फेफड़े वे अंग हैं जो हमें श्वास लेने में सहायता प्रदान करते हैं। वे शरीर के सभी कोषाणुओं को आक्सीजन प्रदान करने में सहायक होते हैं। कैंसर कोषाणु स्वास्थ्य कोषाणुओं के मुकाबले अधिक तेजी से पैदा होते तथा बढ़ते हैं। कुछ कैंसर कोषाणु मिलकर ऐसी सरंचना विकसित कर सकते हैं जिसे ट्यूमर कहा जाता है। फेफड़ों का कैंसर तब होता है जब फेफड़ों में शामिल कोषाणु परिवर्तित होकर अपसामान्य बन जाते हैं। फेफड़ों के कैंसर के कोषाणु रक्त अथवा लसीका, लिम्पा प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य क्षेत्रों में अथवा अन्य अंगों तक जा सकते हैं। इसे विक्षेपण मेटास्टेटिस कहा जाता है।

कारण
यदि आप धूम्रपान करते हैं तो आपको फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक होगा या अन्य लोगों द्वारा धूम्रपान से प्रभावित क्षेत्र में सांस लेते हैं।

तनाव बदलाव के प्रति होने वाली एक भावनात्मक और शारीरिक प्रक्रिया है। हर किसी को तनाव होता है। तनाव सकारात्मक और आपको ऊर्जा देने वाला हो सकता है या वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करने वाला हो सकता है। लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव आप पर प्रभाव डाल सकता है या हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, आंतों में गड़बड़ी के लक्षण, दमा, गठिया जैसी कुछ बीमारियों को और अधिक बिगाड़ सकता है।

कारण
हरेक व्यक्ति के लिए तनाव के अलग-अलग कारण होते हैं। तनाव के कुछ सामान्य कारणों में परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु, बीमारी, अपने परिवार की देखरेख करना, रिश्तों में बदलाव आना, काम नौकरी बदलना, जगह बदलना और पैसा हो सकते हैं। यहां तक कि देर तक इंतजार करना, विलंब हो जाना या भारी ट्रैफिक होना जैसी छोटी-छोटी चीजें तनाव का कारण हो सकती हैं।
लक्षण
तनाव के कुछ सामान्य चिन्ह हैं जैसे- घबराहट, उदासी या गुस्सा महसूस करना, दिल की धड़कनों का तेज हो जाना, सांस लेने में परेशानी होना, पसीना आना, गर्दन, कंधों, पीठ, जबड़े या चेहरे की मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन होना, सिर दर्द होना, थकान महसूस करना या नींद आने में समस्या होना, कब्ज या दस्त, पेट खराब रहना, भूख कम होना या वजन घटना ।

दांत दर्द, दांतों की सड़न, संक्रमण, कान में दर्द, साइनस संक्रमण या जबड़े के जोड़ में चोट के कारण किसी दांत में या उसके पास होने वाला दर्द होता है।
लक्षण
चबाने में दर्द होना, खून बहना या बुरे स्वाद वाला रिसाव होना, मसूड़ों या जबड़े में सूजन, मसूड़ों या जबड़े में लाली, गर्म या ठंडा खाने या पीने पर दर्द होना।

देखभाल करना

  • अगर आपको निम्न में से कुछ हो तो दांत के डाक्टर को दिखाएं।
  • 1 या 2 दिनों से ज्यादा से हो रहा दांत दर्द।
  • बुखार, कान में दर्द या मुंह खोलने पर दर्द।
  • अपाॅईंटमेन्ट मिलने तक र्द से आराम के लिए अपने दांतों के डाक्टर से बिना नुस्खे से मिलने वाली दर्द की दवा पूछ लें।
  • एस्प्रिन या एस्प्रिन वाले उत्पाद न लें। बहुत गर्म या ठंडे खाद्य खाने से बचें।
  • लोंग के तेल का फाहा दांत के नीचे रखने से आराम मिल सकता है। इसे ज्यादातर फार्मेसियों से खरीदा जा सकता है।

