अब होंगे नख आकर्षक

हम अपने आप को सुंदर एंव आकर्षक दिखाने के लिए बहुत कुछ करते हैं, मसलन बढ़िया वस्त्र पहनते हैं, मेकअप करते हैं और न जाने क्या-क्या। मगर क्या आप ने नाखूनों की खूबसूरती को जाहिर करने के महत्व पर ध्यान दिया है। यदि नही तो लीजिये शहनाज हुसैन बता रही हैं नाखूनों को आकर्षक बनाने के कुछ उपयोगी नुस्खे।
यदि आप की अंगुलियां लंबी और खूबसूरत हैं मगर नाखून लापरवाही से कटे या गंदे हैं तो यह आप के व्यक्तित्व एंव आकर्षक पर असर डाल सकते हैं। इस से भी जरूरी बात यह है कि नाखूनों पर ध्यान दे कर आप अपने आंतरिक स्वस्थ्य को जान सकते हैं। गुलाबी नाखून अच्छी सेहत की ओर इशारा करते हैं जबकि नीली आभा वाले नाखून अस्वस्थ रक्त संचार को दर्शाते है। खान-पान की कमियों के कारण भी नाखूनों में दराद, रूखापन और अन्य समस्यायें आती है। आप निम्नलिखित बातों को ध्यान में रख कर अपने नाखूनों और सेहत का ख्याल रख सकते हैं।
नाखूनों की सबसे पहली आवश्यकता है उनका मुलायम और किसी प्रकार के उभार अथवा रेखाओं से मुक्त होना। यह तभी संभव है जब आप उन की नियमित देखभाल करें। सबसे पहले, प्रतिदिन हाथों और नाखूनों पर मसाज क्रीम लगा कर नाखून के आस-पास की त्वचा को नरम एंव मुलायम रखें। शुष्क दिनों में मसाज का महत्व और भी बढ़ जाता है या फिर घर के बहुत से कामों के दौरान डिरजेंट इसकी प्रयोग करने के कारण भी इसकी आवश्यकता बढ़ जाती है। ध्यान रखें की नाखूनों के आस-पास की त्वचा को कभी न काटे, उन्हें नरम बनाने के लिए गुनगुने पानी में डुबोकर अच्छी तरह मसाज करें। इसके बाद त्वचा को काॅटन बड्स से पीछे की ओर धकेले। कभी भी नाखूनों को साफ करने के लिए नूकीले उपकरण का इस्तेमाल न करें। नाखूनों को अच्छी अवस्था में रखने के लिए साप्ताहिक मेनिक्योर का सहारा ले। हाथों की देखभाल के लिए एक कटोरी और गुनगुना पानी, एमरी बोर्ड, आरेंज स्टिक, नेल क्लिपर्स, रूई के बड्स, नेल वार्निश रिमूवर, नेल वार्निश और एक मसाज क्रीम।
सबसे पहले पुरानी नेलपाॅलिश को रूई और रिमूवर से हटाएं। बहुत अधिक रिमूवर न लगाएं। उससे नाखून शुष्क हो सकते है। यदि आप काटना चाहते है। तो नेल क्लिपर्स का इस्तेमाल करें। इसके बाद कटोरे में गुनगुना पानी डालकर उसमें 5 मिनट के लिए हाथ डुबोएं। पानी में आप शैम्पूूू की कुछ बुंदे या साबून रहित बाथ जैल डाल सकते है। इसके बाद नाखूनों की सफाई के लिए नरम ब्रश का इस्तेमाल करें। अब रूई को आॅरेज स्टिक पर लपेटकर नाखून की त्वचा को हल्के से पीछे की तरफ धकेले। यदि त्वचा पीछे की ओर नहीं खिसकती है तो थोड़ी क्रीम लगाकर त्वचा को पीछे की ओर धकेलने का प्रयास करें। नाखूनों को नीचे की ओर साफ करने के लिए किसी पतली डंडी पर रूई लपेटे या रूई के बड्स का इस्तेमाल करें। फिर हाथों को क्लिन से मालिश कर मुलायमम बनाएं और उसके बाद गीले तोलियं से अतिरिक्त क्रीम को पोछ दे।
अब नाखून पर नीचे से ऊपर की ओर लंबे स्ट्रोक से नेल वार्निश लगाएं। प्रत्येक नाखून के लिए तीन स्ट्रोक काफी है। प्रत्येक नाखून पर दोहरी परत उचित रहती है।
हाथ डुबोने के लिए अत्यधिक गरम पानी का इस्तेमाल न करें। ये त्वचा को शुष्क कर सकती है। अगर आपके नाखूनों पर किसी प्रकार का इंफेक्शन है तब उन पर नेल वार्निश लगाने से बचना बेहतर है। स्वयं मैनिक्योर करने के लिए सबसे पहले आप नेलपाॅलिश को हटाकर हाथों को गुनगुने पानी में डुबोए और फिर ऊपर दिए गए तरिके से नाखूनों की सफाई करें। इसके उपरांत नाखूनों को एक नया लुक दें नेल क्लिपर्स की सहायता से और एमरी बोर्ड से रगडकर किनारों को शेप दें। अब नाखूनों के सिरों को सफेद नेल पाॅलिश से रंगे इससे दोनों सिरों तक लगाएं और नाखून को आकार दें। नेलपाॅलिश सूखने के बाद दुबारा एक स्ट्रोक लगाएं। उसके बाद आप रंगहीन या पारदर्शी पाॅलिश लगा सकते है। इससे मैनिक्योर को सुरक्षा मिलती है।
सूर्य की तेज किरणे भी नाखूनो को प्रभावित करती है। कुछ हल्के रंग विशेषकर गहरा पीला और गुलाबी, सूर्य की किरणों के प्रभाव में आने पर पीले रंग के नजर आने लगते है। और इससे आपके नाखून भी पीले पड़ सकते है। इससे बचने के लिए नेलपाॅलिश की ऊपरी परत के रूप में किसी पारदर्शी रंग का प्रयोग कर सकते है। जिस प्रकार आप हाथों और बाजूओं पर सनक्रीम लगाते है ठिक उसी तरह नाखूनों पर भी लगानी चाहिए। जिससे आप सूर्य की पराबैगनी किरणों से बचाव कर सकते है। नाखूनों से पीलापन हटाने के लिए एमरी बोर्ड की सहायता से नाखून की सतह इस सावधानी से हटाएं कि नाखून को नुकसान न पहुंचे।
मसाज और मैनिक्योर से नाखूनों को आकर्षक तो बनाया जा सकता है लेकिन पेष्टिक भोजन के महत्व को भी नकारा नहीं जा सकता इसलिए स्वस्थ नाखूनों के लिए भोजन में पर्याप्त रूप से कैल्शियम, सल्फर, अमिनों एसिड, फास्फोरस, विटामिन बी और ई शामिल हो। ये सब हमें दूध से बने उत्पादों अनाज, अंडा, फल और हरी सब्जियों में मिलता है। पर्याप्त मात्रा में फल व कच्ची सब्जियां सलाद में खाएं जिससे विटामिन मिनरल और एंजायम प्राप्त कर सकते है। संभव हो तो गाजर का रस जरूर पीये।

