सबसे खतरनाक है मोबाइल एडिक्शन

युद्ध और मोहब्बत के दौरान सनक ही सब कुछ कराती है। प्रेम करना गुनाह नहीं। गुनाह है प्यार में अंधा हो कर सब कुछ भूल जाना। भक्ति में शक्ति होती है। प्रेम करना ही है तो वतन से करो, प्रकृति से करो, ईश्वर से करो। प्रेम रोगी बन कर हिंसक बन जाना प्रेम का अपमान करना ही है। एडिक्ट होना घातक हो जाता है फिर चाहे आप किसी भी चीज के एडिक्ट क्यों न बनें। चर्चा में ड्रग एडिक्ट ही आते हैं। लव एडिक्शन के कारनामे भी रोंगटे खड़े कर देते हैं। प्रेम रोगियों की केमिस्ट्री कम खतरनाक नहीं होती। आधुनिक युग में टीवी एडिक्शन के शिकार हैं तो कुछ मोबाइल एडिक्शन के। दुष्परिणाम पड़ रहा है घरेलू औरतों और विद्यार्थियों पर। औरतें आक्रामक हो रही हैं तो विद्यार्थियों का रूझान पढ़ाई से हटता जा रहा है। किताबों के पन्नों में प्रेमी प्रेमिका की तस्वीरें और खत रहेंगे तो कहां से पढाई में मन लगेगा। करोड़ों हाथों में मोबाइल पकड़ा कर कई कंपनियों ने अरबों का कारोबार कर लिया किंतु उपयोगिता के दृष्टिकोण से यदि हम मोबाइल फोन की समीक्षा करें तो लाभ कम, हानि ज्यादा नजर आयेगी। मोबाइल फोन ब्लैकमेलिंग का सुलभ साधन जो बन गया है। घंटों मोबाइल फोन पर अपनी उंगलियां चलाने वालों की निराली दुनिया यही बता रही है कि मोबाइल स्टेटस सिममबल बन गया है। लोग इसका सदुपयोग कम और दुरूपयोग ज्यादा कर रहे हैं। अश्लील तस्वीरें और संदेश के प्रसारण में मोबाइल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गप्प मारने में महारथियों के लिए तो मोबाइल फोन वरदान साबित हो रहा है। स्कूली विद्यार्थियों को भी मोबाइल लत लग रही है। कंप्यूटर के गेम्स बच्चे मोबाइल में खेल रहे हैं। गाने सुन रहें है, फिल्में देख रहे हैं। ब्लू फिल्में तक बड़ी आसानी से बन रही हैं। मोबाइल एडिक्ट पतन के मार्ग पर बढ़ चुके हैं। अपनी जिंदगी हैण्डसेट तक सीमित कर युवा वर्ग ने मोबाइल रोग पाल कर स्वयं को बर्बादी का मार्ग प्रशस्त किया है। मोबाइल एडिक्ट न दिन में अपना ध्यान अपने कार्यक्षेत्र में केंद्रित कर पा रहे हैं और न ही रात में चैन की नींद सो पा रहे हैं। एसएमएस से पीड़ितों का इलाज संभव नहीं। इसी तरह मोबाइल टू मोबाइल घंटों बातें करने वालों का भी इलाज मुश्किल है। मोबाइल फोन का उपयोग जानना जरूरी है। दुर्भाग्य यह है कि लोग दुरूपयोग का आनंद लूट रहे हैं। मोबाइल झूठ बोलने वालों के लिए तो मानो वरदान साबित हो रहा है लेकिन चिंता किसे है? सभी मस्त हैं मोबाइल-मोबाइल खेलने और बेचने में। मध्यम वर्ग पर मोबाइल का बड़ा गहरा प्रभाव पड़ रहा है। पेट में रोटी न रहे चलेगा, जेब में मोबाइल जरूरी है। टॉपअप जरूरी है। रिचार्ज कूपन जरूरी है। स्कूल-कॉलेज पढ़ने वालों के पास लंच बॉक्स न रहे चलेगा, मोबाइल जरूरी है। पालकों ने प्रतिस्पर्धा को गलत अर्थ में लिया और खरीद दिया बच्चों का कलर मोबाइल हैन्डसेट्स। होस्टल में रह कर पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए तो एक बार मोबाइल की उपयोगिता मायने रखती है किंतु घर में रह कर गांव अथवा शहर के शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए मोबाइल की अनिवार्यता समझ के बाहर की बात है। क्लासरूम में ही रिंग टोन बनजे लगती है। बच्चे म्यूजिक सुनने में मस्त है। पढ़ाई की किसी को काई फिक्र नहीं है। घर पर भी पढ़ाई के समय मोबाइल हाथ में नजर आए तो इसे दुर्भाग्य ही कहना पडेगा। मोबाइल के द्वारा टीनएजर्स अपराध के नये-नये गुर सीख रहे हैं। मोबाइल एडिक्शन एक खतरनाक रोग बनता जा रहा है।

बड़े शहरों में काठियां या बंगले तो एक सपना सा लगता है। अधिकतर घर अपार्टमेंटस में होते है जहां न तो जमीन अपनी होती है न छत। यदि आप हरियाली के शौकीन हैं तो अपने शौक को पूरा करने के लिए कुछ न कुछ हल तो ढूंढेगें ही न कि निराश होकर अपना मन मार लेंगे। बड़े घर तो बहुत कम लोगों के पास होते हैं जहां पर आप लॉन का आनंद उठा सकते हैं पर निराश न हों। आप अपने फ्लैट में भी छोटा सा गार्डन तैयार कर अपने शौक को जिंदा रख सकते हैं, साथ ही साथ घर को आकर्षक लुक भी दे सकते हैं। आइए जानिए घर पर छोटी सी बगिया को कैसे तैयार किया जाए।