गले में संक्रमण जीवाणु से होता है। यह जीवाणु किसी व्यक्ति की नाक या गले से गिरने वाली तरल बूंदों से फैलता है। यह सर्दी के मौसम के महीनों में बहुत अधिक होता है। जब लोग एक साथ भीतर रहते हैं तो पीडि़त किसी व्यक्ति के साथ 2 से 7 दिनों तक रहने के बाद संक्रमण हो जाता है।
लक्षण
बुखार, कँपकँपी, गले में दर्द, निगलने में कठिनाई, गर्दन में सूजन, सांस लेने में कठिनाई, शरीर में पीड़ा, भूख न लगना, मितली या उल्टी, पेट में दर्द, टान्सिल और गले का पिछला भाग लाल या सूजा हुआ दिखाई दे सकता है और इसमें मवाद के सफेद या पीले धब्बों के साथ बिन्दु हो सकते हैं।
उपचार
बुखार, कँपकँपी, गले में दर्द, निगलने में कठिनाई, गर्दन में सूजन, सांस लेने में कठिनाई, शरीर में पीड़ा, भूख न लगना, मितली या उल्टी, पेट में दर्द, टान्सिल और गले का पिछला भाग लाल या सूजा हुआ दिखाई दे सकता है और इसमें मवाद के सफेद या पीले धब्बों के साथ बिन्दु हो सकते हैं।

सामग्रीः- 1 कप रवा, 1/2 कप घिसा हुआ नारियल, 1 कप चीनी पाउडर, 4 चम्मच घी, काजू कटा हुआ, थोड़े से किशमिश, इलायची पाउडर 1/2 चम्मच, दूध 1/4 कप।
विधिः- रवा को घी में तब तक भूनें जब तक घी उसका रंग बदल न जाए। अब घिसा हुआ नारियल डाल कर उसे आंच से उतार दें। अब दूध को छोड़कर बाकी सारी चीजें भी डाल दें। अच्छी तरह मिला लें। अन्न में दूध को ऊपर से डालकर फैला दें। रवा लड्डू तैयार है खाने के लिए।

सामग्रीः- 3 कप नारियल (कद्दूकस किया हुआ), 2 कप चीनी, 1 कप दूध।
विधिः- पैन में दूध को उबालें। अब 2 कप नारियल डालकर कम आंच पर पकाएं। जब नारियल पूरा दूध सोख ले तब चीनी डालकर चलाएं। आंच से उतारकर छोटे-छोटे लड्डू बनाएं। एक प्लेट में घिसा नारियल रखकर उस लड्डू को उस पर लपेटे।

अभी कुछ समय पहले ही एक बाहरवीं कक्षा की छात्रा पर कुछ मनचलों ने उस समय ज्वलनशील पदार्थ फेंक दिया जब उसने छेड़छाड़ करने का उन्हें हंस-मुस्कुरा कर कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया था। यह घटना उस सम घटी थी जब छात्रा अपने घर से चलकर स्कूल के निकट पहुंची ही थी।
रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर कार्यरत एक सेल्सगर्ल शाम के समय अपना काम समाप्त करके घर वापस लौट रही थी तो अचानक कुछ मनचलों ने उसे गली में घेर लिया और पकड़ कर उसका शीलभंग करने का प्रयास करने लगे। युवती के प्रबल विरोध करने और सहायतार्थ चिल्लाने पर गुंडों ने उसका ब्लाउज फाड़ दिया और उसे शारीरिक कष्ट पहुंचाया। भीड़ इकट्ठी हो जाने पर अपराधी तत्व बड़े आराम से सबके सामने सुरक्षित निकल कर भाग गये। छेड़छाड़ की घटनाएं किसी विशेष् नगर की बात नहीं है। आजकल तो हर नगर में ही छेड़छाड़, अश्लील और भद्दी हरकतें करने का प्रचलन इतना बढ़ रहा है कि दिनोंदिन महिलाएं घर से बाहर अपने आप को असूरक्षित महसूस कर रही है। आश्चर्य की बात तो यह है कि छेड़छाड़ की हरकतों में युवक ही नहीं अच्छी खासी उम्र वाले और बूढ़े तक शामिल है। इनकी हालत यह है कि ये आंख मिचैली खेलने और हाथ घुमाने तक की हरकतों में शामिल है परंतु बुजुर्ग होने के कारण कोई कुछ कह नहीं पाता और मामला शांत हो जाता है। शहर के चैराहों और व्यस्त बाजारों और कन्या पाठशालाओं की ओर जाने वाले रास्तों पर युवतियों छात्राओं की काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मेलों ठेलों की भीड़भाड़ में तो ये मनचले निंबों पर चुटकी काटने और उरोजों को दबाने से भी बाज नहीं आते आते। कुछ महिलाएं तो शर्म के मारे सब कुछ सहन कर लेती है। अभी थोड़ी ही समय में स्कूल काॅलेज आती जाती छात्राओं के साथ तो छेड़छाड़ की घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। मनचले निडर होकर खुलेआम छात्राओं पर न केवल फब्तियां कसते हैं बल्कि उनके अंगों को छूने और प्रेम पत्र देने की सीमा तक बढ़ रहे है।

