अब होंगे नख आकर्षक

हम अपने आप को सुंदर एंव आकर्षक दिखाने के लिए बहुत कुछ करते हैं, मसलन बढ़िया वस्त्र पहनते हैं, मेकअप करते हैं और न जाने क्या-क्या। मगर क्या आप ने नाखूनों की खूबसूरती को जाहिर करने के महत्व पर ध्यान दिया है। यदि नही तो लीजिये शहनाज हुसैन बता रही हैं नाखूनों को आकर्षक बनाने के कुछ उपयोगी नुस्खे।
यदि आप की अंगुलियां लंबी और खूबसूरत हैं मगर नाखून लापरवाही से कटे या गंदे हैं तो यह आप के व्यक्तित्व एंव आकर्षक पर असर डाल सकते हैं। इस से भी जरूरी बात यह है कि नाखूनों पर ध्यान दे कर आप अपने आंतरिक स्वस्थ्य को जान सकते हैं। गुलाबी नाखून अच्छी सेहत की ओर इशारा करते हैं जबकि नीली आभा वाले नाखून अस्वस्थ रक्त संचार को दर्शाते है। खान-पान की कमियों के कारण भी नाखूनों में दराद, रूखापन और अन्य समस्यायें आती है। आप निम्नलिखित बातों को ध्यान में रख कर अपने नाखूनों और सेहत का ख्याल रख सकते हैं।
नाखूनों की सबसे पहली आवश्यकता है उनका मुलायम और किसी प्रकार के उभार अथवा रेखाओं से मुक्त होना। यह तभी संभव है जब आप उन की नियमित देखभाल करें। सबसे पहले, प्रतिदिन हाथों और नाखूनों पर मसाज क्रीम लगा कर नाखून के आस-पास की त्वचा को नरम एंव मुलायम रखें। शुष्क दिनों में मसाज का महत्व और भी बढ़ जाता है या फिर घर के बहुत से कामों के दौरान डिरजेंट इसकी प्रयोग करने के कारण भी इसकी आवश्यकता बढ़ जाती है। ध्यान रखें की नाखूनों के आस-पास की त्वचा को कभी न काटे, उन्हें नरम बनाने के लिए गुनगुने पानी में डुबोकर अच्छी तरह मसाज करें। इसके बाद त्वचा को काॅटन बड्स से पीछे की ओर धकेले। कभी भी नाखूनों को साफ करने के लिए नूकीले उपकरण का इस्तेमाल न करें। नाखूनों को अच्छी अवस्था में रखने के लिए साप्ताहिक मेनिक्योर का सहारा ले। हाथों की देखभाल के लिए एक कटोरी और गुनगुना पानी, एमरी बोर्ड, आरेंज स्टिक, नेल क्लिपर्स, रूई के बड्स, नेल वार्निश रिमूवर, नेल वार्निश और एक मसाज क्रीम।
सबसे पहले पुरानी नेलपाॅलिश को रूई और रिमूवर से हटाएं। बहुत अधिक रिमूवर न लगाएं। उससे नाखून शुष्क हो सकते है। यदि आप काटना चाहते है। तो नेल क्लिपर्स का इस्तेमाल करें। इसके बाद कटोरे में गुनगुना पानी डालकर उसमें 5 मिनट के लिए हाथ डुबोएं। पानी में आप शैम्पूूू की कुछ बुंदे या साबून रहित बाथ जैल डाल सकते है। इसके बाद नाखूनों की सफाई के लिए नरम ब्रश का इस्तेमाल करें। अब रूई को आॅरेज स्टिक पर लपेटकर नाखून की त्वचा को हल्के से पीछे की तरफ धकेले। यदि त्वचा पीछे की ओर नहीं खिसकती है तो थोड़ी क्रीम लगाकर त्वचा को पीछे की ओर धकेलने का प्रयास करें। नाखूनों को नीचे की ओर साफ करने के लिए किसी पतली डंडी पर रूई लपेटे या रूई के बड्स का इस्तेमाल करें। फिर हाथों को क्लिन से मालिश कर मुलायमम बनाएं और उसके बाद गीले तोलियं से अतिरिक्त क्रीम को पोछ दे।
अब नाखून पर नीचे से ऊपर की ओर लंबे स्ट्रोक से नेल वार्निश लगाएं। प्रत्येक नाखून के लिए तीन स्ट्रोक काफी है। प्रत्येक नाखून पर दोहरी परत उचित रहती है।
हाथ डुबोने के लिए अत्यधिक गरम पानी का इस्तेमाल न करें। ये त्वचा को शुष्क कर सकती है। अगर आपके नाखूनों पर किसी प्रकार का इंफेक्शन है तब उन पर नेल वार्निश लगाने से बचना बेहतर है। स्वयं मैनिक्योर करने के लिए सबसे पहले आप नेलपाॅलिश को हटाकर हाथों को गुनगुने पानी में डुबोए और फिर ऊपर दिए गए तरिके से नाखूनों की सफाई करें। इसके उपरांत नाखूनों को एक नया लुक दें नेल क्लिपर्स की सहायता से और एमरी बोर्ड से रगडकर किनारों को शेप दें। अब नाखूनों के सिरों को सफेद नेल पाॅलिश से रंगे इससे दोनों सिरों तक लगाएं और नाखून को आकार दें। नेलपाॅलिश सूखने के बाद दुबारा एक स्ट्रोक लगाएं। उसके बाद आप रंगहीन या पारदर्शी पाॅलिश लगा सकते है। इससे मैनिक्योर को सुरक्षा मिलती है।
सूर्य की तेज किरणे भी नाखूनो को प्रभावित करती है। कुछ हल्के रंग विशेषकर गहरा पीला और गुलाबी, सूर्य की किरणों के प्रभाव में आने पर पीले रंग के नजर आने लगते है। और इससे आपके नाखून भी पीले पड़ सकते है। इससे बचने के लिए नेलपाॅलिश की ऊपरी परत के रूप में किसी पारदर्शी रंग का प्रयोग कर सकते है। जिस प्रकार आप हाथों और बाजूओं पर सनक्रीम लगाते है ठिक उसी तरह नाखूनों पर भी लगानी चाहिए। जिससे आप सूर्य की पराबैगनी किरणों से बचाव कर सकते है। नाखूनों से पीलापन हटाने के लिए एमरी बोर्ड की सहायता से नाखून की सतह इस सावधानी से हटाएं कि नाखून को नुकसान न पहुंचे।
मसाज और मैनिक्योर से नाखूनों को आकर्षक तो बनाया जा सकता है लेकिन पेष्टिक भोजन के महत्व को भी नकारा नहीं जा सकता इसलिए स्वस्थ नाखूनों के लिए भोजन में पर्याप्त रूप से कैल्शियम, सल्फर, अमिनों एसिड, फास्फोरस, विटामिन बी और ई शामिल हो। ये सब हमें दूध से बने उत्पादों अनाज, अंडा, फल और हरी सब्जियों में मिलता है। पर्याप्त मात्रा में फल व कच्ची सब्जियां सलाद में खाएं जिससे विटामिन मिनरल और एंजायम प्राप्त कर सकते है। संभव हो तो गाजर का रस जरूर पीये।

