अपना व्यक्तित्व सुंदर कैसे बनायें

 

1.तारीफ योग्य वस्तु की तारिफ अवश्य करें।
2. हमेशा सावधानी से तैयार हों, तैयार होते समय छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना चाहिए।
3. मानसिक तनाव से दूर रहें हमेशा दूसरो के सामने अपनी फिक्र या रोना न रोंए।
4. हमेशा दूसरों के गुणों को देखना चाहिए, अवगुणों को नहीं।
5. हमेशा मुस्काते रहना चाहिए।
6. अपनी भावनाओं पर संतुलन रखें।
7. जहां तक हो सके दूसरों की मदद करें।
8. हमेंशा ज्ञान बढ़ाते रहों।
9. बात करते समय अपनी आवाज पर संतुलन रखें।
10. बात करते समय ज्यादा हाथ नहीं हिलाना चाहिए।
शिष्टाचार
1. चलते समय अपनी चाल ढाल पर ध्यान देना चाहिए।
2. चलते समय कन्धे सीधे चेस्ट बाहर और पेट अन्दर होना चाहिए।
3. कैम्पा या चाय पीते समय आखिरी घूंट अवश्य छोड़ें।
4. गिरी हुई वस्तु को बैठकर उठाएं झुक कर नहीं।

स्वास्थ्य का रहस्य

राजा चंद्रगुप्त तीर्थाटन के लिए काशी जा रहे थे। उनके साथ उनके सेनापति, मंत्री और राजदरबार के अन्य लोग भी थे। रात होने पर एक जगह पड़ाव डाला गया। चंद्रगुप्त ने किसी भी नगर के भव्य प्रासाद या भवन में ठहरने की अपेक्षा वन में रूकना उचित समझा। वह आम के पेड़ों से भरे एक जंगल में ठहरे। भोजन विश्राम आदि की व्यवस्था की गई। बीच में कुछ नृत्य आदि के कार्यक्रम भी वैद्यों के उपचार ने उन्हें स्वस्थ तो कर दिया पर वह चिंता में डूब गए। वह विचार करने लगे कि आखिर वन और उसके आस पास रहने वाले आश्रमवासी और गाँव के लोग किस तरह रहते होंगे। उनके उपचार के लिए उन्होनें एक वैद्य को उस क्षेत्र के स्थायी रूप से नियुक्त कर दिया। वैद्य के काफी समय रहने के बाद भी जब कोई वनवासी, ग्रामवासी या गुरूकुल में रहने वाले शिष्य अथवा आचार्य अपनी चिकित्सा के लिए नहीं आये तो उकताकर एक दिन वैद्य ने एक आचार्य से कहा, लगता है मै यहां व्यर्थ ही रह रहा हूँ। यहां के लोग अस्वस्थ नहीं होते अथवा मेरे पास उपचार करवाने में संकोच करते है। आचार्य ने वैद्य के की शंका का निवरण करते हुए कहा, भविष्य में भी शायद ही कोई आपके पास चिकित्सा के लिए आए क्योंकि यहां का प्रत्येक निवासी श्रम करता है। उसे जब तक भूख परेशान नहीं करती, भोजन नहीं करता। सब यहां अल्पभोजी है। जब कुछ भुख शेष रह जाती है तभी खाना बंद कर देते है। भूख से कम भोजन और नीति नियमों से अर्जित धन से जुटाया हुआ आहार हो। स्वस्थ रहने के लिए परिश्रम करना और पसीना बहाना ही काफी नहीं है बल्कि पवित्र मन भी आवश्यक है। अपवित्र मन वाला व्यक्ति कभी स्वस्थ नहीं रह सकता। वैद्यराज के वनवासियों के स्वास्थ्य का रहस्य समझ में आ गया।

