सौंदर्य की देख-रेख में आपके संतुलित भोजन से लेकर शारीरिक व्यायाम, शरीर को आराम देना अर्थात् ’रिलेक्शन’ तथा भरपूर नींद आदि सभी कुछ आता है। इसके साथ ही महत्वपूर्ण है, विभिन्न अंगो का मसाज। पुरातन काल में बड़े-बड़े राजा-रजवाडा़ें के यहां रानियां अपने शरीर की नियमित मसाज करवाती थीं। खूश्बूदार तेल व विभिन्न जड़ी-बूटियों के सत् से की जाने वाली मालिश ही उनके सुकोमल व स्निग्ध सौंदर्य का मुख्य कारण थीं। सधे हुए हाथों से की जाने वाली यह मालिश त्वचा के भीतर रक्त-संचार बढ़ा कर उस स्थान की मांसपेशियां को नवजीवन प्रदान करती है और इसी से उस अंग की त्वचा एक अनोखी कांति से दमकने लगती है। नियमित किए जाने पर मालिश का प्रभाव और भी बढ़ जाता है। जहां तक रिलेक्शन का सवाल है, रक्त-संचार बढ़ने व मांसपेशियो का ढीला होने से शरीर के उस अंग को आराम भी मिलता है।
’मसाज’ शब्द की उत्पत्ति मूलतः ग्रीक शब्द ’मासा’ अर्थात् मलने से हुई है। हमारे किसी अंग के शिथिल होने पर या फिर किसी स्थान पर दर्द महसूस होने पर उस स्थान को विभिन्न दिशाओं मे मलना और उस अंग को आराम पहुचाना ही मालिश या मसाज कहलाता है। मसाज हमारी त्वचा की एक प्रकार से टोनिंग करती है। रक्तसंचार बढ़ाने के साथ-साथ यह त्वचा के भीतर उपस्थित विभिन्न बेकार के पदार्थों को ’लिम्फ सिस्टम’ की मदद से शरीर के बाहर भी निकालती है। शुष्क त्वचा पर की जाने वाली मालिश त्वचा के भीतर उपस्थ्ति ’सिबेशियम ग्रंथियों’ (तेल उत्पादक) की सक्रीयता बढ़ाकर त्वचा को चिकना और कोमल बनाती है।
यह सच है कि मालिश आपकी मांसपेशियों की कार्य क्षमता को ही नही बढ़ाती बल्कि त्वचा के साथ साथ इनकी भी टोनिंग करती है। उदाहरण के तौर पर यदि आप तनाव से ग्रस्त है तो आपने अक्सर देखा होगा कि आपकी मांसपेशियों का कसाव बढ़ जाता है जो कि एक प्रकार के दर्द को जन्म देता है। खास तौर पर कंधे व गर्दन के आसपास की नसें व मासपेशियां तनी हुई सी महसूस होती है और दर्द भी पहले से कम हो जाती है। अब आप खुद सोचिए कि अगर पूरे शरीर की कुशल हाथो द्वारा मालिश की जाए तो उसके बाद मिलने वाले मानसिक और शारीरिक सुख का एहसास कैसा होगा। यूं तो यह सर्विस कोई और करे तो उससे बेहतर कुछ नहीं, पर आजकल की व्यस्त जीवनचर्या में दूसरों से अपेक्षा रखने के स्थान पर अगर आप खुद अपने शरीर के विभिन्न अंगो की मालिश करना सीख लें, तो बेहतर होगा।
अपने शरीर की मालिश करना एक कठिन काम है। फिर भी जहां तक हो सके आप नहाते समय अपने बाथरूम मे ही इसकी आदत डाल लें। बाजार में इसके लिए विशेष दस्ताने मिलते है, जिनमें रबर के दस्तानों पर छाटे-छोटे नोड्यूल्स के कारण यह उस स्थान की त्वचा के रोमकूपों के अवशोषण अर्थात् सोखने की क्षमता को बढ़ा देते है, जिसके कारण नहाने के बाद इन अंगों पर मली हुई क्रीम आदि त्वचा के भीतर भलीभांति जज्ब हो जाती है और त्वचा चिकनी होकर चमकने लगती है। मगर इन दस्तानों का प्रयोग स्तनों पर व पेट की त्वचा के लिए उपयुक्त नही होता। यहां की त्वचा कोमल होने के कारण इन नोड्यूल्स की वजह से बहुत लाल हो जाएगी जिससे नुकसान भी पहुच सकता है। इन दस्तानों से मालिश करते समय हमेशा ध्यान रखिए कि आपकी मालिश की दिशा शरीर के ऊपर की तरफ हो, ताकि उसमे ढीलापन न आ सके।
दस्तानों की जगह पर आप अपनी उंगलियों की मदद से मालिश का काम बखूबी कर सकती है। नहाने के बाद पहले आराम से बैठ जाइए। अब पीठ के बल जमीन पर लेट कर पैरो को पूरी लंबाई से तान लिजिए। अब दोनो पैरो को सीधे सिर के ऊपर की तरफ तान कर खिचिए। थोड़ी देर बाद उन्हें फिर सामान्य स्थिति में नीचे ले आइये। फिर पहले वाली क्रिया को दोहराइये इस प्रकार इन दोनों क्रियाओं को क्रम से कई बार कीजिए। अब शरीर को थोड़ा सा रिलैक्स कीजिए और थोड़ा ढीला छोड़ दीजिए। यह क्रिया कुछ कुछ चुटकी काटने जैसी होगी। इस क्रिया को जांघो व कूल्हो पर सब तरफ दो-दो बार कीजिए। अब इस क्रिया को आप ऊपर की तरफ कमर और बाहों के ऊपरी सिरे पर भी इस्तेमाल करें। इस क्रिया को अगर आप रोज नहाने के बाद न कर सकें तो कम-से-कम हफ्ते में तीन बार जरूर कीजिए। इससे भी रक्त संचार बढ़ता है और मालिश जैसी ही प्रभाव पड़ता है।
