आपके शरीर में बहने वाले रक्त से रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर जो दबाव पड़ता है उसे रक्तचाप कहते हैं। रक्तचाप आपके शरीर में रक्त को पम्प करने में मदद करता है।

रक्तचाप का मापन
हर व्यक्ति का रक्तचाप अलग-अलग होता है। आपकी बांह के चारों और चैड़ी पट्टी बांधकर रक्तचाप की जांच की जाती है। जैसे-जैसे कफ से हवा बाहर निकलती है आपके रक्तचाप का मापन कर लिया जाता है। सामान्य रक्तचाप 120 बटा 80 अथवा उससे कम होता है। उच्च रक्तचाप को अतिरिक्त दाब हायपरटेंशन भी कहते हैं। उच्च रक्तचाप 140 बटा 90 अथवा उससे अधिक होता है। कुछ महिलाएं जब गर्भवती होती हैं तो उन्ळें उच्च रक्तचाप हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप से पीडि़त महिला का यदि सही उपचार नहीं किया जाए तो इससे छोटा या बीमार बच्चा पैदा हो सकता है तथा गर्भवती माँ को भी परेशानियाँ हो सकती हैं।

उपचार
उच्च रक्तचाप में यदि आपका वजन अधिक हो तो इसे कम करें। अपने भोजन और पेय पदार्थों में नमक की मात्रा कम करेें। अल्कोहल के सेवन से बचें। धूम्रपान छोड़ दें या तम्बाकू का उपयोग न करें। व्यायाम लगभग प्रतिदिन करें। तनाव से बचें तथा प्रतिदिन आराम करें।

फेफड़े वे अंग हैं जो हमें श्वास लेने में सहायता प्रदान करते हैं। वे शरीर के सभी कोषाणुओं को आक्सीजन प्रदान करने में सहायक होते हैं। कैंसर कोषाणु स्वास्थ्य कोषाणुओं के मुकाबले अधिक तेजी से पैदा होते तथा बढ़ते हैं। कुछ कैंसर कोषाणु मिलकर ऐसी सरंचना विकसित कर सकते हैं जिसे ट्यूमर कहा जाता है। फेफड़ों का कैंसर तब होता है जब फेफड़ों में शामिल कोषाणु परिवर्तित होकर अपसामान्य बन जाते हैं। फेफड़ों के कैंसर के कोषाणु रक्त अथवा लसीका, लिम्पा प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य क्षेत्रों में अथवा अन्य अंगों तक जा सकते हैं। इसे विक्षेपण मेटास्टेटिस कहा जाता है।

कारण
यदि आप धूम्रपान करते हैं तो आपको फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक होगा या अन्य लोगों द्वारा धूम्रपान से प्रभावित क्षेत्र में सांस लेते हैं।

सामग्रीः- 3 कप नारियल (कद्दूकस किया हुआ), 2 कप चीनी, 1 कप दूध।
विधिः- पैन में दूध को उबालें। अब 2 कप नारियल डालकर कम आंच पर पकाएं। जब नारियल पूरा दूध सोख ले तब चीनी डालकर चलाएं। आंच से उतारकर छोटे-छोटे लड्डू बनाएं। एक प्लेट में घिसा नारियल रखकर उस लड्डू को उस पर लपेटे।