ट्रांग व्यक्तित्व की महिला से पुरुष ज्यादा आकर्षित

ब्रेकअप से जल्द उबर जाते हैं पुरुष

दिल टूटने पर महिलाएं ज्यादा गहरे से उस पीड़ा को महसूस करती हैं। पुरुष रिश्ते से अलग होते हैं लेकिन वे जल्द इससे उबर नहीं पाते हैं। शारीरिक तौर से नहीं लेकिन भावनात्मक तरीकों से पुरुषों को इस टूटन से बाहर आने में लंबा वक्त लगता है। उन्हें भी महिलाओं के समान ही इमोशनल तकलीफों से गुजरना होता है। हालांकि ऊपरी तौर से वे सख्त नजर आते हैं और सार्वजनिक रूप से अपने दर्द का इजहार नहीं होने देते। इसलिए उनके लिए समझ लिया जाता है िकवे ब्रेकअप से उबर चुके हैं। यदि सीरियस रिलेशनशिप से ब्रेकअप हो तो ये दर्द उम्र भर के लिए रह सकता है।

मर्द रोते नहीं

बात आंसू बहाने की हो तो जेंडर डिफरेंस आ ही जाता है। इस पर भी कई शोध हुए हैं जो ये बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा आंसू बहाती हैं। लेकिन कोई इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि पुरुष रोते नहीं हैं। आमतौर पर एक महिला एक महीने में औसतन 5.3 बार रोती है जबकि पुरुष 1.3 बार रोते हैं। इसमें जार-जार रोने के अलावा सुबकना और चुपचाप आंसू बहाना और आंखें नम हो जाना शामिल हैं। फिल्म के दौरान या जिंदगी में किन्हीं विशेष परिस्थितियों में पुरुष रोते हैं। हालांकि उनकी कोशिश होती है कि उनके आंसू न निकलें।
पीछा करने की फितरत है उनकी-

प्रेम करना और प्रेम में पीछा करना पुरुषों को रोमांचित करता है। पुरुषों को पीछा करना अच्छा लगता है लेकिन आज पीछा करना पुराना आइडिया नजर आता है और पुरुष व महिला दोनों ही इससे वाकिफ हैं कि वे क्या चाहते हैं इसलिए इससे डरने की बजाय पीछा करने को एंजाॅय किया जाना चाहिए।

सिर्फ एक ही सोच

एक और धारणा प्रचलित है उनके बारे में सैक्स से संबंधित। लेकिन ये पूरी तरह सही नहीं है। सारे पुरुष ऐसे नहीं होते। सेक्स के बारे में महिलाओं और पुरुषों की रुचि अलग-अलग होती है। कुछ पुरुष इसमें जरा भी रुचि नहीं रखते तो कुछ की बेहद ज्यादा रुचि होती है। यह डिपेंड करता है कि आप जिंदगी के किस दौर में हैं।
पुरुष गाॅसिप नहीं करते

पुरुषों के बारे मंे ये बात हमेशा चर्चित रही है कि 33 फीसदी पुरुष रोजाना गाॅसिप जैसी गतिविधियों का हिस्सा बनते हैं जबकि महिलाओं में ये केवल 26 प्रतिशत ही है। हां ये बिल्कुल सही है कि महिलाओं के मुकाबले पुरुष ज्यादा बतौले होते हैं और बहुत ज्यादा गाॅसिप करते हैं।
स्ट्राॅन्ग महिलाओं से ज्यादा अट्रैक्ट होते हैं पुरुष

पुरुष महिलाओं को भयभीत करके रखते हैं। जबकि शोध के अनुसार पुरुष स्ट्राॅन्ग महिलाओं की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। मजबूत व्यक्तित्व वाली महिलाओं की मौजूदगी में वे नर्वस महसूस करते हैं। आज महिलाएं बहुत मजबूत मानसिकता वाली हैं और अगर उन्हें हैंडल करने में आपको परेशानी आती है तो ये आपकी अपनी समस्या है। स्ट्रांग वूमन्स को डील करना मुश्किल होता है लेकिन साथ ही वे बहुत सैक्सी भी होती हैं।

