बिंदी का महत्व

माथे पर लगी बिंदी महिलाओं का सौंदर्य बढ़ाती है ये तो हम सभी जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये बिंदी सिर्फ सौंदर्य ही नही बढ़ाती बल्कि स्वास्थ्य के लिये भी बहुत लाभकारी होती है
1. चेहरे के मसल्स को मजबूत करती है जिससे की झुर्रियों का आना कम होता है। बिन्दी लगाने से ये चेहरे के मसल्स में रक्त का प्रवाह बढ़ता है इससे मसल्स लचीले होते हैं और झुर्रियां कम होती हैं।
2. भौंह के बीच की लाइन को कम करती है- इसको लेकर बहुत सारे प्रॉबल्म होते हैं जो मसाज करने पर कम हो जाते हैं। मसाज से ब्लड सरकुलेशन बढ़ जाता है।
3. एकाग्रता के केंद्र- बिंदी को दो भौंह के बीच लगाया जाता है। जहां शरीर के सभी नसें एक जगह मिलते हैं। इसको अग्नि चक्र कहते हैं। इस जगह को तृतीय नेत्र भी कहते हैं। बिन्दी लगाने से मन शांत और तनाव कम होता है।
4. सिरदर्द से राहत- एक्यूप्रेशर के अनुसार माथे के इस बिन्दु को मसाज करने से सिरदर्द से तुरन्त राहत मिलती है, क्योंकि इससे नसों और रक्त कोशिकाओं को आराम मिलता है।
5. साइनस से आराम- इस प्वाइंट को मसाज करने पर रक्त का संचालन नाक के आस-पास अच्छी तरह से होने लगता है जिससे साइनस के कारण सूजन कम हो जाता है और बंद नाक खुल जाता है। इससे बहुत आराम मिलता है।
6. मन को शांत करती है- भौंह के बीच का ये हिस्सा बेहद संवेदनशील होता है तनाव होने पर हमारा यही हिस्सा दुखने लगता है। बिंदी इसको शांत करके क्षति को पूर्ण करने में मदद करती है।
7. अनिद्रा से राहत- बिंदी लगाने से चेहरा, गर्दन, पीठ और शरीर के ऊपरी भाग के मसल्स को आराम मिलता है जिससे अनिद्रा की बीमारी से राहत मिलती है।
8. एक तरफ के चेहरे का पक्षाघात के लक्षण से दिलाती है राहत- इस प्वाइंट को मसाज करने से चेहरे के नसें उत्तेजित हो जाती हैं और इस बीमारी के लक्षणों से राहत मिलती है।
आयुर्वेद में इसको ’शिरोधरा’ कहते हैं। इसमें 40-60 मिनट तक मेडिकेटेड ऑयल को कपाल के इस बिन्दु में मसाज किया जाता है।
9. आँखों के मसल्स के लिए अच्छा होता है- माथे के मध्य का ये केंद्रबिन्दु की नसें आँखों के मांसपेशियों से संबंधित होते हैं जो अगल-बगल देखने और स्पष्ट देखने में मदद करती हैं।
10. श्रवणशक्ति बेहतर होती है- जो नस चेहरे के मसल्स को उत्तेजित करती है वह कान के भीतर के मसल्स से सुदृढ़ करके कान को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