बदलते वक्त की पहचान हेयर कलरिंग

यदि आप पाना चाहती हैं आकर्षक व स्टाइलिश लुक तो हेयर कलरिंग बेहद आसान व प्रभावी तरीका है अपनी पर्सनैलिटी में चार चांद लगाने का। आप चाहे तो अच्छे सैलून में जाकर हेयर कलर करवा सकती हैं पर यदि आप घर में हेयर कलर कर रही हैं।

मार्केट में दो तरह के हेयर कलर एवेलेबल है बेसिक कलर, जो बढ़ती उम्र के साथ सफेद होते बालों को रंगीन बनाने के लिए किये जाते हैं। इन्हें हर 15 से 20 दिन बाद दोबारा एप्लाई करने की जरूरत होती हैं। बेसिक कलर में खास शेड हैं ब्लैक, ग्रै, बरगंडी व ब्राउन। दूसरे कलर हैं हाइलाइटिंग कलर, जिन्हें काले व सिम्पल बालों को हाईलाइट करने के लिए किया जाता है। युवाओं में आजकल इनका खासा क्रेज देखा जाता है। इनमें बरगंडी, गोल्डेन, ब्राउन, काॅपर, रेड, ग्रीन, चाॅकलेटी, स्लेटी व गोल्डेन बाउन खास है।