विवाह से पहले लड़कियां क्या जानना चाहती हैं

आप मानें या न मानें हमने देखा है कि स्त्री के शरीर की गंध पति को बर्दाश्त नहीं हुई और आगे चलकर तलाक हो गया। शारीरिक गंध मन में प्यार लाती है। इसलिए हम हमेशा स्त्री को यही कहते हैं कि फूलों की खुशबू वाला इत्र हमेशा व्यवहार करें। बदन से आने वाली खुशनुमा महक दिल को जीत लेती है। रात में सोने से पहले स्नान करना अच्छा रहता है। खूश्बूदार साबुन का भी प्रयोग करें। बालों से भी दुर्गंध न आने दें।
विवाह के पहले घबराना स्वाभाविक है। मां-बाप बेटी का विवाह तो तय कर देते है पर शादी को कैसे निभाना है यह जानकारी नहीं देते।
यह बात स्वभाविक है क्योंकि यौन-विषय पर चर्चा करना साधारण बात नहीं हैं। कुछ उपयोगी बातों का हम जिक्र कर रहे हैः-
क्या मेरे वह मुझे पसंद करेंगेः- अवश्य आपके अंदर आत्मविश्वास होना चाहिए और होनी चाहिए आत्मसमर्पण की भावना। आप पति को पास आने से न रोकें और न ही पास जाने से कतराएं। पति जैसे ही आपके शरीर को छुएगा, उसके शरीर में अपने आप तड़प महसूस होगी। इस तड़प को ही यौन भावना कहते हैं। उसके मन में आपके प्रति प्यार उमड़ पड़ेगा और वह आपकी ओर आकर्षित हो जाएगा।
क्या वह मुझे मन से प्यार करेंगेः- मन में प्यार की भावना में शरीर की सुगंध या दुर्गंध बहुत महत्त्व रखते हैं। आप मानें या न मानें हमने देखा है कि स्त्री के शरीर की गंध पति को बर्दाश्त नहीं हुई और आगे चलकर तलाक हो गया। शारीरिक गंध मन में प्यार लाती है। इसलिए हम हमेशा स्त्री को यही कहते हैं कि फूलों की खुशबू वाला इत्र हमेशा व्यवहार करें। बदन से आने वाली खुशनुमा महक दिल को जीत लेती है। रात में सोने से पहले स्नान करना अच्छा रहता है। खूश्बूदार साबुन का भी प्रयोग करें। बालों से भी दुर्गंध न आने दें।
पहली रात में मुझे क्या करना चाहिएः- शरीर की महक पर ध्यान रखें। उत्तेजक नाइटी पहनें। पति से खुलकर बात चीत करें। उन्हें अपने बारे में बताएं और उनके विचारों को जानें। इसके बाद ही चुंबन आदि की पहल करें। बिना वार्तालाप के सहवास न करें। पहली रात एक तरीके से परिचय की रात होती है। उनको सही तरीके से समझने का प्रयत्न करें। जब पति-पत्नी एक दूसरे को समझ कर सहवास करतें हैं तो संबंध मधुर बनते हैं।
अगर पहली रात में मेरा मासिक धर्म हो तोः- यह बात उन्हें बताएं मासिक काल में भी मासिक काल संभव है। असल में लड़कियों को यह अटपटा सा लगता है। अधिकतर लोग ऐसी दशा में भी सहवास करते हैं और आनंदित होते हैं। वहीं करें जो आप दोनों का मन हो।
क्या मै उन्हें संतुष्ट कर पाउंगीः- सब लड़कियां सोचती है कि पति को हर वक्त सहवास की जरूरत है और उनकी इच्छा कभी मिटती नहीं है। ऐसी बात नहीं है लड़को की इच्छा कभी ज्यादा कभी कम रहती है। हर वक्त एक समान काम वासना नहीं रहती। वीर्यपान के बाद आदमी अपने आप संतुष्ट हो जाता है।
अगर मुझे कष्ट हो तोः- सहवास के समय यदि किसी प्रकार का आपको कष्ट हो तो तुरंत उन्हें बताएं। अगर आप उन्हें नहीं बताएंगी तो उन्हे लगेगा कि सब ठीक है। सहवास के समय क्या आपको अच्छा लग रहा है क्या नहीं इसकी जानकारी उन्हें जरूर दें। इससे आपके संबंधों में निखार आता है।
क्या मुझे पूरा सुख प्राप्त होगाः- पूर्ण तृप्ति प्रथम सहवास से नहीं मिलती। मन में अच्छा बहुत लगता है। पति के सहवास करने की तकनीक पर भी निर्भर होता है। सहवास करते-करते पूर्ण संतुष्टि प्राप्त होती है। कई महिलाओं को यह सुख नहीं भी मिल पाता। यह सुख प्राप्त करने की क्षमता आपमें है या नहीं, यह तो बाद में ही पता चलेगा।