अभी कुछ समय पहले ही एक बाहरवीं कक्षा की छात्रा पर कुछ मनचलों ने उस समय ज्वलनशील पदार्थ फेंक दिया जब उसने छेड़छाड़ करने का उन्हें हंस-मुस्कुरा कर कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया था। यह घटना उस सम घटी थी जब छात्रा अपने घर से चलकर स्कूल के निकट पहुंची ही थी।
रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर कार्यरत एक सेल्सगर्ल शाम के समय अपना काम समाप्त करके घर वापस लौट रही थी तो अचानक कुछ मनचलों ने उसे गली में घेर लिया और पकड़ कर उसका शीलभंग करने का प्रयास करने लगे। युवती के प्रबल विरोध करने और सहायतार्थ चिल्लाने पर गुंडों ने उसका ब्लाउज फाड़ दिया और उसे शारीरिक कष्ट पहुंचाया। भीड़ इकट्ठी हो जाने पर अपराधी तत्व बड़े आराम से सबके सामने सुरक्षित निकल कर भाग गये। छेड़छाड़ की घटनाएं किसी विशेष् नगर की बात नहीं है। आजकल तो हर नगर में ही छेड़छाड़, अश्लील और भद्दी हरकतें करने का प्रचलन इतना बढ़ रहा है कि दिनोंदिन महिलाएं घर से बाहर अपने आप को असूरक्षित महसूस कर रही है। आश्चर्य की बात तो यह है कि छेड़छाड़ की हरकतों में युवक ही नहीं अच्छी खासी उम्र वाले और बूढ़े तक शामिल है। इनकी हालत यह है कि ये आंख मिचैली खेलने और हाथ घुमाने तक की हरकतों में शामिल है परंतु बुजुर्ग होने के कारण कोई कुछ कह नहीं पाता और मामला शांत हो जाता है। शहर के चैराहों और व्यस्त बाजारों और कन्या पाठशालाओं की ओर जाने वाले रास्तों पर युवतियों छात्राओं की काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मेलों ठेलों की भीड़भाड़ में तो ये मनचले निंबों पर चुटकी काटने और उरोजों को दबाने से भी बाज नहीं आते आते। कुछ महिलाएं तो शर्म के मारे सब कुछ सहन कर लेती है। अभी थोड़ी ही समय में स्कूल काॅलेज आती जाती छात्राओं के साथ तो छेड़छाड़ की घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। मनचले निडर होकर खुलेआम छात्राओं पर न केवल फब्तियां कसते हैं बल्कि उनके अंगों को छूने और प्रेम पत्र देने की सीमा तक बढ़ रहे है।

  • 4-6 के समूह में आती हुई छात्राएं तो इनकी हरकतों से बच निकलती हैं लेकिन अकेली छात्रा को तो इनका दुव्र्यवहार झेलना ही पड़ता है। हमें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि आखिर वे कौन से ऐसे कारण है कि आज का युवा वर्ग चरित्रिक पतन की ओर इतना फिसल रहा है।
    गहराई से सोचने पर लगता है कि निम्नलिखित बातें ऐसी हैं जो युवाओं को चरित्रिक पतन की ओर धकेलने में सहायक सिद्ध हो रही है।
    हमारी वर्तमान शिक्षा पद्धति ऐसी है जिसमें अब स्कूलों के नाम पर कुछ रह ही नहीं गया। महंगे पब्लिक स्कूलों की भरमार है जहां सभी कुछ पाश्चात्य ढंग से सिखाया पढ़ाया जाता है। अपनी सभ्यता और संस्कृति पर पाश्चात्य रंग चढ़ता जा रहा है। समय की मांग को देखकर मां-बाप ऐसे स्कूलों ही में अपने बच्चों को दाखिला दिलाकर गौरव महसूस करते है। प्रगतिशीलता के नाम पर नशा और फ्री सेक्स का बोलबाला है।
  • पुलिस व्यवस्था चैाकस न होने के कारण ऐसे युवकों पुरूषों के हौंसले बुलंद है।
    पिछले कुछ वर्षों से विज्ञापनों, फिल्मों तथा टेलीविजन के कार्यक्रम और पत्र पत्रिकाओं इत्यादि में नारी के नंगेपन और अश्लील चित्रों की भरतार है। इस कुप्रवृति के कारण समाज में चरित्रहीनता और वहशीपन बढ़ता जा रहा है। किशोर और युवक शिक्षा की ओर से विमुख होकर कुकृत्यों मंे अधिक से अधिक रूचि ले रहे है। सेक्स और मादक द्रव्यों का उपयोग किशोरों के लिए एक फैशन सा बन रहा है। कमी कंप्यूटर ने पूरी कर दी है। मीडिया भी गलत हरकतों को इतना उछालता है कि बार बार उन दृश्यों को देखकर युवक गलत ही सीखते है।
  • फैशन इतना बढ़ रहा है कि शरीर का अधिक से अधिक भाग प्रदर्शित करने की होड़ सी लगी हुई है। फिल्मी अभिनेत्रियों का अंग प्रदर्शन के विषय में यह कथन कि जब भगवान ने उन्हें सुंदर सुडौल शरीर रूपी सौगात दी है तो उसका प्रदर्शन करने में क्या बुराई है। किशोरियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
  • लड़कियों के जींस या निकर में कसे हुए नितंब और शर्ट के सामने से खेले हुए बटन क्या युवाओं की यौन भावनाओं को भड़काने का काम नहीं करते? फैशन टीवी पर माॅडलों के नंगे शरीर देखकर क्या युवाओं में वासना जागृत नहीं होती। कहने का अर्थ है कि बढ़ता हुआ नंगापन किशोरों और युवाओं के मन मस्तिष्क को दूषित कर रहा है। जिसके कारण वे काम आवेग में आकर छेड़छाड़ और बलात्कार जैसे घटनाओं को जन्म देते है।
  • युवक युवतियों में चरित्र निर्माण के साहित्य में रूचि बिल्कुल भी नहीं है। पाश्चात्य मीडिया उसके मानस पटल पर पूरी तरह छाता जा रहा है। लड़के हों या लड़कियां आजकल अधिकतर की शर्टोें पर अजीबो-गरीब सेक्सी शब्द या वाक्य रहते है। ”मैं बुरा हूं“ माइकल जेक्सन के ये शब्द जाने किस आदर्श का प्रचार प्रसार कर रहे है?
  • खाली दिमाग भी शैतान का घर होता है। युवाओं के लिए आज जीवन को सही ढंग से जीना बड़ा मुश्किल हो रहा है। कड़ी स्पर्धा और बढ़ती हुई बेरोजगारी व निठल्लापन और उद्देश्यहीन जीवन भी बहुत हद तक युवाओं के मन मस्तिष्क को विकृत कर रहा है।
  • शिकागो के सर्वधर्म सम्मेलन में अपना भाषण आरंभ करने से पहले स्वामी विवेकानंद ने वहां के जनसमूह को बहनो और भाइयों कहकर संबोधित किया था। उनके इन शब्दों में अपनत्व, प्यार और विश्वबंधुत्व की भावना थी। लेडीज एंड जेंटलमेन के स्थान पर भाई और बहन का संबोधन सुनकर वहां के स्त्री पुरूष गदगद हो गए और देर तक तालियां बजाकर उनका स्वागत किया था
    काश हम आज भी अपनी सभ्यता और संस्कृति दूसरों में बांट पाते लेकिन अफसोस हम खुद ही भटक गए है।

