गर्मियो आ गई हैं। आप कहीं घूमने जा रहे हो तो जहां तक हो सके इन बातोें का ध्यान रखें जिससे आपका सफर सुखमय तथा यादगार हो सके।
पहले आप अपने साथ अनेक प्रकार क आरामदायक कपड़े रखें। अपने कपड़ों में सूट-सलवार, जींस-टाॅप, स्कर्ट आदि रखें तथा बच्चों के भी कपड़े आरामदायक ही रखें ताकि भागने दौड़ने और सफर करने में आसानी हो। आप चुन्नी गले में डालकर न पहनें जिससे हवा में या दौड़ने में आपके गले में फस सकती है। आप सूट में अंदर जेबें लगा लें जिससे उसमें रूपये पैसे आराम से रख सकें।
जहां तक हो सके किसी अच्छे होटल में ही रूकने का कार्यक्रम बनाएं। होटल के कमरे पहले से ही बुक करा लें क्योंकि बड़े होटलों में आपको हर सुविधा मिल जाएगी। एक बड़ा बैग सफर के लिए हमेंशा साथ रखें ताकि उसमें बच्चों की छोटी-मोटी चीजें और सेफ्टीपिन का पैकैट, फस्ट एड का सामान रखें। उसमें सिरदर्द की टेबलेट, उल्टी जुकाम की दवाई, कोई एंटीसेप्टीक क्रीम, बैंडेड चोट की दवाई इत्यादि, कुछ अपने मेकअप का सामान, कुछ खुल्ले पैसे और कुछ चोकलेट, टाफी नमकीन के पैकैट भी साथ रखें ताकि बच्चे जब तब मांगे तो पैकिंग रास्तें में न खोलनी पड़े। पर्स में एक फोल्डेबल चाकू और टार्च इत्यादि रखें। टार्च छोटी वाली रखें। साथ में एक थर्मस भी रखें।
घूमने जाने से पहले उस शहर का नक्शा भी साथ में होना चाहिए। जिससे उस शहर की सभी सड़कें, स्टेशन, पुलिस स्टेशन, होटल तक के रास्ते के बारे में जानकारी मिल सके। वहां के पुलिस स्टेशन के फोन नम्बर तथा अपने अपने घर का फोन नम्बर अवश्य याद रखें ताकि जरूरत पड़ने पर आप फोन कर सकें। पड़ोसी का फोन नम्बर भी रखें।
अपना पता जहां आप रह रही हैं और आपका स्थाई पता, दोनों पतों को अपने पास रखना चाहिए। पता दो जगह रखना चाहिए, एक अपने बैग में, दूसरे अपने सूटकेस में ताकि कोई भी ट्रेजेडी होने पर आपको घर पहुंचने में दिक्कत न हो। पता एकदम साफ लिखा होना चाहिए जिससे दूसरा व्यक्ति आराम से पड़ सके। सूटकेस एक ही रखें। शेष बैगों का प्रयोग करें। घूमने जाएं तो सारा सामान को न ले जाएं। अगर आपका सामान चोरी हो जाए तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
खाना उस होटल में न खाएं जिस होटल में आप रूके हैं। खाना आम रेस्तरा में या ढाबे में ही खाएं क्योंकि वहां होटल की अपेक्षाकृत सस्ता खाना मिलेगा। हो सके तो साथ लड्डू, मठरी, मट्ठी इत्यादि बनाकर ले जायें।
जहां आप भ्रमण के लिए जा रहीं है वहां पर समान न खरीदें क्योंकि दूसरी जगह आपको नया जानकर पैसे अधिक वसूलते हैं। अगर कोई मजबूरी हो तो अलग बात है।
भ्रमण पर जाते समय अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगी तथा अपने तौर पर सावधानियां बरतेंगी तों आप अपनी यात्रा को सुखद बना सकती हैं।

