प्रग्नेंसी में कम लें चाय-काँफी

यूं तो प्रग्नेंसी में बहुत सी चीजों से परहेज करना होता है। लेकिन एक ऐसी चीज है जो गर्भवती महिला और होने वाले बच्चे पर काफी बुरा असर डाल सकता है। शायद आपको यकिन न हो लेकिन बहुत अधिक चाय और काँफी पीने से गर्भपात हो सकता है। ऐसे मे अगर आपको भी है चाय पीने की लत तो ये बाते जानना है आपके लिए बहुत जरूरी।
प्रेग्नेंसी के दौरान चाय और काँफी में मौजूद कैफीन भ्रूण पर असर डालता है।
प्रग्नेंट महिलाओं को एक दिन में 200 मिलीग्राम से अधिक चाय या काँफी नहीं पीनी चाहिए।
जितना हो सके पाउडर काँफी, फिल्टर काँफी और एस्प्रेसी काँफी पीने से बचें क्योकि इसमें बहुत ज्यादा कैफिन होता है।
प्रग्नेंसी में ब्लैक टी पीने से बचना चाहिए। साथ ही ग्रीन टी भी कंट्रोल करके पिएं इससे गर्भपात होने का खतरा हो सकता है।
रोजाना अधिक काँफी पीने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है और इसके अलावा बच्चे का वनज भी कम होने की आंशका बढ़ जाती है।

क्या आप जानते हैं गर्मियोें में खरबूज खाने से ये 5 फायदेः-

खरबूज गर्मियोें का एक खास फल है। कई लोगों को ये कम पका पसंद है तो कुछ लोग इसे पूरा पकाकर खाना पसंद करते है। शुरूआत में ये हरे रंग का होता है लेकिन पकने के बाद पीले/नारंगी रंग का होता है। खरबूज कई प्रकार से विटामिन और खनिज लवणों से भरपूर होता है लेकिन सबसे खास बात ये है कि इसमें 95 प्रतिशत पानी होता है जो गर्मियो के लिहाज से बहुत फायदेमंद है।
आइये जानियें खरबूज खाने के फायदेः- खरबूज में एंटी- आँक्सीडेट पाए जाते है। इसके अलावा ये विटामिन सी और विटामिन ए का भी अच्छा स्त्रोत है। इसके नियमित सेवन से त्वचा पर निखार आता है।

अगर आपको सीने में जलन हो रही है तो भी विशेषज्ञ खरबूज खाने की सलाह देते हैं।
अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहें है तो भी ये फल आपके लिए बहुत कारगर साबित हो सकता है। खरबूज में भरपूर मात्रा में फाइबर्स होते है। जिससे पाचन क्रिया को भी फायदा होता है।
गर्मियो में अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में खरबूज खाना बहुत फायदेमंद साबित होता है। इससे डी-हाइड्रोशन नहीं होता है।
खरबूज में कई ऐसे तत्व पाए जाते है। जो कैंसर के बचाव में सहायक होते हैं। इसके आलावा ये लू से भी सुरक्षित रखने में मददगार होता है।

सावधान! ज्यादा नमक खाने के ये है चार बड़े नुकसान

नमक खाने का स्वाद बढ़ा भी सकता है। और बिगाड़ भी, लेकिन अधिकतर लोग यह बात नहीं जानते कि नमक सेहत के साथ भी वही करता है। जो स्वाद के साथ। हमारे शरीर के लिए नमक की मात्रा निर्धारित है। अगर नमक की मात्रा उससे कम या ज्यादा हुई तो संतुलन बिगड़ जाता है। जो सेहत के लिए नुकसानदेह है। अधिक मात्रा में नमक या चीनी के सेवन से शरीर में कैलोरीज बढ़ती है और कैंसर का जोखिम भी बढ़ता है।