  •  घर की बालकनी में गमलों में सीजनल पौधे लगवाएं ताकि घर के बाहर हरियाली भी रहे और घर आकर्षक भी लगे। गमलों को ऐसे स्थान पर रखें जहां बालकनी में पौधों पर धूप आ सके। पौधे खरीदने से पहले उनकी प्रकृति के बारे में जानकारी जरूर लें ताकि पौधे खिले रह सकें।
  •  यदि बालकनी बड़ी हो तो उसके एक ओर गमले रखें ताकि बाकी बालकनी का प्रयोग आप कर सकें। ऐसे में ऊंचे गमले पीछे रखें और छोटे आगे रखें। सबसे आगे बिल्कुल छोटे चिलमचीनुमा गमले भी रख सकते है।
  •  कुछ पौधे ऐसे हैं जो सारा साल हरे रहते हैं। उन्हें अपने गार्डन में जरूर स्थान दें जैसे मनीप्लांटस, एलोवेरा फर्न, करी पत्ता, तुलसी, पुदीना, एस्पेरेगस, मोन्सटेरा आदि। इन्हें आप अलग आकार के गमलों में भी लगा सकते हैं। आजकल विभिन्न आकार के गमले बाजार में उपलब्ध है।
  •  यदि आप ग्राउंडफ्लोर पर हैं और घर के बाहर जो कच्ची जमीन हो कुछ पौधे उस जमीन पर लगा दें, कुछ गमलों में, और कुछ स्थान खाली छोड़कर उसमें घास लगा दें ताकि छोटा सा गार्डन या लॉन आपके घर के बाहर बन जाए। यह ध्यान रखें कि पौधे खिड़की के एकदम पास न रखें। थोड़ी सी दूरी बना कर रखें।
  •  बालकनी भी छोटी हो और घर भी ग्राउंड लेवर पर न हो, ऐसे में यदि छत आपके पास हो तो आप टैरेस गार्डन बना सकती हैं। टैरेस गार्डन इस तरह से प्लान करें कि छत का सुख भी आप उठा सकें, बिशेषकर सर्दियों में धूप लेने के लिए।
  •  घर के बाहर बालकनी और छत के अतिरिक्त आप घर के अंदर भी कुछ इनडोर प्लांट रख कर घर में हरे पौधों का आनंद भी उठा सकती हैं। बस इन्हें आवश्यकता होती है थोडी सी अधिक देखभाल की।
  •  ऐसे पौधों को सप्ताह में एक बार खुली हवा में रखना होता है और देखना होता है कि उस स्थान पर सूरज की सीधी रोशनी न पड़े।
  •  इन्डोर प्लॉटस में आप मनीप्लांट, फर्न, एरिका पाम आदि लगा सकते हैं। इन्हें सप्ताह में दो बार पानी दें।
  •  पौधों पर पानी फव्वारें से दें। इससे पौधों पर पड़ी मिट्टी भी घुल जाती है और पौधों की जड़ें भी मिट्टी नहीं छोड़ती। डिब्बे या पाइप से पानी डालने पर पौधों की जड़े उखड़नें का ड़र रहता है और मिट्टी के गमलों से बाहर आने से बालकनी भी खराब होगी।
  •  हर सप्ताह या दस दिन में एक बार खुर्पी से हल्की हल्की गुड़ाई करनी चाहिए जिससे नमी वाली मिट्टी को ताजी हवा लग जाती है और नमी में पैदा होने वाले कीड़े भी नहीं पनपते। सूखे पत्तों को साथ-साथ अलग करते रहना चाहिए।
  •  गर्मी में प्रतिदिन पौधों को पानी देना चाहिए और सर्दी में एक दिन छोड़कर। तीन से चार माह के बाद सभी गमलों से मिट्टी निकालकर उसमें खाद मिलाकर पुनः गमलों में भर देनी चाहिए ताकि उन्हें उचित खुराक मिलती रह सके। थोड़ी सी मेहनत और देखभाल से आप गाडर्निंग के शौक को पूरा सकते हैं और अपनी प्यारी सी बगिया को हरा भरा रख सकते हैं।

शिक्षा के विकास ने स्त्रियों को आत्मनिर्भर बनाया। वे बाहर नौकरी करने लगी। उनसे व्यक्त्वि का विकास हुआ। अब वे घर की चारदीवारी से बाहर सार्वजनिक क्षेत्रों में पुरूष के बराबर भागीदार बन के कार्य करने लगी लेकिन समाज आज भी पुरूषों का ही है। अपनी अस्मिता की चाह लिये जब स्त्री उसमें अपनी जगह ढूंढने चली तो उसे कई एक कठिनाइयों का सामना कई मुकामों पर एक साथ करना पड़ा। सहयोग की अपेक्षा उसके लिए मृगमरीचिका ही बनी रही। वह चाहे नौकरीपेशा हो या गृहिणी, गृहकार्य उसी की जिम्मेदारी है। अगर बच्चें है तो उनकी देखरेख भी उसे ही करनी है। घर बाहर के बोझ तले दबी नारी जब कुंठाग्रस्त होकर खीझ से भर उठती है तो उसकी भावनाओं को पति या घर के दूसरें सदस्य समझ नहीं पाते। उल्टा उसे बदमिजाज होने पर प्रताडित करते है। इसका सीधा असर उसके दांपत्य जीवन पर पड़ता है। पति