अब पूरी तरह नहाने के बाद बदन को तौलिए से पोंछने के दौरान भी तौलिए के दोनो छोरो को हाथ से पकड़ कर शरीर के पीछे ले जाकर दाए व बाए घुमाते हुए अपनी पीठ, कूल्हों, कमर व बाहों के पिछले भाग को रगड़कर पोछिए। यह भी एक तरह से उन अंगों के रक्तसंचार को बढ़ाने की ही प्रक्रीया है। अब पूरे शरीर पर कोई अच्छी क्रीम या फिर हेण्ड एण्ड बाॅडी लोशन लेकर एक हल्की परत लगा लीजिए। यह क्रीम त्वचा के भीतर समा कर उसे जल्दी ही कोमल बनाती है।
बाजार में उपलब्ध विभिन्न मसाज मशीन या वाइब्रेटर द्वारा भी आप अपने विभिन्न अंगो की मालिश कर सकती है। पर हमेशा ध्यान रखिए कि मसाज से पहले उस अंग की त्वचा पर कोई क्रीम या तेल आवश्य लगाएं। धीरे-धीरे गोलाकार दिशा में घुमाते हुए ही मशीन का प्रयोग करे
चेहरे पर मेकअप की पर्तों को हटाने के दौरान क्लींजर लगार रूई के मेकअप हटाने की प्रक्रिया मे भी आप अपने चेहरे की हल्की मसाज ही करती है, फिर भी भिन्न प्रकार की त्वचा वाले चेहरे व गर्दन के लिए मसाज के अलग-अलग स्ट्रोक्स है, जिसको जानना भी जरूरी है।
शुष्क त्वचा की मसाजः चेहरे पर कोई भी नाइट क्रीम लगाइए। अब दोनो हाथों का प्रयोग करते हुए अपनी बीच वाली उंगली और पहली उंगली लेकर गर्दन व चेहरे को छुइए। इसी प्रकार गर्दन से ऊपर की तरफ ले जाते हुए लम्बे, पर धीमे स्ट्रोक्स मे चेहरे की मालिश कीजिए। उंगलियो के अगले सिरे से आपको धीरे धीरे चेहरे के रोयो को ब्रश करने की प्रक्रिया मे नीचे से ऊपर ले जाना है। इस क्रिया को सोने से पहले रोज रात में कीजिए।
तैलीय त्वचा की मसाजः इसको आॅइली स्किन जैक्वेट मसाज भी कहते हैं। जो कि इसके फ्रेंच अविष्कार के नाम पर ही पुकारी जाती है और खास तौर पर इसके तैलीय त्वचा के लिए उपयुक्त है। इसके लिए पहले चेहरे के मांसल भागों जैसे गाल व ठोड़ी पर धीरे-धीरे पिंच कीजिए। इस पिंच करने की प्रक्रिया में उस स्थान की त्वचा की तैल ग्रंथियां सक्रिय होकर और तेल उत्पन्न करने लगती हैं जो कि त्वचा की त्वचा की सतह पर उभर कर दिखने लगता है। इसी प्रकार चेहरे के मांसल भागो हल्के हाथो से ये क्रिया दोहरायें अब पूरे चेहरे को भीगी रूई के फोहे से थपथपाते हुए पोछिए। अब चेहरे को साफ तौलिए से थपथपाते हुए सुखा लीजिए। पतली त्वचा की मसाज बहुत संवेदनशील होने के कारण बाहरी प्रभावों से जैसे तेज धूप तापमान आदि या तली भुनी चीजों एल्कोहल या उचित देख रेख के अभाव में नाक व गाल के पास वाले भागो पर फटी फटी सी दिखाई पड़ती है।
इस त्वचा की मसाज बहुत ही हल्के हाथो से थपथपाते हुए ही करनी चाहिए। उंगलियों के अगले सिरों से पूरे चेहरे को थपथपाते हुए ही इस त्वचा की मालिश करें। मालिश की प्रक्रिया में उंगलियों का क्रम लगातार बदलती जाए जैसे आप तबला या किसी वाद्य को बजाने में करती है। इन्ही स्ट्राक्स को चेहरे के नीचे भी लगाएं।
गर्दन की मसाजः रोज रात को चेहरे की मसाज के साथ गर्दन की मसाज भी न भूलें। गर्दन पर कोई भी क्रीम लगाकर सभी उंगलियों को एक साथ जोड़कर व हथेली का भी प्रयोग करते हुए दोनों हाथों को गर्दन से लेकर ठोड़ी तक क्रम से एक के बाद एक लाइए। इस मसाज को थोड़ा दबाव के साथ और जल्दी-जल्दी करें। थोड़ी-थोड़ी देर बाद हाथो का क्रम बदल दें। यह क्रिया तब तक दोहराए जब तक सारी क्रीम त्वचा में समा न जाए।
चेहरे की मसाज यूं तो फेशियल मसाजर से भी की जा सकती है। पर चेेहरे इसे चलाते वक्त दिशा का ध्यान होना जरूरी है। नही तो चेहरे की त्वचा ढीली होकर लटक जाएगी और उस पर लाइनें व झुर्रियां दिखाई देने लगेंगी।

