1. रंगीन पाॅलिथीन में फल व सब्जियां कभी न रखें।
2. अगर आप पूरे हफ्ते की सब्जियां व फल स्टोर करते है तो उन्हें धो कर फ्रिज में न रखें गीली सब्जी रखने से सब्जी जल्दी खराब हो जाती है।
3. टमाटर का स्वाद बनाये रखने के लिए उसको रूम टेंपरेचर पर रखें।
4. प्याज को सूखे व ठंडे स्थान पर रखें, प्याज खराब नहीं होगी।
5. पालक को बिना धोए पहले अखबार में लपेटे फिर पाॅलिथीन में लपेटकर फ्रिज में रखें।
6. नाॅनस्टिक बर्तन में खाना पकाते समय आंच धीमी ही रखें, तेज आंच पर इसकी पाॅलिश खराब हो जाती है।
7. इनकी सफाई करते समय कभी भी रेत या स्टील के ब्रुश का प्रयोग न करें। इससे इनका सारा मसाला उतर जाएगा।
8. नाॅनस्टिक पैन में हमेशा लकड़ी का चम्मच ही प्रयोग में लाये।
9. यदि अंडा उबलते समय फूट जाये तो घबराइये नहीं उस बर्तन में थोड़ा नमक डाल दें।
10. जिन सब्जियों में लेस निकलता है उसमें थोड़ा सा नींबू का रस डालें।
11. दहीबड़े को मुलायम बनाने के लिए दाल फेरते समय उसमें 1-2 आलू मिला लें।
12. मक्के के आटे को यदि मांड से गुंधा जाये तो रोटी बनाते समय टूटेगी नहीं।

भूख न लगना बच्चों में एक आम समस्या है। कभी-कभी यह समस्या वास्तविक होती है, तो कभी यह अवास्तविक। माता-पिता को यह लगता कि उनका बच्चा कम खात है अथवा खाने से जी चुराता है, परंतु वास्तविकता ऐसी नहीं होती। इसके विपरीत कभी-कभी बच्चों को सचमुच भूख न लगने की बीमारी होती है। वहीं कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो कम मात्रा में खाते है या फिर वे बार-बार खाते हैं। यह प्रवृत्ति बच्चों की सेहत के लिए नुकसानदेह है।
शारीरिक कारणः
पेट दर्द, आंतों व यकृत में सूजन के कारण भी बच्चों को भूख नहीं लगती। कभी कभी पेट में कृमि पड़ने के कारण भी भूख नहीं लगती उल्टी व टी बी रोग की शिकायत होने पर भी बच्चों में भोजन से मोहभंग हो जाता है। कई मानसिक कारणों से भी बच्चों का भोजन से मोह भंग होने लगता है। जैसे भावनात्मक ठेस लगने और घबराहट आदि से बच्चों को खुलकर भूख नहीं लगती। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि बच्चे की किसी इच्छा का दमन कर दिया जाये तो उसका भोजन से मोहभंग हो जाता है। इसके अलावा कुछ बीमारियों में खाई जाने वाली दवाओं के विपरीत प्रभाव के कारण भी बच्चों में भोजन के प्रति अरूचि पैदा हो जाती है।
उपचारः
मां का दूध बच्चों के लिए आवश्यक है। अतः प्रत्येक शिशु को 4 से 6 महीने केवल का का ही दूध देना चाहिए। बच्चों की मनपसंद चीजें खाने में देनी चाहिए। खाने की चीजें बदल-बदल कर देने से बच्चों में भोजन के प्रति रूचि बवकसित हो जाती है। बेहतर रहेगा की मां-बाप बच्चों के साथ बैठकर खाने की आदतें डाले। इससे उन्हें बच्चे की भोजन संबंधी रूचियों की जानकारियां मिलती रहेंगी।