सर्दियों में मेकअप करते समय ध्यान रखें ये बातें

चेहरे को यंग और अट्रैक्टिव लुक देने के लिए जरूरी है कि आपको मेकअप की सही और पूरी जानकारी हो। आज कल हैवी मेकअप का चलन नहीं है। अब मेकअप हमेशा लाइट और नेचरल ही रखा जाता है। जानें मेकअप की सही तरीका।
सनस्क्रीन से करें शुरुआत – यंग लुक के लिए चेहरे की त्वचा पर ओस की बूंदों की तरह ताजगी होना जरूरी है। चाहे बदली हो या तेज धूप, चेहरे पर हर दिन सबसे पहले सनस्क्रीन लगाने की आदत डालें। अगर आपकी त्वचा सेंसिटिव है तो टिंटेड मॉइश्चराइजर लगाएं। यह चेहरे पर फाउंडेशन के तौर पर काम करेगा। अगर आपकी स्किन ऑइली है तो चेहरे को गुनगुने पानी से धोकर सुखा लें और इसके बाद सनस्क्रीन अप्लाई करें।
कंसीलर -कंसीलर चेहरे के मुहांसों, दाग-धब्बों और आंखों के नीचे डार्क सर्कल को छिपाने के लिए यूज किया जाता है। ध्यान रखें, हमेशा स्किन टोन के अनुसार ही कंसीलर का इस्तेमाल करें। इसे बीच वाली अंगुली यानी रिंग फिंगर के पोर में लेकर चेहरे पर लगाएं। फिर उसे स्पॉन्ज से फैलाएं। कंसीलर को चेहरे के उसी स्पॉट पर लगाएं, जहां इसकी ज्यादा जरूरत है।
फाउंडेशन –
चेहरे पर टिंटेड मॉइश्चराइजर या फाउंडेशन लगाएं ।
फाउंडेशन लगाने के लिए फोम स्पॉन्ज यूज करें।
ध्यान रहे, फाउंडेशन आपकी स्किन टोन से मेल खाता हुआ होना चाहिए।
चेहरे पर ग्लो लाने के लिए फाउंडेशन लगाने से पहले मॉइश्चराइजर लगाएं।
अगर आपकी स्किन टोन डार्क है तो उसे लाइट कलर के फाउंडेशन से न छिपाएं।
पीली रंगत वाली त्वचा पर लाइट ऑरेंज टिंट वाला फाउंडेशन लगाएं।
आंखें – आई लाइनर लगाने के कई तरीके हैं। मेकअप एक्सपर्ट्स आंखों की सुंदरता को तीन भागों में बांटते हैं- बेसिक आई, स्मोकी आई और कैट आई।
बेसिक आई के लिए ऊपर और नीचे की पलकों पर आई लाइनर लगाना चाहिए।
आंखें छोटी हों या बड़ी, आई लाइनर या पेंसिल से उसे बड़ा या छोटा लुक दिया जा सकता है। आईशैडो भी लगा सकती हैं। इसे लगाने से आंखें बड़ी और खूबसूरत दिखती हैं। मस्कारा आई लैशेज के नीचे लगता है।
लिप्स – होठों को किस तरह का ट्रीटमेंट देना है, यह आप पर निर्भर करता है। कोई सिर्फ लिप लाइनर लगाता है तो कोई होंठों पर कलरफुल लिप ग्लॉस लगाता है और कोई लिप बाम। मेकअप एक्सपर्ट की मानें तो लिपस्टिक से बेहतर कलरफुल लिप ग्लॉस है। सिल्की और नॉनस्टिकी लिप ग्लॉस से होंठ सॉफ्ट बने रहते हैं। लिप ग्लॉस में मौजूद विटामिन ई होंठों पर पपड़ी नहीं बनने देता, जिससे लिप्स खूबसूरत दिखते हैं।
पिंक या इससे मिलते-जुलते लिप ग्लॉस के शेड्स लिप्स पर बहुत खिलते है

जब खरीदने को शादी के कंगन (चूड़ा) तो इन बातों का रखें ध्यान

शादी में दुल्हन के लिए जितना क्रेज लहंगे का होता है, उससे कई गुना अधिक वो ध्यान देती है कंगन की खरीददारी में। लहंगे की अहमियत तो जयमाल के समय होती है लेकिन कंगन शादी के कई माह बाद तक नव वधू के हाथों की शोभा बढ़ाते है। नई-नवेली दुल्हन जींस, सलवार और साड़ी के साथ शादी में पहने गए कंगनों को शान से धारण करती है। सदाबहार प्लेन कंगन शिवाला के चूड़ी विक्रेता राशिद बताते है, ”प्लेन कंगन हमेशा डिमांड में रहते है। लाल रंग शादी में शुभ माना जाता है इसलिए भले ही नववधू कितने ही डिजाइनर कंगन क्यों न खरीदें लेकिन वह लाल व महरून कंगनों को खरीदना नहीं भूलती।’’ फैशन के लिहाज से भी यह कंगन सदाबहार रहते है। इनकी बिक्री पूरे वर्ष बनी रहती है।
हर ड्रेस से मैचिंग – अगर प्लेन से अलग स्टाइलिश लुक चाहती है तो नग वाले कंगनों का चयन बेहतर रहेगा। यह मेटल और लाख दोनों में ही आते है। ज्यूलरी डिजाइनर सुपर्णा निगम बताती है। अगर आप ट्रेड के हिसाब से कंगनों का चयन करती है तो मेटल वाले कंगनों के बीच में लाख के नग वाले कंगनों को ट्राय कर सकती है।
पारंपरिक है बीकानेरी – धनकुट्टी स्थित श्रीकृष्णा बुटीक की फैशन डिजाइनर सारिका अग्रवाल कहती है, ”शादी में पारपरिक बीकानेरी कंगनों की डिमाड खास होती है। चटख रगों के इन कंगनों की विशेषता है कि इनका रग फेड नहीं होता। लाल और महरून रग के बीकानेरी कंगन उत्तर भारत में शादी के अवसर पर नई दुल्हन के लिए शुभ माने जाते है।
लिखवाएं दिल की बात – बिसाती बाजार के चूड़ी विक्रेता नईम भाई बताते है, ”इन दिनों जीवन साथी का नाम कंगनों पर लिखवाने का ट्रेड जोरों पर है। हमारे पास बहुत सी ऐसी गर्ल्स आती है जो कंगनों पर अपना और अपने होने वाले पति का नाम या दिल बनवाती है। यह काम ऑर्डर पर किया जाता है और नगों के हिसाब से इसका चार्ज कंगनों की कीमत से अलग लिया जाता है।c