भगवान द्वारा दी गई अनुपम भेंट आंखों को स्वस्थ रखना मनुष्य पर निर्भर करता है। आंखों की महत्ता को सभी बखूबी जानते है। यदि आंखे स्वस्थ है तो जीवन रंगों से भरपूर है। आंखे अस्वस्थ्य है तो जीवन रंगहीन हो जाता है। स्वस्थ आंखे निर्मल और चमकीली होती है।
आंखों का आकार और रंग रूप ईश्वर की देन है पर थोड़ी सी अतिरिक्त देखभाल से आंखों को सुंदर और सजीव बनाया जा सकता है। इसके लिए आवश्यकता है उचित खान पान सफाई आवश्यक व्यायाम और समुचित नींद की। आइए देखें कि आंखों को स्वस्थ और सुंदर कैसे बना कर रखें-

  • आंखों को कभी भी रगड़े नहीं।
  • आंखों को धुएं, धूल व तेज प्रकाश से बचा कर रखें।
  • तेज धूप में जाते समय अच्छी क्वालिटी के रंगीन चश्में को पहनना न भूलें।
  • सूर्य और सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से न देखें।
  • भोजन के बाद साफ हाथों से साफ जल को नेत्रों के ऊपर उंगलियों से लगाएं। इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है।
  • सुबह प्रतिदिन हरी घास पर नंगे पांव घूमने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  • सुबह उठ कर नेत्रों में जमी मैल को ठंडे पानी से साफ करें।
  • नहाते समय आंखों को ठंडे पानी से धोएं।
  • आंखों में ठंडक बढ़ाने के लिए रात्रि में त्रिफला ठंडे पानी में भिगो दें। प्रातः उसे छानकर उस पानी में आंखे धोएं। त्रिफला खाने से आंखों को लाभ पहुंचता है।
  • टेलीविजन एक निश्चित दूरी से बैठकर देखें। नजदीक से देखने पर आंखों पर खराब प्रभाव पड़ता है। टकटकी लगाकर न देखें। बीच बीच में आंखों को आराम दें।
  • पढ़ते समय ध्यान दें कि आंखों पर सीधा प्रकाश नहीं पड़ना चाहिए। कम या तेज प्रकाश में भी पढ़ाई न करें। लगातार देर तक पढ़ने से आंखें
  • कमजोर हो जाती है। कुछ पल आंखों को आराम दें।
  • आंखों का स्वस्थ रखने हेतु कुछ आंखों के व्यायाम भी करते रहे।
  • आंखो की सुंदरता और अच्छी सेहत के लिए हरी सब्जी, दूध, फल रेशेदार भोजन नियमित लें ताकि विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में मिलता रहे।
  • आंखों के स्वास्थ्य के लिए मिर्च मसाले भरा भोजन न खाएं। ध्यान रखें कि कब्ज भी न हो पाए।
  • आंखों के स्वास्थ्य हेतु 7-8 घंटें की नींद लें।
  • आंखों के नीचे झुर्रियां होने पर नियमित रूप से मलाई लगाएं ताकि झुर्रियां दूर हो जाए।
  • गुनगुने दूध में रूई डालकर उसके फाहे को प्रतिदिन आंखो के ऊपर रखें। थोड़ी देर रखने से आंखों को आराम मिलता है।