भगवान द्वारा दी गई अनुपम भेंट आंखों को स्वस्थ रखना मनुष्य पर निर्भर करता है। आंखों की महत्ता को सभी बखूबी जानते है। यदि आंखे स्वस्थ है तो जीवन रंगों से भरपूर है। आंखे अस्वस्थ्य है तो जीवन रंगहीन हो जाता है। स्वस्थ आंखे निर्मल और चमकीली होती है।
आंखों का आकार और रंग रूप ईश्वर की देन है पर थोड़ी सी अतिरिक्त देखभाल से आंखों को सुंदर और सजीव बनाया जा सकता है। इसके लिए आवश्यकता है उचित खान पान सफाई आवश्यक व्यायाम और समुचित नींद की। आइए देखें कि आंखों को स्वस्थ और सुंदर कैसे बना कर रखें-

  • आंखों को कभी भी रगड़े नहीं।
  • आंखों को धुएं, धूल व तेज प्रकाश से बचा कर रखें।
  • तेज धूप में जाते समय अच्छी क्वालिटी के रंगीन चश्में को पहनना न भूलें।
  • सूर्य और सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से न देखें।
  • भोजन के बाद साफ हाथों से साफ जल को नेत्रों के ऊपर उंगलियों से लगाएं। इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है।
  • सुबह प्रतिदिन हरी घास पर नंगे पांव घूमने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  • सुबह उठ कर नेत्रों में जमी मैल को ठंडे पानी से साफ करें।
  • नहाते समय आंखों को ठंडे पानी से धोएं।
  • आंखों में ठंडक बढ़ाने के लिए रात्रि में त्रिफला ठंडे पानी में भिगो दें। प्रातः उसे छानकर उस पानी में आंखे धोएं। त्रिफला खाने से आंखों को लाभ पहुंचता है।
  • टेलीविजन एक निश्चित दूरी से बैठकर देखें। नजदीक से देखने पर आंखों पर खराब प्रभाव पड़ता है। टकटकी लगाकर न देखें। बीच बीच में आंखों को आराम दें।
  • पढ़ते समय ध्यान दें कि आंखों पर सीधा प्रकाश नहीं पड़ना चाहिए। कम या तेज प्रकाश में भी पढ़ाई न करें। लगातार देर तक पढ़ने से आंखें
  • कमजोर हो जाती है। कुछ पल आंखों को आराम दें।
  • आंखों का स्वस्थ रखने हेतु कुछ आंखों के व्यायाम भी करते रहे।
  • आंखो की सुंदरता और अच्छी सेहत के लिए हरी सब्जी, दूध, फल रेशेदार भोजन नियमित लें ताकि विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में मिलता रहे।
  • आंखों के स्वास्थ्य के लिए मिर्च मसाले भरा भोजन न खाएं। ध्यान रखें कि कब्ज भी न हो पाए।
  • आंखों के स्वास्थ्य हेतु 7-8 घंटें की नींद लें।
  • आंखों के नीचे झुर्रियां होने पर नियमित रूप से मलाई लगाएं ताकि झुर्रियां दूर हो जाए।
  • गुनगुने दूध में रूई डालकर उसके फाहे को प्रतिदिन आंखो के ऊपर रखें। थोड़ी देर रखने से आंखों को आराम मिलता है।