कुछ बातें पति करें घर के लिए

बच्चों की देखभाल-बच्चों की देखभाल का काम बहुत कठिन है। बीमारी, होमवर्क, स्कूल, भेजना, नहलाना, साथ खेलना आदि जिम्मेदारियां कम नहीं होती इसलिए पति को इन कामों में पत्नी का हाथ बटाना चाहिए। यदि बच्चा बीमार है तो बारी-बारी से रात में पति पत्नी जागने का नियम बना लें। अपनी योग्यता के आधार पर बच्चे को बढाएं। जिसके पास समय है वो, टीचर्स मीटिंग में जाकर टीचर्स से विचार विमर्श करें वैसे कोशिश करें कि दोनों एक साथ ही स्कूल जाएं। इससे बच्चे का मनोबल सुदृढ़ होने के साथ ही अभिभावक भी सम्मान के भागी बनेंगे।
बाहरी दायित्व- बिजली पानी, गैस कनैक्शन, बच्चों की फीस आदि से सम्बन्धित कई काम है जिन्हें सम्पन्न करने में समय लगता है। सरकारी दफ्तरों की लंबी लाइनों में खड़ें रहना पड़ सकता है। ऐसे में पति पत्नी के बीच ठन जाती है। पति अक्सर अपने काम को महत्वपूर्ण समझते हुए पत्नी को आदेश दे डालते हैं, ‘‘जाते समय फलां-फलां काम करती जाना। मैं तो जा नहीं सकता क्योंकि मुझे दफ्तर पहुंचने में देर हो जाएगी।’’ जरा सोचिए, यदि आप को देर तो क्या पत्नी दफ्तर के लिए लेट नहीं होगी? अपना वाहन निकालिए और कर डालिए ये सारे काम। पत्नी को भी सुकून मिलेगा।
रिश्ते-नातेदारी का निर्वहन- शादी ब्याह, मुंडन, जन्मदिन, शोक आदि के मौकों पर पास पड़ोस, परिचितों, रिश्तेदारों के पास जाना पड़ता है। अगर पति-पत्नी, मिलजुल कर ऐसे मौकों पर जाए तो सही है। लेकिन पुरूष वर्ग यदि हर समय सोचे कि पत्नी ही चली जाए, मुझे न जाना पड़े, यह गलत हैं।
बीमारी और परेशानी- घर में कोई सदस्य अचानक बीमार पड़ जाए या कोई परेशानी पैदा हो जाए तो उससे निपटने की जिम्मेदारी भी कामकाजी महिला पर ही थोप दी जाती है। पुरूष अक्सर छुट्टी न मिलने का बहाना बना कर अपने दायित्व से विमुख हो जाते है। जब पढ़े लिखे सुसस्ंकृत परिवारों में ऐसी विसंगतियां देखने को मिलती है तो अजीब सा लगता है। आपस में सामंजस्य बनाएं।
शहर से बाहर जाना- कामकाजी महिलाएं यदि देर तक किसी मीटिंग में बैठ गयीं, शहर से बाहर दौर पर जाने की बात हुई तो परिवार और पति की तीखी नजरों का सामना करना पड़ता है। लोग उनके बारे में धारणा बना लेते हैं कि काम कुछ भी नहीं है घूमने का बहाना चाहिए। कुछ पति यह जानते हुए कि पत्नी को काम के अनुसार उसका बाहर जाना निहायत ही जरूरी है उसका समर्थन करने के बजाय उसका विरोध करते है। ऐसी बातें पत्नी के कैरियर को आगे बढ़ाने में बाधक सिद्ध होती है।
पत्नी के प्रमोशन होने पर- जिस तरह पति के प्रमोशन पर पत्नी प्रसन्न होती है उसी तरह पत्नी के प्रमोशन पर पति को प्रसन्न होना चाहिए। पत्नी का मनोबल तो बढ़ेगा ही उसे प्रसन्नता भी मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं होता है पत्नी की तरक्की देखते ही पति का अहं जागृत हो जाता है हीन भावना प्रबल हो उठती है। पति का कर्तव्य है कि वो पत्नी की सराहना करते हुए उसे प्रोत्साहित करें। इससे दाम्पत्य जीवन तो सुखी होगा ही, पत्नी का कैरियर भी शीर्ष पर पहुंचेगा।
घुमने के सवाल पर- बच्चों को सैर कराने या फिल्म दिखान का सवाल आता है तो बहुत पति यह कहते हैं ‘‘मैं जा ही रहा हूं, तुम जाकर क्या करोगी?’’ पति, पत्नी को मन बहलाव के हक से वंचित कर देते हैं।
यदि पति सहयोग दें तो सारी कठिनाईयां काफी हद तक हल हो सकती हैं। पत्नी थकी हारी दफ्तर से घर लौटे और पति चाय की प्याली के साथ मुस्कुरा कर उसका स्वागत करें। छोटी-छोटी बातें ही दाम्पत्य में रस घोलती हैं।

शादी को बनाएं अफेयर प्रूफ

कहते हैं इश्क कब, कहां और किससे हो जाए यह कोई नहीं जानता। शादीशुदा स्त्री और पुरूष जब इश्क के चक्कर में पड़ते हैं तो कई जिंदगियां दांव पर लग जाती हैं और हाथ आती है बदनामी ही बदनामी मर्दो का कहना है कि शादी के बाद हम जानबूझ कर महुब्बत के जंजाल में नहीं फसते, पता ही नहीं चलता कब दिल अपनी हदं पार कर पत्नी के पल्लू से निकल प्रेमिका की जुल्फों में अटक जाता हैं? पर क्या यह तर्क सही है? जी नहीं, बिल्कुल नहीं। हम इसे आपकी बदनियति कहेंगे क्योंकि यदि आप चाहें तो थोड़ी-सी समझदारी, मेहनत और सच्ची नीयत से आप भी बना सकते हैं अपनी शादीशुदा जिंदगी को अफेयर प्रूफ।
क्या है बेवफाई?
पत्नी के अतिरिक्त किसी और महिला से शारीरिक सम्बन्ध बनाना ही बेवफाई नहीं है। आजकल मि. हसबैंड घंटों आॅनलाइन रोमांस कर रहे हैं। स्टडी बताती है कि आॅनलाइन डेटिंग साइट पर ज्यादातर शादीशुदा मर्द ही सर्फिंग करते है। नैन चाहे जीती जागती गुड़िया से लड़ें या आॅनलाइन बेब से आप लक्ष्मण रेखा पार कर रहे हैं।
विवाह को दें प्राथमिकता- विवाह सफल अपने आप नहीं होते, इसके लिए लगातार जतन करने पड़ते हैं। बस चाहिए थोड़ी-सी इच्छा शक्ति। यदि शांत सफल वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं तो पत्नी को जीवन का एकमात्र ध्येय बनाएं।
रोमांटिक डेट पर जाएं- डेट पर सिर्फ प्रेमिका के साथ ही जाया जाता है यह किसी शास्त्र में नहीं लिखा है। पत्नी को कम से कम सप्ताह में एक बार डेट पर जरूर ले जाएं।
अश्लील साहित्य का त्याग करें- अश्लील साहित्य पढ़ना या ब्लू फिल्में देखना ठीक वैसा ही है, जैसे पत्नी की मौजूदगी में प्रेमिका से इश्क लड़ाना। पोर्न साहित्य देखने-पढ़ने से आपकी उम्मीदें पत्नी से बहुत बढ़ जाती हैं। आपकी कल्पना में परफैक्ट फिगर वाली सेक्सी माॅडल आने लगती हैं जिनकी तुलना जाने-अनजाने आप अपनी पत्नी की ‘कम परफैक्ट फिगर’ से करने लगते हैं और धीरे-धीरे पत्नी से मन उचटने लगता हैं।
रोमांटिक बने- रोमांटिक हसबैंड बनने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं लगती। दिन में एक बार उन्हें एक प्यार भरा एसएमएस या ई-मेल करें। हफ्ते, दस दिन में ‘आई लव यू’ का छोटा सा खत या कार्ड दें। रोमांस करने के लिए कभी कभार फूलों का सहारा लें या उनकी पसंद का कोई गिफ्ट दें।
स्नेह प्रदर्शन में पहल करें- आमतौर पर हसबैंड इस मिथ्या में जीते हैं कि प्रेम प्रदर्शन से पत्नी सिर चढ़ जाएगी। जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। स्नेह का प्रदर्शन पति-पत्नी के जुड़ाव को मजबूत बनाता है। इसलिए ‘माचो’ स्टाइल त्याग कर यदा-कदा ही सही चुम्बन आलिंगन के माध्यम से प्यार दर्शाकर पत्नी को धन्य करें। ये छोटे-छोटे प्रयत्न आपके शादीशुदा जीवन की मजबूत नींव होंगे।
रेगुलर सेक्स- पत्नी के साथ सेक्स लाइफ से बार हो चुके पति बाहर स्पाइस ढूंढ़ने के चक्कर में भटकने लगते हैं। शादी के कुछ वर्षो बाद हर जोड़े की सेक्स लाइफ में मंदी आती है। पर इसका मतलब यह नहीं कि पत्नी के साथ सेक्स आपकी लिस्ट में आउट हो जाए। सेक्सालाॅजिस्टों का मानना है कि खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के लिए पति-पत्नी सप्ताह में कम-से-कम तीन बार सेक्स का आनंद जरूर कर लें।
गप्पें मारें- अफेयर प्रूफ शादी का मूलमंत्र है-‘पति-पत्नी का आपस में दोस्ताना व्यवहार।’ अक्सर पति आॅफिस से घर आकर टीवी के आगे और पत्नी किचन व बच्चों में व्यस्त हो जाती है। बीच की खामोशी कब तूफान बन जाए कहा नहीं जा सकता। इसलिए दोनों गप्पें मारने के लिए समय जरूर निकालें। यदि बच्चे हैं तो उनके सोने के बाद बातें करें। दोनों ने दिनभर क्या-क्या किया, शेयर करें। भविष्य के सुनहरे सपने साथ बुनें। इन बातों से आपके बीच का बंधन अटूट होता जाएगा। जिस सम्बन्ध में भावनाओं का निवेश हो वहां बेवफाई करना मुश्किल होता है।
काॅमन इंटरेस्ट शेयर करें- पत्नी के साथ काॅमन इंटरेस्ट न होना मि. हसबैंड के भटकने का अच्छा और साॅलिड कारण है। शौक मेल नहीं खाते तो ऐसे शौक पैदा करें जिनमें पत्नी की भी रूचि हो। काॅमन एक्टिविटी ढूंढे जिसमें दोनों की दिलचस्पी हो। मेरी एक फ्रेंड को ब्लाॅगिंग पसंद है। उसके हसबैंड भी साथ में ब्लाॅग लिखते हैं। बच्चों के सो जाने के बाद दोनों बिस्तर पर लैपटाॅप लेकर बैठ जाते हैं और ब्लाॅग लिखते हैं। पति के साथ गुजारे ये लम्हें उसे अगले दिन एनर्जेटिक बनाए रखते हैं।
रिश्ते के प्रति सम्मान व समर्पण हो- अग्नि के चारों ओर फेरे लिए हों या निकाह कबूल किया हो या फिर ‘आई डू’ कहा हो यानी शादी किसी भी प्रथा से हुई हो पति-पत्नी की आपसी भावनाएं, अपेक्षाएं समान होती हैं। इसलिए शादी के समय खायी गयी कसमों का सम्मान करते हुए वैवाहिक जीवन के प्रति पूर्णरूपेण समर्पित रहें। पर इन वादों को निभाने के चक्कर में सड़ी गली बदबूदार हो चुकी शादी का भार न ढोयें। हां, सड़ने से पहले ही शादी को हर संभव प्रिजरवेटिव की सहायता से बचाने का प्रयास करें।
लक्ष्मण रेखा खींचें- अधिकतर हसबैंड सोचते हैं कि वे किसी भी प्रकार के हालातों का सामना करने में सक्षम हैं। उन्हें लगता है कि जिंदगी जीने के अंदाज को लक्ष्मण रेखा में बांधने पर वह नीरस और बेजान हो जाएगी। वे अपने खिलंदड़ स्वभाव को बेलगाम बेकाबू रख इधर-उधर फ्लर्ट करते रहते हैं। पर कई बार यह खेल गंभीर रूप ले लेता है और लड़की गले पड़ जाती है तब बदनामी के साथ ही इन्हें पत्नी के कोप का भोजन भी बनना पड़ता है। इसलिए जीवन को सीमा रेखाओं के साथ जीएं, भले ही साथी आपको शर्मीला या जोरू का गुलाम कहें। पर याद है ना? आप को हर हाल में अपनी शादी अफेयर प्रूफ रखनी ही है।
अपनी कमजोरियों को पहचानें- कहीं आपकी पर्सनैल्टी में कोई ऐसी बात तो नहीं जो विपरीत सेक्स को बेवजह आकर्षित करती है? जैसे आप अच्छे श्रोता हैं और अपनी महिला सहकर्मी की हर बात ध्यान से सुनते हैं पर वो इस अटेंशन को कुछ और ही समझ रही हों।
लालच से बचें- लालच का मतलब दूसरी स्त्री से बात करना, उसके साथ घूमना या अन्य किसी भी तरह का आकर्षण है। इन सब से दूरे रहें। हर किसी महिला से पर्सनल लाइफ शेयर ना करें। एक दूसरे की पर्सनल बातें जानने से आप ज्यादा करीब महसूस करते हैं और अफेयर के चांस बढ़ जाते हैं।
3 कारण, जो बताते हैं कि आपने सीमा रेखा लांघ ली है-
भावनात्मक अंतरंगता- कहीं पत्नी से ज्यादा भावनात्मक अंतरंगता गर्लफ्रेंड के साथ तो नहीं?
सेक्सुअल टेंशन- जब गर्लफ्रेंड के सान्निध्य में सेक्सुअल टेंशन होने लगे।
रहस्यात्मक रवैया- क्या पत्नी के आते ही आप ई-मेल आईडी बंद कर देते हैं? क्या पत्नी को दिनभर की बातें बतााते समय आप गर्लफ्रेंड के साथ बिताये लम्हें शेयर करने से घबराने लगते हैं? सबझें दाल में काला होने लगा है। ऐसे में उस महिला के साथ अपने सम्बन्धों का मूल्यांकन करें।
निष्कर्षः- अपनी पत्नी से चीटिंग करना नामुकिन है देर सवेर आप पकड़े ही जाएंगे। इसलिए वफादार बने रहें। जब आप बेवफा हो जाते हैं तो शुरू हो जाता है पत्नी से झूठ बोलना, फोन काॅल्स छिपाना, घर देर से आना, भूख नहीं होन का बहाना बनाना वगैरह-वगैरह। कुछ क्षणों के आनंद के लिए बने रिश्ते को छुपाने के लिए मेहनत मशक्कत करते हैं। हर पल इसी बात का खतरा रहता हैं। कि कहीं पत्नी को पता न चल जाए? फिर बच्चों का, परिवार के सदस्यों का सामना कैसे करेंगेत्र यदि आप अपनी पत्नी और बच्चों को बीच मझधार में छोड़ कर खुश हैं तो यह भी जान लें कि जिस स्त्री के लिए आपने इतनी जलालत मोल ली, क्या गारंटी है कि वो आने वाले जीवन में आपका साथ छोड़कर नहीं जाएगीं? फिर तो शायद आपकी स्थिति न घर की रहेगी न घाट की ।तो क्यों न पूरी मेहनत और ईमानदारी से अपनी शादीशुदा जिंदगी को बनाएं अफेयर प्रूफ?