सर्दी शुरू हो गई है। ग्लोबल वार्मिंग आदि कारणों से ठंड के महीने भले कुछ कम हुए हों लेकिन अब भी दिसंबर-जनवरी के महीनें में भारत विशेषकर समूचे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ती है। सर्दियाँ काफी लोकप्रिय मौसम जो सभी को भाता है। सर्दियों में मानो समूची प्रकृति निखर जाती है। ठंड का एहसास मन में उमंग पैदा करता है। जोश भर देता है। गर्मी, उमस न होने से थकान भी गायब हो जाती है। चेहरे पर रौनक लौटा देती है। मन में उत्साह का संचार होने लगता है । यह उत्साह बसंत तक बना रहता है। सर्दियों में भरपूर जीने को मन करता है। तभी ये मौसम सभी को पसंद है। शादी, पार्टी भी इन दिनों ज्यादा होते है। घूमने फिरने को मन करता है।फैशन का मजा भी इन दिनों में ही होता है।
लेडिज स्पेशल
सर्दियों का मौसम महिलाओं में ज्यादा फेवरेट होना चाहिए। कम से कम सजने-सवरने के मामले में फेशन के मामले में तो पुरूष भी किसी से कम नही है। लेकिन इस मामले में महिलाए हमेशा बदनाम रही है। वैसे तो महिलाएं हर मौसम में संवरती है लकिन उन्है फैशन करने के मामले में सर्दियों का मौसम भाता है। गर्मियों में पसीना व उमस से मेकअप का मजा खराब होता है, इसलिए ठंड में ओढने-पहनने, मेकअप का अलग ही आनंद है। यह कहना गलत न होगा कि सर्दियों में महिलाए ज्यादा खूबसूरत दिखती है। सर्दियों में तन और मन दोनों ही निखरते है।
बुनाई
सर्दियां आ गई है तो इससे बचने के लिए स्र्वेटर भी चाहिए। रेडिमेड कपड़ों के जमाने में भी घर पर ही स्वेटर की बुनाइ। आज भी लोकप्रिय है। वैसे घर पर ही रहने वाली महिलाओं के लिए यह एक अच्छा टाइम पास भी है। बुनाई एक अच्छी गृहणी की एक फायदेमंद कला कह सकते है।
शाॅपिंग टाइम
शाॅपिंग करना, घूमना, फिरना किसे अच्छा नही लगता। सर्दियों में तो इसका मजा दुगना हो जाता है। सर्दियों में महिलाए भी घर से बाहर निकलना ज्यादा पसंद करती है। इस दौरान बाजारों, माॅल्स आदि में चहल-पहल बढ़ जाती है। गर्म कपड़ों के बाजार भरे रहते है और इनकी बिक्री भी खूब होती है।
शादी-पार्टी का मजा
सर्दियों मे शादियां भी खूब होती है। जाहिर है कि कई घरों में न्यौते पहुचते है। शादियों के कारण ठंड के मौसम में ब्यूटी पार्लर, बैंक्विट हाॅल, होटल, टेंट, घोड़े वाले आदि सभी को फायदा होता है शादी ही नही पार्टी की मौज मस्ती भी सर्द मौसम में खूब होती है। क्रिसमस, न्यूईयर जैसी पार्टियों के अलावा आम स्तर पर पार्टियां आयोजित करने में लोग इन दिनों पसंद करते हैै। महिलाओं की मशहूर किटी पार्टियां भी इसमें शामिल है।
घूमना-फिरना
छुट्टी मनानी हो, पिकनिक पर जाना हो, फिल्म देखने का मन हो, किसी पर्यटन स्थल जाना हो या फिर डेट पर जाना हो। सैर-सपाटे के लिए सर्दियो का मौसम बेहद अनुकूल है। इन दिनों शहर से बाहर जाने का मन करता है। सर्दियों में रोमांस का भी अलग मजा है। तभी तो पार्कों या अन्य स्थलों पर प्रेमियों की चहल-पहल दिन भर बनी रहती है।
खाना-पीना
सजना संवरना होगा। शापिंग होगी। शादियों पार्टियों का मजा लिया जाएगा। घूमना-फिरना होगा। इतना कुछ होगा तो भूख भी तो लगेगी। सर्दियों में खाने को भी ज्यादा मन करता है। इन दिनों भूख अच्छी लगती है। पीने वाले भी सर्दियों में पीने का खूब लुप्फ उठाते है।

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प्यार केवल मौज मस्ती के लिए न करें इससे दूसरे की भावना को चोट पहुच सकती है। युवापीढ़ी के लोग अधिकतर प्यार मौज मस्ती के लिए करते है और बाद में निराशा के सिवा कुछ हासिल नहीं होता।