शादी से पहले घटाएं वजन

अपनी शादी को लेकर हर लड़की के अरमान होते हैं कि वो खूबसूरत दिखे। शादी के दिन हर किसी की नजरें उस पर टिकी रहे और हर कोई उसकी खूबसूरती की तारीफ करे। ऐसे में अगर कोई लड़की अपने मोटापे से परेशान हैं और शादी की तारीख बस आने ही वाली है तो उसके लिए हमारे पास है उसका समाधान तो चलिए एक नजर डालते हैं।
1- इतने कम समय में आपको जब मोटापा कम करना है तो ऐसे में खाने की मात्रा बिल्कुल कम न करें। शरीर को 1200 कैलोरी की प्रतिदिन जरुरत होती है। ऐसे में आप 1000 से कम कैलोरी किसी भी स्थिति में न लें। इससे थकान और उर्जा की कमी नहीं होगी।
2- खाने में तैलीय और स्पाइसी चीजों से परहेज करें। लो कैलोरी फूड खाएं। उबली हुई सब्जियां भी फायदेमंद होंगी। शूगर फ्री जूस, सूप, ग्रीन टी, नारियल पानी, नींबू पानी का सेवन कुछ घंटों में कर सकते हैं। इससे आपके चेहरे की चमक बरकरार रहेगी और वजन कम करने मे भी ये कारगार साबित होगा।
3- बिस्किट, ब्रेड, नमकीन, चॉकलेट, चिप्स जैसी चीजों से परहेज करें। मैदे की चीजें बिल्कुल न खाएं। सूप और जूस के मामले में भी बाजार की चीजों के बजाए घर पर ही बनाकर लें।
4-फल, सब्जियां, सलाद एवं सूखे मेवों को आहार में ज्यादा से ज्यादा शामिल करें। इससे आपके शरीर में पोषण की कमी नहीं होगी और उर्जा बनीं रहेगी। इसके अलावा आपका पेट भी जल्दी भर जाएगा।
5- सुबह और शाम के समय लगभग 1 घंटा पैदल चलें और कार्डियो व्यायाम करें। लगभग 1 से डेढ़ घंटा कार्डियो करें। इसके अलावा योगा करने से भी शरीर सही आकार में आएगा।
6- सुबह खाली पेट गरम पानी में नींबू-शहद या फिर दालचीनी का पाउडर लें। आप चाहें तो हरा धनिया और नींबू का जूस बनाकर भी खाली पेट ले सकते हैं यह भी वजन कम करने में सहायक है।

सर्दी में निकलती त्वचा से बचाव के 5 उपाय

सर्दी के दिनों में त्वचा का रूखा और बेजान होना, कई बार त्वचा की परतों के निकलने का कारण भी बनता है। इससे बचने के लिए जरूरत है त्वचा की विशेष देखभाल की। जानिए कौन से उपाय बचाएंगे आपकी त्वचा को निकलने से –
1 अगर आपकी त्वचा बेहद रूखी अैर बेजान हो चुकी है और उसकी परतें निकल रही हैं, तो पहले स्क्रब की सहायता से मृत त्वचा को हटाएं। इससे आपकी त्वचा साफ होगी और इसके बाद आप इससे अच्छी तरह से चिकनाई प्रदान करें।
2. त्वचा को चिकना और नमीयुक्त बनाए रखने का पुराने जमाने का सबसे बेहतरीन उपाय है घी। बस रात को सोते समय अपनी त्वचा पर अंगुलियों के पोरों से घी लगाएं और तब तक मसाज करें, जब तक आपकी त्वचा इसे पूरी तरह से सोख न ले। सुबह उठकर आप पाएंगे नर्म, मुलायम और चिकनी त्वचा।
3. वैसलीन यानि पेट्रोलियम जैली का इसतेमाल भी त्वचा को जरूरी चिकनाई देने में मदद करेगा। इसे लगाने के बाद त्वचा का रूखापन समाप्त हो जाएगा और त्वचा निकलनी बंद हो जाएगी। घर पर भी आप पेट्रोलियम जैली बना सकते हैं।
4. घर में रखा नारियल तेल भी त्वचा के लिए बढ़िया विकल्प है। रात को सोने से पहले और दिन में नहाने के तुरंत बाद नारियल तेल से मसाज करें। इससे त्वचा में आसानी से चिकनाई पहुंचेगी और रूखी त्वचा में बेहद लाभ होगा।
5. भरपूर मात्रा में पानी पीना भी आपको इस समस्या से निजात दिला सकता है। शरीर में नमी बनी रहने से त्वचा में रूखापन नहीं आता और त्वचा का निकलना कम होता है। इसके अलावा आप जूस या फलों का सेवन भी कर सकते हैं।