चलो गर्मियों में कहीं घूम आएं

गर्मियों के मौसम की शुरूआत हो चुकी है। इस मौसम में हर कोई गर्मी से बचने और रिलैक्स होने के लिए कूल जगहों पर जाना पसंद करतें है। खासकर जब बात बच्चों की छुटिट्यों की आती है तो वह भी अपनी इन वेकेशन को एन्जाॅय करने के लिए पहाड़ों की सैर, खूबसूरती और कूल जगहों का चुनाव करते हैं। इसलिए आज हम आपको भारत की कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में बताएगें जहां पर आप वेकेशन को एंजाॅय करने के साथ ठंडक का अहसास भी कर सकते है। तो आइए जानते है इन जगहों के बारे में
औली, उत्तराखंडः- औली उत्तराखंड का एक भाग है। यह जगह काफी शांत और सूकून भरी होने के कारण सुकून भी होने के कारण पर्यटक यहां पर अप्रैल से ही घुमने के लिए आने लगते है। चारो तरफ बर्फ से ढके रहने के कारण यहां का टंेपरेचर 7-17 डिग्री रहता हैं। इसलिए यह जगह आपके लिए वेकेशन को एंजाॅय करने के लिए बेस्ट हैं।
पंचमढ़ी, मध्य प्रदेशः- मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पंचमढ़ी मध्य भारत के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में एक हैं। यह चारों ओर से पहाड़ी से घिरा हैं। यहां पर देखने के लिए बहुत सी गुफाएं, जंगल और बैम्बू फाॅरेस्ट हैं। गर्मियों के मौसम में यहां आकर आप ठंडक महसूस करेंगे।
माॅन, नागालैंडः- अगर आप गर्मियों की छुट्टियों में घूमने के लिए प्लान कर रहें है तो माॅन, नागालैंड जाएं। यहां पर अप्रैल के पहले वीक में नए साल का स्वागत एलेआन्ग फेस्टिवल कोन्याक नागा को सेलिब्रेट करके किया जाता है। जिसमें डांस म्यूजिक और कई प्रकार के खेल खेले जाते हैं।
साराहान, हिमाचल प्रदेशः- घूमने के लिए आप अप्रैल माह में साराहान जाएं। चारों और पहाड़ियों से घिरी यह जगह हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं। यहां पर एक पार्क ऐसा है जो पक्षियों की ब्रीडिंग के लिए मशहूर है। यहां पर पूरे साल टूरिस्ट की भीड़ लगी रहती हैं।
कदमत आइलैंड, लक्षद्वीपः- कदमत आइलैंड की नेचुरल ब्यूटी देखने में बहुत ही खूबसूरत है। लक्षद्वीप का यह 3.12 स्क्वेयर किमी के एरिया में फैला बहुत ही छोटा-सा आइलैंड हैं यहां पर आने वाले टूरिस्ट को ड्राइविंग, स्नाॅकर्लिग और स्वीमिंग जैसी कई सुविधाएं दी जाती हैं। कन्याकुमारी, तमिलनाडुः- भारत के सबसे दक्षिणी छोर पर बसा कन्याकुमारी वर्षो से कला, संस्कृति सभ्यता का प्रतीक रहा है। भारत के पर्यटक स्थल के रूप में भी इस स्थान का अपना ही महत्व है। यहां पर स्वामी विवेकानंद ने 3 दिनों तक तपस्या की थी। यहां पर देखने के लिए गांधी मेरोरियल भी है। अप्रैल माह में यहां पर घूमने के लिए दूर-दूर से टूरिस्ट आते हैं।
दार्जिलिंग, पश्चिम बंगालः- बारिश के मौसम में दार्जिलिंग जाने का अलग ही मजा है। दार्जिलिंग शहर पश्चिम बंगाल में स्थित है। यहां पर होने वाली चाय की खेती पूरी दुनिया में मशहूर है। बारिश के मौसम में यहां काफी संख्या में लोग घूमने आते है। यहां पर आप टाॅप ट्रेन का भी लुत्फ ले सकती है। टाॅय ट्रेन दार्जिलिंग के पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केन्द्र है।
वायनाड़, केरलः- अगर आप अपने मूड़ को रिफ्रेश करने के लिए घूमने जाना चाहते है तो वायनाड जाएं। यहां के हरे-भरे पहाड़, खुशबु बिखेरते इलायची, वनीला, काॅफी और चाय पीने से आपका मूड फ्रेश हो जाएगा और अच्छे से छुट्टियों को इंजाॅय कर सकते हैं। इसे पुरानी जन जातियों का गढ़ भी कहा जाता हैं।
कलीमपोंग, पश्चिम बंगालः- आपके ट्रिप को रोमांचक बनाने के लिए कलीमपोंग जांए। यह जगह पश्चिम बंगाल में स्थित हैं। अप्रैल में यहां पर दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। यहां पर आप जंगलों में रेड पांडा और ब्लैक बियर भी देख सकते है। कलीमपोंग की खूबसूरत वादियां देखने लायक हैं।

