इन्फ्ल्यूएंजा को फ्लू या मौसमी फ्लू भी कहा जाता है। यह एक संक्रमण है जो नाक, गले और फेफड़ों में शुरू होता है और पूरे शरीर में फैलता है। फ्लू वायरस खाँसने, छींकने या निकट सम्पर्क से आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल जाता है। फ्लू तब भी फैलता है जब कोई व्यक्ति फ्लू वायरस वाली सतह या चीज को छूकर आँख, नाक या मुँह को छूता है।

लक्षण
104 डिग्री फे0 या 38 डिग्री से अधिक बुखार, खाँसी या गल शोथ, नाक बहना या उसका भरा होना, सिर दर्द, अत्यधिक थकान का अनुभव होना, माँसपेशियों में पीड़ा या दर्द, उल्टी, दस्त, बहुत अधिक सर्दी लगना।

उपचार
जंक फूड से बचें। खट्टी चीजों का सेवन न करें। अदरक-तुलसी की चाय का सेवन करें। ठंडे पदार्थ जैसे आइसक्रीम, ठंडा कोला आदि का परहेज रखें।

बहरापन यानि अचानक या धीरे-धीरे सुनने की क्षमता घटना। यह आमतौर पर उम्र बढ़ने पर होता है।

कारण
उम्र बढ़ना, ऊँची आवाजें सहना, अवरोध, कान में संक्रमण, कुछ दवाइयाँ, कान और सिर पर चोट, जन्म के साथ कान में समस्या, परिवार के सदस्यों का बहरा होना, परिवार के सदस्यों का बहरा होना।

लक्षण
आवाजें दबी हुई लगती हैं। ऊँचे स्वर वाली आवाजें सुनने में मुश्किल होती है। जब पृष्ठभूमि में आवाजें हो रही हों तब समझने में मुश्किल होती है। आप दूसरों को कोई बात दोहराने को या धीरे-धीरे, स्पष्ट या ऊँचा बोलने को कहते हैं।

आपके शरीर में बहने वाले रक्त से रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर जो दबाव पड़ता है उसे रक्तचाप कहते हैं। रक्तचाप आपके शरीर में रक्त को पम्प करने में मदद करता है।

रक्तचाप का मापन
हर व्यक्ति का रक्तचाप अलग-अलग होता है। आपकी बांह के चारों और चैड़ी पट्टी बांधकर रक्तचाप की जांच की जाती है। जैसे-जैसे कफ से हवा बाहर निकलती है आपके रक्तचाप का मापन कर लिया जाता है। सामान्य रक्तचाप 120 बटा 80 अथवा उससे कम होता है। उच्च रक्तचाप को अतिरिक्त दाब हायपरटेंशन भी कहते हैं। उच्च रक्तचाप 140 बटा 90 अथवा उससे अधिक होता है। कुछ महिलाएं जब गर्भवती होती हैं तो उन्ळें उच्च रक्तचाप हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप से पीडि़त महिला का यदि सही उपचार नहीं किया जाए तो इससे छोटा या बीमार बच्चा पैदा हो सकता है तथा गर्भवती माँ को भी परेशानियाँ हो सकती हैं।

उपचार
उच्च रक्तचाप में यदि आपका वजन अधिक हो तो इसे कम करें। अपने भोजन और पेय पदार्थों में नमक की मात्रा कम करेें। अल्कोहल के सेवन से बचें। धूम्रपान छोड़ दें या तम्बाकू का उपयोग न करें। व्यायाम लगभग प्रतिदिन करें। तनाव से बचें तथा प्रतिदिन आराम करें।

दिल के दौरे को को हृदयपेषी रोधगलन, हार्ट अटैक कहा जाता है। यह तब पड़ता है जब हृदय की मांसपेशी को आक्सीजन पहुुचाने वाली कोई रक्त वाहिका अवरुद्ध हो जाती है जिससे हृदय के एक भाग में रक्त का प्रवाह रुक जाता है। यदि उपचार तुरन्त न करवाया जाए तो हृदय की मांसपेशी के इस भाग की मृत्यु हो जाती है। जितनी जल्दी आप को मदद मिलती है आपका हृदय उतना कम क्षतिग्रस्त होता है।