नवजात शिशुओं की देखभाल सही ढंग से करना माताओं के लिए एक समस्या बन जाती है। थोड़ी सी चूक अथवा अज्ञानता के कारण बड़ी मुश्किल का भी सामना करना पड़ सकता है। पहले ऐसा होता था कि घर की बड़ी बूढ़ी महिलाए इन बच्चों की देखभाल में काफी ध्यान रखती थी, लेकिन आधुनिक शहरी परिवेश में जहां परिवार का दायरा काफी छोटा हो गया है। पति पत्नी को ही घर से बाहर तक की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। ऐसे में दंपत्तियों के लिए पेश है बच्चों की देखभाल के कुछ उपयोगी टिप्सः

  • बच्चों की मालिश के लिए नारियल तेल मे एक बादाम गिरी डालकर गर्म करे। ठंडा होने पर इसे छान लें। इस तेल की मालिश करने से
  • बच्चों की त्वचा मुलायम व चमकदार बनती है। इस तेल ाक सेवन किसी भी मौसम मे किया जा सकता है।
  • एक नारंगी का रस प्रतिदिन पिलाने से नवजात शिशु का रंग साफ होता है तथा हृष्ट पुष्ट एवं गोलाकार शरीर बनता है।
  • नन्हें शिशु को हृष्ट पुष्ट बनाने के लिए छिलका सहित आलू धोकर महीन काट लें। इसका रस सनिकालकर दूध या शहद के साथ दिन में दो
  • बार चटाने से शिशु कुछ ही दिनों में हृष्ट पुष्ट हो जायेगा।
  • गाय के दूध से बने घी से सिर पर मालिश करने से बच्चों की बुद्धि का विकास होता है।
  • चावल का मांड नमक के साथ मिलकर पिलाने से बच्चों का ताकत मिलती है।
  • दुर्बल बच्चों को मिश्री पीसकर घी में मिलाकर एक चम्मच सुबह शाम चटाने से बच्चा हृष्ट पुष्ट होता है। साथ ही उसकी शक्ति बढ़ती है।
  • बड़े बच्चों को सौफ का चुर्ण शहद के साथ् देने से उसकी स्मरण शक्ति का विकास होता है।
  • नन्हें बच्चो को प्रतिदिन शहद चटाने से वह तंदुरूस्त होता है। साथ ही दांत निकलने में आसानी होती है।
  • बच्चों को स्नान के जल में थोड़ा नमक डालने से त्वचा की बीमारियों से बचाव होता है।
  • बच्चों को सदैव मुलायम व आरामदायक कपड़े पहनाएं। बिना धोये व सुखये किसी दूसरे बच्चो का कपड़ा नही पहनायें।
  • कच्ची हल्दी को गुड़ में मिलकर खिलाने से बच्चो के पेट में कीड़े नष्ट हो जाते है।

आधुनिक युग की महिलाओं में स्लीवलैस परिधानों का आकर्षण बढ़ गया है मगर कई बार देखा जाता है कि महिलाएं स्लीवलैस परिधान पहन तो लेती हैं मगर पूर्ण समझ न होने के कारण स्वयं को हंसी का पात्र बना लेती है। अतः स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व कुछ बातों की जानकारी का होना अति आवश्यक हैः