हाईलाइट कलर को आप अपनी सुविधानुसार किसी भी ट्रेंड में चुन सकती हैं

टेम्परेरी कलर- शैम्पू करने के बाद ये शैम्पू के साथ ही धुल जाते है और आपके बाल वापिस अपने ओरिजनल कलर में आ जाते हैं। यदि आप सिर्फ किसी फंक्शन में जाने के लिए लुक चेंज करना चाहती हैं तो टेम्परेरी ककलर एक अच्छा ऑप्शन है।

सेमी टेम्परेरी कलर- अगर आप कुछ ही दिनों के लिए कलर्ड हेयर चाहती हैं तो इसे चुन सकती हैं। इनके असर की अवधि 5-6 शैम्पू करने तक रहती हैं।

सेमी परमानेन्ट कलर- यदि आप बदलते ट्रेंड व फैशन के अनुसार बालों का कलर भी बदलती रहना चाहती हैं तो सेमी परमानेन्ट कलर चुन सकती हैं। ये कलर लगाने के 5 से 6 हफ्तों तक रहते हैं।

परमानेन्ट कलर- परमानेन्ट कलर आपको बालों के ओरिजनल कलर को पूरी तरह नए कलर में बदल देता हैं। हां आपको बालों की जो नई ग्रोथ होगी वह आपके बालों के ओरिजनल रंग में बढ़ेगी। यह कलर मार्केट में कई शेड में उपलब्ध हैं। परमानेन्ट की सलाह अवश्य लें। यह कलर मार्केट में क्रीमी, जेल व शैम्पू फाॅर्म में भी एवेलेबल हैं।

हेयर कला का सेलेक्शन

1  बालों को कलर करने के लिए सबसे पहले जरूरी है, आपके चेहरे के रंग-रूप उम्र व पर्सनैलिटी के आधार पर कलर का सेलेक्शन ताकि आपका व्यक्तित्व और ज्यादा उभर कर सामने आ सके।

2  यदि आपका रंग गोरा है तो आप बरगंडी, ब्राउन, गोल्डन व ग्रीन कलर चुन सकती हैं।

3  हल्के सांवले रंग पर लाइट गोल्डेन ब्राउन, काॅपर, स्लेटी रंग अधिक फबते हैं।

4   गेहुंए रंग पर चाॅकलेटी, बरगंडी व खाकी रंग खिलते हैं।

5   अधिक उम्र में मेंहदी का अधिक प्रयोग बालों को रूखा बनाता है।

सफेद होते बालों को छिपाने के लिए आप काला, भूरा व ब्राउन हेयर कलर चुन सकती है। फैशन व बदलते ट्रेंड के अनुसार भी हेयर कलर चुन सकती हैं बशर्ते वह कलर आपकी पर्सनैलिटी से मैच करता हो। पिछले दिनों ग्रीन कलर अधिक पसंदद किया जा रहा था, आजकल गोल्डेन ब्राउन कलर चलन में हैं। बरगंडी कलर हर उम्र, रंग व मौसम में फबता हैं।

हेयर कलर करने से पहले

1  हेयर कलर करने से 48 घंटे पहले एलर्जी टेस्ट करें इसके लिए बालों के रूखे व बेजान हिस्से पर कलर लगाएं और आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से धो लें। अगर 48 घंटे के अंदर त्वचा में जलन, खुजली आदि होती है या आपको लगे यह कलर आप पर सूट नहीं कर रहा तो हेयर स्पेशलिस्ट की सलाह से नया कलर व ब्रांड इस्तेमाल करें।

2 कलर चुनते समय अमोनिया फ्री कलर चुनें। ये बालों को रूखा बनाते हैं। तो हेयर कलर के दो पाउच खरीदें ताकि सारे बालों पर हेयर कलर अच्छी तरह लगा सकें।

3 हेयर कलर सीधे व सिल्की बालों पर ही अच्छे लगते है। अगर आपके बाल घुंघराले हैं तो आप उन्हें स्ट्रेट करवा कर हेयर कलर कर सकती है।

4 आप चाहे तो सारे बालों को हाईलाइट कर सकती है या सिर्फ आगे की कुछ लेयर। यदि कनफ्यूज है तो आप पेपर पर बालों का स्केच बनाकर, जिस पैटर्न में आप बाल हाइलाइट करना चाहती हैं, ड्रा करें। यदि पैटर्न पसंद आता है तो उसे अप्लाई कर सकती हैं।