सांसो की दुर्गंध से परेशान हैं तो अपनाएं ये उपाय

क्या सांसो की दुर्गंध आपको हर मौके पर शर्मसार करती है? दरअसल सांसो में दुर्गंध की समस्या की वजह अक्सर मुँह में मौजूद बैक्टीरिया होेते है। ऐसे में कुछ ऐसे प्राकृतिक उपाय है। जिनकी मदद से हम सांसो की बदबू से छुटकारा पा सकते है।
चबाएं पुदीने के पत्तेः- पुदीने के पत्ते बेहतरीन माउथ फ्रैशनर है जिनसें आप मिनटो में सांसो की दुर्गध से छुटकारा पा सकते हैं। पुदीने के पत्ते न सिर्फ आपकी सांसो की दुर्गंध दूर करेेगा बल्कि आपको तरोताजा भी रखेगा।
जीभ की रखें सफाईः- चिकित्साकों का मानना है। कि मुंह की सफाई तब तक पूरी नहीं मानी जाती है। जब तक जीभ की सफाई न हो। कई बार भोजन के बाद कुछ बारीक कण जीभ पर लगे रह जाते हैं जिन्हे अगर सही तरिके से साफ न करें तो भी सांसो से दुर्गंध और मुंह के संक्रमण से बचा जा सकता है।
नमकीन पानी से गार्गलः- पानी में नमक घोलकर गरारे करने से मुंह के बैक्टीरिया समाप्त हो जाते हैं और मुंह में मौजूद भोजन के बारिक कण निकल जाते है। हल्के गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक मिलाएं और रोज ब्रश करने के बाद नमकिन पानी से गार्गल करे।
सांसो की बदबू दूर करने के लिए पानी है बहुत फायदेमंदः- मुंह में थोड़ा पानी लेकर हल्के-हल्के कुल्ला करें फिर या तो पानी को पी जाएं या थूक दें। शरीर में जल का स्तर संतुलित रखकर भी सांसो की ताजगी को बनाएं रखा जा सकता है। क्योंकि जब हमारे शरीर में जल का स्तर कम हो जाता है तो मुंह मे लार का बनना कम हो जाता है। लार बनने से मुंह में पनपने वाले जीवाणु साफ होते है, जिससे सांसो में बदबू नहीं पनपती।

अपने पैरों को बनाए साॅफ्ट-साॅफ्ट

देखा जाए तो हमारे पैर कितना कुछ सहते हैं। हम अपनी चेहरे की या अन्य देखभाल के आगे पैरों को नजरअंदाज कर देते है। तो ऐसे में जब बात आती है पेडिक्योर की तो पेडिक्योर ना सिर्फ हमारे पैरों को नरम और नाजुक बनाते हैं बल्कि उनकी सेहत का भ्ज्ञी ख्याल रखते हैं। तो अब अपने चेहरे के साथ साथ अपने पैरो की भी बनाइए खूबसूरत।
सोने से पहलेः सोने से या नहाने से पहले अपने पैरों को धो कर सरसों का तेल लगा लें या आप चाहें तो वेस्लीन विटामिन ई का भी प्रयोग कर सकते है।
नमक का पानीः नहाने से पहले आधे घंटे तक नमक के पानी में अपने पैरों को डालकर रखें। इससे आपके पैर शुष्क भी रहेंगे और पसीना आने से भी बचाव होगा।
पानी और चाय की पत्तीः कई बार हमारे पैरों से बदबू भी आने लगती है तो उससे छुटकारा पाने के लिए एक टब में गरम पानी ले और चाय की पत्ती डालें। लगभग आधे घंटे तक अपने पैरों को इस पानी में डाल कर रखें। इस प्रक्रिया के नियमित इस्तेमाल से जल्दी ही आपको इस समस्या से निजात मिल जाएगा।

आंखों की हिफाजत

आंखों के बिना हमारी दुनिया अंधेरे में हो जाती है। इसलिए हमें अपनी आंखों की देखभाल हमेशा करना चाहिए। दिनों दिन कम्प्यूटर, आई पेड, मोबाइल जैसी चीजों की डिमांड बढ़ती जा रही है। कई लोग इन सब चीजों को इतना ज्यादा इस्तेमाल करते हैं कि बाद में इनके आंखों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कुछ लोग तो चश्में के बिना ठीक से देख भी नहीं पाते। इसके अलावा आंखों की समस्या के और भी कई कारण है। जैसे आंखों का लाल हो जाना, आंखों से पानी गिरना ऐसे ही कई लक्षण हैं जिसको हम नजर अंदाज करते हैं। इसलिए जैसे हम अपने चेहरे की देखभाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ते वैसे ही हमें आंखों की देखभाल करते रहना चाहिए।

