नवजात शिशुओं की देखभाल सही ढंग से करना माताओं के लिए एक समस्या बन जाती है। थोड़ी सी चूक अथवा अज्ञानता के कारण बड़ी मुश्किल का भी सामना करना पड़ सकता है। पहले ऐसा होता था कि घर की बड़ी बूढ़ी महिलाए इन बच्चों की देखभाल में काफी ध्यान रखती थी, लेकिन आधुनिक शहरी परिवेश में जहां परिवार का दायरा काफी छोटा हो गया है। पति पत्नी को ही घर से बाहर तक की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। ऐसे में दंपत्तियों के लिए पेश है बच्चों की देखभाल के कुछ उपयोगी टिप्सः

  • बच्चों की मालिश के लिए नारियल तेल मे एक बादाम गिरी डालकर गर्म करे। ठंडा होने पर इसे छान लें। इस तेल की मालिश करने से
  • बच्चों की त्वचा मुलायम व चमकदार बनती है। इस तेल ाक सेवन किसी भी मौसम मे किया जा सकता है।
  • एक नारंगी का रस प्रतिदिन पिलाने से नवजात शिशु का रंग साफ होता है तथा हृष्ट पुष्ट एवं गोलाकार शरीर बनता है।
  • नन्हें शिशु को हृष्ट पुष्ट बनाने के लिए छिलका सहित आलू धोकर महीन काट लें। इसका रस सनिकालकर दूध या शहद के साथ दिन में दो
  • बार चटाने से शिशु कुछ ही दिनों में हृष्ट पुष्ट हो जायेगा।
  • गाय के दूध से बने घी से सिर पर मालिश करने से बच्चों की बुद्धि का विकास होता है।
  • चावल का मांड नमक के साथ मिलकर पिलाने से बच्चों का ताकत मिलती है।
  • दुर्बल बच्चों को मिश्री पीसकर घी में मिलाकर एक चम्मच सुबह शाम चटाने से बच्चा हृष्ट पुष्ट होता है। साथ ही उसकी शक्ति बढ़ती है।
  • बड़े बच्चों को सौफ का चुर्ण शहद के साथ् देने से उसकी स्मरण शक्ति का विकास होता है।
  • नन्हें बच्चो को प्रतिदिन शहद चटाने से वह तंदुरूस्त होता है। साथ ही दांत निकलने में आसानी होती है।
  • बच्चों को स्नान के जल में थोड़ा नमक डालने से त्वचा की बीमारियों से बचाव होता है।
  • बच्चों को सदैव मुलायम व आरामदायक कपड़े पहनाएं। बिना धोये व सुखये किसी दूसरे बच्चो का कपड़ा नही पहनायें।
  • कच्ची हल्दी को गुड़ में मिलकर खिलाने से बच्चो के पेट में कीड़े नष्ट हो जाते है।

आधुनिक युग की महिलाओं में स्लीवलैस परिधानों का आकर्षण बढ़ गया है मगर कई बार देखा जाता है कि महिलाएं स्लीवलैस परिधान पहन तो लेती हैं मगर पूर्ण समझ न होने के कारण स्वयं को हंसी का पात्र बना लेती है। अतः स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व कुछ बातों की जानकारी का होना अति आवश्यक हैः