थोड़ी सी मलाई में एक चुटकी बेसन व हल्दी मिलाकर इस लेप को चेहरे पर लगाएं। सूखने पर उतार दें और फिर ठंडे पानी से मुंह धो लें। ऐसा करने से चेहरा दमक उठेगा।
एक चम्मच जौ के आटे में जरा सी हल्दी व 5-6 बूंद नारियल का तेल मिला लें। आवश्यकतानुसार जरा सा पानी मिलाकर लेप तैयार कर लें। इसे 10-15 मिनट तक चेहरे पर लगाएं फिर बाद में चेहरा धों ले। इस लेप से त्वचा की शुष्कता दूर हो जाएगी। एक बड़े चम्मच दही में 2 बूंद नारियल का तेल और चुटकी भर हल्दी मिला लें। इस लेप को चेहरे पर लगा लें। जब लेप सूख जाए तब उसे रगड़कर छुड़ा दें। और चेहरे को धो लें। ऐसा करने से त्वचा स्निग्ध होगी।
एक चुटकी हल्दी, थोड़ा दूध, नींबू की चार बूंद रस मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर आधे घंटे तक लगाकर चेहरा पानी से धों दें। इससे काले धब्बे धीरे-धीरे ठीक हो जाएंगे।
मैदे को दूध में मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। इसे चेहरे पर मलें। सूख जाने पर इसे उतार दें और चेहरा धों लें। इस से त्वचा मुलायम बनी रहेगी।
आॅयली स्किन वालों के लिए सर्दियों का मौसम सबसे बेहतर होता है, लेकिन देखभाल की जरूरत इन्हें इस मौसम में भी होती है। आॅयली स्किन वालों को हमेशा ग्लिसरिन और स्ट्राॅबरी युक्त फेस वाॅश का ही इस्तेमाल करना चाहिए मायश्चराइजर का इस्तेमाल करते समय इतना ध्यान जरूर रखें कि आपका मायश्चराइजर आॅयल फ्री हो। ड्राई स्किन वालों को सबसे देखभाल और केयर की जरूरत है। इनको अतिरिक्त माॅयश्चराइजर का प्रयोग करना चाहिए। जब भ्ज्ञी धूप में बाहर निकलें तो सूरज की किरणों से त्वचा को बचाए रखने के लिए सनस्क्रीन जरूर लगाएं। रात को सोने से पहले जैतून और बादाम का तेल लगाएं। इससे त्वचा का रूखापन दूर हो जाएगा। नाॅर्मल स्किन वाली महिलाओं को सर्दियों में त्वचा की देखरेख के लिए काफी सावधानी बरतनी चाहिए। इन्हें सर्दियों में हमेशा क्रीम लगानी चाहिए। इससे आपकी त्वचा को जरूरी पोषण मिल जाएगा। रात में सोने से पहले दूध में थोड़ा नमक मिलाकर रूई के फाहे से चेहरे पर लेप करने से रंग में निखार आता है। और त्वचा मुलयम भी बनी रहती है। रात में जो भी लेप किया है उसे सुबह उठकर धो देना चाहिए।
सर्दियों में धूप से बचाव के लिए एसपीएफ 15 युक्त मायश्चराइजर का प्रयोग करें। यदि बाहर जा रहे हो तो हाई एसपीएफ सनस्क्रीन लगाएं क्योंकि सनबर्न सर्दियों में भी हो सकता है।