  • 4-6 के समूह में आती हुई छात्राएं तो इनकी हरकतों से बच निकलती हैं लेकिन अकेली छात्रा को तो इनका दुव्र्यवहार झेलना ही पड़ता है। हमें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि आखिर वे कौन से ऐसे कारण है कि आज का युवा वर्ग चरित्रिक पतन की ओर इतना फिसल रहा है।
    गहराई से सोचने पर लगता है कि निम्नलिखित बातें ऐसी हैं जो युवाओं को चरित्रिक पतन की ओर धकेलने में सहायक सिद्ध हो रही है।
    हमारी वर्तमान शिक्षा पद्धति ऐसी है जिसमें अब स्कूलों के नाम पर कुछ रह ही नहीं गया। महंगे पब्लिक स्कूलों की भरमार है जहां सभी कुछ पाश्चात्य ढंग से सिखाया पढ़ाया जाता है। अपनी सभ्यता और संस्कृति पर पाश्चात्य रंग चढ़ता जा रहा है। समय की मांग को देखकर मां-बाप ऐसे स्कूलों ही में अपने बच्चों को दाखिला दिलाकर गौरव महसूस करते है। प्रगतिशीलता के नाम पर नशा और फ्री सेक्स का बोलबाला है।
  • पुलिस व्यवस्था चैाकस न होने के कारण ऐसे युवकों पुरूषों के हौंसले बुलंद है।
    पिछले कुछ वर्षों से विज्ञापनों, फिल्मों तथा टेलीविजन के कार्यक्रम और पत्र पत्रिकाओं इत्यादि में नारी के नंगेपन और अश्लील चित्रों की भरतार है। इस कुप्रवृति के कारण समाज में चरित्रहीनता और वहशीपन बढ़ता जा रहा है। किशोर और युवक शिक्षा की ओर से विमुख होकर कुकृत्यों मंे अधिक से अधिक रूचि ले रहे है। सेक्स और मादक द्रव्यों का उपयोग किशोरों के लिए एक फैशन सा बन रहा है। कमी कंप्यूटर ने पूरी कर दी है। मीडिया भी गलत हरकतों को इतना उछालता है कि बार बार उन दृश्यों को देखकर युवक गलत ही सीखते है।
  • फैशन इतना बढ़ रहा है कि शरीर का अधिक से अधिक भाग प्रदर्शित करने की होड़ सी लगी हुई है। फिल्मी अभिनेत्रियों का अंग प्रदर्शन के विषय में यह कथन कि जब भगवान ने उन्हें सुंदर सुडौल शरीर रूपी सौगात दी है तो उसका प्रदर्शन करने में क्या बुराई है। किशोरियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
  • लड़कियों के जींस या निकर में कसे हुए नितंब और शर्ट के सामने से खेले हुए बटन क्या युवाओं की यौन भावनाओं को भड़काने का काम नहीं करते? फैशन टीवी पर माॅडलों के नंगे शरीर देखकर क्या युवाओं में वासना जागृत नहीं होती। कहने का अर्थ है कि बढ़ता हुआ नंगापन किशोरों और युवाओं के मन मस्तिष्क को दूषित कर रहा है। जिसके कारण वे काम आवेग में आकर छेड़छाड़ और बलात्कार जैसे घटनाओं को जन्म देते है।
  • युवक युवतियों में चरित्र निर्माण के साहित्य में रूचि बिल्कुल भी नहीं है। पाश्चात्य मीडिया उसके मानस पटल पर पूरी तरह छाता जा रहा है। लड़के हों या लड़कियां आजकल अधिकतर की शर्टोें पर अजीबो-गरीब सेक्सी शब्द या वाक्य रहते है। ”मैं बुरा हूं“ माइकल जेक्सन के ये शब्द जाने किस आदर्श का प्रचार प्रसार कर रहे है?
  • खाली दिमाग भी शैतान का घर होता है। युवाओं के लिए आज जीवन को सही ढंग से जीना बड़ा मुश्किल हो रहा है। कड़ी स्पर्धा और बढ़ती हुई बेरोजगारी व निठल्लापन और उद्देश्यहीन जीवन भी बहुत हद तक युवाओं के मन मस्तिष्क को विकृत कर रहा है।
  • शिकागो के सर्वधर्म सम्मेलन में अपना भाषण आरंभ करने से पहले स्वामी विवेकानंद ने वहां के जनसमूह को बहनो और भाइयों कहकर संबोधित किया था। उनके इन शब्दों में अपनत्व, प्यार और विश्वबंधुत्व की भावना थी। लेडीज एंड जेंटलमेन के स्थान पर भाई और बहन का संबोधन सुनकर वहां के स्त्री पुरूष गदगद हो गए और देर तक तालियां बजाकर उनका स्वागत किया था
    काश हम आज भी अपनी सभ्यता और संस्कृति दूसरों में बांट पाते लेकिन अफसोस हम खुद ही भटक गए है।