  • सर्वप्रथम अपनी देहयष्टि का आंकलन कर लेना बेहतर है। यदि आप बहुत पतली व बहुत अधिक लंबी है तो स्लावलैस परिधान आप पर नहीं जंचेगा, क्योंकि इससे आपकी बाजुओं का पतलापन व अविकसित वक्ष साफ नजर आएंगे व आप पहले से भी अधिक दुबली दिखाई देंगी।
  • इसके पश्चात अपने पीठ वाले भाग गर्दन और कुहनियों पर ध्यान दें। यदि आपकी गर्दन पीठ का रंग अन्य भागों से गहरा है तो स्लीवलैस परिधान आपके तन के अन भागों के रंग की गहराई को उभारने में सहायक होगा, अतः ऐसा होने पर स्लीवलैस परिधान पहनने का ख्याल बिल्कुल छोड़ दें।
  • स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व शरीर के इन भागों की सफाई की तरफ पूरा ध्यान दे। बांहों की सफाई के साथ साथ कुहनियों की सफाई भी करें। कामकाजी महिलाओं के लिए तो यह और भी आवश्यक है क्योंकि अक्सर ये काम करते समय अपनी कुहनी को कुर्सी के बाजू या मेज पर टिका लेती है। जिससे कुहनी की त्वचा काली मोटी व खुरदरी हो जाती है। यदि आप स्लीवलैस परिधान पहनेंगी तो आपकी कुहनियां दूर से ही बाजू में काला पैबंद नजर आएंगी।
  • काली मोटी व खुरदरी त्वचा की सफाई के लिए सर्वप्रथम वहां गुनगुने पानी से साबुन लगाएं और लगभग पांच मिनट तक धोएं नहीं। इसके पश्चात् वहां की त्वचा को नहाने वाले किसी 10 बादाम गिरी को पीस लें व एक अंडा फेंटे लें। इसमें एक नींबू का रस मिलाकर लेप बनाकर त्वचा पर लगाएं। 15-20 मिनट के बाद गुनगुने पानी की बूंदें डालें व रगड़ कर साफ करें। सप्ताह में 3 बार ऐसा करें बाहों की त्वचा खिल उठेगी।
  • बाहों को दाग धब्बों से मुक्त करने व कोमलता प्रदान करने हेतु एक छोटा चम्मच चीनी ताजा मलाई और नींबू का आधा हिस्सा लेकर बांह पर चीनी के दाने पिघलाने तक मलें, फिर 5-7 मिनट बाद गुनगुने पानी से धोएं। इस उपाय से आपकी बांहों की त्वचा को जीवंतता प्रदान होगी।
    जैतून के तेल की कुछ बूंदें नींबू का रस व एक अंडे का पीला भाग मिलकर बाहों पर लगाएं इससे अवश्य लाभ होगा।
  • स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व बाहों व बगलों पर से अवांछित बाल हटा लें। इसके लिए सबसे उत्तम उपाय है वैक्स करना। इससे बांहों की त्वचा पूर्णरूप से बालों रहित हो जाती है जो देखने में अच्छी लगती है।
  • घर से बाहर निकलते समय खुले भागों पर सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग अवश्य करें। यथासंभव छाता भी लेकर चलें।
    यदि आप स्लीवलैस ब्लाउज पहनना चाहती हैं तो यह ध्यान रखें कि यह आपकी साड़ी के शेड से मेल खाता हो। प्रिंटिड साड़ी हेा तो बेस कलर का ब्लाउज पहनें। अगर साड़ी प्लेन हो तो मैच करते कंट्रास्ट रंग के ब्लाउज पहनें।
  • इसके साथ ही बाहों की सुडौलता की तरफ भी अवश्य ध्यान दें। थुलथुली बांहों पर स्लीवलैस परिधान अच्छे नहीं लगते इसका ध्यान रखें।
    स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व बगलों मे सुगंधयुक्त टेलकम पाउडर अथवा डिओडोरेंट का प्रयोग अवश्य करें।
  • यदि सूट या ब्लाउज के रंग को ध्यान में रखते हुए मैच करते कंगन अथवा सिल्वर या सुनहरे रंग का बावजूद भी पहन सकती है। इसके अलावा सुंदर कलाई घड़ी भी पहन लें तो बांहों की शोभा और भी बढ़ जाएगी।