पैरों पर बाल न बढ़ें इसके लिए आपको लगातार सावधान रहना चाहिए। किसी पार्लर में वैक्सिंग करा लें या नहाते समय शैविंग करके पैरों पर से बाल निकालें। लेजर किरणों से भी बालों को निकाला जा सकता है। पैरों को कुछ रंग दें। इसके लिए हल्के रंग की स्टाॅकिंग या पैंटी होस पाइप पहनें। पैरों को व्यायाम देने से वह सुंदर दिखते हैं। दौड़ना, तैराकी, साइकिल चलाना इससे पैरों से अतिरिक्त चर्बी हटकर वह सुडौल दिखते हैं। पैरों की मालिश करें। मालिश पैरों से जांघों तक हल्के हाथों से करें। मालिश करने से पैरों में रक्त का संचार बढ़ता है और अतिरिक्त चर्बी भी कम होती है। आम तौर पर पैरों को जमीन से जुड़ा रहना पड़ता है। हर दिन 15 मिनट के लिए पीठ के बल लेटकर पैरों को हवा में उठाये रखें। पैरों को धो कर मास्चराइजर लगा कर पैरों को थोड़ी नमी दें। पैरों को एक दूसरे से अलग रखना चाहिए। पैरों के जुड़े रहने से पैरों की नसों में सूजन आ सकती है।

जब आप लोगों के सामने अपनी खूबसूरत मुस्कान बिखेरती हैं और खुलकर हंसती हैं तो इससे पता चलता है कि आपने अपने दाँतों को कितना चमकाया है। नेशनल डेंटल एसोसिएशन के अनुसार दाँतों की साफ-सफाई और स्वास्थ्य के लिए रोजाना दो बार दाँत ब्रश करने चाहिए।