5 अब बालों को किसी अच्छे शैम्पू से धोएं। जिससे बालों में उपस्थित धूल-मिट्टी के कण बाहर निकल जाए।

हेयर कलर करने से पहले माथे के ऊपरी हिस्से व गर्दन के पिछले हिस्से पी क्रीमी जेल या वैसलीन लगा ले। इससे हेयर कलरिंग के दौरान त्वचा पर दाग पड़ने का डर नहीं रहेगा।

हेयर कलर

1 हेयर कलर को एक बाउल में अच्छी तरह मिक्स करें और घोलने के तुरंत बाद बालों पर लगाएं, कलर को अधिक देर तक रखना बालों को नुकसान पहुंचा सकता है।

2 हाथों में गलव्स पहनकर बालों को कलर करें। सबसे पहले बालों की जड़ों में कलर लगाएं फिर ब्रश की सहायता से सारे बालों में फैला दें।

3 45 मिनट बाद बालों को गुनगुने पानी से गीला करके 3 मिनट तक झाग बनाए फिर अच्छी तरह पानी से धो लें ताकि हेयर कलर कर कोई कण बालों में न रहे।

4 24 घंटे तक बालों में शैम्पू न करें। अन्यथा शैम्पू के साथ बालों में लगा कर भी बह जाएगा।

5 बाल धोने के बाद बालों में नींबू युक्त सोल्यूशन लगाएं अगर सिर की त्वचा पर कलर लगा गया होगा तो यह उसे हटाने में मदद करेगा।

6 यदि माथे की त्वचा पर कलर लग गया है तो गीले कपड़े को शैम्पू में भिगोकर दाग पर लगाएं, फिर साफ कपड़े से रगड़ कर पोंछ दें। दाग हट जाएगा।

7 बालों को हेयर ड्रायर से सुखाने की बजाए नैचुरल रूप से सुखने दें।

8 बालों को तौलिये में लपेट कर न रखें, न ही तौलिये से रगड़े या झाड़े, इससे बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं।

कलर्ड बालों की देखभाल

1 कलर्ड बाल तभी खूबसूरत लगते हैं जब वे सिल्की, साॅफ्ट व मुलायम हों, रूखे-बेजान, बाल आपके सौन्दर्य को बढ़ाने की बजाय कम कर सकते हैं। इसलिए इन्हें जरूरत होती है विशेष देखभाल की। आइयेे देखें ये टिप्स-

2 कलर्ड बालों के लिए खास बनाए गए शैम्पू व कंडीशनर का इस्तेमाल करें।

3 बालों को हफ्ते में 2 बार डीप कंडीशनिंग दें। चाहे तो पार्लर में जाकर हेयर स्पा भी ले सकती है।

4 बालों को साॅफ्ट सिल्की बनाए रखने के लिए नैचुरल हेयर प्रोटीन व विटामिन-ई युक्त तेल से अच्छी तरह मालिश करें। आधे घंटे बाद शैम्पू से धोकर कंडीशनिंग करेंगे, हेयर कलर भी बालों पर अप्लाई होगा। 5 मिनट बाद धो दें।

5 कलर्ड बाल को सुखा छोड़ना या हाफ क्लच करना आकर्षक लगने के साथ-साथ सेक्स अपील भी बढ़ाता है। यदि आपके बाल ज्यादा लम्बे हैं तो सिर्फ आगे से लेजर कंटिग करवा कर कलर्ड हेयर को हाईलाइट कर सकती है।

6 यदि बाल ऑयली हैं तो फ्राइड फूड व फैट कम लें।

7 कंडीशनर हमेशा बालों के सिरे पर ही उपयोग करें। जड़ों पर कंडीशनर लगाना बालों को नुकसान पहुंचाना है।

8 बालों को हेयर ड्रायर से सुखाती हैं तो 8 इंच की दूरी बना कर रखें व बालों को ठंडा होने के बाद ही सेट करें, अन्यथा बाल रूखे हो सकते हैं।

9 बालों के लिए चैडे, दांतों वाले कंघे इस्तेमाल करें, प्लास्टिक के साधारण कंघे बालों को तोड़ते व रूखा बनाते हैं।