अपने पेट को काबू में रखना है सबसे जरूरी

प्रायः एक बार पेट का घेरा बढ़ जाए तो उसे कम करना काफी कठिन माना जाता है। पेट बढ़ने का मूल कारण बार-बार खाना ही है। दोपहर और रात्रि के भोजन के बीच हम कई प्रकार के स्नैक्स खाते है। शाम होते ही कई प्रकार की उल्टी सीधी चीजे खानें की इच्छा हो जाती है। कुछ लोग समोसे खाते हैं, कुछ कचैडियां, कोई नूडल्स तो कुछ पिज्जा। कई बार तो एक स्नैक खाने के पश्चात कोई और स्नैक खाने की इच्छा हो जाती है। क्या इसका कारण पेट की थैली के आकार का बढ़ जाना है? विशेषज्ञों का कहना है कि हम जितना भोजन खाते हैं उसके हिसाब से पेट की थैली का आकार बड़ा हो जाता हैं। और हमें अधिक भूख लगने लगती हैं। जो कई बार खाए बिना संतुष्टी नहीं होती। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि हम प्रत्येक बार साधारण से कम भोजन खाकर पेट की थैली का आकार छोटा कर सकते हैं ओर अपना वजन कम कर सकते है। अधिक भूख और बढ़े पेट का संबंध तो सर्वविदित ही है। एक मनोवैज्ञानिक एलन ग्लिबटर ने न्यूयार्क में कुछ व्यक्तियों के पेट में एक बैलून डालकर और उसमें पानी भरकर उनके पेट की क्षमता नापी। इनमें से प्रत्येक व्यक्ति लगभग चार कप पानी से पेट काफी भरा हुआ महसूस करने लगे। उसके पश्चात् इन लोगों के एक मास तक कम कैलोरी के हल्के भोजन पर रखा गया। जब पुनः उनके पेट की क्षमता नापी गई तो यह तीन कप पानी के बराबर निकली। पेट की क्षमता बढ़ने में कितना समय लगता हैं? बढ़ने में लगभग दो से चार सप्ताह का समय लगता हैं। एकाध बार अधिक खा लेने से विशेष अंतर नहीं पड़ता किंतु इससे अगले दिन फिर अधिक भूख लग जाती है। एक विशेषज्ञ डाॅ. लोरंस चैस्किन ने दिन में कम खाना और रात को भारी भोजन को इसका दोषी ठहराया है। विशेषज्ञों के अनुसार निम्न कदम आप को सीमित रखने और पेट का आकार कम रखने में सहायक कर सकते है। दिन में पांच बार खांए। तीन बार हल्का भोजन और दो बार हल्के स्नैक्स लें।
हर वस्तु की सीमित मात्रा लें और धीरे-धीरे खांए ताकि आपके पेट को यह पता लगने लगे कि यह भर गया है।
किसी जन्मदिन या विशेष अवसर पर बर्थडे केक या पिज्जा खाना हो तो अपना मन न मारें। पहले ही तय कर लें कि आपको केक या पिज्जा का छोटा टुकड़ा ही खाना है। यदि संभव हो तो पार्टी में जाने से पूर्व दही या कोई फल खा लें। हलवा या मिठाई जैसी भारी चीज किसी साथी के साथ बांट कर खांए।
भोजन से पूर्व एक गिलास पानी पीने से भी भूख की तीव्रता कुछ समय कम हो जाती है। अधिक वनज बढ़ाने वाली चीजों की इच्छा होने पर इनसे कुछ मिलती-जुलती चीजें खाने का प्रयास करें जैंसे फ्रेंच फ्राइस के स्थान पर उबले या भुने हुए आलू की चाट और चिकन कटलेट के स्थान पर भुना हुआ चिकन, स्टफ परांठे के स्थान पर स्टफ चपाती। शुरू में एक दो सप्ताह आपकों कठिनाई हो सकती है। पर धीरे-धीरे आपको आदत हो जाएगी। यदि आप इन तरिकों को अपना कर धीरे खाने की आदत डाल लें तो धीरें-धीरें आपका पेट अवश्य काबू में आ जाएगा।

क्यों तनावग्रस्त रहती हैं वर्किंग वूमैन?

कामकाजी महिलाओं का तनाव से गहरा रिश्ता है। जब यह तनाव उन पर हावी होने लगता है। तो अक्सर वे अवसादग्रस्त हो जाती है जिससे उनका काम तो प्रभावित होता ही है, साथ ही पर्सनल लाइफ भी डिस्टर्ब होती है।
कारण
1 काम का अत्यधिक बोझ होना।
2 कम्युनिकेशन गैप-अक्सर वे कोई समस्या होन पर बाॅस से डिस्कस नहीं करती, उस समस्या से अकेली जूझती हैं तो मन व दिमाग दोनों ही कभी फ्रैश नहीं हो पाते।
3 कई बार इसके विपरीत व ‘ओवररिएक्ट’ करती हैं। बाॅस उनकी प्रतिक्रिया पर नाराज होते है तो वे तनावग्रस्त हो जाती है।
कामकाजी महिलाओं पर काम का दोहरा बोझ होता है, ऐसे में परिवारजनों का सहयोग न मिलने से वे तनावग्रस्त हो जाती हैं साथ ही घर का वातावरण, परिवार की उनसे बढ़ती उम्मीदें इत्यादि कारण भी उनके तनाव को बढ़ाते हैं।
1 कुलीग्स के साथ वे अच्छे संबंध मैंटेन नही कर पाती हैं तो भी आॅफिस का माहौल बोझिल हो जाता है, जिससे तनाव उत्पन्न होता हैं।
2 स्वंय पर जरूरत से ज्यादा भरोसा होना या काम के प्रति लापरवाही गलतियों का मुख्य कारण है। जब गलती सीनियरस के सामने आती है तो वे परेशान हो उठती हैं।
3 कुछ महिलाअें में कांफिडेंस की कमी होती हैं जो उन्हें तनाव देता हैं।
4 टाइम मैनेजमेंट की कमी, जिससे जाॅब करना भी उसके तनाव का कारण रहता है।
5 अपनी इच्छा व टेलेंट से हटकर जाॅब करना भी उसके तनाव का कारण रहता हैं।
6 काम को पूरी वफादारी से करने पर भी बाॅस द्वारा कोई क्रेडिट न दिए जाने पर भी अक्सर वे तनाव की शिकार हो जाती हैं।
7 पर्सनल व प्रोफेशनल लाइफ के बीच सही संतुलन न होने से भी वे इस समस्या से ग्रस्त रहती हैं।
8 मीटिंग, प्रेजेंटेशन इत्यादी की सही प्रकार से तैयारी न कर पाने से जब वे अच्छी परफाॅरमेंस नही दें पाती तो उन्हें स्वयं पर क्रोध आता है जिससे तनाव पनपता हैं।
9 जब वे व्यस्तता के कारण पति या बच्चों के लिए कुछ कर नहीं पाती तो स्वयं को कोसती रहती है व अपराध भावना का शिकार हो कर तनावग्रस्त हो जाती हैं।
ऐसे में महिलाओं को कई मानसिक व शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं जैसे-सिरदर्द, बाॅडी में दर्द
1 सदैव थकान महसूस करना।
2 भूख ज्यादा या कम लगना।
3 चीजें रखकर भूल जाना।
4 छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या रोने का मन करना।
5 एकाग्रचितता में कमी।
6 स्वभाव में चिड़चिड़ापन पैदा होना।
7 कभी-कभी जीवन में उत्साह की कमी के कारण जीने की चाह खत्म होने लगती है। कैसे पाएं छुटकारा-
8 घर व काम के बीच संतुलन बिठाने हेतु जरूरी है कि अपने दिमाग में दो फाइल केबिनेट बनाएं एक में आॅफिस की पूरी जिम्मेदारियां व समस्याएं रखें, दूसरे में घरेलू। इन दोनों को कभी मिक्स नहीं होने देंगी तो तनाव सदैव आपसे दूर रहेगा।
9 आत्मविश्वासी बनें। अपनी फिटनेस, ड्रेस सेंस व खानपान पर ध्यान दें। सब तरह से फिट रहेंगी तो पूरे आत्मविश्वास के साथ लोगों का सामना कर पाएंगी जिससे अंदरूनी उत्साह में वृद्धि होगी। टेलेंट को सही शेप देने हेतु परिणाम जरूरी है। इससे आपकी परफाॅरमेंस बेहतर होगी जो आपके आत्मविश्वास में वृद्धि करेगी व तनाव को दूर भगाएगी।
10 पाॅजिटिव बनें। नकारात्मक विचार अक्सर तनाव उत्पन्न करने में सहायक होते हैं।
11 अच्छी प्लानर बनें इससे आपका काम सही तरीके से व सही समय पर होगा तो आप तनाव से बची रहेंगी।
12 जो बातें आपके लिए तनाव का कारण बनती है, उनसे दूर ही रहें। ऐसे संभव न हो तो उनके साथ किस तरह डील करना है, सीखें। किसी एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकती है।
13 फोन पर दोस्तों या क्लाइंट्स से लंबी बातचीत करने से बचें। इससे आपका काम प्रभावित होगा जो आपको तनाव देगा। बेहतर है दोस्तों से बात करने हुत टाइम फिक्स कर लें।
14 स्वयं को मशीन न बनांए। अपने सामथ्र्य के अनुसार ही कार्य करें।
15 ऐसे लोग जो आपको इरीटेट करते हों भले ही वो अपाके कुलीग हों या क्लाइंट्स, उनसे सिर्फ काम के विषय में ही बात करें।
16 नेटवर्किंग से जुड़े रहे। इससे आपमें स्मार्टनस आएगी व ज्ञान बढ़ेगा पर आॅफिस टाइम में व्यर्थ की नेटसर्फिंग करने से बचें।
17 सोशल बनें। लोगों से मिलना जुलना तनाव को कम करेगा।
18 पति या बच्चों के समक्ष अपनी व्यस्तता का रोना न रोएं। उनसे मदद लेने हेतु उन्हें प्यार से डील करें वरना वे आपसे कतराने लगेंगे। जिससे तनाव आना स्वाभाविक है।
19 स्वयं को ‘टेकन फाॅर ग्रांटेड’ न लें। अपनी इम्पाॅर्टेस समझें। तभी परिवारजन आपको महत्ता देंगे।
20 घर के लिए कभी कुछ न कर पाएं तो स्वयं का कोसने की बजाय प्रयास करना बेहतर हैं।