कच्ची उम्र का प्यार-प्यार न होकर महज आकर्षण होता है। कच्ची उम्र के प्यार से बचें। प्यार में परिपक्व होना आवश्यक है। कच्ची उम्र में लड़के लड़कियों को सब्जबाग दिखाकर, मीठी-मीठी बातों में बहकातें हैं और लड़की के साथ शारीरिक सुख का पूरा आनंद लेते हैं और फिर छोड़ देतें हैं। ऐसे में पछतावे के सिवा कुछ हाथ नहीं लगता।
प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है, यह कहावत सुनने में अच्छी और सच्ची लगती है। पर फिर भी प्यार करते समय जोश में होश न खोएं, तो अच्छा होगा। अब यह तो प्रकृति कि देन है कि विपरित लिंग की ओर आकर्षण ज्यादा होता है। पर किसी से प्रेम करते समय सोच समझ कर करें तों ज्यादा अच्छा होगा। प्यार का हाथ सोच समझकर बढ़ाएं तो दोनों के लिए हितकारी होगा।

  • लड़का हो या लड़की, प्यार करने से पहले सोचें कि आप जिससे प्यार करने लगे हैं, कहीं ये प्यार एक तरफा तो नहीं। एक तरफा प्यार दुखः ही दुख देता है। दूसरे की भावना को जानकर ही कदम बढ़ाएं तो अच्छा होगा।
    केवल प्यार मौज मस्ती के लिए न करें। इससे दूसरे की भावना को चोट पहुंच सकती है। युवापीढ़ी के लोग अक्सर प्यार मौज मस्ती के लिए ही करते हैं और बाद में उन्हे निराशा के अलावा कुछ नहीं मिलता।
    कच्ची उमर का प्यार-प्यार न होकर महज आकर्षण होता है। कच्ची उमर के प्यार से बचें। प्यार में परिपक्व होना आवश्यक है।
  • यह ध्यान रखें कि आपका मित्र आपका फायदा तो नहीं उठा रहा। आपके प्रति सीरियस है या दोस्तों के सामने बस तड़ी जमाने के लिए दोस्ती तो नहीं कर रहा है।
    अकसर प्यार में युवा पीढ़ी अपने कैरियर को भूल जाते हैं। जो भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। अपना अमूल्य समय घूम फिर के बर्बाद न करें। समझदार प्रमी-प्रमिका को अपने कैरियर को प्राथमिकता देनी चाहिए। ख्यालों में डूबे नहीं रहना चाहिए।
  • सच्चा प्रेम करें। सच्चा प्यार जीवन भर सुखद अहसास करवाता रहता है। ध्यान दे कि आपका साथी प्यार का नाटक तो नहीं कर रहा। कुछ लोग अपने प्रेमी को इस तरह बदलते हैं जैसे वस्त्र। ऐसे प्रेमियों से सावधान रहें। प्रेमी के आर्थिक मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी ध्यान दें। ऐसा न करें कि पछताना पड़े। प्रेमी के सामने अपना स्टेटस दिखाने के चक्कर में न पड़े। जितना चादर हो, उतना ही पैर फैलाएं। सच्चे और लंबे प्यार के लिए ये जरूरी है। ज्यादा खर्च करके कब तक आप झूठी शान का सहारा लेंगे। भेद खुलने पर तो शर्मिंदा होना ही पड़ेगा।
    अपने प्रेमी के साथ अकेले स्थान पर न जाएं जिससे आपका प्रेमी आपका लाभ उठा सके। ग्रुप में ही रहें। अपनी समस्या अपनी दोस्ती के आड़े न आने दें ताकि प्रेमी आपकी मजबूरी का फायदा न उठा सके। संभल कर चले तो प्यार की राह में फूल ही मिलेंग। जरा सा डगर से हटे तो कांटो का सामना करना पड़ेगा। किसी ने ठीक ही कहा हैः- बाबू जी धीरे चलना, प्यार में जरा संभलना, बड़े धोखें हैं इस राह में।

आधुनिक युग की महिलाओं में स्लीवलैस परिधानों का आकर्षण बढ़ गया है मगर कई बार देखा जाता है कि महिलाएं स्लीवलैस परिधान पहन तो लेती हैं मगर पूर्ण समझ न होने के कारण स्वयं को हंसी का पात्र बना लेती है। अतः स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व कुछ बातों की जानकारी का होना अति आवश्यक हैः