10 अगर अप स्वीमिंग करती हैं तो बालों को बचाकर रखें। स्वीमिंग पूल के पानी में क्लोरीन होती है जो बालों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

पांच मिनट में संवारे कर्ली हेयर

कर्ली हेयर एक ऐसा हेयरस्टाइल है जो कभी भी फैशन से बाहर नहीं होता है। कुछ के बाल तो प्राकृतिक रूप से कर्ली होते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे बाल पाने के लिए खासतौर पर प्रयास करते हैं। जो भी हो, पर आपको कर्ली हेयर की देखभाल के बारे में पता होना चाहिए। सीधे बाल के उलट कर्ली हेयर को शानदार दिखाने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास करने होते हैं। अगर आप अपने कर्ली हेयर पर इतराते हैं तो निश्चित रूप से आप इसकी देखभाल के तरीके जानना चाहेंगे। आप यह जान लीजिए के कर्ली हेयर का रखरखाव सीधे बालों जितना आसान नहीं है। हालांकि ऐसे कई टिप्स हैं जिसे अपना कर आप न सिर्फ कर्ली हेयर का अच्छे से रखरखाव कर सकते हैं बल्कि इसे और बेहतर भी बना सकते हैं। तो आइए जानते हैं कुछ टिप्स जिनकी सहायता से आप अपने कर्ली हेयर को एक नयी स्टाइल प्रदान कर सकते हैं।
तेल लगानाः- कर्ली हेयर को ज्यादा तेल लगाने की जरूरत होती है, क्योंकि सीधे बालों की तुलना में इसमें रूखापन ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए है कि बाल मुड़े होने से स्किन आयल बालों के सिरे तक नहीं पहुंचता है। रूखा बाल ज्यादा कमजोर होता है और ज्यादा टूटता है। आप जैतून का तेल, नारियल का तेल, बादाम का तेल और दूसरे नेचुरल हेयर आयल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हेयर पैकः- कर्ली हेयर की देखभाल में कई तरह के हेयर पैक भी आपकी मदद कर सकते हैं। मेयोनेज, अंडा, दूध, दही, शहद और नींबू कुछ ऐसे हेयर पैक हैं जो असरदार होने के साथ साथ प्राकृतिक भी हैं।
शैंपू करनाः- बालों में शैंपू करें, क्योंकि बाल में कई सारे ट्विस्ट और टर्न होने से बालों के छल्ले में गंदगी की संभावना काफी बढ़ जाती है। इससे बाल भद्दे भी नजर आने लगते हैं। आपने बालों को साफ करने के लिए आप नेचुरल मेथड भी अपना सकते हैं।
कंडीशनिंगः- कर्ली हेयर की देखभाल में कंडीशनिंग बेहद जरूरी है। आप चाहें तो कंडीशनर बाजार से खरीद सकते हैं या फिर इसे घर पर बना सकते हैं। शहद, अंडा, सेब, सिरका और चाय कुछ बेहतरीन प्राकृतिक कंडीशनर हैं।
कंघी करनाः- कर्ली बालों के लिए कंघी का चुनाव करते समय सावधानी बरतें। चौड़े दांत वाली कंघी का चुनाव करें क्योंकि यह आपके बालों के छल्ले में फंसेगी नहीं। पतले दांत वाली कंघी कर्ली हेयर पर आसानी से नहीं चलेगी। साथ ही इससे बालों को नुकसान भी पहुंचेगा।