आंखों के नीचे के डार्क सर्कल्स ऐसे करें विदा

आंखों के नीचे के काले घेरे बढ़ती उम्र के बताते हैं। काले घेरे से परेशान हैं, तो ठंडे टी(चाय) बैग या मलाई आजमाएं, ये डार्क सर्कल्स को कम करने में मददगार हैं।

टी बैगः रेफ्रिजरेटर में आधे घंटे तक रखे गए दो ब्लैक या ग्रीन ठंडे चाय के बैग का इस्तेमाल करें। उन्हें दोनों आंखों पर रखें और 10-15 मिनट तक वहीं रहने दें। इसके बाद उन्हें हटाएं और अपना मुहं धो लें इस प्रक्रिया को कुछ सप्ताह तक दो बार करें।

ठंडक : ठंडे पानी या दूध में भीगा हुआ साफ कपड़ा लें और कुछ मिनटों के लिए इन्हें अपनी पलकों के पास रखें। मुलायम कपड़ों में बर्फ का टुकड़ा लपेटें और कुछ मिनटों तक इसे अपनी आंख के पास रखें।

मलाई : दो चम्मच मलाई और एक चौथाई चम्मच हल्दी मिलाएं। इसे काले घेरों पर लगाएं। इसे 15 से 20 मिनट तक रहने दीजिए, बाद में इसे गुनगुने पानी से धो लें।

पुदीना : पुदीने की पत्तियों को हाथों से पीस लें। पुदीने की पत्तियों में नींबू का रस मिलाएं। इसे 15 से 20 मिनट तक लगाएं। इसके बाद धो लें। इसे रोजाना दो बार करें।