  • सर्वप्रथम अपनी देहयष्टि का आंकलन कर लेना बेहतर है। यदि आप बहुत पतली व बहुत अधिक लंबी है तो स्लावलैस परिधान आप पर नहीं जंचेगा, क्योंकि इससे आपकी बाजुओं का पतलापन व अविकसित वक्ष साफ नजर आएंगे व आप पहले से भी अधिक दुबली दिखाई देंगी।
  • इसके पश्चात अपने पीठ वाले भाग गर्दन और कुहनियों पर ध्यान दें। यदि आपकी गर्दन पीठ का रंग अन्य भागों से गहरा है तो स्लीवलैस परिधान आपके तन के अन भागों के रंग की गहराई को उभारने में सहायक होगा, अतः ऐसा होने पर स्लीवलैस परिधान पहनने का ख्याल बिल्कुल छोड़ दें।
  • स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व शरीर के इन भागों की सफाई की तरफ पूरा ध्यान दे। बांहों की सफाई के साथ साथ कुहनियों की सफाई भी करें। कामकाजी महिलाओं के लिए तो यह और भी आवश्यक है क्योंकि अक्सर ये काम करते समय अपनी कुहनी को कुर्सी के बाजू या मेज पर टिका लेती है। जिससे कुहनी की त्वचा काली मोटी व खुरदरी हो जाती है। यदि आप स्लीवलैस परिधान पहनेंगी तो आपकी कुहनियां दूर से ही बाजू में काला पैबंद नजर आएंगी।
  • काली मोटी व खुरदरी त्वचा की सफाई के लिए सर्वप्रथम वहां गुनगुने पानी से साबुन लगाएं और लगभग पांच मिनट तक धोएं नहीं। इसके पश्चात् वहां की त्वचा को नहाने वाले किसी 10 बादाम गिरी को पीस लें व एक अंडा फेंटे लें। इसमें एक नींबू का रस मिलाकर लेप बनाकर त्वचा पर लगाएं। 15-20 मिनट के बाद गुनगुने पानी की बूंदें डालें व रगड़ कर साफ करें। सप्ताह में 3 बार ऐसा करें बाहों की त्वचा खिल उठेगी।
  • बाहों को दाग धब्बों से मुक्त करने व कोमलता प्रदान करने हेतु एक छोटा चम्मच चीनी ताजा मलाई और नींबू का आधा हिस्सा लेकर बांह पर चीनी के दाने पिघलाने तक मलें, फिर 5-7 मिनट बाद गुनगुने पानी से धोएं। इस उपाय से आपकी बांहों की त्वचा को जीवंतता प्रदान होगी।
    जैतून के तेल की कुछ बूंदें नींबू का रस व एक अंडे का पीला भाग मिलकर बाहों पर लगाएं इससे अवश्य लाभ होगा।
  • स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व बाहों व बगलों पर से अवांछित बाल हटा लें। इसके लिए सबसे उत्तम उपाय है वैक्स करना। इससे बांहों की त्वचा पूर्णरूप से बालों रहित हो जाती है जो देखने में अच्छी लगती है।
  • घर से बाहर निकलते समय खुले भागों पर सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग अवश्य करें। यथासंभव छाता भी लेकर चलें।
    यदि आप स्लीवलैस ब्लाउज पहनना चाहती हैं तो यह ध्यान रखें कि यह आपकी साड़ी के शेड से मेल खाता हो। प्रिंटिड साड़ी हेा तो बेस कलर का ब्लाउज पहनें। अगर साड़ी प्लेन हो तो मैच करते कंट्रास्ट रंग के ब्लाउज पहनें।
  • इसके साथ ही बाहों की सुडौलता की तरफ भी अवश्य ध्यान दें। थुलथुली बांहों पर स्लीवलैस परिधान अच्छे नहीं लगते इसका ध्यान रखें।
    स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व बगलों मे सुगंधयुक्त टेलकम पाउडर अथवा डिओडोरेंट का प्रयोग अवश्य करें।