महक उठे आशियाना

त्योहारों का मौसम आने वाला है और फिर मेहमानों का तो इन दिनों आना-जाना लगा ही रहता है। अगर आप भी चाहती होंगी अपने घर को एक ऐसा लुक देना ताकि जो भी आपके घर को देखे कह उठे ‘वाह क्या बात है।’ तो फिर देर किस बात की?
घर की मेंटेनेंस
1 घर में वाॅशेबल पेन्ट करवाए, दीवारों के गंदा होने पर इन्हें झट से धोकर चमका सकती हैं।
2 कमरा यदि छोटा है तो फर्नीचर दीवार से सटा कर रखें। छोटे-छोटे कई फर्नीचर रखने की बजाए 5-6 बड़े फर्नीचर रखें।
3 घर में फोल्डिंग फर्नीचर लाएं, आवश्यकता न होने पर इन्हें फोल्ड करके रख सकती है।
4 दरवाजे के पीछे वाॅल हैंगिग लटकाए, यहां रोजमर्रा की जरूरतों की छोटी-छोटी चीजें रख सकती हैं।
5 स्टाइलिश एक्सेसरीज जगह-जगह रखने की बजाय एक ही स्थान पर रखें।
6 दीवार से जुड़ी कैबिनेट अलमारियां बनवाएं, बिखरा हुआ सामान बिना जगह घेरे ही संवरा रहेगा।
7 लैम्प को टेबल पर रखने की बजाय दीवार पर टांगे, जगह कम घिरने के साथ-साथ स्टाइलिश भी लगेगा।
8 संदूक पर सुन्दर कवर बिछाकर ऊपर फूल सजा दें, संदूक खूबसूरत लगने लगेगा।
9 दरवाजे के पीछे सेल्फ बनवाकर वहां पर डीवीडी लाइब्रेरी बनाई जा सकती है।
10 बड़े संदूक पर रात को गद्दा डालकर सोने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
11 फोटो व किताबों पर से धूल हटाने के लिए तेज स्पीड में हेयर ड्रायर चलाएं।
12 सीढ़ियों को वैक्यूम क्लीनर से साफ करें, सीढ़ियां चमक उठेंगी।
13 फ्रिज पर से दाग हटाने के लिए पेपर टाॅवेल का इस्तेमाल करें।
14 वाॅशरूम में ‘ग्रे’ व ‘गाढ़े हरे’ रग के टाॅवल टांगें, वाॅशरूम फ्रेश नजर आएगा।
15 सभी जरूरी कागज फाइल में सहेज कर रखें, आवश्यकता पड़ने पर हडबड़ी का शिकार नहीं होंगी।
16 सप्ताह में एक बार सभी दराजों व अलमारी की सफाई करें। सफाई के साथ-साथ यह भी ध्यान रखें कि कौन सी चीज कहां रखी हैं।
17 लम्बे ऊंचे संदूक पर कवर बिछाकर इसे बेड के पास रखें, उपर चाय, गिलास, पानी का जग आदि रख सकती हैं।
18 कालीन साफ करने के लिए कालीन को उल्टा करके झाड़ लें, फिर तेज स्पीड में वैक्यूम क्लीनर चलाएं, कालीन खिल उठेगा।
कमरे की डेकोरेशन
1 कमरे को बड़ा दर्शाने के लिए छोटे पैटर्न या फूलों के डिजाइन वाला कालीन बिछाएं।
2 बेड पर रंगीन बेडशीट बिछाएं। कमरा छोटा है तो हल्के रंग की बेडशीट बिछाएं, कमरा बड़ा लगेगा।
3 बेड पर पिलो-कुशन रखने के लिए सबसे पहले बड़े कुशन फिर पिलो और फिर छोटे-छोटे कुशन रखें।
4 पर्दों के लिए आजकल कई फैब्रिक चलन में है। आप भी लम्बे स्ट्रेप वाले पर्दों का चुनाव कर सकती हैं।
5 पुराने सोफा सेट को नये कुशन कवर व सोफा कवर से सजाकर नया लुक दें।
6 दीवार पर नैचुरल सीनरी की अच्छी सी पेन्टिग टांगें, प्रकृति के करीब होने का अहसास होगा।
7 दीवार पर हरे रंग की एक आर्टिफिशियल बेल लगाएं, खुशबू न सही पर आंखों को ताजगी मिलती रहेगी।
8 पुराने पड़े लैम्प का शेड बदलकर उसे नया रूप दें।
9 लाइटिंग के बिना डेकोरेशन अधूरी है। दिल की शेप में जलते-बुझते बल्ब कमरे को अट्रैक्टिव लुक देंगे।
10 शादी की एलबम में से एक अच्छी सी फोटो चुनकर बड़ी करवाकर फ्रेम करवा लें। इसे दीवार पर टांग दें, कमरा रिश्ते की खुशबू से महक उठेगा।
11 बल्ब जलाने से पहले उस पर हल्का सा परफ्यूम छिड़क दें, रोशनी के साथ-साथ कमरे में खुशबू भी फैल जाएगी।
12 कमरे के कोनों को मोमबत्तियों और दियों से सजाएं विशेष अवसरों पर इन्हें जलाएं, कमरा जगमगा उठेगा।
13 खिड़कियों पर रंगीन शीशे लगवाकर उन्हें स्टाइलिश लुक दें।
14 ड्रेसिंग टेबल ही नहीं, अलमारी को भी क्रोशिए से बुने पर्दे से ढंककर नया रूप दे सकती हैं।
15 कमरे के कोने में एक बड़ा सा टेडीबियर रखें, कोने में बैठे-बैठे ही ये कमरे की शोभा बढ़ाता रहेगा।
16 स्टैच्यू रखने का शौक आजकल काफी प्रचलन में है। आप भी घर में सुन्दर सा स्टैच्यू रखकर सौम्य लुक दें सकती हैं।
17 सिलेण्डर को एक अच्छा सा पुराना स्कर्ट पहना दीजिएं, सिलेण्डर भी स्मार्ट दिखने लगेगा।

बदलते वक्त की पहचान हेयर कलरिंग

यदि आप पाना चाहती हैं आकर्षक व स्टाइलिश लुक तो हेयर कलरिंग बेहद आसान व प्रभावी तरीका है अपनी पर्सनैलिटी में चार चांद लगाने का। आप चाहे तो अच्छे सैलून में जाकर हेयर कलर करवा सकती हैं पर यदि आप घर में हेयर कलर कर रही हैं।