पत्नी कमाए पति खाएं कहां तक उचित है

हमारे यहां कहा जाता है कि पति पत्नी जीवन की गाड़ी के दो पहिए है और एक दूसरे के समन्वय के बिना जीवन की गाड़ी खींचना मुश्किल है। परंतु कई बार जीवन में ऐसे मोड़ भी आते है जब एक पहिया लड़खड़ाने लगते है और इस लड़खड़ाहट के कई कारण होते है और उनमें एक है जब पत्नी कमाऊ हो जाती है और पति गैर जिम्मेदार। किसी पति से यदि आप पूछे तो क्या वह हामी भरेगा कि वह गैर जिम्मेदार हो गया है? कभी नही, परंतु यदि हम अपने आस पास देखे तो हमें ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे जहां पत्नी की कमाई से घर चलने लगता है तो पति को व्यापर करने की सुझती है या फिर आराम करने की। हमारे घरों में काम करने वाली बाईयों का हाल किसी से छुपा नहीं है। उनके पति उनकी कमाई पर ही नशा करते है यह स्थिति हमें निम्न वर्ग में हर जगह नजर आएगी। एक ओर शिक्षा और बदलते वातावरण ने महिलाओं को जागृति दी है वहीं दूसरी ओर इस शिक्षा और कुछ न कुछ काम करने की तमन्ना ने उनको दो पाटों के बीच पीसने पर मजबूर कर दिया है। आज कल बड़े शहरों में ज्यादातर महिलाएं कमाने लगी है। काम कसकर चाहे कोई भी हो, हर महिला चाहती है उसके घर में अतिरिक्त आय हो।
श्रीमति विमला अग्रवाल एक उच्च वर्गीय परिवार की सदस्य है उनके घर में ऐशोआराम की सभी चीजे है। पैसों की बहुलता और नौकरों की बहुत आयत ने विमला को प्रेरणा दी कि वे भी कुछ काम करें। वह बेकार बैठना नहीं चाहती थीं। इसलिए उन्होंने अपने घर के गैरेज में एक दो औरतों को रखकर वंदनवार और शादी विवाह के अवसर पर काम आने वाली ट्रे बनाना शुरू किया। उनका काम चल निकला और अब उसके पति सुनील भी पारिवारिक व्यापार में हाथ बटाने लगे और फिर धीरे धीरे घर पर ही रहने लगे और फिर घर में रोज शाम को ताश की चोकड़ी जमने लगी। उनके दोस्त रोजाना शाम को घर आ जाते और ताश खेली जाती। विमला परेशान रहने लगी। सुनील का कहना था कि जब विमला कमाती है तो उसे कमाने की क्या जरूरत है। कल तक मैं कमाता था आज अगर विमला कमाती है तो इसमें बुराई क्या और पुरूष का गैर जिम्मेदार होने का आरोप क्यों हो मुझ पर। लेकिन विमला को इस बात पर नाराजगी थी कि पत्नियां अगर घर में रहती है तो वो बच्चों को संभालती है और घर की बाकी जिम्मेदारियों को पूरा करती है। वे पति की तरह ताश नहीं खेल सकती। जबकि पति न बच्चों को संभाल सकते है और न ही मेहमानों की आवाभगत कर सकते है तो ये गैर जिम्मेराना ही तो हुआ। कई बार पुरूष के काम बंद करने के कारण कुछ और होते हैं। चूंकि पत्नी काम करते-करते थक जाती है, इसलिए वह पति के काम न करने से परेशान हो जाती है। परंतु कई पुरूष इस पर सवाल उठाते हैं कि यदि पुरूष काम करता है और पत्नी घर में रहती है तो कोई नहीं कहता कि पत्नी गैर जिम्मेदार हो गई है। आजकल सच्चाई है कि ज्यादातर मध्यम और उच्चवर्गीय घरों में घर के काम के लिए अतिरिक्त मदद ली जाती है। परंतु पुरूष को अपना काम स्वतः ही करना पड़ता है। जो बात हमें गैर जिम्मेदार लगती है, वह दूसरे की मजबूरी भी हो सकती है। यह तो परिस्थितियां ही बता सकती हैं कि असलियत क्या है। यह सच है कि पत्नी के काम करने से पति का व्यवहार थोड़ा लापरवाह हो जाता है क्योंकि वह अंदर से आश्वस्त होता है कि पत्नी का घर में सहयोग मिलेगा और उसे अकेले ही सारे खर्च नही चलाने पडेंगे। परंतु इसे गैर जिम्मेदाराना कहना गलत होगा। इस तरह की गैर जिम्मेदारी ज्याददातर निम्न आयवर्गीय लोगों में मिलती है। मध्यम और उच्चआय के दर्जे के लोगों की यह कोशिश रहती है कि यदि पत्नी काम करती है तो घर में कुछ बचत भी हो जाए। पति गैरजिम्मेदार तभी होता है जब उसे महसूस हो कि पत्नी से घर खर्च भली भांति चल रहा है। तब वो भूल जाता है कि उसका भी घर के प्रति कोई कर्तव्य है। पुरानी परिपाटी की पीढ़ी का मानना है कि महिलाओं का बाहर जाकर ही काम करना ही गलत है। क्यूंकि घर में क्या कम काम है जो बाहर जाने की जरूरत पड़े। स्वतंत्रता कि यह पराकाष्ठा है। और इसी का परिणाम है कि पति अपने मार्ग से भटकते है और ये भटकन लापरवाही को जन्म देती है और पति गैर जिम्मेदार होते है। पुरूष जब नारी को अपने से आगे बढ़ता देखता है तो उसके मन में हीन भावना जागृत होती है और यही भावना उसे गैर जिम्मेवार बनाती है।