  • सर्वप्रथम अपनी देहयष्टि का आंकलन कर लेना बेहतर है। यदि आप बहुत पतली व बहुत अधिक लंबी है तो स्लावलैस परिधान आप पर नहीं जंचेगा, क्योंकि इससे आपकी बाजुओं का पतलापन व अविकसित वक्ष साफ नजर आएंगे व आप पहले से भी अधिक दुबली दिखाई देंगी।
  • इसके पश्चात अपने पीठ वाले भाग गर्दन और कुहनियों पर ध्यान दें। यदि आपकी गर्दन पीठ का रंग अन्य भागों से गहरा है तो स्लीवलैस परिधान आपके तन के अन भागों के रंग की गहराई को उभारने में सहायक होगा, अतः ऐसा होने पर स्लीवलैस परिधान पहनने का ख्याल बिल्कुल छोड़ दें।
  • स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व शरीर के इन भागों की सफाई की तरफ पूरा ध्यान दे। बांहों की सफाई के साथ साथ कुहनियों की सफाई भी करें। कामकाजी महिलाओं के लिए तो यह और भी आवश्यक है क्योंकि अक्सर ये काम करते समय अपनी कुहनी को कुर्सी के बाजू या मेज पर टिका लेती है। जिससे कुहनी की त्वचा काली मोटी व खुरदरी हो जाती है। यदि आप स्लीवलैस परिधान पहनेंगी तो आपकी कुहनियां दूर से ही बाजू में काला पैबंद नजर आएंगी।
  • काली मोटी व खुरदरी त्वचा की सफाई के लिए सर्वप्रथम वहां गुनगुने पानी से साबुन लगाएं और लगभग पांच मिनट तक धोएं नहीं। इसके पश्चात् वहां की त्वचा को नहाने वाले किसी 10 बादाम गिरी को पीस लें व एक अंडा फेंटे लें। इसमें एक नींबू का रस मिलाकर लेप बनाकर त्वचा पर लगाएं। 15-20 मिनट के बाद गुनगुने पानी की बूंदें डालें व रगड़ कर साफ करें। सप्ताह में 3 बार ऐसा करें बाहों की त्वचा खिल उठेगी।
  • बाहों को दाग धब्बों से मुक्त करने व कोमलता प्रदान करने हेतु एक छोटा चम्मच चीनी ताजा मलाई और नींबू का आधा हिस्सा लेकर बांह पर चीनी के दाने पिघलाने तक मलें, फिर 5-7 मिनट बाद गुनगुने पानी से धोएं। इस उपाय से आपकी बांहों की त्वचा को जीवंतता प्रदान होगी।
    जैतून के तेल की कुछ बूंदें नींबू का रस व एक अंडे का पीला भाग मिलकर बाहों पर लगाएं इससे अवश्य लाभ होगा।
  • स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व बाहों व बगलों पर से अवांछित बाल हटा लें। इसके लिए सबसे उत्तम उपाय है वैक्स करना। इससे बांहों की त्वचा पूर्णरूप से बालों रहित हो जाती है जो देखने में अच्छी लगती है।
  • घर से बाहर निकलते समय खुले भागों पर सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग अवश्य करें। यथासंभव छाता भी लेकर चलें।
    यदि आप स्लीवलैस ब्लाउज पहनना चाहती हैं तो यह ध्यान रखें कि यह आपकी साड़ी के शेड से मेल खाता हो। प्रिंटिड साड़ी हेा तो बेस कलर का ब्लाउज पहनें। अगर साड़ी प्लेन हो तो मैच करते कंट्रास्ट रंग के ब्लाउज पहनें।
  • इसके साथ ही बाहों की सुडौलता की तरफ भी अवश्य ध्यान दें। थुलथुली बांहों पर स्लीवलैस परिधान अच्छे नहीं लगते इसका ध्यान रखें।
    स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व बगलों मे सुगंधयुक्त टेलकम पाउडर अथवा डिओडोरेंट का प्रयोग अवश्य करें।
  • यदि सूट या ब्लाउज के रंग को ध्यान में रखते हुए मैच करते कंगन अथवा सिल्वर या सुनहरे रंग का बावजूद भी पहन सकती है। इसके अलावा सुंदर कलाई घड़ी भी पहन लें तो बांहों की शोभा और भी बढ़ जाएगी।