लक्षण
आपके सीने, बाँह, जबड़े, कंधे अथवा गले में दर्द, दबाव, जकड़न, भारीपन, दम घुटने सा, जलन की अनुभूति। यह अनुभूति काम और आराम दोनों समय होती है। यह अनुभूति 5 मिनट से अधिक समय तक होती रहती है। इसमें पसीना आना, सांस फूलना, मितली या उल्टी, पेट दर्द या सीने में जलन, बहुत ज्यादा थकान महसूस करना, चक्कर या बेहोशी आना, भय लगना या घबरा जाना आदि लक्षण पाये जाते हैं।
उपचार
खाने की चीजों और पेय पदार्थों में नमक या सोडियम कम कर दें। प्रतिदिन व्यायाम करें। टखने की सूजन को कम करने के लिए अपने पैरों को ऊपर रखें। यदि आपका वजन अधिक हों तो इसे कम करें। धूम्रपान छोड़ दें।

फेफड़े वे अंग हैं जो हमें श्वास लेने में सहायता प्रदान करते हैं। वे शरीर के सभी कोषाणुओं को आक्सीजन प्रदान करने में सहायक होते हैं। कैंसर कोषाणु स्वास्थ्य कोषाणुओं के मुकाबले अधिक तेजी से पैदा होते तथा बढ़ते हैं। कुछ कैंसर कोषाणु मिलकर ऐसी सरंचना विकसित कर सकते हैं जिसे ट्यूमर कहा जाता है। फेफड़ों का कैंसर तब होता है जब फेफड़ों में शामिल कोषाणु परिवर्तित होकर अपसामान्य बन जाते हैं। फेफड़ों के कैंसर के कोषाणु रक्त अथवा लसीका, लिम्पा प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य क्षेत्रों में अथवा अन्य अंगों तक जा सकते हैं। इसे विक्षेपण मेटास्टेटिस कहा जाता है।

कारण
यदि आप धूम्रपान करते हैं तो आपको फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक होगा या अन्य लोगों द्वारा धूम्रपान से प्रभावित क्षेत्र में सांस लेते हैं।

तनाव बदलाव के प्रति होने वाली एक भावनात्मक और शारीरिक प्रक्रिया है। हर किसी को तनाव होता है। तनाव सकारात्मक और आपको ऊर्जा देने वाला हो सकता है या वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करने वाला हो सकता है। लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव आप पर प्रभाव डाल सकता है या हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, आंतों में गड़बड़ी के लक्षण, दमा, गठिया जैसी कुछ बीमारियों को और अधिक बिगाड़ सकता है।

कारण
हरेक व्यक्ति के लिए तनाव के अलग-अलग कारण होते हैं। तनाव के कुछ सामान्य कारणों में परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु, बीमारी, अपने परिवार की देखरेख करना, रिश्तों में बदलाव आना, काम नौकरी बदलना, जगह बदलना और पैसा हो सकते हैं। यहां तक कि देर तक इंतजार करना, विलंब हो जाना या भारी ट्रैफिक होना जैसी छोटी-छोटी चीजें तनाव का कारण हो सकती हैं।
लक्षण
तनाव के कुछ सामान्य चिन्ह हैं जैसे- घबराहट, उदासी या गुस्सा महसूस करना, दिल की धड़कनों का तेज हो जाना, सांस लेने में परेशानी होना, पसीना आना, गर्दन, कंधों, पीठ, जबड़े या चेहरे की मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन होना, सिर दर्द होना, थकान महसूस करना या नींद आने में समस्या होना, कब्ज या दस्त, पेट खराब रहना, भूख कम होना या वजन घटना ।

दांत दर्द, दांतों की सड़न, संक्रमण, कान में दर्द, साइनस संक्रमण या जबड़े के जोड़ में चोट के कारण किसी दांत में या उसके पास होने वाला दर्द होता है।
लक्षण
चबाने में दर्द होना, खून बहना या बुरे स्वाद वाला रिसाव होना, मसूड़ों या जबड़े में सूजन, मसूड़ों या जबड़े में लाली, गर्म या ठंडा खाने या पीने पर दर्द होना।