जब पति हो उम्र में छोटा

ना उम्र की सीमा हो, ना जन्मों का हो बंधन
जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन,
कुछ रिश्तें हमे जन्म के साथ ही प्राप्त होते है जिनमें हम चाहकर भी परिवर्तन नहीं कर सकते। जैसे माता-पिता, भाई बहन इत्यादी। किंतु जो रिश्ते जीवन के दौरान बनते है उनमें हमें चुनाव की स्वतंत्रता होती है जैसे पति पत्नी, बहु, दामाद, मित्र, सखा, संबंधी इसी तरह शादी ब्याह ऐसा ही एक संबंध है जिसमें हम चुनाव कर सकते है। आयु, परिवार, जाति, राज्य सभी मामलों में नियम न होने के बाद भी हम समाज द्वारा बनाये गए नियमों पर ही चलते आ रहे है। जिसमें तय है विवाह अपनी जाति में हो, बराबर के परिवार में हो, पति उम्र में बड़ा हो और दोनों की समाजिक और आर्थिक स्थिति में ज्यादा अंतर न हो। बदलते परिवेश में समय के साथ साथ इन मान्यताओं पर ध्यान तो दिया जाता है परंतु पालन नहीं। अब लड़के लड़कियां अपनी पसंद और इच्छानुसार शादी विवाह करने लगे तो जाति, धर्म, आयु, गोत्र, परिवार के बंधन भी ढीले पड़ने लगे है। दरअसल जब दिल का मामला हो तो फिर अन्य सारी बातें गौण हो जाती है। ऐसे कई मामलों में लड़कियां उम्र में अपने से छोटे लड़के से शादी कर लेती है। कुछ जोड़े तो उम्र भर सफलता पूर्वक साथ निभाते है। परंतु कुछ मामलों में ये सफर दो चार कदम चल कर अलग राह पकड़ लेता है।
हमारे समाज में विवाह मात्र दो प्राणियों का मिलन न होकर दो परिवारों का समन्वय होता है। जहां परिवार की मर्यादा बचाए रखने के लिए कई बार लोग न चाहते हुए भी मजबूरन एक दूसरे से निभा लेते है। ऐसी स्थिति में पति पत्नी के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों से भी परिपक्वता की उम्मीद की जाती है। आमतौर पर स्त्री, पुरूष की अपेक्षा अधिक सहनशील और परिपक्व मानी जाती है। इसी कारण आमतौर पर वर वधु से अधिक उम्र का ही ढूंढा जाता है यही परंपरा बन गयी है कि विवाहिक जीवन के सुख पूर्ण होने के लिए पति को पत्नी से उम्र में बड़ा होना चाहिए। एक समय था जब बालविवाह कर दिए जाते थे, कुलीन परिवार में कन्या का विवाह करने की चाह में बेमेल विवाह भी कर दिए जाते थे। कई बार तो मात्र तेरह व चौदह वर्ष की कन्या का विवाह उसके पिता की आयु के बराबर व्यक्ति से कर दिया जाता था। पत्नी जब यौवन की दहलिज पर पहुंचती पति के पैर कब्र में पहुंचने लगते। समय के साथ परिवर्तन आए और स्त्रियों को स्वतंत्रता जागी। वैचारिक स्वतंत्रता प्रमुख थी उसमें। अब वे शादी विवाह के मामले में मुखर हो गई थी। यदि कोई युवती अपने से छोटे उम्र के युवक को पति बनाना चाहे तो कोई समाज का बंधन या कानून का बंधन उसे नहीं रोक सकता। वैवाहिक मतभेद तो समान आयु वाले जोड़ों में या पत्नी के छोटी उम्र के हाने पर भी होते हैं, फिर उम्र का फासला इतना महत्वपूर्ण क्यों हो? समय के साथ-साथ शिक्षा का प्रचार होने से स्त्रियां जागरूक हुई हैं। अधिकांश छोटी उम्र में घर बसा कर पति और बच्चों में व्यस्त होने के बजाय कैरियर बनाने को प्राथमिकता देने लगी हैं। घर परिवार में उनका निर्णय भी महत्व रखने लगा है। जिसके चलते वैवाहिक संबंधो में उम्र की दूरियां भी घटने लगी हैं। कुछ साल का ही अंतर रह गया है पति पत्नी के बीच, कभी कभी एकाध साल या कभी तो लगभग समान आयु वालों में भी संबंध होने लगे हैं। अब विवाह संबंध के लिए पति का उम्र में बड़ा होना अति आवश्यक नहीं माना जाता बल्कि बहुस सी जोड़ियों में पति कम उम्र के भी होते है और पत्नी उम्र में उनसे बड़ी।
समाज शास्त्रियों के अनुसार लड़कियां जल्दी परिपक्व और समझदार हो जाती है। जबकि लड़कों को विकसित होने में कुछ देर लगता है। यह भी एक कारण है कि विवाहित युगल में लडके की उम्र अधिक होना समाज की दृष्टि में ठीक माना जाता है। यही कारण है कि कानूनन भी लडकियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु अठारह वर्ष है और लड़कों के लिए इक्कीस वर्ष। मगर आज की सोच के अनुसार उम्र बड़ी या छोटी होना समझदारी का पैमाना नहीं है। कहा भी गया है कि अक्ल का होता नहीं है वास्ता कुछ उम्र से, अगर नहीं आती तो सौ बरस तक भी नहीं आती। अब तो शादी ब्याह दिल का मामला हो गया है। जिस पर दिल आ जाए उसी से शादी की जाएं।
लड़कियों का अपने से कम उम्र के लड़के से शादी का प्रचलन नया नहीं है, इससे पहले भी यह होता आया है और ऐसी शादियां सफल भी हुई है। कुछ प्रसिद्ध हस्तियां जैसे सुनील दत्त, सचिन तेंदुलकर। व्यवाहिक जीवन के लिए जो बात मायने रखती है वह है अंडरस्टैडिंग जो इन जोड़ों में और इन जैसे और बाकि सफल जाड़ो में रही। विरोधाभास कहां नहीं है? हर सिक्के के दो पहलू होते है। कई बार पति के उम्र में छोटे होने पर समस्याएं खड़ी हो जाती है जैसे – जिम्मेदारियों के बोझ से पत्नी की उम्र कुछ वक्त बाद परिपक्वता के चलते बड़ी दिखने लगती है और दूसरी तरफ पति देव की उम्र बढ़ने के साथ उसमें रंगीन मिजाजी चरम सीमा पे पहुंच जाती है। उसकी दिलचस्पी कम उम्र की लड़कियों की तरफ बढ़ने लगती है। अपनी पत्नी प्रौढ़ा लगने लगती है। ऐसे में प्यार सामिप्य कम होने लगता है और रिश्तों में विरोधाभास बढ़ता चला जाता है।
कोई भी परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चले तो वह वैचारिक सत्वता बन जाती है। जिसे तोड़ना समाज में उथल पुथल को जन्म देता है। विवाह में भी इसी लिए पुरूष को बड़ा होना माननीय है क्योंकि लीक से हटकर किए गए फैसले दंपति में फासले ही लाएंगे।
हमारे पूर्वजों ने जो नियम बनाएं उन में वैज्ञानिक सोच भी शामिल थी। नियम तो यही है कि लड़के और लड़की की उम्र में दो पांच साल का फासला होना ही आदर्श अंतर है। क्यूंकि लड़कियां अपने अचेतन पति में पिता का सामर्थ्य खोजती है जो उन्हें छोटी उम्र की पति में नहीं मिलता और लड़के पत्नी में मां की छवि अपेक्षा करते है। यानि सहचर्या के साथ ममता भी चाहते है।
आज पति का उम्र में पत्नी से छोटा होना कोई समस्या नहीं लगता कुछ समय से यह चलन बढ़ा है, दोनो तरफ से वफादारी और प्रेम से इस रिश्ते को सिंचा जाएं तो छोटे उम्र का पति भी सफल पति साबित होगा, बड़ी उम्र की पत्नी भी पति की प्रिय बनी रहेगी। उम्र का अंतर पृष्ठभूमि की भिन्नता तथा यहां तक की कुछ मामलों में वैचारिक मतभेद भी उनके सुखद वैवाहिक जीवन में अर्चन नहीं बन पांए।