मार्केट में दो तरह के हेयर कलर एवेलेबल है बेसिक कलर, जो बढ़ती उम्र के साथ सफेद होते बालों को रंगीन बनाने के लिए किये जाते हैं। इन्हें हर 15 से 20 दिन बाद दोबारा एप्लाई करने की जरूरत होती हैं। बेसिक कलर में खास शेड हैं ब्लैक, ग्रै, बरगंडी व ब्राउन। दूसरे कलर हैं हाइलाइटिंग कलर, जिन्हें काले व सिम्पल बालों को हाईलाइट करने के लिए किया जाता है। युवाओं में आजकल इनका खासा क्रेज देखा जाता है। इनमें बरगंडी, गोल्डेन, ब्राउन, काॅपर, रेड, ग्रीन, चाॅकलेटी, स्लेटी व गोल्डेन बाउन खास है।

हाईलाइट कलर को आप अपनी सुविधानुसार किसी भी ट्रेंड में चुन सकती हैं

टेम्परेरी कलर- शैम्पू करने के बाद ये शैम्पू के साथ ही धुल जाते है और आपके बाल वापिस अपने ओरिजनल कलर में आ जाते हैं। यदि आप सिर्फ किसी फंक्शन में जाने के लिए लुक चेंज करना चाहती हैं तो टेम्परेरी ककलर एक अच्छा ऑप्शन है।

सेमी टेम्परेरी कलर- अगर आप कुछ ही दिनों के लिए कलर्ड हेयर चाहती हैं तो इसे चुन सकती हैं। इनके असर की अवधि 5-6 शैम्पू करने तक रहती हैं।

सेमी परमानेन्ट कलर- यदि आप बदलते ट्रेंड व फैशन के अनुसार बालों का कलर भी बदलती रहना चाहती हैं तो सेमी परमानेन्ट कलर चुन सकती हैं। ये कलर लगाने के 5 से 6 हफ्तों तक रहते हैं।

परमानेन्ट कलर- परमानेन्ट कलर आपको बालों के ओरिजनल कलर को पूरी तरह नए कलर में बदल देता हैं। हां आपको बालों की जो नई ग्रोथ होगी वह आपके बालों के ओरिजनल रंग में बढ़ेगी। यह कलर मार्केट में कई शेड में उपलब्ध हैं। परमानेन्ट की सलाह अवश्य लें। यह कलर मार्केट में क्रीमी, जेल व शैम्पू फाॅर्म में भी एवेलेबल हैं।

हेयर कला का सेलेक्शन

1  बालों को कलर करने के लिए सबसे पहले जरूरी है, आपके चेहरे के रंग-रूप उम्र व पर्सनैलिटी के आधार पर कलर का सेलेक्शन ताकि आपका व्यक्तित्व और ज्यादा उभर कर सामने आ सके।

2  यदि आपका रंग गोरा है तो आप बरगंडी, ब्राउन, गोल्डन व ग्रीन कलर चुन सकती हैं।

3  हल्के सांवले रंग पर लाइट गोल्डेन ब्राउन, काॅपर, स्लेटी रंग अधिक फबते हैं।

4   गेहुंए रंग पर चाॅकलेटी, बरगंडी व खाकी रंग खिलते हैं।

5   अधिक उम्र में मेंहदी का अधिक प्रयोग बालों को रूखा बनाता है।

सफेद होते बालों को छिपाने के लिए आप काला, भूरा व ब्राउन हेयर कलर चुन सकती है। फैशन व बदलते ट्रेंड के अनुसार भी हेयर कलर चुन सकती हैं बशर्ते वह कलर आपकी पर्सनैलिटी से मैच करता हो। पिछले दिनों ग्रीन कलर अधिक पसंदद किया जा रहा था, आजकल गोल्डेन ब्राउन कलर चलन में हैं। बरगंडी कलर हर उम्र, रंग व मौसम में फबता हैं।

हेयर कलर करने से पहले

1  हेयर कलर करने से 48 घंटे पहले एलर्जी टेस्ट करें इसके लिए बालों के रूखे व बेजान हिस्से पर कलर लगाएं और आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से धो लें। अगर 48 घंटे के अंदर त्वचा में जलन, खुजली आदि होती है या आपको लगे यह कलर आप पर सूट नहीं कर रहा तो हेयर स्पेशलिस्ट की सलाह से नया कलर व ब्रांड इस्तेमाल करें।

2 कलर चुनते समय अमोनिया फ्री कलर चुनें। ये बालों को रूखा बनाते हैं। तो हेयर कलर के दो पाउच खरीदें ताकि सारे बालों पर हेयर कलर अच्छी तरह लगा सकें।

3 हेयर कलर सीधे व सिल्की बालों पर ही अच्छे लगते है। अगर आपके बाल घुंघराले हैं तो आप उन्हें स्ट्रेट करवा कर हेयर कलर कर सकती है।

4 आप चाहे तो सारे बालों को हाईलाइट कर सकती है या सिर्फ आगे की कुछ लेयर। यदि कनफ्यूज है तो आप पेपर पर बालों का स्केच बनाकर, जिस पैटर्न में आप बाल हाइलाइट करना चाहती हैं, ड्रा करें। यदि पैटर्न पसंद आता है तो उसे अप्लाई कर सकती हैं।

5 अब बालों को किसी अच्छे शैम्पू से धोएं। जिससे बालों में उपस्थित धूल-मिट्टी के कण बाहर निकल जाए।

हेयर कलर करने से पहले माथे के ऊपरी हिस्से व गर्दन के पिछले हिस्से पी क्रीमी जेल या वैसलीन लगा ले। इससे हेयर कलरिंग के दौरान त्वचा पर दाग पड़ने का डर नहीं रहेगा।

हेयर कलर

1 हेयर कलर को एक बाउल में अच्छी तरह मिक्स करें और घोलने के तुरंत बाद बालों पर लगाएं, कलर को अधिक देर तक रखना बालों को नुकसान पहुंचा सकता है।

2 हाथों में गलव्स पहनकर बालों को कलर करें। सबसे पहले बालों की जड़ों में कलर लगाएं फिर ब्रश की सहायता से सारे बालों में फैला दें।

3 45 मिनट बाद बालों को गुनगुने पानी से गीला करके 3 मिनट तक झाग बनाए फिर अच्छी तरह पानी से धो लें ताकि हेयर कलर कर कोई कण बालों में न रहे।

4 24 घंटे तक बालों में शैम्पू न करें। अन्यथा शैम्पू के साथ बालों में लगा कर भी बह जाएगा।

5 बाल धोने के बाद बालों में नींबू युक्त सोल्यूशन लगाएं अगर सिर की त्वचा पर कलर लगा गया होगा तो यह उसे हटाने में मदद करेगा।

6 यदि माथे की त्वचा पर कलर लग गया है तो गीले कपड़े को शैम्पू में भिगोकर दाग पर लगाएं, फिर साफ कपड़े से रगड़ कर पोंछ दें। दाग हट जाएगा।

7 बालों को हेयर ड्रायर से सुखाने की बजाए नैचुरल रूप से सुखने दें।

8 बालों को तौलिये में लपेट कर न रखें, न ही तौलिये से रगड़े या झाड़े, इससे बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं।

कलर्ड बालों की देखभाल

1 कलर्ड बाल तभी खूबसूरत लगते हैं जब वे सिल्की, साॅफ्ट व मुलायम हों, रूखे-बेजान, बाल आपके सौन्दर्य को बढ़ाने की बजाय कम कर सकते हैं। इसलिए इन्हें जरूरत होती है विशेष देखभाल की। आइयेे देखें ये टिप्स-

2 कलर्ड बालों के लिए खास बनाए गए शैम्पू व कंडीशनर का इस्तेमाल करें।

3 बालों को हफ्ते में 2 बार डीप कंडीशनिंग दें। चाहे तो पार्लर में जाकर हेयर स्पा भी ले सकती है।

4 बालों को साॅफ्ट सिल्की बनाए रखने के लिए नैचुरल हेयर प्रोटीन व विटामिन-ई युक्त तेल से अच्छी तरह मालिश करें। आधे घंटे बाद शैम्पू से धोकर कंडीशनिंग करेंगे, हेयर कलर भी बालों पर अप्लाई होगा। 5 मिनट बाद धो दें।

5 कलर्ड बाल को सुखा छोड़ना या हाफ क्लच करना आकर्षक लगने के साथ-साथ सेक्स अपील भी बढ़ाता है। यदि आपके बाल ज्यादा लम्बे हैं तो सिर्फ आगे से लेजर कंटिग करवा कर कलर्ड हेयर को हाईलाइट कर सकती है।

6 यदि बाल ऑयली हैं तो फ्राइड फूड व फैट कम लें।

7 कंडीशनर हमेशा बालों के सिरे पर ही उपयोग करें। जड़ों पर कंडीशनर लगाना बालों को नुकसान पहुंचाना है।

8 बालों को हेयर ड्रायर से सुखाती हैं तो 8 इंच की दूरी बना कर रखें व बालों को ठंडा होने के बाद ही सेट करें, अन्यथा बाल रूखे हो सकते हैं।