  • यदि सूट या ब्लाउज के रंग को ध्यान में रखते हुए मैच करते कंगन अथवा सिल्वर या सुनहरे रंग का बावजूद भी पहन सकती है। इसके अलावा सुंदर कलाई घड़ी भी पहन लें तो बांहों की शोभा और भी बढ़ जाएगी।

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ऐसे ही चेहरे पर कुछ भी पोत लेना मेकअप नहीं है। मेकअप वही अच्छा लगता है जो सही तरीके से किया गया होता है। उसमें कोई भी आसानी से खूबसूरत लग सकता है। बेढंगा मेकअप खूबसूरत चेहरे को भी बेजान बना देता है।
फाउंडेशन और पाउडर
मेकअप की शुरूआत करने से पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। फाउंडेशन लगाने के लिए स्पंज का प्रयोग करें। इसे हाथ से न लगाकर स्वच्छ स्पंज मे लगाएं और फिर उंगलियों के ऊपरी भाग की सहायता से चेहरे पर गोलाई में लगाएं।
फाउंडेशन अपनी हेयरलाइन कानों जाॅलाइन गर्दन, पलकों आदि पर लगाना न भूलें। चेहरे पर फाउंडेशन थोड़ा और एकसार लगाएं नहीं तो चेहरा पुता हुआ लगेगा। फाउंडेशन को अच्छी तरह फैलायें। उसमे कोई पैच इत्यादि न पड़ने दे। फाउंडेशन का वहीं शेड लें जो आपकी त्वचा पर चमकता न हो अन्यथा भद्दा लगेगा।
फाउंडेशन के बाद चेहरे पर काॅस्मेटिक पाउडर लगाये। यह फाउंडेशन को सेट करने में मदद करता है। चेहरे पर यदि थोड़ा बहुत तेल होता है तो उसे सोख लेता है। चेहरे को एकसार करने में भी मदद करता है। यदि चेहरे पर ज्यादा तेल नजर आये तो पाउडर नहीं लगाना चाहिए। इससे ज्यादा पैच नजर आयेंगे। चेहरे के तेल को हटाने के लिए आयल एब्जार्बिंग पेपर इस्तेमाल करें। चेहरा का रंग अगर सांवला हो तो थोड़ा खुला फेस पाउडर भी इस्तेमाल करने से भी चेहरे के दाग-धब्बे, मुहासे, दरारें आदि छिप जाती है। सांवले रंग पर गुलाबी शेड वाला फाउंडेशन या पाउडर प्रयोग न करे।
आईब्रो और लैशेज
आईब्रो का रंग बालों के रंग से मेल खाता हआ होना चाहिए। पहले आइलाइनर लगाये, फिर हल्के रंग का आई शैडो लगाएं। फिर पलकों पर मस्कारा लगाये। फिर पलकों पर मस्कारा लगाये। आजकल बाजार में कई प्रकार के आई शैडो भी उपलब्ध है जैसे जैल पाउडर क्रीम इत्यादि।
लिपस्टिक
लिपस्टिक लगाने से पहले होठों पर चारों ओर लिपलाइनर से बार्डर बनाये। फिर इसके बीच में लिपस्टिक लगायें। लिपलाइनर का रंग लिपस्टिक के रंग से एक शेड हल्का होना चाहिए। लिपस्टिक ज्यादा समय तक टिकी रहे इसके लिए होठों को हल्का सा टिशू पेपर से दबाएं और खुले पाउडर की हल्की सी परत उस पर लगाएं। होठों को हल्का सा प्रेस कर दें। जिससे पाउडर सेट हो जाएगा। होंठ अगर पतले हो तो उन्हें मोटा दिखाने के लिए आउटलाइन थोड़ी मोटी और डार्क लिपस्टिक से करें। लिपस्टिम लगाने के बाद लिप ग्लाॅस लगाने से बेहद ही खूबसूरत लुक आता है होंठों का।
मेकअप रिमूवर
अच्छी कंपनी का ही मेकअप रिमूवर खरीदें। हमेशा मेकअप उतारकर ही सोएं। मेकअप उतारने मे आलस न दिखाएं। आंखों के आस पास हल्के हाथों से रिमूवर प्रयोग करें। मेकअप हटाकर सोने से त्वचा के रोप छिद्र बंद नहीं होते और उन्हें आॅक्सीजन मिलती रहती है।