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ऐसे ही चेहरे पर कुछ भी पोत लेना मेकअप नहीं है। मेकअप वही अच्छा लगता है जो सही तरीके से किया गया होता है। उसमें कोई भी आसानी से खूबसूरत लग सकता है। बेढंगा मेकअप खूबसूरत चेहरे को भी बेजान बना देता है।
फाउंडेशन और पाउडर
मेकअप की शुरूआत करने से पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। फाउंडेशन लगाने के लिए स्पंज का प्रयोग करें। इसे हाथ से न लगाकर स्वच्छ स्पंज मे लगाएं और फिर उंगलियों के ऊपरी भाग की सहायता से चेहरे पर गोलाई में लगाएं।
फाउंडेशन अपनी हेयरलाइन कानों जाॅलाइन गर्दन, पलकों आदि पर लगाना न भूलें। चेहरे पर फाउंडेशन थोड़ा और एकसार लगाएं नहीं तो चेहरा पुता हुआ लगेगा। फाउंडेशन को अच्छी तरह फैलायें। उसमे कोई पैच इत्यादि न पड़ने दे। फाउंडेशन का वहीं शेड लें जो आपकी त्वचा पर चमकता न हो अन्यथा भद्दा लगेगा।
फाउंडेशन के बाद चेहरे पर काॅस्मेटिक पाउडर लगाये। यह फाउंडेशन को सेट करने में मदद करता है। चेहरे पर यदि थोड़ा बहुत तेल होता है तो उसे सोख लेता है। चेहरे को एकसार करने में भी मदद करता है। यदि चेहरे पर ज्यादा तेल नजर आये तो पाउडर नहीं लगाना चाहिए। इससे ज्यादा पैच नजर आयेंगे। चेहरे के तेल को हटाने के लिए आयल एब्जार्बिंग पेपर इस्तेमाल करें। चेहरा का रंग अगर सांवला हो तो थोड़ा खुला फेस पाउडर भी इस्तेमाल करने से भी चेहरे के दाग-धब्बे, मुहासे, दरारें आदि छिप जाती है। सांवले रंग पर गुलाबी शेड वाला फाउंडेशन या पाउडर प्रयोग न करे।
आईब्रो और लैशेज
आईब्रो का रंग बालों के रंग से मेल खाता हआ होना चाहिए। पहले आइलाइनर लगाये, फिर हल्के रंग का आई शैडो लगाएं। फिर पलकों पर मस्कारा लगाये। फिर पलकों पर मस्कारा लगाये। आजकल बाजार में कई प्रकार के आई शैडो भी उपलब्ध है जैसे जैल पाउडर क्रीम इत्यादि।
लिपस्टिक
लिपस्टिक लगाने से पहले होठों पर चारों ओर लिपलाइनर से बार्डर बनाये। फिर इसके बीच में लिपस्टिक लगायें। लिपलाइनर का रंग लिपस्टिक के रंग से एक शेड हल्का होना चाहिए। लिपस्टिक ज्यादा समय तक टिकी रहे इसके लिए होठों को हल्का सा टिशू पेपर से दबाएं और खुले पाउडर की हल्की सी परत उस पर लगाएं। होठों को हल्का सा प्रेस कर दें। जिससे पाउडर सेट हो जाएगा। होंठ अगर पतले हो तो उन्हें मोटा दिखाने के लिए आउटलाइन थोड़ी मोटी और डार्क लिपस्टिक से करें। लिपस्टिम लगाने के बाद लिप ग्लाॅस लगाने से बेहद ही खूबसूरत लुक आता है होंठों का।
मेकअप रिमूवर
अच्छी कंपनी का ही मेकअप रिमूवर खरीदें। हमेशा मेकअप उतारकर ही सोएं। मेकअप उतारने मे आलस न दिखाएं। आंखों के आस पास हल्के हाथों से रिमूवर प्रयोग करें। मेकअप हटाकर सोने से त्वचा के रोप छिद्र बंद नहीं होते और उन्हें आॅक्सीजन मिलती रहती है।