दाँतों को ब्रश करने का तरीका
1. किसी जाने-माने बढि़या टुथपेस्ट का इस्तेमाल करें और ऐसा आप टीवी विज्ञापन देखकर नहीं करें बल्कि अगर आपके दांतों की कोई छोटी मोटी समस्या है तो उसके अनुसार अपने डाक्टर से इस बारे में राय कर लें और
2. दांतों के अंदरूनी तथा बाहरी हिस्सों में 45 डिग्री के कोण से ब्रश करें। आप मसूड़ों से शुरू करके आधे दांत की चैड़ाई के स्ट्रोक्स लें।
3. ब्रश को हर 3 से 5 महीने में एक बार जरूर बदलें।
4. इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि ब्रश का चुनाव करते समय यह सावधानी रखें कि आपके दाँतों और मसूड़ों की नाजुक परत को वो कोई नुक्सान नहीं पहुंचाए और उसके रेशे नाजुक होने चाहिए।
5. आप मसूड़ों की मालिश कर सकते हैं पिपरमेंट के तेल से।
6. दाँतों को भी व्यायाम चाहिए होता है ऐसा करने के लिए आप ब्रश करने के बाद अपने ऊपर के दाँत और नीचे के दाँतों को आपस में प्रेशर के साथ दबाएँ और फिर खोल दें।
7. मीठा कम खाएं क्योंकि ऐसी चीजें जो चीने से भरपूर होते हैं वह आपके मुँह में जाकर सड़न पैदा करने का काम करती है और ये हमारी दाँतों के इनेमल वाली पर्त को गला देते हैं इसलिए जरूरत से अधिक मीठे के शौकीन नहीं बनें।
8. अगर आप दाँतों की सही से देखभाल नहीं करते तो आपको मुंह की किसी भी तरह की बीमारी का सामना करना पड़ सकता है।
9. आपके दाँत आपके जीवन भर साथ रहें इसके लिए आवश्यक है कि आप नशे से जुड़ी आदतों से दूर रहें और नियमित दाँतों की देखभाल करें क्योंकि तम्बाकू आदि से आपको मुँह के कैंसर की समस्या से जूझना भी पड़ सकता है।

प्राकृतिक रूप से गुलाबी होंठ एक महिला की खूबसूरती की पहचान होती है। कई लोग अपने होंठों को चमकदार और सुन्दर बनाना चाहते हैं। होठों के काले पड़ने के कई कारण हो सकते हैं जैसे सूरज की अत्याधिक रौशनी पड़ना, औषधियों का विपरीत असर पड़ना, खराब क्वालिटी के सौंदर्य प्रसाधन, धूम्रपान, काफी मात्रा में कैफीन का सेवन तथा शरीर में हार्मोनों का असंतुलन आदि।

डार्क लिप से कैसे पाएं छुटकारा
काॅफी और चाय होंठों को डार्क बनाने में कसर नहीं छोड़ते। दिन भर में एक या दो बार काॅफी या चाय पीने से कोई फर्क नहीं पड़ता पर यदि मात्रा थोड़ी ज्यादा हो जाए तो निश्चित फर्क पड़ेगा। इसके अलावा समोकिंग, एलर्जी, होंठ को बार बार चाटना भी आपके होठों को डार्क बना सकता है।

उपचार
1 सुबह ब्रश करने के बाद अपने उसी ब्रश से होंठ पर से मृत कोशिका को हटाने का प्रयास करे इससे नई त्वचा आ जाएगी।
2 रात को सोने से पहले अपने होंठों पर वैसलीन या नींबू का रस लगा कर सोएं। इसके लिए एसपीएफ 15 वेल्यू वाला लिप बाल्म लगाना चाहिए साथ ही दिन भर में 8 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।
3 पौष्टिक आहार न लेने से भी डार्क लिप हो जाते हैं।
4 एक्सपायर लिपिस्टक न लगाएं।
5 होठों का कालापन दूर करने के लिए बादाम का तेल बहुत उपयोगी होता है।
6 खीरे का प्रयोग आप अपनी कुहनी, घुटने और हाथों के बगल के रंग में भी निखार ला सकती हैं साथ ही खीरा होंठों पर लगाने से होंठों के कालेपन से छुटकारा मिल जाएगा।
7 होंठों के कालेपन को दूर करने के लिए एक सूती कपड़े में दूध की कुछ बूंदें लें और इसे अपने होंठों पर लगाएं। इससे होंठों का कालापन दूर होता है।
8 होंठों को स्वस्थ रखने के लिए मक्खन का इस्तेमाल करें।
9 नींबू से होंठों का रंग साफ किया जा सकता है।
10 गुलाब जल के साथ शहद मिलाकर होठों पर लगाने से होंठों का डार्कनेस कम किया जा सकता है।