सरसों तेल के ब्यूटी सीक्रेट्स

मस्टर्ड ऑयल जिसे साधारणत सरसों के तेल से जाना जाता है और जिसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल घर के किचन में होता है। सरसों का तेल ना सिर्फ हमारे खाने को स्वादिष्ट बनाता है बल्कि हमारे हेल्थ, हेयर और स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद है। इसलिए अगर आप महंगे कॉस्मेटिक्स पर पैसे और समय बर्बाद किये बिना प्राकृतिक सुंदरता और स्वास्थ्य की कामना करती हैं तो सरसों का तेल आपके लिए बेस्ट च्वाइस है।

बालों के लिए – बालों पर सरसों के तेल का नियमित इस्तेमाल इन्हें समय से पहले सफेद होने से रोकता है। ये आपके बाल को पकने से बचाता है और साथ ही इसे जड़ से मजबूत भी बनाता है। बालों को नेचुरली ग्रोथ देता है। विटामिन, मिनरल, आयरन और कैल्शियम जैसे तत्व भरपूर मात्रा में बालों को मिलते हैं। इसमें बीटा केरेटिन भारी मात्रा में पाया जाता है जो बालों के लिए बहुत जरुरी होता है। इसके नियमित मसाज से बाल लंबे और घने होते हैं। बराबर मात्रा में ऑलिव ऑयल, कोकोनट ऑयल और मस्टर्ड ऑयल मिला कर बालों पर लगाने से बालों के गिरने की समस्या से भी छुटकारा मिलता है। ये प्रक्रिया सप्ताह में दो बार अवश्य करें। बालों की जड़ों में होने वाले फंगल प्रॉब्लम से भी ये निजात दिलाता है।