कांटैक्ट लैंस यूज करना आज फैशन बन गया है। इन्हें इस्तेमाल करना आज धीरे धीरे इस्तेमाल करना आज धीरे धीरे आप बात होती जा रही है। कांटैक्ट लैंस का इस्तेमाल दृष्टि दोष में अपने सौंदर्य को निखारने के लिए आंखों का कलर बदलने के लिए कोर्नियल अल्सर के मरीजों में इलाज के लिए और काला मोतिया के मरीजों में दवा के उचित इस्तेमाल के लिए किया जाता है। काटैक्ट लैंस आमतौर पर तीन प्रकार के होते हैं-
हार्ड कांटैक्ट लैंसः ये लैंस वजन में हल्के व ज्यादा समय तक चलने वाले होते है। हार्ड कांटैक्ट लैंस पोलीमिथाइल मिथा एकरेलेट मेटीरियल के बने होते है। ये वजन में हल्के बेशक होते हैं लेकिन ये आॅक्सीजन को आर पार नहीं होने देते, जिसकी वजह से आॅक्सीजन काॅर्निया तक नहीं पहुंच पाती है। इन्हें हम रोज इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन रात के समय ध्यान से उतार लेने चाहिए। नहीं तो कार्निया को आॅक्सीजन की कमी हो जाएगी और धुंधला दिखाई देने लगेगा। हार्ड कांटैक्ट लैंस को सावधानी से लगाना चाहिए। इनके हार्ड होने की वजह से कार्निया मे खरोंच लगने का एवं कोर्निया अल्सर होने का खतरा बढ़ जाता है। आजकल कांटैक्ट लैंस का फैशन बढ़ता ही जा रहा है।
सेमी साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस
ये लैंस सिलीकाॅन पालीमर्स के बने होते हैं। इनमें हार्ड और साॅफ्ट दोनों प्रकार के गुण पाये जाते है। आज के समय में सेमी साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस सबसे अच्छे माने जाते है। ये लैंस आक्सीजन को कार्निया तक पहुंचाने में मदद करते है। साॅफ्ट लैंस की तुलना में ये अपना आकार बनाए रखने के साथ साथ इन लैंसों से एकदम साफ भी दिखाई देता है। जिन लोगों को सिलिंड्रीकल नंबर होता है। उन लोगों के लिए ये लैंस सबसे अच्छे होते है। इसकी देखभाल करना भी आसान होता है। और ये साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस की तुलना में अधिक टिकाऊ भी होते है।
साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस
ये लैंस हाइड्रोक्सी इथाईलइथा एक रीलेट नामक मेटिरियल के बने होते है। इसमें पानी भी शामिल होता है। जो आॅक्सीजन को लैंस से कार्निया तक पहुंचाने में मददगार होता है। साॅफ्ट होने के कारण नये व्यक्ति के लिए इन्हें इस्तेमाल करना आसान होता है। जहां साॅफ्ट लैंस के कुछ फायदे हैं वहां नुकसान भी है। जैसे इन लैंसों में थोड़े समय में ही प्रोटीन जमा होने लगता है, जिससे ये धुंधले पड़ सकते है। एवं इन्हें बदलना पड़ता है।
साॅफ्ट होने की वजह से ये टूटते भी जल्दी है और संक्रमित भी जल्दी हो जाते है। लेकिन ये लैंस सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से आंखों का बचाव करने में सक्षम होते है। कुछ साॅफ्ट लैंस डिसपोजेबल भी होते है। जिंहें कुछ समय के बाद बदल दिया जाता है। जिंहें कुछ समय के बाद बदल दिया जाता है। जिससे संक्रमित होने का खतरा भी कम रहता है। जिनकी आंखों में एलर्जी रहती है। साॅफ्ट लैंस को साल में एक बार अवश्य बदल लेना चाहिए। ऐसा करने से आंख के संक्रमण का खतरा कम रहता है, साथ ही साॅफ्ट लैंस उन लोगों के लिए बहुत कारगर होते हैं जिन्हें देर तक काम करना होता है।
साॅफ्ट लैंस कई प्रकार के होते है। महीने में बदलने वाले कांटैक्ट लैंस इन लैंसों को एक महीने इस्तेमाल करने के बाद बदल देना आवश्यक है। जिन लोगों की आंखों में संक्रमण जल्दी जल्दी होता है उनके लिए ये लैंस बहुत उपयोगी होते हैं और रोज बदलने वाले लैंस की तुलना में ये सस्ते भी पड़ते हैं एवं ज्यादा लोकप्रिय भी है।
डेली डिस्पोजल लैंस
इन लैंसों को हर दिन इस्तेमाल करने के बाद फेक दिया जाता है। जिन लोगों को आंख में एलर्जी और आंख में संक्रमण की शिकायत होती है उन लोगों के लिए इस तरह के कांटैक्ट लैंस बहुत उपयोगी होते है।
रंगीन साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस
रंगीन कांटैक्ट लैंस लगाकर आप अपनी सुंदरता को बढ़ा सकते है। इन लैंसों का ज्यादातर इस्तेमाल माॅडल करते है। साथ ही इन लैंसों का इस्तेमाल वो लोग भी करते हैं जिनकी आंख की पुतली में फूला पड़ गया होता है।
बायफोकल एवं ग्रेडिड कांटैक्ट लैंस
बायफोकल कांटैक्ट लैंस दूर एवं पास की दृष्टि दोष दोनों में इस्तेमाल किये जाते है। इनका प्रयोग पास की नेत्र ज्योति कमजोर होने पर किया जाता है। बायफोकल लैंस साॅफ्ट एवं सेमी साॅफ्ट दोनों तरह के होते है।
कांटैक्ट लैंस से होने वाले नुकसान
आंख में संक्रमण
कांटैक्ट लैंस लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धों लें। वरना आंख में संक्रमण होने का डर रहता है। कांटैक्ट लैंस को कभी भी पानी से धोना नहीं चाहिए वरना इसमें मौजूद बैक्टीरिया आंख में संक्रमण कर सकते है। कांटैक्ट लैंस को लेंस केयर सोल्यूशन को दुबारा इस्तेमाल न करें।
आंख में एलर्जी जिसमें आंख लाल रहने लगती है। आंख में खुजली होने लगती है। ऐसा होने पर कुछ समय के लिए कांटैक्ट लैंस न लगाएं और नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लें।
आंख की पुतली पर खरोच
ध्यान रखें कि कांटैक्ट लैंस को पहनते और उतारते समय आंख की पुतली पर खरोच न लगे क्योंकि ऐसा होने पर कोर्नियल अल्सर एवं आंख की पुतली पर सफेदी पड़ने का डर रहता है। जिसकी वजह से आंख की रोशनी भी जा सकती है।
कांटैक्ट लैंस का इस्तेमाल न करें जब-