भगवान द्वारा दी गई अनुपम भेंट आंखों को स्वस्थ रखना मनुष्य पर निर्भर करता है। आंखों की महत्ता को सभी बखूबी जानते है। यदि आंखे स्वस्थ है तो जीवन रंगों से भरपूर है। आंखे अस्वस्थ्य है तो जीवन रंगहीन हो जाता है। स्वस्थ आंखे निर्मल और चमकीली होती है।
आंखों का आकार और रंग रूप ईश्वर की देन है पर थोड़ी सी अतिरिक्त देखभाल से आंखों को सुंदर और सजीव बनाया जा सकता है। इसके लिए आवश्यकता है उचित खान पान सफाई आवश्यक व्यायाम और समुचित नींद की। आइए देखें कि आंखों को स्वस्थ और सुंदर कैसे बना कर रखें-

  • आंखों को कभी भी रगड़े नहीं।
  • आंखों को धुएं, धूल व तेज प्रकाश से बचा कर रखें।
  • तेज धूप में जाते समय अच्छी क्वालिटी के रंगीन चश्में को पहनना न भूलें।
  • सूर्य और सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से न देखें।
  • भोजन के बाद साफ हाथों से साफ जल को नेत्रों के ऊपर उंगलियों से लगाएं। इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है।
  • सुबह प्रतिदिन हरी घास पर नंगे पांव घूमने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  • सुबह उठ कर नेत्रों में जमी मैल को ठंडे पानी से साफ करें।
  • नहाते समय आंखों को ठंडे पानी से धोएं।
  • आंखों में ठंडक बढ़ाने के लिए रात्रि में त्रिफला ठंडे पानी में भिगो दें। प्रातः उसे छानकर उस पानी में आंखे धोएं। त्रिफला खाने से आंखों को लाभ पहुंचता है।
  • टेलीविजन एक निश्चित दूरी से बैठकर देखें। नजदीक से देखने पर आंखों पर खराब प्रभाव पड़ता है। टकटकी लगाकर न देखें। बीच बीच में आंखों को आराम दें।
  • पढ़ते समय ध्यान दें कि आंखों पर सीधा प्रकाश नहीं पड़ना चाहिए। कम या तेज प्रकाश में भी पढ़ाई न करें। लगातार देर तक पढ़ने से आंखें
  • कमजोर हो जाती है। कुछ पल आंखों को आराम दें।
  • आंखों का स्वस्थ रखने हेतु कुछ आंखों के व्यायाम भी करते रहे।
  • आंखो की सुंदरता और अच्छी सेहत के लिए हरी सब्जी, दूध, फल रेशेदार भोजन नियमित लें ताकि विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में मिलता रहे।
  • आंखों के स्वास्थ्य के लिए मिर्च मसाले भरा भोजन न खाएं। ध्यान रखें कि कब्ज भी न हो पाए।
  • आंखों के स्वास्थ्य हेतु 7-8 घंटें की नींद लें।
  • आंखों के नीचे झुर्रियां होने पर नियमित रूप से मलाई लगाएं ताकि झुर्रियां दूर हो जाए।
  • गुनगुने दूध में रूई डालकर उसके फाहे को प्रतिदिन आंखो के ऊपर रखें। थोड़ी देर रखने से आंखों को आराम मिलता है।

