस वर्ग में सिनेमा, दूरदर्शन, प्रकाशन, फैशनों के आविष्कारक व प्रचार से संबंधित लोग आते हैं। ऐसे व्यक्तियों को प्रायः अकेले रहना पड़ता है तथा अत्यधिक व्यस्तता के कारण वे समय पर खा पी और सो नहीं पाते। वे जब भी अपने काम से लौटकर सोने के लिए बिस्तर पर जाते हैं, उनके अंदर दूसरे दिन की कार्य योजना बनने लगती है और वे तुरंत नहीं सो पाते।
स्कर्जोम्नियाः- यह अनिंद्रा का दूसरा प्रकार है। इसमें नींद तो तुरंत आ जाती है किंतु दो-तीन घंटे बाद ही स्वयं टूट जाती है। इसके बाद रोगी रातभर दुबारा नहीं सो पाता। परिणामस्वरूप अगले दिन उन्हें थकावट महसूस होती है। रोगी की मांसपेशियों में दर्द होता रहता है तथा आंखे लाल-लाल रहती हैं। आंखों में जलन होती है और जम्हाइयाँ आती रहती हैं। यह अवस्था उनमें आती हैं जो मानसिक तनावों से युक्त होते हैं। अधिकतर महिलांए स्कर्जोम्निया के शिकारी होते हैं। डा. एस. के. रावत के अनुसार यौन अतृप्ति, अत्यधिक चिंता, नशीले पदार्थो का सेवन, सुबह जल्दी उठने की चिंता, किसी बात का भय आदि अनेक कारणों से लोग स्कर्जोम्निया के शिकार हो जाते हैं।
हाईपर-लिक्सियाः- यह नींद न आने का तीसरा प्रकार होता है। इसमें अक्सर अनिंद्र व्यक्ति यही सोचता रहता है कि वह रात भर ठीक से नहीं सो सका है। वास्तविकता भी यह होती है कि नींद का आना-जाना सम्पूर्ण रात लगा रहता है। हल्की नींद के दौरान हमेशा जागते रहने का आभास रोगी को होता रहता है। रोगी को इस स्थिति से जब अनेक रातें गुजारनी पड़ जाती है तो वह झुंझला जाता है। हाईपर-लिक्सिया के रोगी रात के अलावा दिन में भी सोने का प्रयास करते हैं किंतु उन्हें गहरी नींद कभी नहीं आती। यह अवस्था उन लोगों में अधिक आती है जो नशीले एंव मादक पदार्थो का सेवन अधिक करते हैं। मांसाहार एंव अधिक चटपटे पदाथो्र को खाते रहने से यह अवस्था आती है। फास्ट-फूड खाने वाले लोग भी प्रायः हाईपरलिक्सिया के शिकार हो जाया करते हैं।
प्लाइसोम्नियाः- यह अवस्था प्रायः चालीस की उम्र पार करने के बाद आती है। इसमें ऐसी नींद आती है जिसमें बार-बार जागने का व्यवधान आ पड़ता है। अधिक उम्र वालों में जागने की मियाद (समय) बढ़ने लगती है और दुबारा सो पाने की क्षमता नहीं रह जाती। प्लाइसोम्निया से ग्रसित व्यक्ति बिस्तर पर लेटे-लेटे करवटें बदलता रहता है। इस बीमारी की वजह सिर्फ बुढ़ापा ही नहीं होती। उत्तरदायित्व में कमी, अकर्मण्यता, पहले जैसी पूछ न रह जाना, मान-मर्यादा घट जाना आदि स्थितियां ज्यादा वक्त बिस्तर पर बिताने को बाध्य कर देती हैं। जवानी में भी अगर कोई गहरा विषाद, ग्लानि, उदासी या मायूसी का शिकार हो जाता है तो उसे भी यह बीमारी हो सकती है।
इन्सोम्निया टर्बुलाः- डरावने एंव बुरे दुःस्वप्न भी अनिंद्रा का एक स्वरूप है। ऐसी अनिंद्रा जो दुःस्वप्नों से भरी रहती है उसे ‘इन्सोम्निया टर्बुला’ कहा जाता है। यह अवस्था बहुत ही तकलीफदेह होती है। ये दुःस्वप्न बड़े घने-गहरे और अलग-अलग वक्त पर अचानक नींद तोड़ने वाले होते हैं। किसी व्यक्तिगत हानि या कष्टकर स्थिति में प्रायः दुःस्वप्न दिखते हैं और नींद टूट जाती है। शरीर पसीने से लथपथ हो जाता हैं। दुबारा सोने की कोशिश करने पर भी रोगी सो नहीं पता। कभी-कभी तो दुःस्वप्न की अवस्था में घिग्धी तक बंध जाती है। रोगी का शरीर पीला हो जाता है। इस तरह अनेक प्रकार की अनिंद्रा आकर परेशान करती रहती है। अनिंद्रा के शिकार लोगों को चाहिए कि वे आत्म परिक्षण कर अनिंद्रा की वजह जान कर उसे दूर करने का प्रयास करें। अच्छी नींद लाने के लिए इन उपायों को अपनायें- बिस्तर पर जाने से पहले अच्छी तरह हाथ-पांवों को धो लें तथा बिस्तर पर आने के बाद अपने इष्ट का स्मरण करते हुए सोने का प्रयास करें। सोते समय दूसरे दिन की योजनाओं पर विचार न करें तथा सभी चिंता, भय का त्याग करके सोने का उपक्रम करें। रोज एक निश्चित समय पर ही अपने बिस्तर पर पहुंच जायें। बेड रूम में तीव्र प्रकाश वाला बल्ब न जलायें तथा उस रूम में सुगन्धित अगरबत्ती या इत्र का छिड़काव कर दें। सुविधापूर्ण स्थिति में सोयें। तकिया, उचित बिछावन, चादर आदि को यथा स्थान रखें। सोने वाले बिछावन पर बैठकर पढ़ना-लिखना या खाना खाना वर्जित करें। सभी काम करने के बाद सिर्फ सोने के उद्देश्य से ही बिस्तर पर जायें। अनिंद्रा की औषधियों से अपने आपको बचाने का हर संभव प्रयास करें क्योकि यह एक बुरी आदत बनती चली जाती है।