के साथ उसके रिश्तों में ठंडापन, विसंगति और दरार आने लगती है। दोनों ही जब घर में सुकून नहीं पाते तो सुकून की तलाश में अन्यत्र भटकने लगते हैं। वैवाहिक जीवन की ऊब भरी असफलता व नीरस यौन जीवन न केवल पुरूषों को बल्कि स्त्रियों को भी विवाहेत्तर संबंध बनाने की ओर प्रेरित करते है। विवाहेत्तर संबंधों में फंसी सुनीता दत्ता एक शिक्षित नारी इस तथ्य को स्पष्ट करते हुए कहती हैं, ‘मेरी शादी को नौ वर्ष हो गए हैं। मेरे दो बच्चें भी हैं। शादी के कुछ वर्ष बाद सब कुछ बासी लगने लगा। रोज-रोज वही रूटीन एक रस ऊबाऊ जिंदगी से मै बोर होने लगी थी। शिवम और मेरे बीच जैसे कुछ भी नया नहीं रहा। वह ऑफिस से ही क्लब चला जाता। घर में रहते हुए भी बस औपचारिकता ही बरतता। अनायास ही मेरे जीवन में मेरा सहकर्मी जावेद आ गया। सब कुछ अचानक ही हो गया था। जिंदगी मुझे फिर से जीने लायक लगने लगी। उसने मुझे औरत होने का अहसास दिलाया वर्ना मैं तो भूल ही गई थी कि मैं मिसेज दत्ता और बच्चों की मां के अलावा भी कुछ हूं।’ राहुल जिसे पहले अपनी निहायत सीधी सादी घरेलू किस्म की बीवी दुनिया की सबसे सुंदर और अच्छी स्त्री लगती थी, अब उसके लिजलिजे, यस वुमन वाले व्यक्तित्व से ऊबने लगा था। उसे अपने दोस्त की नई नवेली पत्नी जो साधारण रूप रंग होने बावजूद बहुत बोल्ड और फैशनेबल, साथ ही नंबर बन फ्लर्ट थी, आकर्षित करने लगी। दोस्त अक्सर ऑफिस के काम से टूर पर जाता रहता था। ऐसे मे उसकी फ्लर्ट पत्नी जो कॉलेज के जमाने से ही अनेक पुरूषों के साथ दैहिक संबंध बनाने की आदी थी, राहुल की कमजारी जानने के बाद फंसाने में उसे वक्त न लगा। आज नैतिकता के मापदंड बदल गए हैं। ज्यादा से ज्यादा आधुनिक विचारों वाले विवाहेत्तर संबंधों के पक्ष में मिलेंगे। अगर इससे जीवन की एकरसता टूटती है, ऊब मिटती है तो इसमें बुरा क्या है बशर्ते आप परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाते रहें, उसे टूटने न दें। ये संबंध अगर आप में नई स्फूर्ति भरते हैं, आपमें अपनापन लौटाते है, नये संदर्भो में पुराने को तोलने का मौका देते हैं और दांपत्य को स्थायित्व दिलाते हैं तो इन पर किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए। सच्चाई यह भी है कि ऊब को मात्र बहाना मान कई व्यक्ति स्त्री हो या पुरूष, अपनी मूल प्रवृति को ऐसे संबंध बना कर संतुष्ट करते हैं।

आज के भौतिकवादी युग में तेज गति से दौड़ती इंसानी जिंदगी में परेशानियां दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान को हंसी मजाक के बहुत कम अवसर नसीब होते है और शायद अधिकतर लोग दिल से हंसना भी भूलते जा रहे हैं, जिस से कुण्ठित समाज का निर्माण शुरू हो गया है। दिल खोल कर हंसना सेहत व दिमाग के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं मगर इस टॉनिक के निर्माण के लिए परम आवश्यक है मजाक। इंसान के मन में मजाक हंसी व खुशी के अंकुर प्रस्फुटित करता है। निस्संदेह आज मजाक करने वाले लोगों की कमी लगातार खलती जा रही है। कारण, लोगों की मानसिकताओं में तीव्र परिवर्तन, अपना अहम और खोखले भौतिकवादी आदर्श। एक स्वस्थ मजाक से मिली हंसी-खुशी तन और मन दोनों को स्वस्थ बनाती है लेकिन भद्दा या फूहड़ किस्म का किया मजाक किसी को दुखी व अशांत कर सकता है, जो कभी-कभी आपसी मनमुटाव व झगड़े का रूप भी धारण कर लेता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए, आइये इस विषय पर कुछ और आगे बढ़ते है। मजाक क्यों किया जाता है, यह सर्वविदित है। ऊपर भी लिखा जा चुका है मगर किससे कब और कैसे किया जाना चाहिए, यह जानना बेहद जरूरी है। किसी से भी मजाक करने से पहले यह ध्यान रखना जरूरी है कि सामने वाला आप से परिचित है या नहीं। अपरिचित व्यक्ति से सीधे कभी मजाक न करें। हो सकता है वह मजाक पसंद न करता हो। ऐसे आदमी से भी मजाक न करें जो दूसरों के साथ मजाक न करता हों अथवा सहन न कर सकता हो। अगर आप किसी से मजाक कर रहे हैं तो