पोषक से भरपूर अमरूद और आंवला

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विटामिन-सी की मात्रा बढ़ाने के लिए यह जरूरी है कि आप अमरूद व आंवला का सेवन करें। क्योंकि विटामिन-सी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और कई तरह के संक्रमण से भी दूर रखता है।

अमरूद
अमरूद में फाइबर की अधिकता आंतों की सफाई के लिए जरूरी होती है। अमरूद में एस्टिंजेंट का होना पेट व आंतों में संक्रमण करने वाले बैक्टीरिया की उत्पत्ति को रोकता है। यह एसिडिटी की समस्या को कम करता है। एक 50 ग्राम के अमरूद में 40 कैलोरी होती है। अमरूद मधुमेह पीडि़तों के लिए भी फायदेमंद है। यह फल रक्त शर्करा को धीरे-धीरे ग्रहण करता है। अमरूद में विटामिन-सी की प्रचुरता होती है। एक औसत अमरूद में संतरे से चार गुणा अधिक विटामिन सी होता है। विटामिन सी इम्युनिटी यानी रोगों से लड़ने की क्षमता को मजबूत बनाता है। अमरूद के छिलके व उसकी निचली परत में सबसे अधिक गूदा होता है। अमरूद कैंसररोधी गुणों से भरपूर होता है। इसमें बी काॅम्प्लेक्स, विटामिन और मैग्नीशियम और तांबा आदि मिनरल होते हैं। इसमें पोटैशियम की प्रचुरता होती है। इसे कच्चा व पकाकर दोनों तरह से खाया जाता है।

आंवला
विटामिन सी की प्रचुरता के अलावा आंवले का सेवन शरीर की आयरन व कैल्शियम को ग्रहण करने की क्षमता को बढ़ाता है। ऐसे में आंवले को किशमिश, अखरोट, तिल और डेयरी उत्पाद के साथ खाने से फायदा पहुंचता है। आंवला पाचन को दुरुस्त करने के साथ ही यह खांसी में भी राहत देता है। आंवला एल्केलाइन यानी क्षारीय प्रकृति का फल है। ये पेट के रसायनों के स्तर को संतुलित रखता है। आंतों को भी स्वस्थ रखता है।आंवले का सेवन अपच में राहत देता है, लिवर को दुरुस्त रखता है और फैफड़ों व शरीर की सफाई करता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आंवले का सेवन शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या को बढ़ाता है। सफेद रक्त कोशिकाएं ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जिम्मेदार होती है। आयरन और केरोटीन की अधिकता के कारण आंवला बालों व त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटीआॅक्सीडेंट्स त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को काबू में रखते हैं। इस फल का सेवन आंखों के लिए भी अच्छा होता है। आंवले में क्रोमियम नामक खनिज होता है, जिसकी जरूरत शरीर को कम मात्रा में होती है, पर यह खनिज शारीरिक प्रक्रियाओं को दुरुस्त रखता है। मधुमेह रोगियों के लिए भी आंवला फायदेमंद है। आप इसे कद्दूकस कर सलाद के साथ भी खा सकते हैं।

लो-फैट डेयरी प्राॅडक्ट

स्किम्ड दूध लो-फैट चीज, पनीर व दही में कैल्सियम की भरपूर मात्रा होती है। ये कैल्सियम कोशिकाओं में फैट को जमने नहीं देता साथ ही इससे सभी जरूर विटामिन व खनिज भी मिल जाते हैं। हर रोज इनमें से 2 चीजों को अपनी डाइट में अवश्य शामिल करें।