कांटैक्ट लैंस यूज करना आज फैशन बन गया है। इन्हें इस्तेमाल करना आज धीरे धीरे इस्तेमाल करना आज धीरे धीरे आप बात होती जा रही है। कांटैक्ट लैंस का इस्तेमाल दृष्टि दोष में अपने सौंदर्य को निखारने के लिए आंखों का कलर बदलने के लिए कोर्नियल अल्सर के मरीजों में इलाज के लिए और काला मोतिया के मरीजों में दवा के उचित इस्तेमाल के लिए किया जाता है। काटैक्ट लैंस आमतौर पर तीन प्रकार के होते हैं-
हार्ड कांटैक्ट लैंसः ये लैंस वजन में हल्के व ज्यादा समय तक चलने वाले होते है। हार्ड कांटैक्ट लैंस पोलीमिथाइल मिथा एकरेलेट मेटीरियल के बने होते है। ये वजन में हल्के बेशक होते हैं लेकिन ये आॅक्सीजन को आर पार नहीं होने देते, जिसकी वजह से आॅक्सीजन काॅर्निया तक नहीं पहुंच पाती है। इन्हें हम रोज इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन रात के समय ध्यान से उतार लेने चाहिए। नहीं तो कार्निया को आॅक्सीजन की कमी हो जाएगी और धुंधला दिखाई देने लगेगा। हार्ड कांटैक्ट लैंस को सावधानी से लगाना चाहिए। इनके हार्ड होने की वजह से कार्निया मे खरोंच लगने का एवं कोर्निया अल्सर होने का खतरा बढ़ जाता है। आजकल कांटैक्ट लैंस का फैशन बढ़ता ही जा रहा है।
सेमी साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस
ये लैंस सिलीकाॅन पालीमर्स के बने होते हैं। इनमें हार्ड और साॅफ्ट दोनों प्रकार के गुण पाये जाते है। आज के समय में सेमी साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस सबसे अच्छे माने जाते है। ये लैंस आक्सीजन को कार्निया तक पहुंचाने में मदद करते है। साॅफ्ट लैंस की तुलना में ये अपना आकार बनाए रखने के साथ साथ इन लैंसों से एकदम साफ भी दिखाई देता है। जिन लोगों को सिलिंड्रीकल नंबर होता है। उन लोगों के लिए ये लैंस सबसे अच्छे होते है। इसकी देखभाल करना भी आसान होता है। और ये साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस की तुलना में अधिक टिकाऊ भी होते है।
साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस
ये लैंस हाइड्रोक्सी इथाईलइथा एक रीलेट नामक मेटिरियल के बने होते है। इसमें पानी भी शामिल होता है। जो आॅक्सीजन को लैंस से कार्निया तक पहुंचाने में मददगार होता है। साॅफ्ट होने के कारण नये व्यक्ति के लिए इन्हें इस्तेमाल करना आसान होता है। जहां साॅफ्ट लैंस के कुछ फायदे हैं वहां नुकसान भी है। जैसे इन लैंसों में थोड़े समय में ही प्रोटीन जमा होने लगता है, जिससे ये धुंधले पड़ सकते है। एवं इन्हें बदलना पड़ता है।
साॅफ्ट होने की वजह से ये टूटते भी जल्दी है और संक्रमित भी जल्दी हो जाते है। लेकिन ये लैंस सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से आंखों का बचाव करने में सक्षम होते है। कुछ साॅफ्ट लैंस डिसपोजेबल भी होते है। जिंहें कुछ समय के बाद बदल दिया जाता है। जिंहें कुछ समय के बाद बदल दिया जाता है। जिससे संक्रमित होने का खतरा भी कम रहता है। जिनकी आंखों में एलर्जी रहती है। साॅफ्ट लैंस को साल में एक बार अवश्य बदल लेना चाहिए। ऐसा करने से आंख के संक्रमण का खतरा कम रहता है, साथ ही साॅफ्ट लैंस उन लोगों के लिए बहुत कारगर होते हैं जिन्हें देर तक काम करना होता है।