बढ़ रही हैं छेड़छाड़ की घटनाएं

अभी कुछ समय पहले ही एक बाहरवीं कक्षा की छात्रा पर कुछ मनचलों ने उस समय ज्वलनशील पदार्थ फेंक दिया जब उसने छेड़छाड़ करने का उन्हें हंस-मुस्कुरा कर कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया था। यह घटना उस सम घटी थी जब छात्रा अपने घर से चलकर स्कूल के निकट पहुंची ही थी।
रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर कार्यरत एक सेल्सगर्ल शाम के समय अपना काम समाप्त करके घर वापस लौट रही थी तो अचानक कुछ मनचलों ने उसे गली में घेर लिया और पकड़ कर उसका शीलभंग करने का प्रयास करने लगे। युवती के प्रबल विरोध करने और सहायतार्थ चिल्लाने पर गुंडों ने उसका ब्लाउज फाड़ दिया और उसे शारीरिक कष्ट पहुंचाया। भीड़ इकट्ठी हो जाने पर अपराधी तत्व बड़े आराम से सबके सामने सुरक्षित निकल कर भाग गये। छेड़छाड़ की घटनाएं किसी विशेष् नगर की बात नहीं है। आजकल तो हर नगर में ही छेड़छाड़, अश्लील और भद्दी हरकतें करने का प्रचलन इतना बढ़ रहा है कि दिनोंदिन महिलाएं घर से बाहर अपने आप को असूरक्षित महसूस कर रही है। आश्चर्य की बात तो यह है कि छेड़छाड़ की हरकतों में युवक ही नहीं अच्छी खासी उम्र वाले और बूढ़े तक शामिल है। इनकी हालत यह है कि ये आंख मिचैली खेलने और हाथ घुमाने तक की हरकतों में शामिल है परंतु बुजुर्ग होने के कारण कोई कुछ कह नहीं पाता और मामला शांत हो जाता है। शहर के चैराहों और व्यस्त बाजारों और कन्या पाठशालाओं की ओर जाने वाले रास्तों पर युवतियों छात्राओं की काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मेलों ठेलों की भीड़भाड़ में तो ये मनचले निंबों पर चुटकी काटने और उरोजों को दबाने से भी बाज नहीं आते आते। कुछ महिलाएं तो शर्म के मारे सब कुछ सहन कर लेती है। अभी थोड़ी ही समय में स्कूल काॅलेज आती जाती छात्राओं के साथ तो छेड़छाड़ की घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। मनचले निडर होकर खुलेआम छात्राओं पर न केवल फब्तियां कसते हैं बल्कि उनके अंगों को छूने और प्रेम पत्र देने की सीमा तक बढ़ रहे है।