साबुत अनाजः
साबुत अनाज में ज्वार, बाजरा रागी व कुट्टू में जो कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिनसे शरीर को धीरे-धीरे ग्लूकोज मिलता रहता है। यह ग्लूकोज आपके ब्लड में शुगर का स्तर संतुलित रखता है। इनमें फाइबर व विटामिन-बी काॅम्प्लैक्स भी होता है जो मैटाबाॅलिज्म को नियंत्रित रखता है। गेहूँ के आटे में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में इन चीजों को मिलाकर रोटी बनायें।

खट्टे फलः
संतरा, अंगूर, नींबू, पपीता, अमरूद, टमाटर व आंवला खट्टे फलों के उत्तम स्त्रोत हैं। ये विटामिन सी से भी भरपूर हैं। विटामिन सी बाॅडी में जमा एक्सट्रा फैट को कम करता है। शरीर को भरपूर एनर्जी भी देता है। इसमें कैरोनिटीन अमीनो एसिड होता है। इन चीजों में पानी भी खूब होता है जो बाॅडी के वाटर लेवल को मैंटेन करता है।

हरी सब्जियाँः
सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं। हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे- पालक, मैथी, बथुआ, चैलाई, सोआ आदि क्लोरोफिल से भरपूर हैं। इसके अलावा लौकी ब्राॅकली, टिंडा, परवल आदि भी खनिज व विटामिन युक्त सब्जियाँ हैं इनसे शरीर को जरूरी हीट मिलती है। इसमें कैलोरीज भी बहुत कम होती है। ये भी बाॅडी में फेट को जमा नहीं होने देती। ये सब्जियाँ फाइबर युक्त तथा एंटीआॅक्सीडेंट भी हैं जो भूख को बढ़ाने के साथ-साथ उचित पोषण भी देते हैं। शरीर में काॅलेस्ट्रोल को कम करता है मैटाबाॅलिज्म को संतुलित रखता है। यदि आप शाकाहारी हैं तो फ्लैस्स सीड को भून कर पाउडर बना लें। इसको रोटी में दही में या पानी के साथ सेवन को एक दिन में 10-15 ग्राम यह पाउडर लिया जा सकता है। सैलमन व भूना फिश भी ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा उदाहरण है।

तरल पदार्थः
शरीर को स्वस्थ रखने में अहम रोल अदा करते हैं। पानी भरपूर पीयें। पानी की कमी होने से शरीर में डीहाइड्रेशन की शिकायत हो सकती है जो एनर्जी लेबल को कम कर देता है। दिन की शुरूआत हल्के गर्म पानी, नींबू, शहद, पानी आंवला, पानी या मैथी वसी से करें। ये चीजें एंटीआॅक्सीडेंट हैं। शरीर से विषैले तत्त्व बाहर निकालते हैं। फलों व सब्जियों का जूस लेना भी लाभदायक है। आम का पना, जलजीरा, पतली छाछ या मट्ठा गर्मियों में लेना लाभकारी है। हाँ, चाय काॅफी का सेवन सीमित मात्रा में ही करें। पानी का भरपूर सेवन बाॅडी को एर्नजैटिक तो रखता ही है त्वचा में नमी भी बनाये रखता है।

अंडे का सफेद भाग
इसका सेवन आमतौर पर आमलेट बनाकर करें। एक बार में 3-4 अंडे के सफेद भाग का आमलेट बनाकर लें। इससे सारे विटामिन व खनिज मिलेंगे। यदि शाकाहारी हैं तो दाल का चीला सब्जी डालकर बनायें।
इन चीजों का सेवन आपकी सेहत व आश्चर्यजनक प्रभाव डालता है। आप स्वस्थ व एनर्जेटिक बने रह सकते हैं।