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ऐसे ही चेहरे पर कुछ भी पोत लेना मेकअप नहीं है। मेकअप वही अच्छा लगता है जो सही तरीके से किया गया होता है। उसमें कोई भी आसानी से खूबसूरत लग सकता है। बेढंगा मेकअप खूबसूरत चेहरे को भी बेजान बना देता है।
फाउंडेशन और पाउडर
मेकअप की शुरूआत करने से पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। फाउंडेशन लगाने के लिए स्पंज का प्रयोग करें। इसे हाथ से न लगाकर स्वच्छ स्पंज मे लगाएं और फिर उंगलियों के ऊपरी भाग की सहायता से चेहरे पर गोलाई में लगाएं।
फाउंडेशन अपनी हेयरलाइन कानों जाॅलाइन गर्दन, पलकों आदि पर लगाना न भूलें। चेहरे पर फाउंडेशन थोड़ा और एकसार लगाएं नहीं तो चेहरा पुता हुआ लगेगा। फाउंडेशन को अच्छी तरह फैलायें। उसमे कोई पैच इत्यादि न पड़ने दे। फाउंडेशन का वहीं शेड लें जो आपकी त्वचा पर चमकता न हो अन्यथा भद्दा लगेगा।
फाउंडेशन के बाद चेहरे पर काॅस्मेटिक पाउडर लगाये। यह फाउंडेशन को सेट करने में मदद करता है। चेहरे पर यदि थोड़ा बहुत तेल होता है तो उसे सोख लेता है। चेहरे को एकसार करने में भी मदद करता है। यदि चेहरे पर ज्यादा तेल नजर आये तो पाउडर नहीं लगाना चाहिए। इससे ज्यादा पैच नजर आयेंगे। चेहरे के तेल को हटाने के लिए आयल एब्जार्बिंग पेपर इस्तेमाल करें। चेहरा का रंग अगर सांवला हो तो थोड़ा खुला फेस पाउडर भी इस्तेमाल करने से भी चेहरे के दाग-धब्बे, मुहासे, दरारें आदि छिप जाती है। सांवले रंग पर गुलाबी शेड वाला फाउंडेशन या पाउडर प्रयोग न करे।
आईब्रो और लैशेज
आईब्रो का रंग बालों के रंग से मेल खाता हआ होना चाहिए। पहले आइलाइनर लगाये, फिर हल्के रंग का आई शैडो लगाएं। फिर पलकों पर मस्कारा लगाये। फिर पलकों पर मस्कारा लगाये। आजकल बाजार में कई प्रकार के आई शैडो भी उपलब्ध है जैसे जैल पाउडर क्रीम इत्यादि।
लिपस्टिक
लिपस्टिक लगाने से पहले होठों पर चारों ओर लिपलाइनर से बार्डर बनाये। फिर इसके बीच में लिपस्टिक लगायें। लिपलाइनर का रंग लिपस्टिक के रंग से एक शेड हल्का होना चाहिए। लिपस्टिक ज्यादा समय तक टिकी रहे इसके लिए होठों को हल्का सा टिशू पेपर से दबाएं और खुले पाउडर की हल्की सी परत उस पर लगाएं। होठों को हल्का सा प्रेस कर दें। जिससे पाउडर सेट हो जाएगा। होंठ अगर पतले हो तो उन्हें मोटा दिखाने के लिए आउटलाइन थोड़ी मोटी और डार्क लिपस्टिक से करें। लिपस्टिम लगाने के बाद लिप ग्लाॅस लगाने से बेहद ही खूबसूरत लुक आता है होंठों का।
मेकअप रिमूवर
अच्छी कंपनी का ही मेकअप रिमूवर खरीदें। हमेशा मेकअप उतारकर ही सोएं। मेकअप उतारने मे आलस न दिखाएं। आंखों के आस पास हल्के हाथों से रिमूवर प्रयोग करें। मेकअप हटाकर सोने से त्वचा के रोप छिद्र बंद नहीं होते और उन्हें आॅक्सीजन मिलती रहती है।