नवजात शिशुओं की देखभाल सही ढंग से करना माताओं के लिए एक समस्या बन जाती है। थोड़ी सी चूक अथवा अज्ञानता के कारण बड़ी मुश्किल का भी सामना करना पड़ सकता है। पहले ऐसा होता था कि घर की बड़ी बूढ़ी महिलाए इन बच्चों की देखभाल में काफी ध्यान रखती थी, लेकिन आधुनिक शहरी परिवेश में जहां परिवार का दायरा काफी छोटा हो गया है। पति पत्नी को ही घर से बाहर तक की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। ऐसे में दंपत्तियों के लिए पेश है बच्चों की देखभाल के कुछ उपयोगी टिप्सः

  • बच्चों की मालिश के लिए नारियल तेल मे एक बादाम गिरी डालकर गर्म करे। ठंडा होने पर इसे छान लें। इस तेल की मालिश करने से
  • बच्चों की त्वचा मुलायम व चमकदार बनती है। इस तेल ाक सेवन किसी भी मौसम मे किया जा सकता है।
  • एक नारंगी का रस प्रतिदिन पिलाने से नवजात शिशु का रंग साफ होता है तथा हृष्ट पुष्ट एवं गोलाकार शरीर बनता है।
  • नन्हें शिशु को हृष्ट पुष्ट बनाने के लिए छिलका सहित आलू धोकर महीन काट लें। इसका रस सनिकालकर दूध या शहद के साथ दिन में दो
  • बार चटाने से शिशु कुछ ही दिनों में हृष्ट पुष्ट हो जायेगा।
  • गाय के दूध से बने घी से सिर पर मालिश करने से बच्चों की बुद्धि का विकास होता है।
  • चावल का मांड नमक के साथ मिलकर पिलाने से बच्चों का ताकत मिलती है।
  • दुर्बल बच्चों को मिश्री पीसकर घी में मिलाकर एक चम्मच सुबह शाम चटाने से बच्चा हृष्ट पुष्ट होता है। साथ ही उसकी शक्ति बढ़ती है।
  • बड़े बच्चों को सौफ का चुर्ण शहद के साथ् देने से उसकी स्मरण शक्ति का विकास होता है।
  • नन्हें बच्चो को प्रतिदिन शहद चटाने से वह तंदुरूस्त होता है। साथ ही दांत निकलने में आसानी होती है।
  • बच्चों को स्नान के जल में थोड़ा नमक डालने से त्वचा की बीमारियों से बचाव होता है।
  • बच्चों को सदैव मुलायम व आरामदायक कपड़े पहनाएं। बिना धोये व सुखये किसी दूसरे बच्चो का कपड़ा नही पहनायें।
  • कच्ची हल्दी को गुड़ में मिलकर खिलाने से बच्चो के पेट में कीड़े नष्ट हो जाते है।

आधुनिक युग की महिलाओं में स्लीवलैस परिधानों का आकर्षण बढ़ गया है मगर कई बार देखा जाता है कि महिलाएं स्लीवलैस परिधान पहन तो लेती हैं मगर पूर्ण समझ न होने के कारण स्वयं को हंसी का पात्र बना लेती है। अतः स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व कुछ बातों की जानकारी का होना अति आवश्यक हैः