सामने वाला भी मजाक कर सकता है। अतः आप में मजाक सहने की भी सहनशीलता अवश्य होनी चाहिए। मजाक कब किया जाये, यह एक विचारणीय विषय है। वैसे तो इंसान को ज्यादा से ज्यादा हंसी मजाक के पल बटोरकर निकालने चाहिए मगर गंभीर, दुखी, अत्यधिक व्यस्त व नशेडी महफिल जैसे वातावरण में किसी से मजाक न करें। मजाकिया होना अच्छी बात है मगर अर्थहीन मजाक किसी के भी व्यक्तित्व को बिगाड़ सकता है। ऐसा व्यक्ति खुद दूसरों की हंसी का पात्र बन जाता है। स्वस्थ मजाक में अर्थयुक्त वाकपटुता, सहनशीलता, सामयिक विषय में चार चांद लगा देती है। ब्याह शादियों आदि मौकों पर मजाक का माहौल हाता है। युवक युवतियों में आकर्षण स्वाभाविक है अतः ऐसे मौकों पर समझदारी से काम लेना चाहिए। मजाक ऐसे करें कि कोई गलत अर्थ न लगाये। फूहड़, भद्दा या किसी को मानसिक कष्ट पहुंचाने वाला मजाक कदापि न करें। मजाक यथासंभव हम उम्र के व्यक्तियों से ही किया जाना चाहिए। मजाक में अबोध बच्चें या अज्ञानी व्यक्ति को किसी गलत कार्य करने के लिए प्रेरित न करें।

कामकाजी महिलाओं का तनाव से गहरा रिश्ता है। जब यह तनाव उन पर हावी होने लगता है। तो अक्सर वे अवसादग्रस्त हो जाती हैं जिससे उनका काम तो प्रभावित होता ही है, साथ ही पर्सनल लाइफ भी डिस्टर्ब होती है।
कारण-

  •  काम का अत्यधिक बोझ होना
  •  कम्युनिकेशन गैप-अक्सर वे कोई समस्या होने पर बॉस से डिस्कस नहीं करती, उस समस्या से अकेली जूझती हैं तो मन व दिमाग दोनों ही कभी फ्रैश नहीं हो पाते।
  •  कई बार इसके विपरीत वे ‘ओवररिएक्ट’ करती हैं। बॉस उनकी प्रतिक्रिया पर नाराज होते हैं तो वे तनावग्रस्त हो जाती हैं।
    अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. संदीप वोहरा के अनुसार चूंकि कामकाजी महिलाओं पर काम का दोहरा बोझ होता है, ऐसे में परिवारजनों का सहयोग न मिलने से वे तनावग्रस्त हो जाती हैं साथ ही घर का वातावरण, परिवार की उनसे बढ़ती उम्मीदें इत्यादि कारण भी उनके तनाव को बढ़ाते हैं।
  •  कुलीग्स के साथ वे अच्छे संबंध मैंटेन नहीं कर पाती हैं तो भी ऑफिस का माहौल बोझिल हो जाता है, जिससे तनाव उत्पन्न होता है।
  •  स्वंय पर जरूरत से ज्यादा भरोसा होना या काम के प्रति लापरवाही, गलतियों का मुख्य कारण है। जब गलती सीनियरस के सामने आती है तो वे परेशान हो उठती हैं।
  •  कुछ महिलाओं में कांफिडेंस की कमी होती है जो उन्हें तनाव देता है।
  •  टाइम मैनेजमेंट की कमी, जिससे उन पर सदैव काम का प्रेशर रहता है।
  •  अपनी इच्छा व टेलेंट से हटकर जॉब करना भी उसके तनाव का कारण रहता है।
  •  काम को पूरी वफादारी से करने पर भी बॉस द्वारा कोई क्रेडिट न दिए जाने पर भी अक्सर वे तनाव की शिकार हो जाती हैं।
  •  पर्सनल व प्रोफेशनल लाइफ के बीच सही संतुलन न होने से भी वे इस समस्या से ग्रस्त रहती हैं।
  •  मीटिंग, प्रेजेंटेशन इत्यादी की सही प्रकार से तैयारी न कर पाने से जब वे अच्छी परफॉरमेंस नहीं दे पाती तो उन्हें स्वयं पर क्रोध आता है जिससे तनाव पनपता है।
  •  जब वे व्यस्तता के कारण पति या बच्चों के लिए कुछ कर नहीं पाती तो स्वयं को कोसती रहती हैं व अपराध भावना का शिकार हो कर तनावग्रस्त हो जाती हैं।
    परिणाम – डा. वोहरा के मुताबिक ऐसे में महिलाओं को कई मानसिक व शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं जैसे- सिरदर्द, बॉडी में दर्द
  •  सदैव थकान महसूस करना।
  •  भूख ज्यादा या कम लगना।
  •  चीजें रखकर भूल जाना।
  •  छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या रोने का मन करना
  •  एकाग्रचितता में कमी।
  •  स्वभाव में चिड़चिड़ापन पैदा होना।
  •  कभी-कभी जीवन में उत्साह की कमी के कारण उनकी जीने की चाह खत्म होने लगती है।
    कैसे पाएं छुटकारा-
  •  घर व काम के बीच संतुलन बिठाने हेतु जरूरी है कि अपने दिमाग में दो फाइल केबिनेट बनाएं, एक में ऑफिस की पूरी जिम्मेदारियां व समस्याएं रखें, दूसरे में घरेलू। इन दोनों को कभी मिक्स नहीं होने देंगी तो तनाव सदैव आपसे दूर रहेगा।