कांटैक्ट लैंस यूज करना आज फैशन बन गया है। इन्हें इस्तेमाल करना आज धीरे धीरे इस्तेमाल करना आज धीरे धीरे आप बात होती जा रही है। कांटैक्ट लैंस का इस्तेमाल दृष्टि दोष में अपने सौंदर्य को निखारने के लिए आंखों का कलर बदलने के लिए कोर्नियल अल्सर के मरीजों में इलाज के लिए और काला मोतिया के मरीजों में दवा के उचित इस्तेमाल के लिए किया जाता है। काटैक्ट लैंस आमतौर पर तीन प्रकार के होते हैं-
हार्ड कांटैक्ट लैंसः ये लैंस वजन में हल्के व ज्यादा समय तक चलने वाले होते है। हार्ड कांटैक्ट लैंस पोलीमिथाइल मिथा एकरेलेट मेटीरियल के बने होते है। ये वजन में हल्के बेशक होते हैं लेकिन ये आॅक्सीजन को आर पार नहीं होने देते, जिसकी वजह से आॅक्सीजन काॅर्निया तक नहीं पहुंच पाती है। इन्हें हम रोज इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन रात के समय ध्यान से उतार लेने चाहिए। नहीं तो कार्निया को आॅक्सीजन की कमी हो जाएगी और धुंधला दिखाई देने लगेगा। हार्ड कांटैक्ट लैंस को सावधानी से लगाना चाहिए। इनके हार्ड होने की वजह से कार्निया मे खरोंच लगने का एवं कोर्निया अल्सर होने का खतरा बढ़ जाता है। आजकल कांटैक्ट लैंस का फैशन बढ़ता ही जा रहा है।
सेमी साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस
ये लैंस सिलीकाॅन पालीमर्स के बने होते हैं। इनमें हार्ड और साॅफ्ट दोनों प्रकार के गुण पाये जाते है। आज के समय में सेमी साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस सबसे अच्छे माने जाते है। ये लैंस आक्सीजन को कार्निया तक पहुंचाने में मदद करते है। साॅफ्ट लैंस की तुलना में ये अपना आकार बनाए रखने के साथ साथ इन लैंसों से एकदम साफ भी दिखाई देता है। जिन लोगों को सिलिंड्रीकल नंबर होता है। उन लोगों के लिए ये लैंस सबसे अच्छे होते है। इसकी देखभाल करना भी आसान होता है। और ये साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस की तुलना में अधिक टिकाऊ भी होते है।
साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस
ये लैंस हाइड्रोक्सी इथाईलइथा एक रीलेट नामक मेटिरियल के बने होते है। इसमें पानी भी शामिल होता है। जो आॅक्सीजन को लैंस से कार्निया तक पहुंचाने में मददगार होता है। साॅफ्ट होने के कारण नये व्यक्ति के लिए इन्हें इस्तेमाल करना आसान होता है। जहां साॅफ्ट लैंस के कुछ फायदे हैं वहां नुकसान भी है। जैसे इन लैंसों में थोड़े समय में ही प्रोटीन जमा होने लगता है, जिससे ये धुंधले पड़ सकते है। एवं इन्हें बदलना पड़ता है।
साॅफ्ट होने की वजह से ये टूटते भी जल्दी है और संक्रमित भी जल्दी हो जाते है। लेकिन ये लैंस सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से आंखों का बचाव करने में सक्षम होते है। कुछ साॅफ्ट लैंस डिसपोजेबल भी होते है। जिंहें कुछ समय के बाद बदल दिया जाता है। जिंहें कुछ समय के बाद बदल दिया जाता है। जिससे संक्रमित होने का खतरा भी कम रहता है। जिनकी आंखों में एलर्जी रहती है। साॅफ्ट लैंस को साल में एक बार अवश्य बदल लेना चाहिए। ऐसा करने से आंख के संक्रमण का खतरा कम रहता है, साथ ही साॅफ्ट लैंस उन लोगों के लिए बहुत कारगर होते हैं जिन्हें देर तक काम करना होता है।
साॅफ्ट लैंस कई प्रकार के होते है। महीने में बदलने वाले कांटैक्ट लैंस इन लैंसों को एक महीने इस्तेमाल करने के बाद बदल देना आवश्यक है। जिन लोगों की आंखों में संक्रमण जल्दी जल्दी होता है उनके लिए ये लैंस बहुत उपयोगी होते हैं और रोज बदलने वाले लैंस की तुलना में ये सस्ते भी पड़ते हैं एवं ज्यादा लोकप्रिय भी है।
डेली डिस्पोजल लैंस
इन लैंसों को हर दिन इस्तेमाल करने के बाद फेक दिया जाता है। जिन लोगों को आंख में एलर्जी और आंख में संक्रमण की शिकायत होती है उन लोगों के लिए इस तरह के कांटैक्ट लैंस बहुत उपयोगी होते है।
रंगीन साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस
रंगीन कांटैक्ट लैंस लगाकर आप अपनी सुंदरता को बढ़ा सकते है। इन लैंसों का ज्यादातर इस्तेमाल माॅडल करते है। साथ ही इन लैंसों का इस्तेमाल वो लोग भी करते हैं जिनकी आंख की पुतली में फूला पड़ गया होता है।
बायफोकल एवं ग्रेडिड कांटैक्ट लैंस
बायफोकल कांटैक्ट लैंस दूर एवं पास की दृष्टि दोष दोनों में इस्तेमाल किये जाते है। इनका प्रयोग पास की नेत्र ज्योति कमजोर होने पर किया जाता है। बायफोकल लैंस साॅफ्ट एवं सेमी साॅफ्ट दोनों तरह के होते है।
कांटैक्ट लैंस से होने वाले नुकसान
आंख में संक्रमण
कांटैक्ट लैंस लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धों लें। वरना आंख में संक्रमण होने का डर रहता है। कांटैक्ट लैंस को कभी भी पानी से धोना नहीं चाहिए वरना इसमें मौजूद बैक्टीरिया आंख में संक्रमण कर सकते है। कांटैक्ट लैंस को लेंस केयर सोल्यूशन को दुबारा इस्तेमाल न करें।
आंख में एलर्जी जिसमें आंख लाल रहने लगती है। आंख में खुजली होने लगती है। ऐसा होने पर कुछ समय के लिए कांटैक्ट लैंस न लगाएं और नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लें।
आंख की पुतली पर खरोच
ध्यान रखें कि कांटैक्ट लैंस को पहनते और उतारते समय आंख की पुतली पर खरोच न लगे क्योंकि ऐसा होने पर कोर्नियल अल्सर एवं आंख की पुतली पर सफेदी पड़ने का डर रहता है। जिसकी वजह से आंख की रोशनी भी जा सकती है।
कांटैक्ट लैंस का इस्तेमाल न करें जब-

