पांच मिनट में संवारे कर्ली हेयर

कर्ली हेयर एक ऐसा हेयरस्टाइल है जो कभी भी फैशन से बाहर नहीं होता है। कुछ के बाल तो प्राकृतिक रूप से कर्ली होते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे बाल पाने के लिए खासतौर पर प्रयास करते हैं। जो भी हो, पर आपको कर्ली हेयर की देखभाल के बारे में पता होना चाहिए। सीधे बाल के उलट कर्ली हेयर को शानदार दिखाने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास करने होते हैं। अगर आप अपने कर्ली हेयर पर इतराते हैं तो निश्चित रूप से आप इसकी देखभाल के तरीके जानना चाहेंगे। आप यह जान लीजिए के कर्ली हेयर का रखरखाव सीधे बालों जितना आसान नहीं है। हालांकि ऐसे कई टिप्स हैं जिसे अपना कर आप न सिर्फ कर्ली हेयर का अच्छे से रखरखाव कर सकते हैं बल्कि इसे और बेहतर भी बना सकते हैं। तो आइए जानते हैं कुछ टिप्स जिनकी सहायता से आप अपने कर्ली हेयर को एक नयी स्टाइल प्रदान कर सकते हैं।
तेल लगानाः- कर्ली हेयर को ज्यादा तेल लगाने की जरूरत होती है, क्योंकि सीधे बालों की तुलना में इसमें रूखापन ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए है कि बाल मुड़े होने से स्किन आयल बालों के सिरे तक नहीं पहुंचता है। रूखा बाल ज्यादा कमजोर होता है और ज्यादा टूटता है। आप जैतून का तेल, नारियल का तेल, बादाम का तेल और दूसरे नेचुरल हेयर आयल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हेयर पैकः- कर्ली हेयर की देखभाल में कई तरह के हेयर पैक भी आपकी मदद कर सकते हैं। मेयोनेज, अंडा, दूध, दही, शहद और नींबू कुछ ऐसे हेयर पैक हैं जो असरदार होने के साथ साथ प्राकृतिक भी हैं।
शैंपू करनाः- बालों में शैंपू करें, क्योंकि बाल में कई सारे ट्विस्ट और टर्न होने से बालों के छल्ले में गंदगी की संभावना काफी बढ़ जाती है। इससे बाल भद्दे भी नजर आने लगते हैं। आपने बालों को साफ करने के लिए आप नेचुरल मेथड भी अपना सकते हैं।
कंडीशनिंगः- कर्ली हेयर की देखभाल में कंडीशनिंग बेहद जरूरी है। आप चाहें तो कंडीशनर बाजार से खरीद सकते हैं या फिर इसे घर पर बना सकते हैं। शहद, अंडा, सेब, सिरका और चाय कुछ बेहतरीन प्राकृतिक कंडीशनर हैं।
कंघी करनाः- कर्ली बालों के लिए कंघी का चुनाव करते समय सावधानी बरतें। चौड़े दांत वाली कंघी का चुनाव करें क्योंकि यह आपके बालों के छल्ले में फंसेगी नहीं। पतले दांत वाली कंघी कर्ली हेयर पर आसानी से नहीं चलेगी। साथ ही इससे बालों को नुकसान भी पहुंचेगा।

फैशन बड़ा ही कोमल अहसास है जिसे शब्दों में बांधना मुश्किल है। आज इसका स्वरूप इतना लुभावना, आकर्षक और मनोहर हो गया है कि बच्चे, किशोर, युवा और बूढ़े तक इससे अछूते नहीं हैं। आज के समय में कम कपड़ों के फैशन का ही बोलबाला है। शरीर पर जितने ही कम कपड़े होते हैं, वह उतना ही फैशनेबल कहलाता है। फैशन की परिधि में महिलाओं के अंतर्वस्त्र भी आ चुके हैं। कल तक जिन अंतर्वस्त्रों को आरामदेह मानकर पहला जाता था, वे ही वस्त्र आज फैशन के रूप में इस्तेमाल होने लगे है। एक समय ऐसा था जब महिलाएं दुकानों पर जाकर चोरी छिपे अंतर्वस्त्रों पैंटी, ब्रा