  • 4-6 के समूह में आती हुई छात्राएं तो इनकी हरकतों से बच निकलती हैं लेकिन अकेली छात्रा को तो इनका दुव्र्यवहार झेलना ही पड़ता है। हमें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि आखिर वे कौन से ऐसे कारण है कि आज का युवा वर्ग चरित्रिक पतन की ओर इतना फिसल रहा है।
    गहराई से सोचने पर लगता है कि निम्नलिखित बातें ऐसी हैं जो युवाओं को चरित्रिक पतन की ओर धकेलने में सहायक सिद्ध हो रही है।
    हमारी वर्तमान शिक्षा पद्धति ऐसी है जिसमें अब स्कूलों के नाम पर कुछ रह ही नहीं गया। महंगे पब्लिक स्कूलों की भरमार है जहां सभी कुछ पाश्चात्य ढंग से सिखाया पढ़ाया जाता है। अपनी सभ्यता और संस्कृति पर पाश्चात्य रंग चढ़ता जा रहा है। समय की मांग को देखकर मां-बाप ऐसे स्कूलों ही में अपने बच्चों को दाखिला दिलाकर गौरव महसूस करते है। प्रगतिशीलता के नाम पर नशा और फ्री सेक्स का बोलबाला है।
  • पुलिस व्यवस्था चैाकस न होने के कारण ऐसे युवकों पुरूषों के हौंसले बुलंद है।
    पिछले कुछ वर्षों से विज्ञापनों, फिल्मों तथा टेलीविजन के कार्यक्रम और पत्र पत्रिकाओं इत्यादि में नारी के नंगेपन और अश्लील चित्रों की भरतार है। इस कुप्रवृति के कारण समाज में चरित्रहीनता और वहशीपन बढ़ता जा रहा है। किशोर और युवक शिक्षा की ओर से विमुख होकर कुकृत्यों मंे अधिक से अधिक रूचि ले रहे है। सेक्स और मादक द्रव्यों का उपयोग किशोरों के लिए एक फैशन सा बन रहा है। कमी कंप्यूटर ने पूरी कर दी है। मीडिया भी गलत हरकतों को इतना उछालता है कि बार बार उन दृश्यों को देखकर युवक गलत ही सीखते है।
  • फैशन इतना बढ़ रहा है कि शरीर का अधिक से अधिक भाग प्रदर्शित करने की होड़ सी लगी हुई है। फिल्मी अभिनेत्रियों का अंग प्रदर्शन के विषय में यह कथन कि जब भगवान ने उन्हें सुंदर सुडौल शरीर रूपी सौगात दी है तो उसका प्रदर्शन करने में क्या बुराई है। किशोरियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
  • लड़कियों के जींस या निकर में कसे हुए नितंब और शर्ट के सामने से खेले हुए बटन क्या युवाओं की यौन भावनाओं को भड़काने का काम नहीं करते? फैशन टीवी पर माॅडलों के नंगे शरीर देखकर क्या युवाओं में वासना जागृत नहीं होती। कहने का अर्थ है कि बढ़ता हुआ नंगापन किशोरों और युवाओं के मन मस्तिष्क को दूषित कर रहा है। जिसके कारण वे काम आवेग में आकर छेड़छाड़ और बलात्कार जैसे घटनाओं को जन्म देते है।
  • युवक युवतियों में चरित्र निर्माण के साहित्य में रूचि बिल्कुल भी नहीं है। पाश्चात्य मीडिया उसके मानस पटल पर पूरी तरह छाता जा रहा है। लड़के हों या लड़कियां आजकल अधिकतर की शर्टोें पर अजीबो-गरीब सेक्सी शब्द या वाक्य रहते है। ”मैं बुरा हूं“ माइकल जेक्सन के ये शब्द जाने किस आदर्श का प्रचार प्रसार कर रहे है?
  • खाली दिमाग भी शैतान का घर होता है। युवाओं के लिए आज जीवन को सही ढंग से जीना बड़ा मुश्किल हो रहा है। कड़ी स्पर्धा और बढ़ती हुई बेरोजगारी व निठल्लापन और उद्देश्यहीन जीवन भी बहुत हद तक युवाओं के मन मस्तिष्क को विकृत कर रहा है।
  • शिकागो के सर्वधर्म सम्मेलन में अपना भाषण आरंभ करने से पहले स्वामी विवेकानंद ने वहां के जनसमूह को बहनो और भाइयों कहकर संबोधित किया था। उनके इन शब्दों में अपनत्व, प्यार और विश्वबंधुत्व की भावना थी। लेडीज एंड जेंटलमेन के स्थान पर भाई और बहन का संबोधन सुनकर वहां के स्त्री पुरूष गदगद हो गए और देर तक तालियां बजाकर उनका स्वागत किया था
    काश हम आज भी अपनी सभ्यता और संस्कृति दूसरों में बांट पाते लेकिन अफसोस हम खुद ही भटक गए है।