  •  व्यक्ति मंदबुद्धि हो
  •  आंख में संक्रमण होने पर
  •  आंख की रूसी होने पर
  •  आंख की एलर्जी होने पर
  •  आंख के सूखे होने पर
  •  आंख की पुतली पर सूजन होने पर।

1. रंगीन पाॅलिथीन में फल व सब्जियां कभी न रखें।
2. अगर आप पूरे हफ्ते की सब्जियां व फल स्टोर करते है तो उन्हें धो कर फ्रिज में न रखें गीली सब्जी रखने से सब्जी जल्दी खराब हो जाती है।
3. टमाटर का स्वाद बनाये रखने के लिए उसको रूम टेंपरेचर पर रखें।
4. प्याज को सूखे व ठंडे स्थान पर रखें, प्याज खराब नहीं होगी।
5. पालक को बिना धोए पहले अखबार में लपेटे फिर पाॅलिथीन में लपेटकर फ्रिज में रखें।
6. नाॅनस्टिक बर्तन में खाना पकाते समय आंच धीमी ही रखें, तेज आंच पर इसकी पाॅलिश खराब हो जाती है।
7. इनकी सफाई करते समय कभी भी रेत या स्टील के ब्रुश का प्रयोग न करें। इससे इनका सारा मसाला उतर जाएगा।
8. नाॅनस्टिक पैन में हमेशा लकड़ी का चम्मच ही प्रयोग में लाये।
9. यदि अंडा उबलते समय फूट जाये तो घबराइये नहीं उस बर्तन में थोड़ा नमक डाल दें।
10. जिन सब्जियों में लेस निकलता है उसमें थोड़ा सा नींबू का रस डालें।
11. दहीबड़े को मुलायम बनाने के लिए दाल फेरते समय उसमें 1-2 आलू मिला लें।
12. मक्के के आटे को यदि मांड से गुंधा जाये तो रोटी बनाते समय टूटेगी नहीं।