आदि को खरीदा करती थीं किन्तु आज उन्हीं वस्तुओं को खरीदने में किसी भी प्रकार की लज्जा महसूस नहीं होती। हो भी क्यों? जब पुरूष बनियान (गंजी), अन्डरवीयर खरीदते हैं, तो क्या वे लज्जा का अनुभव करते हैं? अंतर्वस्त्रों को अंग्रेजी में ‘लिंगरीज’ के नाम से पुकारा जाता है। महिलाओं के रूझान को देखते हुए विदेशों में स्थित अनेक कंपनियों ने अंतर्वस्त्रों के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। वेनिटी फेयर, कैलिंडा, लवेबुल, जॉकी आदि अनेक विदेशी कंपनियों ने लिंगरीज के निर्माण में ख्याति को प्राप्त किया है। अपने देश में भी अनेक कंपनियों ने अंतर्वस्त्रों के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है किंतु विदेशी तकनीक एंव सुविधायुक्त वस्त्रों के निर्माण के आगे फिलहाल उपभोक्ताओं का दिल अपनी कंपनियां नहीं जीत पा रही है। लिंगरीज में महिला अंतर्वस्त्रों के अलावा रात्रिकालीन पोशाकें भी शामिल है। मुख्य रूप से लिंगरीज परिधानों में नाइटवीयर, कॉरसेट, पैंटी, ब्रा, कैमीसोल आदि शामिल है। ये अनेक स्टाइलों में नर्म, गुदगुदे तथा आरामदेह होते हैं। इसी कारण महिलाओं का झुकाव नित्यप्रति इस ओर होता जा रहा हैं। सर्वेक्षण के अनुसार इन अंतर्वस्त्रों का प्रयोग न सिर्फ कम उम्र की लड़कियां ही करती हैं बल्कि ज्यादा उम्र की महिलाएं भी इनका उपयोग धडल्ले से करने लगी हैं। अधिकांश महिलाये अपने अंतर्वस्त्रों को शोख पीले रंग, चमकीला ब्लू, रायल पर्पल, मैरून आदि रंगों में देखना पसंद करती हैं। सफेद एंव काले रंगों में अंतर्वस्त्रों को प्रायः पसंद नहीं किया जाता। ‘ब्रा’ की बाजार में कई किस्में हैं जिनमें ‘फुल बस्टेड’ प्रमुख है। यह आगे की ओर से खुल जाती है। स्तनों के ऊपर वाला स्टिच पिन से जुड़ा रहता है जिसे खोल देने पर पूरा स्तन बाहर निकल आता है। इस खोल का अंदरूनी भाग मुलायम तथा स्पंजयुक्त होता है, जिसका स्पर्श एक आनंददायक एहसास को प्रदान करता रहता है। डेमी ब्रा लो कट स्टाइल में आती है। इसे बहुत ही मोहक एंव आकर्षक डिजाइनों में तैयार किया जाता है। सीमलेस ब्रा स्मूथ एहसास दिलाता है। इसी प्रकार कन्टूर ब्रा में फाइबर या फोम का गोलाकर पैड जुड़ा होता है जो स्तनों के आकर को आकर्षक बना डालते हैं। पैड का प्रयोग नर्म एहसास दिलाने और फिगर शेप के लिए किया जाता है। इसे पैडेड ब्रा भी कहा जाता है। स्ट्रेपलेस ब्रा की पट्टियों को इच्छानुसार जोड़ा या हटाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल ऑफ शोल्डर टॉप या अन्य इसी किस्म की पोशाकों के साथ भी किया जा सकता है। कन्वर्टिबुल ब्रा का इस्तेमाल भी स्ट्रेपलेस की तरह ही किया जा सकता है। इसके बस्टियर को जोड़ा या हटाया जा सकता है। इसे ‘वन पीस’ ब्रा की तरह आसानी से प्रयोग में लाया जा सकता है। कन्वर्टिबुल ब्रा का आकार अंग्रजी के लेटर ‘एक्स’ की तरह होता है। इसमें स्ट्रेप्स को भी लगाया या हटाया जा सकता है। पुश-अप ब्रा में पूर्णता के लिए किनारों पर पैड का इस्तेमाल किया जाता है। ये सभी ब्रा विभिन्न डिजाइनों एंव भिन्न-भिन्न लंबाईयों में उपलब्ध होती