स्किन के लिए – सूरज की हानिकारक किरणों से होने वाले टैनिंग से भी छुटकारा दिलाता है और स्किन को चमकदार बनाता है। कोकोनट ऑयल और मस्टर्ड ऑयल को बराबर मात्रा में मिलाकर इसे चेहरे पर दस से बारह मिनट तक मसाज करें। ये आपके स्किन कॉम्प्लेक्शन को फेयर बनाता है। इसमें उपस्थित विटामिन ‘ई’ एक नेचुरल सनस्क्रीन की तरह बॉडी पर काम करता है। इसके नियमित इस्तेमाल से स्किन कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है साथ ही स्किन में होने वाले झुर्रियों से भी छुटकारा मिलता है। डार्क स्पॉट्स को हटाता है। एक बड़ा चम्मच बेसन में चंदन पाउडर, शहद औऱ मस्टर्ड ऑयल मिक्स करें। इस पेस्ट को अपने फेस पर पैक की तरह इस्तेमाल करें और धीरे धीरे चेहरे पर मसाज करें। थोड़ी देर के बाद इसे साफ पानी से धो दें। स्किन रैशेज को भी हटाता है इसके अलावा ये लिप मॉइश्चराइजिंग के लिए भी अच्छा काम करता है। सोने के पहले लिप पर और बेली बटन पर मस्टर्ड ऑइल लगायें।

स्वास्थ्य के लिए – स्किन कैंसर के रिस्क को कम करता है। कोल्ड और कफ में भी ये काफी फायदेमंद होता है। मस्टर्ड ऑइल में अजवाइन मिलाकर बॉइल करें और चेस्ट पर सोने से पहले लगायें। ये आपको कोल्ड में काफी मददगार साबित होगा। अस्थमा के मरीजों के लिए भी ये काफी फायदेमंद होता है। बॉडी दर्द में भी ये काफी कारगर होता है। रात के समय इसे गर्म करके अपनी बॉडी पर लगायें इससे दर्द में राहत मिलती है।

मन में नेगेटिव विचार आते हैं तो जिंदगी में जरूर लाएं ये 5 बदलाव

कई बार मन में नकारात्मक विचार कुछ इस तरह घर कर जाते हैं कि हमारी सोच ही नकारात्मक होती जाती है और जीवन में सिर्फ निराशा ही दिखती है। नकारात्मक विचार मन में जितने अधिक होंगे अवसाद उतनी ही तेजी से हमें घेरेगा। ऐसे में इन्हें खुद से दूर रखने का हर संभव प्रयास हमारे लिए जरूरी है। अगर आप भी अक्सर ऐसे ही नकारात्मक भावों से घिर जाते हैं तो अपने भीतर छोटे-छोटे बदलाव करें और सकारात्मक दिशा में बढ़ें।

मनोविज्ञान को समझें – मनोविज्ञान में नकारात्मक भावों से दूर रखने के लिए कॉग्नीटिव बिहेवियरल थेरेपी, साइकोथेरेपी आदि विधाओं में कई उपाय हैं। आप इनसे संबंधित किताबें पढ़ सकते हैं जिससे बहुत हद तक आपकी सोच में बदलाव आएगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

दौर बीत जाता है – हर समस्या का अपना एक दौर होता है जो जीवन में कभी न कभी आता है और बीत भी जाता है। ऐसे में किसी समस्या को अपने जीवन से इतना बड़ा न बनाएं कि वह दौर आपको अपने आप से बड़ा लगने लगे। बड़ी से बड़ी समस्या को आप सिर्फ एक दौर मानकर चलें तो मन में निराशा कभी बैठ ही नहीं सकती।

अपनी काबिलियत को न भूलें – हो सकता है समय सही न हो, हो सकता है आपकी किसी गलती का खामियाजा आपको दिन-रात परेशान करता हो, लेकिन इन सबके बीच आपके व्यक्तित्व के गुणों कभी दरकिनार न करें। बुरे से बुरे समय में भी अपने गुणों को याद रखें। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता लेकिन हर किसी में अच्छाई-बुराई तो होती ही है। इसलिए अपनी कमियों को पहचानें पर अपने गुणों की अनदेखी न करें।

खुद निर्णय लेना सीखें – अवसाद की स्थिति में मजबूत से मजबूत व्यक्ति भी निर्णय नहीं ले पाता। ऐसे में छोटे-छोटे निर्णयों को लें और उन पर अमल करें। ये न सोचें कि आपके निर्णय का परिणाम क्या होगा, सिर्फ यह ध्यान में रखें कि एक बार अगर अपने किसी निर्णय पर अमल किया तो वह अनुभव ही होगा।