
हिंदू धर्म मैं समृद्धि, बुद्धि विघ्नहर्ता के देवता का दिवस है गणेश चतुर्थी। यह उत्सव भाद्रपद मास में दस दिनों तक मनाया जाता है। यह पर्व नए आरंभ , मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिकता का प्रतीक भी माना जाता है।
इस पूजा से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं और सुख और सौभाग्य प्राप्त होता है। लोग इस दिन बप्पा की मूर्ति स्थापित करके 10 दिन पूजा करते है सात्विक भोजन व फलाहार से व्रत रखते है । पूर्ण विधि विधान से गणेश जी को कुमकुम, अक्षत्र , चंदन फूल अर्पित कर चौकी पर विराजमान किया जाता है फ़िर घी दीपक साथ आरती और गणेश चालीसा का पाठ कर गणेश मंत्रों का जाप किया जाता है। दिन में भजन कीर्तन कर संध्याकाल में आरती के साथ मोतीचूर के लड्डू मोदक का भोग लगाया जाता है।
महाराष्ट्र व कर्नाटक राज्यों में गणेश चतुर्थी को बहुत उत्साहित धूमधाम से मनाया जाता हैं पूरे दिनों पूर्ण रूप से पूजा समापन के बाद गणेश जी की मूर्ति का जल में विसर्जन किया जाता है।
भारत वर्ष में महीनों पहले से गणेश मूर्तियों को बनाने का काम आरंभ हो जाता है। छोटी बड़ी विशाल मूर्तियों घर , पंडालों में स्थापित होती है। घरों में लोग गणेश उत्सव तीन, पांच, सात का होता है। फिर उन्हें ढोल नगाड़ों भक्ति गायन , नृत्य साथ जलाशय मैं विसर्जित कर दिया जाता है। जो गणेश जी के अपने माता पिता के निवास कैलाश पर्वत कि और घर की वापसी यात्रा का प्रतीक है।