साॅफ्ट लैंस कई प्रकार के होते है। महीने में बदलने वाले कांटैक्ट लैंस इन लैंसों को एक महीने इस्तेमाल करने के बाद बदल देना आवश्यक है। जिन लोगों की आंखों में संक्रमण जल्दी जल्दी होता है उनके लिए ये लैंस बहुत उपयोगी होते हैं और रोज बदलने वाले लैंस की तुलना में ये सस्ते भी पड़ते हैं एवं ज्यादा लोकप्रिय भी है।
डेली डिस्पोजल लैंस
इन लैंसों को हर दिन इस्तेमाल करने के बाद फेक दिया जाता है। जिन लोगों को आंख में एलर्जी और आंख में संक्रमण की शिकायत होती है उन लोगों के लिए इस तरह के कांटैक्ट लैंस बहुत उपयोगी होते है।
रंगीन साॅफ्ट कांटैक्ट लैंस
रंगीन कांटैक्ट लैंस लगाकर आप अपनी सुंदरता को बढ़ा सकते है। इन लैंसों का ज्यादातर इस्तेमाल माॅडल करते है। साथ ही इन लैंसों का इस्तेमाल वो लोग भी करते हैं जिनकी आंख की पुतली में फूला पड़ गया होता है।
बायफोकल एवं ग्रेडिड कांटैक्ट लैंस
बायफोकल कांटैक्ट लैंस दूर एवं पास की दृष्टि दोष दोनों में इस्तेमाल किये जाते है। इनका प्रयोग पास की नेत्र ज्योति कमजोर होने पर किया जाता है। बायफोकल लैंस साॅफ्ट एवं सेमी साॅफ्ट दोनों तरह के होते है।
कांटैक्ट लैंस से होने वाले नुकसान
आंख में संक्रमण
कांटैक्ट लैंस लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धों लें। वरना आंख में संक्रमण होने का डर रहता है। कांटैक्ट लैंस को कभी भी पानी से धोना नहीं चाहिए वरना इसमें मौजूद बैक्टीरिया आंख में संक्रमण कर सकते है। कांटैक्ट लैंस को लेंस केयर सोल्यूशन को दुबारा इस्तेमाल न करें।
आंख में एलर्जी जिसमें आंख लाल रहने लगती है। आंख में खुजली होने लगती है। ऐसा होने पर कुछ समय के लिए कांटैक्ट लैंस न लगाएं और नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लें।
आंख की पुतली पर खरोच
ध्यान रखें कि कांटैक्ट लैंस को पहनते और उतारते समय आंख की पुतली पर खरोच न लगे क्योंकि ऐसा होने पर कोर्नियल अल्सर एवं आंख की पुतली पर सफेदी पड़ने का डर रहता है। जिसकी वजह से आंख की रोशनी भी जा सकती है।
कांटैक्ट लैंस का इस्तेमाल न करें जब-

  •  व्यक्ति मंदबुद्धि हो
  •  आंख में संक्रमण होने पर
  •  आंख की रूसी होने पर
  •  आंख की एलर्जी होने पर
  •  आंख के सूखे होने पर
  •  आंख की पुतली पर सूजन होने पर।

लोक परिधान में घाघरा और चोली अपना अलग ही महत्त्व रखती है। प्राचीन काल से ही लोक साहित्य में इस परिधान का प्रचलन उत्तर भारत में रहा है। आज आधुनिक फैशन की दुनिया में इस परिधान का अपना अलग ही आकर्षण है। आज फैशन में सूती, रेशमी, बंदनी, क्रेप, आदि के कपड़ों से तैयार घाघरा चोलियों का प्रचलन है। छोटे-छोटे कांच, मोतियों, टेराकोटा, कढ़ाई आदि के काम घाघरा में किए जाते है। करीब 500 रूपयों से लेकर एक लाख तक के लहंगा चोली के फैशन बाजार में उपलब्ध है। शादी-ब्याह तीज त्यौहार, पार्टी आदि में इस परिधान का प्रचलन है। नारी सौंदर्य को यह परिधान अलग ही गरिमा प्रदान करता है। प्रस्तुत है लहंगा चोली के रख-रखाव विषयक कुछ बातें जिन्हें ध्यान रखते हुए आप इस आकर्षक परिधान की चमक सालों साल बरकरार रख सकती है।