है। ब्रिटेन की मार्क्स एंड स्पेसर कंपनी के अंतर्वस्त्रों को भारतीय महिलाएं अधिक पसंद कर रही है। दूध पिलाने वाली माताओं के लिए नर्सिंग ब्रा नामक एक स्पेशल ब्रा भी भारतीय बाजार में मौजूद है। इसकी विशेषता यह है कि इसे बिना उतारे ही स्तनपान कराया जा सकता है। स्तनों में अतिरिक्त निकलने वाले दूध को भी इस ब्रा में सोख लेने की विशेष सुविधा है। बाजार में अनेक रंगों एवं डिजाइनों की पैंटी भी मौजूद है। हाईकट पैंटी में पैरों के किनारों पर एक गहरा कट और पूरा बैक कवरेज पाया जाता है। बाय लेग ब्रीफ हिप्स को आराम होने के ख्याल से तैयार किया गया है। इसका आगे वाला भाग राउण्ड चैन से युक्त होता है। इसे बिना उतारे पेशाब किया जा सकता है। टोंग नामक पैंटी में गहरा कट होता है। इसके पीछे वाले भाग में आधा या एक इंच की स्ट्रिप होती है। बिकिनी पैंटी में बेस्ट बैंड नाभि के नीचे होता है। इसमें पैरों के पास एक गहरा कट पाया जाता हैं बैक कवरेज बिकिनी के स्टाइल पर निर्भर करता है। इसे मुलायम तथा चमकीले फेब्रिक से तैयार किया जाता है। ‘नेग्लैस पैंटी’ को जापान की एक विख्यात कंपनी ने विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए तैयार किया है जो श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) अथवा कामशीतलता के बीमारियों से ग्रसित होती है। आराम दायक पैड के साथ ही औषधियों से उक्त बीमारियां छह माह के अंतराल में ही समाप्त हो जाती हैं। आज की महिलाएं अपने अंतर्वस्त्रों के प्रति जागरूक हो चुकी है। तथा अपनी सुविधा के अनुसार इन्हें खरीदने लगी है।

एक कहावत है कि संसार में उसी वस्तु की नकल होती है जिसकी माँग अधिक होती है। प्राचीन समय में ज्योतिष केवल आवश्यकता थी परंतु आज के दौर में आवश्यकता के साथ-साथ ज्योतिष एक फैशन भी बन गया है। जयोतिष का अर्थ है ”ज्योति दिखलाना“। मनुष्य के जीवन में लाभ-हानि, अनुकूलता-प्रतिकूलता, शुभता-अशुभता या अच्छा-बुरा कब-कब होगा इसको ज्योतिष के माध्यम से ही जाना जा सकता है।
वास्तव में ज्योतिष का अर्थ है व्यक्ति को जागरूक करना परंतु समाज में कुछ पोंगा पंडितों द्वारा गलत प्रयोग करने अर्थात् लोगों को सही जानकारी देने की बजाय उनको भयभीत कर धन कमाने के कारण कई बार इस विद्या की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है। इस लेख के माध्यम से ज्योतिष शास्त्र के उन तथ्यों के बारे में जानकारी दी जाएगी। जिनसे आमजन अक्सर भयभीत रहते है। तथा उपायों के नाम पर कुछ ज्योतिषी किस प्रकार आम लोगों को ठगते है, इस बात का भी उल्लेख किया जाएगा।
मांगलिक दोष
जन्मकुंडली के 1, 4, 7, 8, एवं 12वें भाव में मंगल के होने से जातक/जातिका मांगलिक कहलाते है। विवाह के समय कुंडली मिलान में मांगलिक दोष देखा जाता है। मंगल पानी ग्रह है या सदैव हानि करता है। ऐसी धारणा अल्पज्ञानी ज्योतिषियों की हुआ करती है। सत्य यह है कि मंगल पानी ग्रह न होकर क्रूर स्वभाव वाला ग्रह है। राजनैतिक गुणों से दूर मंगल सरल स्वभाव वाला ग्रह है। परंतु यदि कोई मंगल प्रभावित व्यक्ति से छेड़छाड़ करता है तो मंगल उसे नीति की बजाय हिंसा से सबक सिखाता है। जिसके स्वभाव में सरलता हो, निष्कपटता हो, कर्तव्यपरायणता हो व दृढ़ता हो, ऐसे सद्गुणों से भरपूर मंगल ग्रह को यदि कोई अज्ञानी पानी ग्रह कहता है तो उसकी बुद्धि प्रश्नचिन्ह लगने योग्य है।