देखभाल करना

  • अगर आपको निम्न में से कुछ हो तो दांत के डाक्टर को दिखाएं।
  • 1 या 2 दिनों से ज्यादा से हो रहा दांत दर्द।
  • बुखार, कान में दर्द या मुंह खोलने पर दर्द।
  • अपाॅईंटमेन्ट मिलने तक र्द से आराम के लिए अपने दांतों के डाक्टर से बिना नुस्खे से मिलने वाली दर्द की दवा पूछ लें।
  • एस्प्रिन या एस्प्रिन वाले उत्पाद न लें। बहुत गर्म या ठंडे खाद्य खाने से बचें।
  • लोंग के तेल का फाहा दांत के नीचे रखने से आराम मिल सकता है। इसे ज्यादातर फार्मेसियों से खरीदा जा सकता है।

गले में संक्रमण जीवाणु से होता है। यह जीवाणु किसी व्यक्ति की नाक या गले से गिरने वाली तरल बूंदों से फैलता है। यह सर्दी के मौसम के महीनों में बहुत अधिक होता है। जब लोग एक साथ भीतर रहते हैं तो पीडि़त किसी व्यक्ति के साथ 2 से 7 दिनों तक रहने के बाद संक्रमण हो जाता है।
लक्षण
बुखार, कँपकँपी, गले में दर्द, निगलने में कठिनाई, गर्दन में सूजन, सांस लेने में कठिनाई, शरीर में पीड़ा, भूख न लगना, मितली या उल्टी, पेट में दर्द, टान्सिल और गले का पिछला भाग लाल या सूजा हुआ दिखाई दे सकता है और इसमें मवाद के सफेद या पीले धब्बों के साथ बिन्दु हो सकते हैं।
उपचार
बुखार, कँपकँपी, गले में दर्द, निगलने में कठिनाई, गर्दन में सूजन, सांस लेने में कठिनाई, शरीर में पीड़ा, भूख न लगना, मितली या उल्टी, पेट में दर्द, टान्सिल और गले का पिछला भाग लाल या सूजा हुआ दिखाई दे सकता है और इसमें मवाद के सफेद या पीले धब्बों के साथ बिन्दु हो सकते हैं।

नवजात शिशुओं की देखभाल सही ढंग से करना माताओं के लिए एक समस्या बन जाती है। थोड़ी सी चूक अथवा अज्ञानता के कारण बड़ी मुश्किल का भी सामना करना पड़ सकता है। पहले ऐसा होता था कि घर की बड़ी बूढ़ी महिलाए इन बच्चों की देखभाल में काफी ध्यान रखती थी, लेकिन आधुनिक शहरी परिवेश में जहां परिवार का दायरा काफी छोटा हो गया है। पति पत्नी को ही घर से बाहर तक की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। ऐसे में दंपत्तियों के लिए पेश है बच्चों की देखभाल के कुछ उपयोगी टिप्सः

  • बच्चों की मालिश के लिए नारियल तेल मे एक बादाम गिरी डालकर गर्म करे। ठंडा होने पर इसे छान लें। इस तेल की मालिश करने से
  • बच्चों की त्वचा मुलायम व चमकदार बनती है। इस तेल ाक सेवन किसी भी मौसम मे किया जा सकता है।
  • एक नारंगी का रस प्रतिदिन पिलाने से नवजात शिशु का रंग साफ होता है तथा हृष्ट पुष्ट एवं गोलाकार शरीर बनता है।
  • नन्हें शिशु को हृष्ट पुष्ट बनाने के लिए छिलका सहित आलू धोकर महीन काट लें। इसका रस सनिकालकर दूध या शहद के साथ दिन में दो
  • बार चटाने से शिशु कुछ ही दिनों में हृष्ट पुष्ट हो जायेगा।
  • गाय के दूध से बने घी से सिर पर मालिश करने से बच्चों की बुद्धि का विकास होता है।
  • चावल का मांड नमक के साथ मिलकर पिलाने से बच्चों का ताकत मिलती है।
  • दुर्बल बच्चों को मिश्री पीसकर घी में मिलाकर एक चम्मच सुबह शाम चटाने से बच्चा हृष्ट पुष्ट होता है। साथ ही उसकी शक्ति बढ़ती है।
  • बड़े बच्चों को सौफ का चुर्ण शहद के साथ् देने से उसकी स्मरण शक्ति का विकास होता है।
  • नन्हें बच्चो को प्रतिदिन शहद चटाने से वह तंदुरूस्त होता है। साथ ही दांत निकलने में आसानी होती है।
  • बच्चों को स्नान के जल में थोड़ा नमक डालने से त्वचा की बीमारियों से बचाव होता है।
  • बच्चों को सदैव मुलायम व आरामदायक कपड़े पहनाएं। बिना धोये व सुखये किसी दूसरे बच्चो का कपड़ा नही पहनायें।
  • कच्ची हल्दी को गुड़ में मिलकर खिलाने से बच्चो के पेट में कीड़े नष्ट हो जाते है।