9 बालों के लिए चैडे, दांतों वाले कंघे इस्तेमाल करें, प्लास्टिक के साधारण कंघे बालों को तोड़ते व रूखा बनाते हैं।

10 अगर अप स्वीमिंग करती हैं तो बालों को बचाकर रखें। स्वीमिंग पूल के पानी में क्लोरीन होती है जो बालों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

अक्षर भी बताते है कितने सटीक है प्रेम संबंध

ज्योतिष की मानें तो व्यक्ति के नाम का उसके जीवन पर बहुत प्रभाव होता है। यही नहीं, बल्कि नाम का पहला अक्षर संबंधित व्यक्ति के व्यक्त्वि और भाग्य के बारे में भी काफी कुछ जानकारी देता है।
(ए) अक्षर वाले वक्ति देखने में आकर्षण होते है। इसके इर्द-गिर्द लोगों की भीड़ रहती है तो इनके सम्मोहक व्यवहार से बंधे रहते है।
(ए) अक्षर वाले प्यार और रिश्तों का काफी महत्व देते हैं परन्तु स्वभाव से ये रोमांटिक नहीं होते है। ये लोग सही निर्णय लेते है।
(बी) अक्षर वाले अक्सर प्रेम विवाह करते है। स्वभाव से मूडी तथा हिम्मत वाले होते है। (बी) अक्षर वाले लोग काफी रोमांटिक होते है और किशोरावस्था में ही फ्लर्ट शुरू कर देते है।
(सी) अक्षर वालों को दोस्ती करना पसंद होता है। ऐसे लोगो अपने पहले प्यार को याद रखना चाहते हैं। बिना लाग लपेट के बोलना इनकी आदत होती है। भावुक होने के कारण ऐसे लोग अक्सर प्रेम संबंधो में धोखा खाना पड़ता है।
(ड़) अक्षर वाले लोग अपने आप पर भरोसा करते है। इनके पास जाना अक्सर आपको कुछ न कुछ नया सिखाया है। ये जिस चीज को पाना चाहते हैं, किसी भी तरह से उसे पा ही लेते हैं। एक हद तक इन्हें जिद्दी भी कहा जा सकता है।
(ई) अक्षर वाले लोगों का स्वभाव फ्लर्ट करने का होता है। ऐसा ये मजाकिया स्वभाव के चलते करते है लेकिन कई बार ये बहुत ज्यादा बोलने के कारण खतरों को आमंत्रित कर लेते है। ये जिंदगी को जिंदादिली के साथ जीने की चाहत रखते है।
(एफ) अक्षर से जिनका नाम शुरू होता है वह रचनात्मक होते हैं। ये अपनी प्रोफेशनल लाइफ और पर्सनल लाइफ को अलग-अलग रखते हैं। ऐसे लोगों को अच्छा लाइफ पार्टनर मिलता है।
(जी) नाम के लोग साफ दिल होते है। ये अपने मन में कुछ नहीं रखते और न ही किसी के खिलाफ कोई साजिश रखने में विश्वास रखते हैं। ऐसे लोग स्वभाव से अंर्तमुखी होते हैं और बेवजह किसी को परेशान नहीं करते।
(एच) अक्षर वाले लोग अपनी बातें दूसरों से शेयर करने में डरते हैं। इनको समझना मुश्किल होता हैं लेकिन दिल से ये बेहद अच्छे और सच्चे होते है। आप इन पर आंख बंद कर विश्वास कर सकते है। हालांकि ये दूसरे से झंझट में पड़ने से बचते है।
(आई) अक्षर वाले दिमाग से ज्यादा दिल से सोचते हैं। बेहद भावुक होने और सिर्फ दिल की सुनने के कारण इन्हें आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता हैं हालांकि इनका प्यार सच्चा ही होता है। अपनी भावुकता के चलते इन्हें अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है।
(जे) अक्षर वाले स्वभाव से ईमानदार और वफादार होते है। खुशनुमा दूसरे लोग इनके दुश्मन बन जाते है और इनसे ईष्र्या करने लगते है। अगर आपका पार्टनर का नाम (जे) अक्षर से शुरू होता है तो आप बहुत भाग्यशाली हैं।
(के) अक्षर वाले मुंहफट होते है। बिना कुछ सेचे समझे ये किसी को भी कुछ भी कह सकते हैं। अपने फायदे के लिए ये कुछ भी कर सकते है। इन्हे अपनी इज्जत से ज्यादा पैसे से प्यार होता है। प्रोफेशनली सफल होने के बावजूद भी इनके जीवन में अपनेपन का अभाव रहता है।
(एल) अक्षर वाले कभी किसी को दुखी नहीं देख सकते हैं। ऐसे लोग जीवन में बड़ी कामनाएं नहीं रखते लेकिन अपने से मिलने वाले हर आदमी को खुश रखना इनकी आदत होती हैं। स्वभाव से कल्पनाशील होने के कारण ये स्वप्नदर्शी तथा हरदिल अजीज होते हैं।
(एम) अक्षर वाले स्वभाव से काफी भावुक, जिद्दी और संकोची होते हैं। अक्सर ये छोटी-छोटी बातों को दिल से लगा लेते है। इनके साथ दिल से लगा लेते हैं। इनके साथ दिल लगाना काफी खतरनाक हो सकता है। ये कब किस चीज पर गुस्सा हो जाए और कब किसी बात पर प्यार दिखाने लगे, कहा नहीं जा सकता।
(एन) अक्षर वाले खुले विचारों को समर्थन देने वाले होते हैं और बहुत जल्दी बोर हो जाते है। ऊपर से ये शांत दिखाई देते लेकिन अंदर ही अंदर बेहत आक्रामक होते हैं। इन्हें अपनी आलोचना जरा भी नहीं सुहाती।
(ओ) अक्षर वाले बहुत आकर्षक, ऊर्जावान तथा प्रतिभाशाली होती हैं। अक्सर इस नामाक्षर वाले लोग प्रेम विवाह करत है और परिवार को साथ लेकर चलते हैं। ऊपर से ये शर्मीले दिखाई देते है। लेकिन वक्त आने पर ये ऐसे काम कर जाते हैं जिन्हें करना हर किसी के बस की बात नहीं नहीं होती है।
(पी) अक्षर वाले घर, देश, दुनिया को साथ लेकर चलने में विश्वास करते है। ये उसूलपसंद होते हैं तथा अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। लेकिन साथ ही ये कुछ हद तक तानाशाली सोच रखने वाले होते हैं।
(क्यू) अक्षर वाले स्वभाव से रचनाशील और क्रिएटिव होते है। हर काम को बेहद सलीके से करते हैं। (क्यू) अक्षर वाले अपने आप में खोए रहते हैं और दूसरों से इन्हें गुस्सा भी कम ही आता हैं।
(आर) अक्षर वाले मनमौजी होते हैं उन्हें दुनिया से कोई लेना देना नहीं नहीं होता। ये कम बोलते हैं, अपनी दुनिया में ही खोए के साथ-साथ इनकी मित्रता लेखकों, दोस्तों और अपनी ही तरह के लोगों के साथ होती हैं।
(एस) अक्षर वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं। इनका स्वभाव सहज ही समझ में नहीं आता हैं। ये अपने आप में सिमटे होते है और अपने चारों ओर एक रहस्यमय वातावरण बनाए रखते है। ये कंजूस होते हैं लेकिन दानी होने का दिखावा भी करते हैं।
(टी) अक्षर वाले मेहनती और बुद्धिमान होते हैं। आमतौर पर इस नामाक्षर वाले लोग मीडिया और प्रशासिनक क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे लोग रिश्तों और भावनाओं को लेकर बेहद भावुक होते हैं, हालांकि ये उसे अभिव्यक्त नहीं कर पाते हैं।
(यू) अक्षर वाले बेहद जोशीले होशियार और दिल के साफ होते हैं। ये छोटी-छोटी चीजों में ही खुशियों को ढूंढने का प्रयास करते हैं और दूसरों को भी खुशियां बांटने में विश्वास रखते हैं। ये किस्मत के भी धनी होते हैं।
(वी) अक्षर वाले आजाद ख्याल वाले होते है, ये न तो किसी की सुनते है और न ही किसी का कहा करते हैं, लेकिन यदि उनके मन को कोई बा तजम जाए तो ये उसे करने से भी नहीं चूकते। साफ दिल होन के साथ ये दूसरों की भावनाओं की भी कद्र करते हैं।
(डब्ल्यू) अक्षर वालों में दूसरों को दबा कर अपना रौब जमाने की आदत होती हैं। अनकी इस आदत के चलते लोग ऐसे लोगों से दूर ही रहते हैं। ये बहुत अभिमानी होते है और हमेशा लोगों की आलोचनाओं के निशाने पर रहते हैं।
(एक्स) अक्षर वाले स्वभाव से बेहद अस्थिर होते है और हर चीज से इनका मन बड़ी जल्छी उचट जाता है। इन्हें खुद ही पता नहीं होता कि ये अगले पल क्या करेंगे। इन लोगों में एक खास आदत होती है कि ये जिसको पाने की इच्छा रखते है, उसे पाकर ही दम लेते है फिर चाहे उससे लिए जान ही दावं पर लगानी पड़े।
(वाई) अक्षर वाले बोलते स्वभाव से ईमानदार, स्पष्टवादी और मेहनती होते है लेकिन लोगों के साथ मिलना-जुलना इन्हें पसंद नहीं होता। जिनका नाम (वाई) अक्षर से शुरू होता हैं वे समझौता भी पसंद नही करते ओर इसके चले उन्हें संघर्षमय जीवन जीना पड़ता हैं।
(जेड़) अक्षर वाले धीर-गंभीर लेकिन सरल प्रवृति के मालिक होते हैं। स्वभाव से बेहद सीधे और भावुक होते है। ये बड़ी से बड़ी कठिनाई को भी हंसते-हंसते झेल जाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि सीधे होते हुए भी इन्हें बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता।