फैशन बड़ा ही कोमल अहसास है जिसे शब्दों में बांधना मुश्किल है। आज इसका स्वरूप इतना लुभावना, आकर्षक और मनोहर हो गया है कि बच्चे, किशोर, युवा और बूढ़े तक इससे अछूते नहीं हैं। आज के समय में कम कपड़ों के फैशन का ही बोलबाला है। शरीर पर जितने ही कम कपड़े होते हैं, वह उतना ही फैशनेबल कहलाता है। फैशन की परिधि में महिलाओं के अंतर्वस्त्र भी आ चुके हैं। कल तक जिन अंतर्वस्त्रों को आरामदेह मानकर पहला जाता था, वे ही वस्त्र आज फैशन के रूप में इस्तेमाल होने लगे है। एक समय ऐसा था जब महिलाएं दुकानों पर जाकर चोरी छिपे अंतर्वस्त्रों पैंटी, ब्रा आदि को खरीदा करती थीं किन्तु आज उन्हीं वस्तुओं को खरीदने में किसी भी प्रकार की लज्जा महसूस नहीं होती। हो भी क्यों? जब पुरूष बनियान (गंजी), अन्डरवीयर खरीदते हैं, तो क्या वे लज्जा का अनुभव करते हैं? अंतर्वस्त्रों को अंग्रेजी में ‘लिंगरीज’ के नाम से पुकारा जाता है। महिलाओं के रूझान को देखते हुए विदेशों में स्थित अनेक कंपनियों ने अंतर्वस्त्रों के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। वेनिटी फेयर, कैलिंडा, लवेबुल, जॉकी आदि अनेक विदेशी कंपनियों ने लिंगरीज के निर्माण में ख्याति को प्राप्त किया है। अपने देश में भी अनेक कंपनियों ने अंतर्वस्त्रों के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है किंतु विदेशी तकनीक एंव सुविधायुक्त वस्त्रों के निर्माण के आगे फिलहाल उपभोक्ताओं का दिल अपनी कंपनियां नहीं जीत पा रही है। लिंगरीज में महिला अंतर्वस्त्रों के अलावा रात्रिकालीन पोशाकें भी शामिल है। मुख्य रूप से लिंगरीज परिधानों में नाइटवीयर, कॉरसेट, पैंटी, ब्रा, कैमीसोल आदि शामिल है। ये अनेक स्टाइलों में नर्म, गुदगुदे तथा आरामदेह होते हैं। इसी कारण महिलाओं का झुकाव नित्यप्रति इस ओर होता जा रहा हैं। सर्वेक्षण के अनुसार इन अंतर्वस्त्रों का प्रयोग न सिर्फ कम उम्र की लड़कियां ही करती हैं बल्कि ज्यादा उम्र की महिलाएं भी इनका उपयोग धडल्ले से करने लगी हैं। अधिकांश महिलाये अपने अंतर्वस्त्रों को शोख पीले रंग, चमकीला ब्लू, रायल पर्पल, मैरून आदि रंगों में देखना पसंद करती हैं। सफेद एंव काले रंगों में अंतर्वस्त्रों को प्रायः पसंद नहीं किया जाता। ‘ब्रा’ की बाजार में कई किस्में हैं जिनमें ‘फुल बस्टेड’ प्रमुख है। यह आगे की ओर से खुल जाती है। स्तनों के ऊपर वाला स्टिच पिन से जुड़ा रहता है जिसे खोल देने पर पूरा स्तन बाहर निकल आता है। इस खोल का अंदरूनी भाग मुलायम तथा स्पंजयुक्त होता है, जिसका स्पर्श एक आनंददायक एहसास को प्रदान करता रहता है। डेमी ब्रा लो कट स्टाइल में आती है। इसे बहुत ही मोहक