वजन घटाने के स्वस्थ व असरदार उपाय

वजन घटाने के स्वस्थ व असरदार उपायः-

  • प्रतिदिन अधिक से अधिक ताजी सब्जियां खाएं।
  • अपने नियमित भोजन में बदलाव लाएं यानि चाॅकलेट, आइसक्रीम, पेस्ट्री, साॅफ्ट ड्रिंक्स, मिठाई, जैम, साॅस, केक आदि खाना बंद कर दें।
  • अपने भोजन में वसा की मात्रा 2-3 चाय के चम्मच तक ही सीमित रखें, इससे अधिक उचित नहीं।
    रोज 2-3 फल आवश्य खाएं।
  • रिफांड आटा यानि मैदे से बनी चीजें जैसे ब्रैड, पेस्ट्री, रूमाली रोटी, नान आदि बिल्कुल न खाएं, क्योंकि इससे मोटापा अधिक बढ़ता है।
  • रोटी बनाने के लिए ज्वार, बाजरा, जई आदि के आटे का इस्तेमाल करें, इनसे बिना मोटापे के शरीर को भरपूर पौष्टिकता मिलती है।
  • सफेद चावल के स्थान पर ब्राउन राइस खाएं।
  • दिनभर 35-40 मिनट शारीरिक व्यायाम को अवश्य दें।

”आप कभी भी अपने आप को व्यर्थ न समझें। ऐसा नाकारात्मक सोच आपके अंदर कुंठा को जन्म दे सकती है। सच तो यह है कि आप आज भी अपने परिवार व समाज के लिए बहुत उपयोगी है।“
आप सभी जानते हैं कि यह जीवन नाशवान है। एक दिन हर किसी की मृत्यु होनी है और यह मिट्टी का शरीर मिट्टी में ही मिल जाना है। मृत्यु एक चुनौती की तरह हमेशा हमारे चिकित्सा वैज्ञानिकों के सामने रही है। मनुष्य के शरीर में ऐसी कौन सी ऊर्जा है जिसके निकलते ही हमारी सांसों की डोर टूट जाती है। इस सत्य को बहुत कोशिशों के बाद भी कोई समझ नही पाया है। फिर भी चिकित्सा वैज्ञानिकों के द्वारा इतना तो संभव हुआ कि मनुष्य की औसत आयु पहले से कही अधिक हो गई है। और अब पहले की अपेक्षा वृद्धावस्था में भी मनुष्य चुस्त-दुरूस्त रह सकता है। अधिक उम्र तक स्वस्थ एवं चुस्त-दुरूस्त बने रहने के लिए वृद्धावस्था में भी मनुष्य का क्रियाशील रहना, पारिवारिक व सामाजिक सहयोग मिलना अति आवश्यक है। इसके अलावा खानपान की आदतें, आर्थिक स्थिति व मानसिक सोच का भी आपकी उम्र व स्वास्थ पर बहुत असर पड़ता है। यदि आप भी वृद्धावस्था में और भी स्वस्थ बनें रहना चाहते है तो निम्नलिखित बिंदुओं पर गंभीरता पूर्वक मनन करें।