हेयर स्पा से बालों की खूबसूरती बढ़ती है। बालों का टैक्सचर और चमक कायम रखने में हेयर स्पा बहुत मदद करता है। इसमें आॅयल, मसाज, शैंपू, हेयर मास्क और कंडिशनर का इस्तेमाल किया जाता है।
बालों के लिए स्पा लगभग 45 मिनट से एक घंटे तक होने वाला प्रोसेस है। यह बालों के कई ट्रीटमेंट में उपयोगी है। हेयर स्पा में मसाज, क्रीम, मशीन और हेयर मास्क आदि का प्रयोग किया जाता है। कोई भी ट्रीटमेट शुरू करने से पहले बालों को शैंपू किया जाता है। बालों के टेक्सचर के मुताबिक क्रीम चुनकर तकरीबन 45 मिनट मसाज दी जाती है।

हेयर स्पा के लाभ

हेयर स्पा से बालों मे चमक और नमी वापस लाने में मदद मिलती है। शैंम्पू के दौरान सिर की त्वचा को कम से कम 10 मिनट तक मसाज किया जाता है। शैंम्पू के बाद डीप कंडीशनिंग माॅस्क लगाकर 20 से 25 मिनट तक मसाज किया जाता है। फिर बालो की जड़ से सिरे तक एक क्रीम लगाई जाती है।
बीमारियों को दूर रखे
हेयर स्पा अनेक समस्याओं से बचाए रखता है। आमतौर पर स्पा करने से डैन्ड्रफ, बालों का गिरना और सिर की त्वचा की समस्याएं समाप्त होती हैं। बालों की खो चुकी चमक और नमी को वापस लौटाने में मदद करता है।

सुंदर आंखें इंसान की सुंदरता में चार चाँद लगाती हैं क्योंकि इन्हीं अनमोल आँखों से कुदरत के खूबसूरत नजारों को देख सकते हैं इसलिए जरूरी है आँखों को बीमारियों से बचाना जरूरी है। आँखों को बीमारियों से बचाने के लिए आँखों की सफाई और आँखों का व्यायाम करना जरूरी है। आँखों की देखभाल के लिए विटामिन-ए युक्त भोजन करना चाहिए। आँखों की देखभाल के लिए ताजे गुलाब की पंखुडि़यों को लेकर उनका रस निकाल कर अपनी बंद आँखों पर लगाएं। और आँखों पर 20 मिनट तक रखें। यह आपकी आँखों की सूजन हटाने का तरीका है। जिन लोगों की उम्र थोड़ी ज्यादा हो गयी है उनकी आँखों के आसपास झुर्रियां पड़ना आम बात है पर सही देखभाल से इस समस्या का भी इलाज हो सकता है। 3 चम्मच कच्चा दूध और 3 चम्मच शहद। इन दोनों पदार्थों को अच्छे से मिलाएं और आंच पर कुछ देर गर्म कर लें और इसे 30 मिनट तक रखें। समय पूरा हो जाने पर गर्म पानी से धो दें। यह काफी असरदार प्राकृतिक नुस्खा है जिसकी मदद से आँखों के पास की झुर्रियां बिल्कुल गायब हो जाती हैं। इसके अलावा पालक खाएं और खूब पानी पियें। आलू या खीरे के टुकड़े लें और इसे आँखों के नीचे रखें। इससे काले घेरों, झुर्रियां तथा त्वचा की महीन रेखाओं से छुटकारा मिलेगा।

नियमित रूप से करें आँखों की सफाई

आँखों के प्रति लापरवाही बरतने से आँखों मे पानी आना, जलन, खुजली, आँखों का लाल होना, पीलापन आना, सूजना, धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन समस्याओं से आँखों को बचाने के लिए नियमित रूप से आँखों की सफाई करनी चाहिए। इसके लिए दिन में ठंडे पानी से आँखों को अच्छी तरह से धोएं। आँखों को बीमारी से बचाने के लिए विटामिन-ए- लेना चाहिए साथ ही दूध, मक्खन, गाजर, टमाटर, पपीता, अंडे, शुद्ध घल और हरी साग-सब्जियों इत्यादि का सेवना करना चाहिए। भरपूर नींद लें तथा कंप्यूटर से उचित दूर बनाकर काम करें।