थोड़ी सी मलाई में एक चुटकी बेसन व हल्दी मिलाकर इस लेप को चेहरे पर लगाएं। सूखने पर उतार दें और फिर ठंडे पानी से मुंह धो लें। ऐसा करने से चेहरा दमक उठेगा।
एक चम्मच जौ के आटे में जरा सी हल्दी व 5-6 बूंद नारियल का तेल मिला लें। आवश्यकतानुसार जरा सा पानी मिलाकर लेप तैयार कर लें। इसे 10-15 मिनट तक चेहरे पर लगाएं फिर बाद में चेहरा धों ले। इस लेप से त्वचा की शुष्कता दूर हो जाएगी। एक बड़े चम्मच दही में 2 बूंद नारियल का तेल और चुटकी भर हल्दी मिला लें। इस लेप को चेहरे पर लगा लें। जब लेप सूख जाए तब उसे रगड़कर छुड़ा दें। और चेहरे को धो लें। ऐसा करने से त्वचा स्निग्ध होगी।
एक चुटकी हल्दी, थोड़ा दूध, नींबू की चार बूंद रस मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर आधे घंटे तक लगाकर चेहरा पानी से धों दें। इससे काले धब्बे धीरे-धीरे ठीक हो जाएंगे।
मैदे को दूध में मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। इसे चेहरे पर मलें। सूख जाने पर इसे उतार दें और चेहरा धों लें। इस से त्वचा मुलायम बनी रहेगी।
आॅयली स्किन वालों के लिए सर्दियों का मौसम सबसे बेहतर होता है, लेकिन देखभाल की जरूरत इन्हें इस मौसम में भी होती है। आॅयली स्किन वालों को हमेशा ग्लिसरिन और स्ट्राॅबरी युक्त फेस वाॅश का ही इस्तेमाल करना चाहिए मायश्चराइजर का इस्तेमाल करते समय इतना ध्यान जरूर रखें कि आपका मायश्चराइजर आॅयल फ्री हो। ड्राई स्किन वालों को सबसे देखभाल और केयर की जरूरत है। इनको अतिरिक्त माॅयश्चराइजर का प्रयोग करना चाहिए। जब भ्ज्ञी धूप में बाहर निकलें तो सूरज की किरणों से त्वचा को बचाए रखने के लिए सनस्क्रीन जरूर लगाएं। रात को सोने से पहले जैतून और बादाम का तेल लगाएं। इससे त्वचा का रूखापन दूर हो जाएगा। नाॅर्मल स्किन वाली महिलाओं को सर्दियों में त्वचा की देखरेख के लिए काफी सावधानी बरतनी चाहिए। इन्हें सर्दियों में हमेशा क्रीम लगानी चाहिए। इससे आपकी त्वचा को जरूरी पोषण मिल जाएगा। रात में सोने से पहले दूध में थोड़ा नमक मिलाकर रूई के फाहे से चेहरे पर लेप करने से रंग में निखार आता है। और त्वचा मुलयम भी बनी रहती है। रात में जो भी लेप किया है उसे सुबह उठकर धो देना चाहिए।
सर्दियों में धूप से बचाव के लिए एसपीएफ 15 युक्त मायश्चराइजर का प्रयोग करें। यदि बाहर जा रहे हो तो हाई एसपीएफ सनस्क्रीन लगाएं क्योंकि सनबर्न सर्दियों में भी हो सकता है।

सुंदर आंखें इंसान की सुंदरता में चार चाँद लगाती हैं क्योंकि इन्हीं अनमोल आँखों से कुदरत के खूबसूरत नजारों को देख सकते हैं इसलिए जरूरी है आँखों को बीमारियों से बचाना जरूरी है। आँखों को बीमारियों से बचाने के लिए आँखों की सफाई और आँखों का व्यायाम करना जरूरी है। आँखों की देखभाल के लिए विटामिन-ए युक्त भोजन करना चाहिए। आँखों की देखभाल के लिए ताजे गुलाब की पंखुडि़यों को लेकर उनका रस निकाल कर अपनी बंद आँखों पर लगाएं। और आँखों पर 20 मिनट तक रखें। यह आपकी आँखों की सूजन हटाने का तरीका है। जिन लोगों की उम्र थोड़ी ज्यादा हो गयी है उनकी आँखों के आसपास झुर्रियां पड़ना आम बात है पर सही देखभाल से इस समस्या का भी इलाज हो सकता है। 3 चम्मच कच्चा दूध और 3 चम्मच शहद। इन दोनों पदार्थों को अच्छे से मिलाएं और आंच पर कुछ देर गर्म कर लें और इसे 30 मिनट तक रखें। समय पूरा हो जाने पर गर्म पानी से धो दें। यह काफी असरदार प्राकृतिक नुस्खा है जिसकी मदद से आँखों के पास की झुर्रियां बिल्कुल गायब हो जाती हैं। इसके अलावा पालक खाएं और खूब पानी पियें। आलू या खीरे के टुकड़े लें और इसे आँखों के नीचे रखें। इससे काले घेरों, झुर्रियां तथा त्वचा की महीन रेखाओं से छुटकारा मिलेगा।

नियमित रूप से करें आँखों की सफाई

आँखों के प्रति लापरवाही बरतने से आँखों मे पानी आना, जलन, खुजली, आँखों का लाल होना, पीलापन आना, सूजना, धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन समस्याओं से आँखों को बचाने के लिए नियमित रूप से आँखों की सफाई करनी चाहिए। इसके लिए दिन में ठंडे पानी से आँखों को अच्छी तरह से धोएं। आँखों को बीमारी से बचाने के लिए विटामिन-ए- लेना चाहिए साथ ही दूध, मक्खन, गाजर, टमाटर, पपीता, अंडे, शुद्ध घल और हरी साग-सब्जियों इत्यादि का सेवना करना चाहिए। भरपूर नींद लें तथा कंप्यूटर से उचित दूर बनाकर काम करें।