  •  आत्मविश्वासी बनें। अपनी फिटनेस, ड्रेय सेंस व खानपान पर ध्यान दें। सब तरह से फिट रहेंगी तो पूरे आत्मविश्वास के साथ लोगों का सामना कर पाएंगी जिससे अंदरूनी उत्साह में वृद्धि होगी। टेलेंट को सही शैप देने हेतु परिणाम जरूरी है। इससे आपकी परफॉरमेंस बेहतर होगी जो आपके आत्मविश्वास में वृद्धि करेगी व तनाव को दूर भगाएगी।
  •  पॉजिटिव बनें। नकारात्मक विचार अक्सर तनाव उत्पन्न करने में सहायक होते हैं।
  •  अच्छी प्लानर बनें। इससे आपका काम सही तरीके से व सही समय पर होगा तो आप तनाव से बची रहेंगी।
  •  जो बातें आपके लिए तनाव को कारण बनती है, उनसे दूर ही रहें। ऐसा संभव न हो तो उनके साथ किस तरह डील करना है, सीखें। किसी एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकती हैं।
  •  फोन पर दोस्तों या क्लाइंट्स से लंबी बातचीत करने से बचें। इससे आपका काम प्रभावित होगा जो आपको तनाव देगा। बेहतर है दोस्तों से बात करने हेतु टाइम फिक्स कर लें।
  •  स्वयं को मशीन न बनांए। अपने सामर्थ्य के अनुसार ही कार्य करें।
  •  ऐसे लोग जो आपको इरीटेट करते हों भले ही वे आपके कुलीग हों या क्लाइंट्स, उनसे सिर्फ काम के विषय में ही बात करें।
  •  नेटवर्किंग से जुड़े रहे। इससे आपमें स्मार्टनेस आएगी व ज्ञान बढ़ेगा पर ऑफिस टाइम में व्यर्थ की नेटसर्फिंग करने से बचें।
  •  सोशल बनें। लोगों से मिलना जुलना तनाव को कम करेगा।
  •  पति या बच्चों के समक्ष अपनी व्यस्तता का रोना न रोएं। उनसे मदद लेने हेतु उन्हें प्यार से डील करें वरना वे आपसे कतराने लगेंगे जिससे तनाव आना स्वाभाविक है।
  •  स्वयं को ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ न लें। अपनी इम्पॉर्टेंस समझें। तभी परिवारजन आपको महत्ता देंगे।
  •  घर के लिए कभी कुछ न कर पाएं तो स्वयं को कोसने की बजाय प्रयास करना बेहतर है।

अधिकांश बच्चें शरारती होते हैं। वे दिन भर कोई न कोई शरारत करते ही रहते हैं। कुछ बच्चे बात-बात पर मचलते और रोते हैं। आमतौर पर लोग ऐसे बच्चों को शरारत करने से रोकते या बात-बात पर रोने वाले बच्चों को डराते डपटते और मारते हैं। बच्चों को चुप कराने के लिए या शरारत करने से रोकने के लिए उपरोक्त तरीका बिल्कुल गलत है। बच्चों को डराते रहने से ऐसे बच्चे डरपोक हो जाते हैं और हर चीज से डरने लगते है। ऐसे बच्चे जीवन में कुछ करने में सफल नहीं हो पाते। बार बार असफल होने से उन्हें मानसिक आघात पहुंचता है। भयावह काल्पनिक बातों द्वारा बच्चों को चुप कराने या शरारत करने से रोकने में भले ही हम सफल हो जाते हैं लेकिन बच्चों पर इसका खतरनाक असर पड़ता है। हमारा यह व्यवहार बच्चों के कोमल मन को झंझोड़कर रख देता है। बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार करते समय हम बिल्कुल नहीं सोचते कि बच्चों के कोमल मन पर इन बातों का क्या असर पड़ सकता हैं। बस हम तो यही चाहते हैं कि बच्चा चुप हो जाए और अपना व्यवहार बदल दें। बड़ों द्वारा कही गई डरावनी काल्पनिक बातों का बच्चे के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इन भयावह बातों से उत्पन्न भय के कारण बच्चों में कई प्रकार की मानसिकता विकृतियां उत्पन्न हो जाती है। आजकल माता-पिता मनोरंजन के लिए अपने बच्चों को भूत-प्रेत के व सुपरमैन आदि के आतंकित करने वाले कारनामे सुनाते है। इनसे बच्चों का मनोरंजन तो नहीं होता लेकिन वे भयभीत और आतंकित जरूर हो जाते हैं। ऐसे बच्चें बड़े होने पर भी अंधेरे में जाने से घबराते हैं तथा हल्की आहट पर भी पसीना-पसीना हो जाते है। बच्चा ज्यों-ज्यों बड़ा होता है, इन बातों को गहराई से लेने लगता है तथा आगे चलकर यही भय भयानक रूप धारण कर लेता है। आज भी अनेकों युवक-युवतियां बिल्ली, छिपकली, इंजेक्शन या बिजली से डरते हैं। यह सब परिवार के सदस्यों द्वारा बचपन में डराने का परिणाम