  • युवावस्था से ही हमें खानपान में संयम रखना चाहिए। 40 साल के बाद तो तली हुई वस्तुएँ, फास्ट फूड, मिर्च, खटाई, अधिक नमक, अधिक चीनी आदि एकदम कम कर देनी चाहिए जिससे वृद्धावस्था में होने वाले मोटापे, उच्च रक्तचाप, मधुमेह एवं हृदय रोग आदि से बचा सके।
  • अपने वजन पर शुरू से ही नियंत्रण रखें, क्योंकि जोड़ों की बीमारियों के साथ-साथ अन्य कई बीमारियों को भी यह अपना मित्र आसानी से बना लेता है जो कि आपके स्वास्थ के साथ पूरी तरह से दुश्मनी निकालती है।
  • खाने में सलाद, हरी सब्जियाँ, अंकुरित अनाज आदि फाइबर युक्त वस्तुओं को प्राथमिकता दें। ये आपको हृदय रोग, मधुमेह एवं कैंसर जैसे रोगों से बचाने में मदद करेंगे और आप वृद्धावस्था में भी अन्य लोगो से अधिक स्वस्थ रहेंगे।
    वैसे तो शाकाहारी होना ही बेहतर है, क्योंकि शाकाहारी व्यक्ति मासाहारी की तुलना में अधिक स्वस्थ रहता है एवं लम्बी आयु तक जीता है। फिर भी आप मांस का सेवन करते हैं तो रेडीमेड का सेवन कम-से-कम करें।
  • वृद्धावस्था में अधिकतर कैल्शियम की कमी हो जाती है, जिससे आॅस्टिपोरोसिस रोग होने की संभावना रहती है। इस रोग में हड्डियाँ कमजोर हो जाती है और जरा सा ही दबाव पड़ने से टूट जाती है। इस रोग से बचने के लिए नियमित रूप से मलाई रहित दूध लें।
  • विभिन्न रोगो से बचने के लिए मनुष्य का क्रियाशील होना अति आवश्यक है। इसके लिए सुबह नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। इसके लिए योग के कुछ आसन भी किए जा सकते है। इससे सारे दिन आपके शरीर में ताजगी बनी रहती है एवं आपकी कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधु-मेह, जोड़ो के रोग आदि होने की आशंका कम हो जाती है।
  • शराब, तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी या किसी अन्य नशे की आदत बिल्कुल मत डालिए। इनके रहते आपकी जवानी किसी तरह से कट जाती है, पर आपका बुढ़ापा पूरी तरह से खराब हो जाता है। कई तरह की बिमारियों के साथ ही आर्थिक संकट भी आपको घेर लेता है।
  • बच्चों की अच्छी शिक्षा, परवरिश, लाड-प्यार देने के साथ-साथ उन्हें ऐसे संसकार दें जिससे वे बुढ़ापे में आपका संबल बन सकें। निश्चित ही बेटे बहुओं का आपके प्रति सम्मान, प्यार व देखरेख आपको प्रसन्नचित व स्वस्थ रखेंगे। हर हाल में आपके भविष्य की चिंता करें। इसके लिए शरीर में यथासंभव शक्ति रहते अपने आप को आर्थिक रूप से सुरक्षित कर लें, क्योंकि समय पर रूपये पैसे ही काम आते है।
  • हमेशा खुश रहें जिससे आप मानसिक तनाव से मुक्त रहेंगे इसके लिए आप खुद को किसी कार्य में व्यस्त रखें, पढ़े लिखें या अपनी कोई हाॅब्बी पूरी करें। इससे आपको आत्मसंतुष्टि मिलेगी जो आपके तनाव को कम करेगी।
  • व्यर्थ के वाद-विवाद, लडाई-झगड़े एवं कोट-कटहरी के चक्कर में भी न पड़े। इससे आपकी सारी उम्र मुकदमा लड़ते ही बीत जाएगी, वैमनस्य बढ़ेगा और आर्थिक हानि भी होगी।
  • कुछ विटामिन्स जैसे ई, ए, सी एवं संलिनियम काॅपर, जिंक एवं मैगनीज आदि खनिज तत्व वृद्धावस्था में होने वाले परिवर्तनों को रोकता है। एवं अन्य रोगों से बचाव भी करता है। अतः वृद्धावस्था में शरीर में इसकी कमी नही होने देना चाहिए। ये तत्त्व मौसमी फलों, सब्जियों एवं अनाजों में पर्याप्त मात्रा में मिलते है। अतः अपना खान पान एकदम संतुलित रखें जिससे आपके शरीर में पोषक तत्त्वों की कमी न हो सके।
  • आप कभी भी अपने आप को व्यर्थ न समझें। ऐसी नाकारात्मक सोच आपके अंदर कुंठा को जन्म दे सकती है। सच तो यह है कि आप आज भी अपने परिवार व समाज के लिए बहुत उपयोगी है।
  • अपनी हर एक शारीरिक या मानसिक परेशानी के लिए जल्द से जल्द अपने चिकित्सक से आवश्य मिलें। इससे समय रहते ही आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा।
  • नई पीढ़ी के सदस्यों के साथ तालमेल रखें। उनकी हर बात पर झीखें न और न ही मीनमेख निकालें। उनके विचारों को भी जाने और यदि ठीक है तो उनका स्वागत करें।
  • हालांकि वृद्धावस्था में पूरी सावधानी के बाद भी कुछ परेशानियां जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, प्राटेस्ट ग्रंथि का बढ़ना, कान से कम सुनाई देना एवं मोतियाबिंद आदि हो सकती है। फिर भी वृद्धावस्था को अभिशाप न मानें और इसे पूर्ण उत्साह के साथ जिएँ।