कालसर्प योगः
आजकल चारो तरफ कालसर्प योग की बहुत ही चर्चा है। यदि आपका समय कुछ अच्छा नहीं चल रहा है और ऐसे में यदि आप किसी ज्योतिषी से संपर्क करते हैं तो अधिकतर ज्योतिषी किसी न किसी तरह से आपको कालसर्प योग से पीडि़त बताते हैं। सबसे पहले आपको यह जानकारी दी जाती है कि कालसर्प योग होता क्या है। किसी भी कुंडली में यदि सूर्य से लेकर शनि ग्रह तक सातों ग्रह राहु व केतु की एक दिशा में आ जाते हैं तो जन्मकुंडली कालसर्प योग से पीडि़त हो जाती है।
सबसे पहले हम ये जानेंगे कि कालसर्प योग की उत्पत्ति का प्रमाण किन ग्रंथों में मिलता है। ज्योतिष की उत्पत्ति वेदों से हुई है तथा वेदों का अंग भी माना जाता है, किसी भी वेद, संहिता एवं पुराणों में कालसर्प नामक योग का उल्लेख नहीं मिलता, यहाँ तक की भृगुसंहिता, पराशर एवं रावण संहिता आदि मुख्य ग्रंथों में भी इस योग की चर्चा तक नहीं है। अब जो महत्त्वपूर्ण प्रश्न सामने आते हैं वो यह है कि जब योग का विवरण किसी भी प्रमाणिक ग्रंथ में नहीं मिलता तो फिर यह कहाँ से और कब प्रकट हुआ। खोज करने पर यह मालूम पड़ा कि 80 के दशक में इस योग का आर्विभाव दक्षिण भारत की ओर से हुआ।
हम भारतीय ज्योतिष की बात करें तो राहु-केतु को छाया ग्रह माना गया है इनका अपना कोई आस्तित्व नहीं है। राहु अकेला होने पर मंगल ग्रह का प्रभाव रखते है। इस तर्क से ही कालसर्प योग अप्रमाणिक सिद्ध हो जाता है। यदि हम एक अन्य उदाहरण लें तो उसके अनुसार राहु-केतु के मध्य अन्य सभी ग्रहों के होने पर यह योग बनता है तो यदि किसी ग्रह की राहु या केतु पर दृष्टि पड़ रही हो तो भी कालसर्प योग खंडित हो जाता है क्योंकि दानों छाया ग्रह होने से इन दोनों पर जिस भी ग्रह की दृष्टि पड़ती है उसी ग्रह के अनुसार फल देने के लिए बाध्य है। अब हम दूसरी तरह से विचार करते हैं कि मान लो राहु-केतु नामक छाया ग्रह अपने प्रभाव से अन्य सात ग्रहों को बांध देते हैं तो क्या सूर्य का सभी ग्रहों का राजा कहलाया जाना बेकार है। बृहस्पति का देवगुरू होना प्रभावहीन है तथा शनि जिसे कलयुग में सबसे प्रभावशाली कारक माना जाता है क्या उनका प्रभावशाली होना मिथ्या है।

हम अपने शरीर, त्वचा, बालों का कितना ख्याल रखतें हैं। मार्किट से सुंदरता की कितनी चीजें खरीदते हैं, पर हमें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे नाखून भी हमारे व्यक्तित्व को सवांरने में अहम् भूमिका निभाते हैं। आइये जानते है कि इनकी सुंदरता को कैसे बढ़ाएंः-
अपने नाखूनों को फैशनेबल तथा फंकी बनाने के लिए साॅलिड रंग लगाएं, इससे नाखून मजबूत होते हैं। टूथपिक से नाखून के अंदर किसी और रंग से डायगनोल रेखा बना लें।
क्लब या रात की पार्टियों पर तक मेटालिक ग्लीट और नाखून पियर्स करके, नाखून टेटू का प्रयोग कर सकती है। अगर आपके नाखून ज्यादा बड़े नहीं है तो, आप नकली नाखून लगा सकती हैं।