एंव आकर्षक डिजाइनों में तैयार किया जाता है। सीमलेस ब्रा स्मूथ एहसास दिलाता है। इसी प्रकार कन्टूर ब्रा में फाइबर या फोम का गोलाकर पैड जुड़ा होता है जो स्तनों के आकर को आकर्षक बना डालते हैं। पैड का प्रयोग नर्म एहसास दिलाने और फिगर शेप के लिए किया जाता है। इसे पैडेड ब्रा भी कहा जाता है। स्ट्रेपलेस ब्रा की पट्टियों को इच्छानुसार जोड़ा या हटाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल ऑफ शोल्डर टॉप या अन्य इसी किस्म की पोशाकों के साथ भी किया जा सकता है। कन्वर्टिबुल ब्रा का इस्तेमाल भी स्ट्रेपलेस की तरह ही किया जा सकता है। इसके बस्टियर को जोड़ा या हटाया जा सकता है। इसे ‘वन पीस’ ब्रा की तरह आसानी से प्रयोग में लाया जा सकता है। कन्वर्टिबुल ब्रा का आकार अंग्रजी के लेटर ‘एक्स’ की तरह होता है। इसमें स्ट्रेप्स को भी लगाया या हटाया जा सकता है। पुश-अप ब्रा में पूर्णता के लिए किनारों पर पैड का इस्तेमाल किया जाता है। ये सभी ब्रा विभिन्न डिजाइनों एंव भिन्न-भिन्न लंबाईयों में उपलब्ध होती है। ब्रिटेन की मार्क्स एंड स्पेसर कंपनी के अंतर्वस्त्रों को भारतीय महिलाएं अधिक पसंद कर रही है। दूध पिलाने वाली माताओं के लिए नर्सिंग ब्रा नामक एक स्पेशल ब्रा भी भारतीय बाजार में मौजूद है। इसकी विशेषता यह है कि इसे बिना उतारे ही स्तनपान कराया जा सकता है। स्तनों में अतिरिक्त निकलने वाले दूध को भी इस ब्रा में सोख लेने की विशेष सुविधा है। बाजार में अनेक रंगों एवं डिजाइनों की पैंटी भी मौजूद है। हाईकट पैंटी में पैरों के किनारों पर एक गहरा कट और पूरा बैक कवरेज पाया जाता है। बाय लेग ब्रीफ हिप्स को आराम होने के ख्याल से तैयार किया गया है। इसका आगे वाला भाग राउण्ड चैन से युक्त होता है। इसे बिना उतारे पेशाब किया जा सकता है। टोंग नामक पैंटी में गहरा कट होता है। इसके पीछे वाले भाग में आधा या एक इंच की स्ट्रिप होती है। बिकिनी पैंटी में बेस्ट बैंड नाभि के नीचे होता है। इसमें पैरों के पास एक गहरा कट पाया जाता हैं बैक कवरेज बिकिनी के स्टाइल पर निर्भर करता है। इसे मुलायम तथा चमकीले फेब्रिक से तैयार किया जाता है। ‘नेग्लैस पैंटी’ को जापान की एक विख्यात कंपनी ने विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए तैयार किया है जो श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) अथवा कामशीतलता के बीमारियों से ग्रसित होती है। आराम दायक पैड के साथ ही औषधियों से उक्त बीमारियां छह माह के अंतराल में ही समाप्त हो जाती हैं। आज की महिलाएं अपने अंतर्वस्त्रों के प्रति जागरूक हो चुकी है। तथा अपनी सुविधा के अनुसार इन्हें खरीदने लगी है।