है। प्रत्येक माता-पिता को चाहिए कि वे रोते बच्चे को चुप कराने के लिए या उससे कोई काम करवाने के लिए उसे भयावनी बातों या कहानियों द्वारा आतंकित न करें बल्कि उन्हें महापुरूषों की साहसपूर्ण गाथाएं सुनाकर साहसी बनने की प्रेरणा देनी चाहिए। बच्चों को भक्तिपूर्ण गाथाएं, बहादुरी की गाथाएं आदि सुनाने से उनमें आत्मबल की वृद्धि होती है और बच्चे साहसी बनते है। डरावनी कहानियां तथा भयावह बातों से बच्चें शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होते है। तभी बच्चा बड़ा होकर निडर और साहसी बन सकता है।

अंगूठा व्यक्ति के चिंतन विचारों का आईना होता है। अंगूठों का अध्ययन हाथ में रेखाओं जितना महत्व रखता है। अंगूठे के गुण तथा दुर्गुणों से रेखाओं के फल में अंतर आ जाता है। अतः कोई भी फलादेश कहने से पहले अंगूठे का अध्ययन जरूर करना चाहिए
अंगूठा मनुष्य के व्यवहार की खुली किताब है। इससे व्यक्ति के गुण, अवगुण कमजोरी आदि का पता लगाया जा सकता है। अतः अंगूठे के बारे में सभी को जानकारी अवश्य होनी चाहिए।
लंबा अंगूठा-
लंबा अंगूठा मनुष्य के सुलभ गुणों के बारे में बताता है जैसे व्यक्ति उदार शांत बुद्धिमान शौकीन व बड़े दिल का होता है। अगर अंगूठा लंबा होकर गुरू की अंगूली के दूसरे पौर तक आ जाए तो ऐसे लोग किसी का बुरा करना तो दूर सोचते भी नहीं है।
अगर अंगूठा लंबा मस्तिष्क रेखा निर्दोष और बुध की अंगुली उत्तम हो तो ऐसे लोग निर्णायक होतेे है। किसी भी बात को बहुत जल्दी समझ लेते है। यह लोग उलझी से उलझी बात का निर्णय भी बड़ी जल्दी कर देते है। अतः लंबा मानवता के गुणों में वृद्धि करता है। ऐसे व्यक्ति जिम्मेवार होते हैं व अनुशासित होते है।
छोटा अंगूठाः-
छोटा अंगूठा व्यक्ति के पशुत्व होने का लक्षण है। ऐसे लोग गुस्सैल बहमी जल्दबाज अकड़ू, छोटे काम करने वाले अधिक मेहनत करने वाले सीधे विश्वास करके दूसरे के कहने पर चलने वाले होते हैं ऐसे लोग अपने आपको बहुत ही बुद्धिमान और दूसरों को सामान्य समझते है। इनके घर का वातावरण भी ठीक नहीं रहता है। ऐसे लोग अपने घर में रोब बहुत जमाते हैं, अगर इनकी मस्तिष्क रेखा खराब हो तो कमजोर स्मृति होती है।
अगर अंगूठा छोटा व मोटा हो तो सभी से इनका विरोध रहता है। इनका दिया हुआ पैसा डूब जाता है। जल्दबाज बहुत होते है। इस कारण इन्हें जीवन में कई बार हानि उठानी पड़ती है। ये क्षण में कुछ, दूसरे क्षण में कुछ और सोचने लगते है। अगर हाथ में अन्य दोष हो तो ऐसे लोग कातिल व जेल जाने वाले भी होते है।
अगर इनकी अंगुलियां भी मोटी हो तो राक्षस प्रवृति होती है। इनसे ज्यादा मेंल जोल नहीं रखना चाहिए। इनकी शत्रुता भी हानिकारक होती है। अगर अंगुलियां पतली हो तो दुर्गुणों में कमी जरूर आ जाती है।
अगर मोटा अंगूठा यदि लंबा हो तो झगड़ा कम पसंद करते है। अगर इनके साथ अन्याय होता है तो चिल्ला चिल्लाकर न्याय लेने वाले होते है। ऐसे लोगों की संतान भी लापरवाह होती है। इनका गृहस्थ जीवन भी क्लेशमयी होता है। घर में खर्च बहुत अधिक होते है। ऐसे व्यक्ति किसी न किसी नशीली चीज का सेवन करते है। जैसे श्राब पीना जुआ खेलना आदि लक्षण पाए जाते है।
कठोर तथा न झुकने वाला अंगूठाः-
ऐसा अंगूठा लंबा, मोटा किसी भी प्रकार का हो सकता है पर ये पीछे की ओर नहीं मुड़ता है। ऐसा होने पर व्यक्ति मेहनती ईमानदार व दृढ़प्रतिज्ञ होता है। ऐसा व्यक्ति कोई भी निश्चय करने पर उसे मरते दम तक पूरा करने वाला होता है। ऐसे लोग खुलकर विरोध करते है। अतः इनका भी लोग बहुत विरोध करते है। ऐसे लोग संघर्ष के बाद निरंतर सफल पाए गए है। ऐसे लोगों की घर वालों से नहीं बनती है। ये सभी को दबाकर रखते है। अगर ये अंगूठा मोटा और छोटा हो तो ऐसे व्यक्ति अपने अपमान का बदला जरूर लेते है। सख्त व लंबा अंगूठा फौज के अफसरों में देखा जाता है। ऐसे लोग वफादार तथा कत्र्तव्य निभने वाले होते है।
झुकने वाला नरम अंगूठा