  • सर्वप्रथम अपनी देहयष्टि का आंकलन कर लेना बेहतर है। यदि आप बहुत पतली व बहुत अधिक लंबी है तो स्लावलैस परिधान आप पर नहीं जंचेगा, क्योंकि इससे आपकी बाजुओं का पतलापन व अविकसित वक्ष साफ नजर आएंगे व आप पहले से भी अधिक दुबली दिखाई देंगी।
  • इसके पश्चात अपने पीठ वाले भाग गर्दन और कुहनियों पर ध्यान दें। यदि आपकी गर्दन पीठ का रंग अन्य भागों से गहरा है तो स्लीवलैस परिधान आपके तन के अन भागों के रंग की गहराई को उभारने में सहायक होगा, अतः ऐसा होने पर स्लीवलैस परिधान पहनने का ख्याल बिल्कुल छोड़ दें।
  • स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व शरीर के इन भागों की सफाई की तरफ पूरा ध्यान दे। बांहों की सफाई के साथ साथ कुहनियों की सफाई भी करें। कामकाजी महिलाओं के लिए तो यह और भी आवश्यक है क्योंकि अक्सर ये काम करते समय अपनी कुहनी को कुर्सी के बाजू या मेज पर टिका लेती है। जिससे कुहनी की त्वचा काली मोटी व खुरदरी हो जाती है। यदि आप स्लीवलैस परिधान पहनेंगी तो आपकी कुहनियां दूर से ही बाजू में काला पैबंद नजर आएंगी।
  • काली मोटी व खुरदरी त्वचा की सफाई के लिए सर्वप्रथम वहां गुनगुने पानी से साबुन लगाएं और लगभग पांच मिनट तक धोएं नहीं। इसके पश्चात् वहां की त्वचा को नहाने वाले किसी 10 बादाम गिरी को पीस लें व एक अंडा फेंटे लें। इसमें एक नींबू का रस मिलाकर लेप बनाकर त्वचा पर लगाएं। 15-20 मिनट के बाद गुनगुने पानी की बूंदें डालें व रगड़ कर साफ करें। सप्ताह में 3 बार ऐसा करें बाहों की त्वचा खिल उठेगी।
  • बाहों को दाग धब्बों से मुक्त करने व कोमलता प्रदान करने हेतु एक छोटा चम्मच चीनी ताजा मलाई और नींबू का आधा हिस्सा लेकर बांह पर चीनी के दाने पिघलाने तक मलें, फिर 5-7 मिनट बाद गुनगुने पानी से धोएं। इस उपाय से आपकी बांहों की त्वचा को जीवंतता प्रदान होगी।
    जैतून के तेल की कुछ बूंदें नींबू का रस व एक अंडे का पीला भाग मिलकर बाहों पर लगाएं इससे अवश्य लाभ होगा।
  • स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व बाहों व बगलों पर से अवांछित बाल हटा लें। इसके लिए सबसे उत्तम उपाय है वैक्स करना। इससे बांहों की त्वचा पूर्णरूप से बालों रहित हो जाती है जो देखने में अच्छी लगती है।
  • घर से बाहर निकलते समय खुले भागों पर सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग अवश्य करें। यथासंभव छाता भी लेकर चलें।
    यदि आप स्लीवलैस ब्लाउज पहनना चाहती हैं तो यह ध्यान रखें कि यह आपकी साड़ी के शेड से मेल खाता हो। प्रिंटिड साड़ी हेा तो बेस कलर का ब्लाउज पहनें। अगर साड़ी प्लेन हो तो मैच करते कंट्रास्ट रंग के ब्लाउज पहनें।
  • इसके साथ ही बाहों की सुडौलता की तरफ भी अवश्य ध्यान दें। थुलथुली बांहों पर स्लीवलैस परिधान अच्छे नहीं लगते इसका ध्यान रखें।
    स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व बगलों मे सुगंधयुक्त टेलकम पाउडर अथवा डिओडोरेंट का प्रयोग अवश्य करें।
  • यदि सूट या ब्लाउज के रंग को ध्यान में रखते हुए मैच करते कंगन अथवा सिल्वर या सुनहरे रंग का बावजूद भी पहन सकती है। इसके अलावा सुंदर कलाई घड़ी भी पहन लें तो बांहों की शोभा और भी बढ़ जाएगी।