जब पति हो उम्र में छोटा

ना उम्र की सीमा हो, ना जन्मों का हो बंधन जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन, कुछ रिश्तें हमें जन्म के साथ ही प्राप्त है जिनमें हम चाहकर भी परिवर्तन नहीं कर सकते है। जैसे माता-पिता, भाई बहन इत्यादि। किंतु जो रिश्ते जीवन के दौरान बनते है उनमें हमें चुनाव की स्वतंत्रता होती हैं जैसे पति पत्नी, बहु, दामाद, मित्र, सखा, संबंधी इसी तरह शादी ब्याह ऐसा ही एक संबंध है जिसमें हम चुनाव कर सकते है। आयु, परिवार, जाति, राज्य सभी मामलों में नियम न होने के बाद भी हम समाज द्वारा बनाये गए नियमों पर ही चलते आ रहे है। जिसमें तय है विवाह अपनी जाति में हो, बराबर के परिवार में हो, पति उम्र में बड़ा हो और दोनों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में ज्यादा अंतर न हो। बदलते परिवेश में समय के साथ साथ इन मान्यताओं पर ध्यान तो दिया जाता है परंतु पालन नहीं। अब लड़के लड़कियां अपनी पसंद और इच्छानुसार शादी विवाह करने लगे तो जाति, धर्म, आयु, गोत्र, परिवार के बंधन भी ढीले पड़ने लगे है। दरअसल जब दिल का मामला हो ताो फिर अन्य सारी बातें गौण हो जाती है। ऐसे कई मामलों में लड़कियों उम्र में अपने से छोटे लड़के से शादी कर लेती है। कुछ जोड़े तो उम्र भर सफलता पूर्वक साथ निभाते है। परंतु कुछ मामलों में ये सफर दो चार कदम चल कर अलग राह पकड़ लेता है।
हमारे समाज में विवाह मात्र दो प्रणियों का मिलन न होकर दो परिवारों का समन्वत होता है। जहां परिवार की मर्यादा बचाए रखने के लिए कई बार लोग न चाहते हुए भी मजबूरन एक दूसरे से निभा लेते है। ऐसी स्थिति में पति पत्नी के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों से भी परिपक्वता की उम्मीद की जाती है। आमतौर पर स्त्री, पुरूष की अपेक्षा अधिक सहनशील और परिपक्व मानी जाती है। इसी कारण आमतौर पर वर वधु से अधिक उम्र का ही ढूंढा जाता हैं यही परंपरा बन गयी हैं कि विवाहित जीवन के सुख पूर्ण होने के लिए पति को पत्नी से उम्र में बड़ा होना चाहिए। एक समय था जब बालविवाह कर दिए जाते थे, कुलीन परिवार में कन्या का विवाह करने की चाह में बेमेल विवाह भी कर दिए जाते थे। कई बार तो मात्र तेरह व चैदह वर्ष की कन्या का विवाह उसके पिता की आयु के बराबर व्यक्ति से कर दिया जाता था। पत्नी जब यौवन की दहलिज पर पहुंचती पति के पैर कब्र में पहुंचने लगते। समय के साथ परिवर्तन आए और स्त्रियों को स्वतंत्रता जागी। वैचारिक स्वतंत्रता प्रमुख थी। उसमें। अब वे शादी विवाह के मामले में मुखर हो गई थी। यदि कोई युवती अपने से छोटे उम्र के युवक को पति बनाना चाहे तो कोई समाज का बंधन या कानून का बंधन उसे नहीं रोक सकता। वैवाहिक मतभेद तो समान आयु वाले जोड़ों में या पत्नी के छोटी उम्र्र के होने पर भी होते हैं, फिर उम्र का फासला इतना महत्वपूर्ण क्यों हो? समय के साथ-साथ शिक्षा का प्रचार होन से स्त्रियां जागरूक हुई है। अधिकांश छोटी उम्र में घर बसा कर पति और बच्चों में व्यस्त होने के बजाय कैरियर बनाने को प्राथमिकता देने लगी है। घर परिवार में उनका निर्णय भी महत्व रखने लगा है। जिसके चलते वैवाहिक संबंधो में उम्र की दूरियां भी घटने लगी है। कुछ साल का ही अंतर रह गया है पति पत्नी के बीच कभी-कभी एकाध साल या कभी तो लगभग समान आयु वालों में भी संबंध होने लगे है। अब विवाह संबंध के लिए पति का उम्र में बड़ा होना अति आवश्यक नहीं माना जाता बल्कि बहुत सी जोड़ियों में पति कम उम्र के भी होते है और पत्नी उम्र में उनसे बड़ी।
समाज शास्त्रियों के अनुसार लड़कियां जल्दी परिवक्व और समझदार हो जाती है। जबकि लड़को को विकसित होने में कुछ देर लगता है। यह भी एक कारण है कि विवाहित युगल में लडके की उम्र अधिक होना समाज की दृष्टि में ठीक माना जाता है। यही कारण है कि कानूनन भी लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु अठारह वर्ष है और लड़कों के लिए इक्कीस वर्ष। मगर आज की सोच के अनुसार उम्र बड़ी या छोटी होना समझदारी का पैमाना नहीं है। कहा भी गया है कि अक्ल का होता नहीं है वास्ता कुछ उम्र से, अगर नहीं आती तो सौ बरस तक भी नहीं आती। अब तो शादी ब्याह दिल का मामला हो गया है। जिस पर दिल आ जाए उसी से शादी की जाएं।
लड़कियों का अपने से कम उम्र के लड़के से शादी का प्रचलन नया नहीं है, इससे पहले भी यह होता आया है और ऐसी शादियां सफल भी इुई है। कुछ प्रसिद्ध हस्तियां जैसे सुनील दत्त, सचिन तेंदुलकर। व्यवाहिक जीवन के लिए जो बात मायने रखती हैं वह है अंडरस्टैडिंग जो इन जोड़ों में और जैसे और बाकि सफल जोड़ो में रही। विरोधाभास कहां नहीं हैं? हर सिक्के के दो पहलु होते है। कई बार पति के उम्र में छोटे होने पर समस्याएं खड़ी हो जाती है जैसे- जिम्मेदारियों के बोझ से पत्नी की उम्र कुछ वक्त बाद परिपक्कता के चलते बड़ी दिखने लगती है और दूसरी तरफ पति देव की उम्र बढ़ने के साथ उसमें रंगीन मिजाजी चरम सीमा पे पहुंच जाती है। अपनी पत्नी प्रौढ़ा लगने लगती है। ऐसे में प्यार सामिप्य कम होने लगता है और रिश्तों में विरोधाभास बढ़ता चला जाता है।
कोई भी परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चले तो वह वैचारिक सत्वता बन जाती है। जिसे तोड़ना समाज में उथल पुथल को जन्म देता है। विवाह में भी इसी लिए पुरूष को बड़ा होना माननीय है क्योंकि लीक से हटकर किए गए फैसले दंपति में फासले ही लाएंगे।
हमारे पूर्वजों ने जो नियम बनाएं उन में वैज्ञानिक सोच भी शामिल थी। नियम तो सही है कि लड़के और लड़की की उम्र में दो पांच साल का फासला होना ही आदर्श अंतर है। क्यूंकि लड़कियां अपने अचेतन पति में पिता का सामथ्र्य खोजती है जो उन्हें छोटी उम्र की पति में नहीं मिलता और लड़के पत्नी में मां की छवि अपेक्षा करते है। यानि सहचर्या के साथ ममता भी चाहते है।
आज पति का उम्र में पत्नी से छोटी होना कोई समस्या नही लगता कुछ समय से यह चलन बढ़ा है, दोना तरफ से वफादारी और प्रेम स इस रिश्ते को सिंचा जाएं तो छोटे उम्र का पति भी सफल पति साबित होगा, बड़ी उम्र की पत्नी भी पति की प्रिय बनी रहेगी। उम्र का अंतर पृष्ठभूमि की भिन्नता तथा यहां तक की कुछ मामलों में वैचारिक मतभेद भी उनके सुखद वैवाहिक जीवन में अर्चन नहीं बन पांए।