पीछे की ओर मुड़ने वाला व नरम अंगूठा मानव के गुणों में वृद्धि करने वाला होता है। ऐसे लोग सभी से प्यार करने वाले होते है। ये लोग किसी से बगाड़ते नही है। जिससे नाराज हो जाए उसे भुलाते नही है। माफी मांगने पर माफ कर देते है। बहुत ही भावुक होते है। जल्दी ही किसी भी बात पर रो पड़ते है। ऐसे लोग मन के साफ तथा कोई भी बात छुपाकर रखने वाले होते है। अगर इन्हें जरा भी विश्वासपात्र लगे तो गुप्त बातें भी बता देते है। ये विद्वान दयालु होते है। तथा बेकार के झगड़े में नहीं पड़ते है। ऐसे लोगों से सभी लाभ उठाते है। अगर मस्तिष्क रेखा दोषपूर्ण हो तो बर्दाश्त कम हो जाता है। तथा कटु आलोचना करने वाले होते है। ऐसे लोग दीन हीन लोगों के लिए सदैव उदार होते है।
अंगुलियांः चरित्र का परिचायक
अंगुलियां हाथ में एक विशेष स्थान रखती है। अंगुलियों के चिन्ह लंबाई मोटाई पैनापन का हाथ में एक विशेष लक्षण होता है। इसके द्वारा मानव जीवन बहुत अधिक प्रभावित होता है। अंगुलियों के बारे में जानकारी हासिल कर हम किसी व्यक्ति के सामान्य चरित्र के बारे में जानकारी हासिल कर सकते है। अगर इसका हम विस्तार से वर्णन करें तो चरित्र को बारीकियों के बारे में भी पता चल सकता है। इस लेख में मै ऐसी जानकारी देना चाहती हूं जो मेरे निजी अनुभव व गुरू की कृपा से मुझे प्राप्त हुए है। जो एक लेख में संभव नही हैं फिर भी इसे मैं संक्षेप में समझाने की कोशिश करती हूं।
अंगुलियां हाथ में सामान्य छोटी लंबी मोटी पतली सख्त कोमल इत्यादि होती है।
छोटी अंगुलियांः-
छोटी अंगुलियां जिसके हाथ में होती है, वह अपने बारे में बहुत सोचते हैं तथा स्वार्थी होते है। ऐसे लोग अपने परिवार के बाद ही समाज आदि का सोचते है। ऐसे लोग बहुत ही सोच समझकर खर्च करते है। इन्हें बेवजह दोस्तों के साथ घूमना पसंद नही होता है। ऐसे लोग दोस्ती भी उनसे करते हैं जिनसे लाभ ही होना होता है। ऐसे लोग पढ़ाई करते वक्त भी सोचते है कि आगे इससे लाभ अवश्य उठाना है। अगर हाथ में मस्तिष्क रेखा द्विभाजित है, अंगुलियां सुंदर तथा पतली हो तो ये मकान का लाभ भी व्यवसायिक रूप से उठाने की कोशिश भी और करते है। इनके मित्रों की संख्या कम होती है।
अगर यही हाथ काला पतला मोटी अंगुलियां भी हो तो ये अनैतिक काम करने वाले होते है। जैसे चोरी बेइमानी अगर भाग्य रेखा भी मोटी हो तो किसी भी तरीके से पैसा कमाने की फिराक में रहते है।
हाथ अच्छा हो तो ये जीवन मे विशेष सफलता प्राप्त करते है। इनके बच्चे भाई आदि चालाक होते है। अगर ऐसे लोग राजनीति मे हो तो लाभ उठाने वाले होते है।
मोटी उंगलियांः-
अगर अंगुलियां अधिक मोटी हो तो ऐसे लोग हाथ से ज्यादा काम करने वाले व बुद्धि से काम करने वाले वाले होते है। अगर इसके साथ हाथ सख्त भी हो तो क्रोधी जल्दबाज तानाशाह होते है। किसी चीज से संतुष्टि ना होने पर ये चिड़चिड़े बहुत जल्दी होते है।
अगर हाथ की मस्तिष्क रेखा मंगल से मंगल पर जाए तो ऐसे लोग परिणाम की चिंता नहीं करते है। अगर हाथ में अन्य दोषपूर्ण लक्षण हो तो ऐसे लोग कत्ल भी कर देते है। उनका दिल पढ़ाई में भी नहीं लगता है। इनका गृहस्थ जीवन विशेष अच्छा नहीं होता है। ऐस लोगों से ज्यादातर दूर ही रहे तो अच्छा है। ये बुद्धिमान लोगों के साथ ज्यादातर नही रह सकते है।
ये दूसरों की बुराई करने वाले होते है। अगर शुक्र अधिक उठा हो तो बहुत ही कामुक हो जाते हैं और जीवन में बदला लेने की बातें और अनुचित तरीके स बदला लेते है। अगर अंगुलियां लंबी हो तो ये अपने जीवन में धन की स्थिति को सुधार लेते।
लंबी उंगलियांः-
उंगलियां लंबी होने के साथ साथ पतली हो हाथ का रंग गुलाबी हो तो ऐसे लोग सही मायने में मानव कहलाने योग्य होते है। ऐसे लोग दूसरों की मदद जरूर करते है। इस वजह से इनकी प्रगति की रफ्तार थोड़ी धीरे हो जाती है। यह सभी से मानवता का कव्यवहार करते हैं ये लोग चलते फिरते भी दोस्ती कर लेते है। ऐसे लोग दूसरों की बातों में जल्दी आ जाते है।