मर्द हो या औरत हर किसी की चाहत होती है कि उसके बाल काले, घने और सुंदर हों। लेकिन पोषक तत्वों की कमी और सही ध्यान न रखने के कारण बाल कमजोर हो जाते हैं और झडने लगते हैं। साथ ही कई लोग बालों के रूखेपन से भी खासा परेशान होेते हैं। इसलिए आपके बालों को सुन्दर, घने और चमकदार बनाने के लिए हम लाये हैं कुछ घरेलू उपाय जिनके जरिये आपके बालों को भरपूर पोषण और ताकत मिलेगी और बाल हमेंशा स्वस्थ रहेंगे।
बालों को काला, घना और मुलायम बनाने के उपाय

1 अंडे के पेस्ट में दही मिलाकर इसे बालों में कंडिशनर की तरह लगायें। इससे बाल स्ट्रोंग बनेंगे।
2 हर तीन दिन में बालों की गुनगुने सरसों के तेल से मालिश करें। इससे बालो को पोषक तत्व मिलते रहेंगे और सिर में खून का प्रभाव भी सही रहता है।
3 पिसे हुए मेथी के दानों का पेस्ट बनाकर बालों पर लगाने से बालो की रूसी खत्म हो जाती है।

4 नारियल के तेल में कुछ बूंदे नींबू के रस की डालकर बालों की जड़ों तक मालिश करें। इससे भी रूसी खत्म होती है।
5 बालों का रूखापन दूर करने के लिए सूरजमुखी के तेल से बालों की जड़ों तक मालिश करें।
6 बालों को साफ रखने के लिए हर 4-5 दिन में चावल या बेसन के आटे से बालों को धोएं।
7 अरंडी को तेल लगाने से बाल लंबे बने रहते हैं और टूटते नहीं है। इसके नियमित इस्तेमाल से आपके बाल उगने लगेंगे जिससे आपके बाल घने हो जायेंगे।
8 बालों पर केमिकल युक्त साबुन और शैम्पू का प्रयोग न करें।

सैफ अली खान शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। उनके अंगूठे पर काफी चोट आई है, जिसके बाद इलाज के लिए वो मुंबई के कोकीला बेन अस्पताल पहुंचे। मीडिया ने जब उनका इलाज कर रहे डाक्टर से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंनकार कर दिया और कहा हम उम्मीद कर हैं कि कुछ गंभीर ना हो। ‘बॉलीवुडलाइफ’ की खबर के मुताबिक, सैफ की बहन सोहा अली खान ने मीडिया से मुखातिव होते हुए इस खबर की पुष्टि की और कहा,’शूटिंग के दौरान भाई के अंगूठे में काफी चोट आई है, पर समय पर इलाज दिया जा रहा है। वो अब ठीक हो रहे हैं। आप सभी की चिंता और दुआओं का शुक्रिया।’ ये पहला मौका नहीं है जब सैफ अपनी फिल्म की शूटिंग के दौरान घायल हुए हैं। इससे पहले शाहिद कपूर और कंगना रनोट अभिनीत फिल्म ‘रंगून’ की शूटिंग के दौरान भी उन्हें काफी चोटें आ चुकी हैं। ‘एजेंट विनोद’ की शूटिंग के दौरान भी उनके हाथ और पैर में बेंडिड देखा जा चुका है। खैर हम तो सैफ से यही उम्मीद करेंगे की काम करें लेकिन थोड़ी सर्तकता के साथ।

बाॅलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की लाडली बेटी श्वेता बच्चन नंदा बाॅलीवुड में हीरोइन नहीं बनी लेकिन वह बाॅलीवुड का हिस्सा क्यों नही बनी इस बात का खुलासा करना चाहती है। श्वेता ने इस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बचपन में अक्सर वे अपनी मां के साथ सेट पर जाती थीं। मां और पापा दोनों के बिजी शेड्यूल की वजह से उन्होंने बहुत कम समय उनके साथ बिताया है। इस वे बड़ी वजह बताती है। उनका कहना है कि एक बच्चे की तरह सोचने पर उनके लिए फिल्में उतनी खास नहीं थी। श्वेता आगे कहती हैं, मैने स्कूल समय में कुछ नाटकों में काम किया था। ये सोच कर कि मैं भी एक्टिंग करूं पर मेरे लिए यह उतना खास अनुभव कभी नहीं रहा। स्कूल के एक नाटक में मैने हवाइयन गर्ल का किरदार निभाया था। नाटक के क्लाइमैक्स में मै अपना शाॅट भूल गई और वो मेरे लिए एक खराब अनुभव था। श्वेता के इन जवाबों के बाद उम्मीद है कि लोगों तक यह संदेश पहुंच जाएगा कि अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज की बेटी सिनेमा में क्यों नहीं आई।