सेक्स हारमोंस की कमी से होता है डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन

नारी के जीवन में आने वाली रजोनिवृति की तरह की ही स्थिति पुरूषों के जीवन में भी आती है जिसे ‘एडम’ यानी ‘एंड्रोजन डेफिशिऐंसी इन एजिंग मेल्स’ कहा जाता है। ऐसा उन वैज्ञानिकों का कहना है जो कई दशकों से उम्र बढ़ने के साथ पुरूषों के शरीर पर पड़ते प्रभाव का अध्ययन करते आ रहे थे। उम्र बढ़ने के साथ पुरूषों के स्वभाव में भी परिवर्तन आने लगता है। 40 वर्ष की उम्र के बाद पुरूषों के शरीर में सैक्स हारमोन ‘टेस्टोस्टेरोन’ की उत्पत्ति कम होने लगती है जिसका असर पुरूष के यौन जीवन और स्वभाव पर पड़ता है। टेस्टोस्टेरोन की उत्पत्ति कम होने के कारण प्रायः पुरूषों में कामेच्छा कम हो जाती है और चिड़चिड़े हो जाते हैं। हड्डियों और जोड़ों में दर्द होने लगता है। अंगों पर चर्बी बढ़ने लगती है और वे तनाव तथा डिप्रेशन का शिकार हो जाते है। ये सभी लक्षण ‘एडम’ अर्थात ‘एंड्रोजन डेफिशिऐंसी इन एजिंग मेल्स’ के हैं। कुछ वैज्ञानिक महिलाओं में होने वाली रजोनिवृति की प्रक्रिया तथा एडम की प्रक्रिया, दोनों को एक सा मानते हैं लेकिन कुछ अन्य वैज्ञानिक इस विचार से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि ‘एडम’ की तुलना रजोनिवृति से नहीं की जा सकती क्योंकि रजोनिवृति के बाद एंड कोशिकाओं में एग सेल्स का निर्माण होना बंद हो जाता है और महिलाएं गर्भधारण करने में अक्षम हो जाती है लेकिन एडम के चलते पुरूषों में ऐसी स्थिति नहीं आती है। उनके शरीर में जीवन भर निरंतर शुक्राणु बनने की प्रक्रिया जारी रहती है। पुरूष 60 या 70 साल की उम्र में भी गर्भाधान कराने में सक्षम होते हैं यद्यपि उस समय उनके जननांगों में पर्याप्त उत्तेजना नहीं आती। एडम को तुरंत नहीं पहचाना जा सकता क्योंकि यह स्थिति धीरे-धीरे आती है और अधिकांश पुरूष इसे उम्र का प्रभाव मान लेते हैं कि शरीर अब बुढ़ापे की ओर अग्रसर हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यह बुढ़ापे की अवस्था नहीं है बल्कि सैक्स हारमोन टेस्टोस्टेरोन की मात्रा में कमी के कारण यह स्थिति है जिसे इलाज द्वारा दूर किया जा सकता है, इसलिए एडम के लक्षणों के पता चलते ही पुरूषों को सतर्क हो जाना चाहिए। टेस्टोस्टेरोन पुरूषों के शरीर में पैदा होने वाला एक हारमोन है जिसे सैक्स हारमोन या एन्ड्रोजेनिक हारमोन कहा जाता है। इस हारमोन का निर्माण वृषणों मे होता है। एक पुरूष के अंदर प्रतिदिन 4.7 मिलीग्राम होता है। इसी हारमोन की दौलत एक दुबला पतला किशोर पूर्ण पुरूष में बदल जाता है। उसके जननांगों और शरीर का विकास होता है। चेहरे पर दाढ़ी-मूछें व शरीर पर घने बाल निकल आते है। शुक्राणु जनन की प्रक्रिया शुरू होती है। इस हारमोन का निर्माण किशोरावस्था में शुरू हो जाता है। एडम की अवस्था में मधुमेह व दिल की बीमारियों जैसे घातक रोग उभर सकते हैं। रोग पैदा होते ही उपचार कराना चाहिए। टेक्सास विश्वविद्यालय, ह्यूस्टन के एसोसिएट प्रोफेसर राबर्ट टान के अनुसार टेस्टोस्टोरोन हारमोन की कमी के कारण पुरूष में स्मरण शक्ति की कमी, हड्डियों के टूटने का खतरा, नपुंसकता और डिप्रेशन आदि का शिकार हो सकते हैं। हारमोन कमी को पूरा करके रोगी को इन परेशानियों से छुटकारा दिलाया जा सकता है। डॉ. टान के अनुसार टेस्टोस्टेरोन का स्मृति से सीधा संबंध है। जब उन्होंने इस हारमोन की कमी वाले पुरूषों को एंड्रोजन हारमोन दिया तो उनकी स्मरणशक्ति आश्चर्यजनक रूप से बढ़ गई। डॉ. टान द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि प्रति दिन 10 सिगरेट से ज्यादा सिगरेट पीने वाले पुरूषों में सिगरेट पीने वाले पुरूषों की तुलना में एंड्रोपोज की अवस्था जल्दी आती है। यही बात स्त्रियों के साथ भी है। ज्यादा मद्यपान व धूम्रपान करने वाली महिलाओं में रजोनिवृति जल्दी होती है। टेस्टोस्टेरोन हारमोन पुरूषत्व प्रदान करता है। इस हारमोन की कमी के कारण पुरूष, तनाव, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन व तनाव का शिकार हो जाते हैं। उन्हें गुस्सा ज्यादा आता है। एंड्रोपोज की अवस्था को टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थैरेपी (टी. आर. टी.) द्वारा दूर किया जा सकता है। इस थैरेपी से पहले व्यक्ति के शरीर में सीरम टेस्टोस्टेरोन की मात्रा की जांच करना आवश्यक होता है। यह परीक्षण सुबह किया जाता है। कुल टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम पाए जाने पर सीरम प्रोलेक्टिन जांच की जाती है। सीरम टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम पाए जाने पर ही टी. आर. टी. द्वारा उपचार किया जाता है।

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