इस मामले में स्त्रियों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए क्योंकि ये प्रत्येक पर विश्वास कर लेती है। और चरित्र से संबंधित हानि पहुंचाने की कोशिश भी अधिकतर उन्हीं स्त्रियों के साथ होती है। जिनकी अंगुलियां लंबी और मोटी होती हैं अगर पतली हो तो इनकी हानि कम होती है।
शुक्र अगर उठा हो अंगुलियां लंबी हो तो कामवासना को दबाकर रखने वाले होते है। ऐसे लोग बदनामी से बहुत डरते है। कवि, सलाहकार, कलाकार इस प्रकार के बौद्धिक कार्य करने वालों की अंगुलियां पतली पाई जाती है।
सख्त तथा न झुकने वाली अंगुलियां-
ऐसे व्यक्ति स्थिर विचारों वाले होते हैं इन्हें क्रोध भी बहुत अधिक आता है। ऐसे लोग मन में सोच लें कि ये काम करना है तो बस ये कर ही डालते है। ऐसे लोग आसानी से किसी को काफ नहीं करते है। ये सभी पर अपना रोब डालने वाले अपने कार्य में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करते है।
बचपन में भी बहुत जिद्दी पाए जाते है। इसी कारण इनके संबंध जिससे होते है। उनके साथ सैद्धांतिक मतभेद अवश्य होते है। अगर इसी दशा में अंगुलियां टेढ़ी हो मंगल पर तारा बनता हो, अंगूठा टोपाकार हो तो गुस्से में ये कत्ल भी करते है। ऐसे लोग अपने बीवी बच्चों पर भी बहुत हाथ उठाते है।
गुरू की उंगली लंबीः-
गुरू की अंगुली यानि की तर्जनी अंगुली अगर ये सूर्य की अंगुली से बड़ी हो तो ये लंबी मानी जाती है। इस अंगुली के हाथ में लंबी होने पर हाथ गुलाबी उत्तम किस्म का होने पर इन्हें जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुख मिलते है। इनकी प्रवृत्ति भी धार्मिक होती है। इन्हें अपने कार्यों में टीका टिप्पणी पसंद नहीं होती है।
शनि की उंगलीः-
अर्थातृ माध्यमिका उंगली अगर हाथ में उंगली लबी हो तो ऐसे लोग धार्मिक कलाकार साहित्य में रूचि रखने वाले सभी से प्यार करने वाले होते है। ज्योतिषी होने का खास लक्षण इसी उंगली के द्वारा भी पता चलता है। अगर बीच का पोर लंबा हो और शनि के नीचे त्रिकोण बनता हो तो ऐसे लोगों को इस प्रकार की विद्या का विशेष शौक होता है। बिल्कुल सीधी शनि की अंगुली धनी तथा एकांतवासी बनाती है। अगर शनि की अंगुली सूर्य पर झुकी हो जीवन रेखा एक हाथ में अधूरी हो तो ऐसे लोगों के घर जवान मौत अवश्य होती है। शनि की अंगुली सीधी होने पर जानवारों से विशेष लगाव व जानवरों का रख रखाव भी ये बड़े चाव से करते है। अगर ये अंगुली तिरछी हो तो इन्हें विशेष धन लाभ नहीं होता है। धन आने पर इनके पास टिकता हुआ नजर भी नही आता है। तिरछी होने पर ये जानवर पालते है तो इन्हें नुकसान अवश्य होता है। अगर शनि की अंगुली सीधी हाथ भारी जीवन रेखा गोल हो शनि की अंगुली पर तिल हो तो विशेष धनी होने का लक्षण है।
बुध की उंगलीः-
बुध की अंगुलों का सीधा होना, आजकल के समाज के हिसाब से अच्छा नहीं माना जाएगा क्योंकि ऐसे लोग सीधे स्वभाव के होते है। समय के अनुसार अपना काम नहीं निकाल पाते है। ना ही अपने आपको इसमें ढाल पाते है। इसलिए ये उंगली अगर थोड़ी तिरछी हो तो ही अच्छा माना जाता है। क्योंकि समय अनुसार अपना काम निकलवाना ऐसे लोग जानते है। अगर ये ज्यादा तिरछी हो तो व्यक्ति में चालाकी धोखाधड़ी षडयंत्र बनाने आदि दुर्गुणा आ जाते है। ज्यादा झूठ बोलने वालों की भी कनिष्ठा अंगुली तिरछी होती है। बुध की उंगली अनामिका से थोड़ी आगे तक जाए तो ऐसे लोग विशेष प्रगति करने वाले होते है। इस अंगुली का छोटा होना भी उन्नति में रूकावट का कारण होता है। अगर साथ में टेढ़ी भी हो तो ये गुप्तचर होते है। अगर ये अंगुली गांउदार हो तो इनके तक बहुत उत्तम होते है। अगुलियों में छेद हो या चमसाकार हाथ हो बुध की अंगुली टेढ़ी हो तो बहुत अधिक बोलने वाले होते है। इस प्रकार हमें फलादेश करते समय अंगुलियों का अध्ययन अवश्य करना चाहिए और बुध की अंगुलीका विशेष रूप से करना चाहिए। चरित्र संबंधी अन्य कई बातें हमें बुध की उंगली से ही पता चलती है। इन लक्षणों से समन्वय करके ही हस्तरेखाओं का अध्ययन भविष्यफल में चार चांद लगा देता है।