  •  व्यक्ति मंदबुद्धि हो
  •  आंख में संक्रमण होने पर
  •  आंख की रूसी होने पर
  •  आंख की एलर्जी होने पर
  •  आंख के सूखे होने पर
  •  आंख की पुतली पर सूजन होने पर।

1. रंगीन पाॅलिथीन में फल व सब्जियां कभी न रखें।
2. अगर आप पूरे हफ्ते की सब्जियां व फल स्टोर करते है तो उन्हें धो कर फ्रिज में न रखें गीली सब्जी रखने से सब्जी जल्दी खराब हो जाती है।
3. टमाटर का स्वाद बनाये रखने के लिए उसको रूम टेंपरेचर पर रखें।
4. प्याज को सूखे व ठंडे स्थान पर रखें, प्याज खराब नहीं होगी।
5. पालक को बिना धोए पहले अखबार में लपेटे फिर पाॅलिथीन में लपेटकर फ्रिज में रखें।
6. नाॅनस्टिक बर्तन में खाना पकाते समय आंच धीमी ही रखें, तेज आंच पर इसकी पाॅलिश खराब हो जाती है।
7. इनकी सफाई करते समय कभी भी रेत या स्टील के ब्रुश का प्रयोग न करें। इससे इनका सारा मसाला उतर जाएगा।
8. नाॅनस्टिक पैन में हमेशा लकड़ी का चम्मच ही प्रयोग में लाये।
9. यदि अंडा उबलते समय फूट जाये तो घबराइये नहीं उस बर्तन में थोड़ा नमक डाल दें।
10. जिन सब्जियों में लेस निकलता है उसमें थोड़ा सा नींबू का रस डालें।
11. दहीबड़े को मुलायम बनाने के लिए दाल फेरते समय उसमें 1-2 आलू मिला लें।
12. मक्के के आटे को यदि मांड से गुंधा जाये तो रोटी बनाते समय टूटेगी नहीं।