एक कहावत है कि संसार में उसी वस्तु की नकल होती है जिसकी माँग अधिक होती है। प्राचीन समय में ज्योतिष केवल आवश्यकता थी परंतु आज के दौर में आवश्यकता के साथ-साथ ज्योतिष एक फैशन भी बन गया है। जयोतिष का अर्थ है ”ज्योति दिखलाना“। मनुष्य के जीवन में लाभ-हानि, अनुकूलता-प्रतिकूलता, शुभता-अशुभता या अच्छा-बुरा कब-कब होगा इसको ज्योतिष के माध्यम से ही जाना जा सकता है।
वास्तव में ज्योतिष का अर्थ है व्यक्ति को जागरूक करना परंतु समाज में कुछ पोंगा पंडितों द्वारा गलत प्रयोग करने अर्थात् लोगों को सही जानकारी देने की बजाय उनको भयभीत कर धन कमाने के कारण कई बार इस विद्या की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है। इस लेख के माध्यम से ज्योतिष शास्त्र के उन तथ्यों के बारे में जानकारी दी जाएगी। जिनसे आमजन अक्सर भयभीत रहते है। तथा उपायों के नाम पर कुछ ज्योतिषी किस प्रकार आम लोगों को ठगते है, इस बात का भी उल्लेख किया जाएगा।
मांगलिक दोष
जन्मकुंडली के 1, 4, 7, 8, एवं 12वें भाव में मंगल के होने से जातक/जातिका मांगलिक कहलाते है। विवाह के समय कुंडली मिलान में मांगलिक दोष देखा जाता है। मंगल पानी ग्रह है या सदैव हानि करता है। ऐसी धारणा अल्पज्ञानी ज्योतिषियों की हुआ करती है। सत्य यह है कि मंगल पानी ग्रह न होकर क्रूर स्वभाव वाला ग्रह है। राजनैतिक गुणों से दूर मंगल सरल स्वभाव वाला ग्रह है। परंतु यदि कोई मंगल प्रभावित व्यक्ति से छेड़छाड़ करता है तो मंगल उसे नीति की बजाय हिंसा से सबक सिखाता है। जिसके स्वभाव में सरलता हो, निष्कपटता हो, कर्तव्यपरायणता हो व दृढ़ता हो, ऐसे सद्गुणों से भरपूर मंगल ग्रह को यदि कोई अज्ञानी पानी ग्रह कहता है तो उसकी बुद्धि प्रश्नचिन्ह लगने योग्य है।
कालसर्प योगः
आजकल चारो तरफ कालसर्प योग की बहुत ही चर्चा है। यदि आपका समय कुछ अच्छा नहीं चल रहा है और ऐसे में यदि आप किसी ज्योतिषी से संपर्क करते हैं तो अधिकतर ज्योतिषी किसी न किसी तरह से आपको कालसर्प योग से पीडि़त बताते हैं। सबसे पहले आपको यह जानकारी दी जाती है कि कालसर्प योग होता क्या है। किसी भी कुंडली में यदि सूर्य से लेकर शनि ग्रह तक सातों ग्रह राहु व केतु की एक दिशा में आ जाते हैं तो जन्मकुंडली कालसर्प योग से पीडि़त हो जाती है।
सबसे पहले हम ये जानेंगे कि कालसर्प योग की उत्पत्ति का प्रमाण किन ग्रंथों में मिलता है। ज्योतिष की उत्पत्ति वेदों से हुई है तथा वेदों का अंग भी माना जाता है, किसी भी वेद, संहिता एवं पुराणों में कालसर्प नामक योग का उल्लेख नहीं मिलता, यहाँ तक की भृगुसंहिता, पराशर एवं रावण संहिता आदि मुख्य ग्रंथों में भी इस योग की चर्चा तक नहीं है। अब जो महत्त्वपूर्ण प्रश्न सामने आते हैं वो यह है कि जब योग का विवरण किसी भी प्रमाणिक ग्रंथ में नहीं मिलता तो फिर यह कहाँ से और कब प्रकट हुआ। खोज करने पर यह मालूम पड़ा कि 80 के दशक में इस योग का आर्विभाव दक्षिण भारत की ओर से हुआ।
हम भारतीय ज्योतिष की बात करें तो राहु-केतु को छाया ग्रह माना गया है इनका अपना कोई आस्तित्व नहीं है। राहु अकेला होने पर मंगल ग्रह का प्रभाव रखते है। इस तर्क से ही कालसर्प योग अप्रमाणिक सिद्ध हो जाता है। यदि हम एक अन्य उदाहरण लें तो उसके अनुसार राहु-केतु के मध्य अन्य सभी ग्रहों के होने पर यह योग बनता है तो यदि किसी ग्रह की राहु या केतु पर दृष्टि पड़ रही हो तो भी कालसर्प योग खंडित हो जाता है क्योंकि दानों छाया ग्रह होने से इन दोनों पर जिस भी ग्रह की दृष्टि पड़ती है उसी ग्रह के अनुसार फल देने के लिए बाध्य है। अब हम दूसरी तरह से विचार करते हैं कि मान लो राहु-केतु नामक छाया ग्रह अपने प्रभाव से अन्य सात ग्रहों को बांध देते हैं तो क्या सूर्य का सभी ग्रहों का राजा कहलाया जाना बेकार है। बृहस्पति का देवगुरू होना प्रभावहीन है तथा शनि जिसे कलयुग में सबसे प्रभावशाली कारक माना जाता है क्या उनका प्रभावशाली होना मिथ्या है।

हम अपने शरीर, त्वचा, बालों का कितना ख्याल रखतें हैं। मार्किट से सुंदरता की कितनी चीजें खरीदते हैं, पर हमें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे नाखून भी हमारे व्यक्तित्व को सवांरने में अहम् भूमिका निभाते हैं। आइये जानते है कि इनकी सुंदरता को कैसे बढ़ाएंः-
अपने नाखूनों को फैशनेबल तथा फंकी बनाने के लिए साॅलिड रंग लगाएं, इससे नाखून मजबूत होते हैं। टूथपिक से नाखून के अंदर किसी और रंग से डायगनोल रेखा बना लें।
क्लब या रात की पार्टियों पर तक मेटालिक ग्लीट और नाखून पियर्स करके, नाखून टेटू का प्रयोग कर सकती है। अगर आपके नाखून ज्यादा बड़े नहीं है तो, आप नकली नाखून लगा सकती हैं।