धूम्रपान की लत किसी के लिए भी फायदेमंद नहीं होती। महिलाएं इसकी कीमत कुछ ज्यादा हो गई है। नार्वे के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में इस बात का खुलासा किया कि धूम्रपान करन वाली महिलाओं की हड्डियों के खोखला होने और हृदय रोग के अलावा समय से पहले रजोनिवृति की आशंका भी बढ़ जाती है। ओस्लो विश्वविद्यालय की प्रोफेसर थ्यिा एफ मिकेल्सन के नेतृत्व में 59 और 60 साल की 2123 महिलाओं पर यह अध्ययन किया गया। रिपोर्ट के अनुसान धूम्रपान करने वाली 59 प्रतिशत महिलाएं 45 साल की उम्र के पहले ही रजोनिवृति की शिकार पाई गई। समय से पहले रजोनिवृति की शिकार दस प्रतिशत महिलाओं में 25 प्रतिशत महिलाएं अध्ययन के समय भी धूम्रपान करती थी। अध्ययन के अनुसार महिलाओं के लिए पिता या पति द्वारा धूूम्रपान करना सबसे घातक साबित होता है। चाहे-अनचाहे वे स्मोकिंग की शिकार हो जाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू. एच. ओ.) के अनुसार भारत तंबाकू महामारी के कगार पर है। संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में तंबाकू से होने वाली बीमारियों के कारण हर साल 40 लाख लोग मरते है। मरने वालों की यह संख्या 2-3 दशकों में 70 लाख तक बढ़ने का अनुमान है। धूम्रपान धीरे-धीरे की गई आत्महत्या है। यह मानव शरीर को 25 प्रकार के रोगों का शिकार बना देता है। धूम्रपान से स्वांस नली पर सीधा प्रभाव पड़ता है। जिस प्रकार धूएं से रसोई घर, चिमनियां, स्कूटर, मोटर इत्यादि के साईलैंसर और दूसरी चीजें काली हो जाती है इसी प्रकार धूम्रपान से निकलने वाला धुआं फेफड़ों के साथ कैसी खिलवाड़ करता है, यह अनुमान किया जा सकता है। जैसे बीड़ी सिगरेट का धुआं अंदर जाता है नलियों में जकड़न होती है। वायु प्रवेश के प्रति अवरोध बढ़ जाता है। सांस की नलियों की नलियों की सतह पर छोटे छोटे बालों की तरह के अंकुर होते है इन्हें सिलिया कहते है। सामान्य हालत में ये फेफड़ों में से वहां के स्त्राव के साथ वायु के साथ पहुंचे हुए विजातीय द्रव्य धूल धूएं आदि के कण पाते। अब विजातीय द्रव्य और श्लेष्मा आसानी से बाहर नहीं निकल पाते। इस से सांस की नलियों की हालत खराब हो जाती है। एक सिगरेट का धुआं लगभग 4000 विषैले पदार्थ हवा में फैकता है। इसमें मुख्य है- निकोटिन, कार्बन मोनोक्साइड, कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ-काॅरसिनोजन्स, टार आदि। निकाटिन से फेंफड़ों में जख्म हो जाते है। अंत में उनमें कैंसर पैदा हो जाता है। जब फेफड़ो में टार की मात्रा अधिक बढ़ने लगती है, तब कैंसर की शुरूआत होने लगती है।