सूती घाघरा चोलीः सूती घाघरा, पहनने से पूर्व पूरे घाघरे के नीचे फाॅल लगा लें। फाॅल लगाते समय ध्यान रखें। कि फाॅल घाघरा के दिए हुए बाॅर्डर से ऊपर न जाए। अगर आप ड्राईक्लीन में न दें कर स्वयं घर में ही धोना चाहती हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें। नमक मिले पानी में धोएं ताकि अतिरिक्त रंग निकल जाए और भविष्य में फिर रंग निकलने की संभावना न हो। आजकल रिवाईव कंपनी की ओर से कलर फिक्सर भी आता है जो कपड़े की रंगत को यथासंभव बनाए रखता है। सूती घाघरा चोली की ओढ़ती को कभी-कभी हल्का कलफ दे सकती है। कड़कती धूप मे न सुखाएं। छांव में रंगीन कपड़े सुखाने से कपड़ों की रंगत बनी रहती है। कलफ लगी ओढ़नी को ज्यादा दिन तक बक्से में रखे न रहने दें। इसमें झिंगुर लगने की संभावना रहती है। कजली व रक्षा बंधन जैसे पर्व पर सूती घाघरा चोली किशोरियों पर चार चांद लगा देते है।

रेशमी घाघरा चोलीः शादी ब्याह में रेशमी घाघरा चोली का प्रचलन अधिक रहा है। परिधान के पहनावे में नारी की सुंदरता जितनी दुगुनी होती है उतनी ही सावधानी से नारी को इसका रख रखाव करना होता है। रेशमी लहंगा पहनते समय कभी इत्र का प्रयोग न करें। इसमें दाग पड़ने की संभावना रहती है। पहनने से पूर्व आप सदैव इस पर हल्की इस्त्री का ही प्रयोग करें। आपको लहंगे में यदि मोतियों का काम है तो आप हल्के ब्रश से ट्रांसपेरेंट नेल एनोल का प्रयोग उन मोतियों की चमक यथासंभव बनी रहे। इस रेशम के परिधान को आप ड्राइक्लिन में दें तो अच्छा रहेगा। अगर आप स्वयं ही घर में धोने के अच्छुक हैं तो इजी नामक ऊनी व रेशमी वस्त्र धोने के द्रव्य पदार्थ को प्रयोग में लाएं। अंत में कुछ बूंदें ग्लिसरीन की पानी में डालकर एक बार धो कर उठा लें। सुखाते समय अधिक जोर से इस वस्त्र को निचोड़ें। छांव में ही सुखाएं तथा हल्की प्रेस करें। बक्से में रखते समय आप बीच बीच में तह बदल कर रखें ताकि एक ही स्थान पर पड़ने से निशान बनने का खतरा न हो।

जरी वाली घाघरा चोलीः जरी वाले घाघरा चोली को दीपावली जैसे अवसर में पहनने से जगमगाती रोशनी में इस परिधान से नारी की आभा उभर कर सामने आती है। जरी वाले घाघरा चोली पहनते समय भी इस परिधान पर इत्र न लगाएं अन्यथा जरी काली पड़ जाती है। सदैव घाघरों को उल्टा कर इस्त्री करें। धुलाई करनी हो तो ड्राइक्लीन में दे। बक्से मे रखते समय कभी पोलीथीन में डाल कर न रखें। किसी पुराने पतले सूती कपड़े में लिपटा कर रखें तो अच्छा रहेगा। कपूर की गोलियां बक्से में न रख कर नीम व लौंग की पोटली बना कर एक कोने में रखें तो बेहतर होगा। कपूर की गोली से जरी काली पड़ने की संभावना रहती है। कभी कभी बीच में हल्की धूप दिखाना अच्छा रहता है।

बंदनी व क्रेप के लहंगेः इस प्रकार के लहंगे चोली का प्रचलन काफी है। आजकल रात की पार्टियों में उच्च घराने से ले कर मध्यवर्गीय परिवारों में इस परिधान का फैशन है। थोड़ी सी सावधानी से आप वर्षों तक इसकी चमक बनाए रख सकती है। केवल मोड़ मोड़ कर रखने से ही इसकी कला है। पहनने से पूर्व हल्की प्रेस करने की आवश्यकता होती है। इसे ड्राइक्लीन में देना ही बेहतर है। इत्र लगाते समय थोड़ी सावधानी बरतें कपड़े में न लगा कर गर्दन, कलाई, आदि स्थानों पर ही लगाएं। बक्से मे रखने से पूर्व कागज में लपेट कर रखें।