कुछ बातें पति करें घर के लिए

कुछ बातें पति करें घर के लिए

बच्चों की देखभाल-बच्चों की देखभाल का काम बहुत कठिन है। बीमारी, होमवर्क, स्कूल, भेजना, नहलाना, साथ खेलना आदि जिम्मेदारियां कम नहीं होती इसलिए पति को इन कामों में पत्नी का हाथ बटाना चाहिए। यदि बच्चा बीमार है तो बारी-बारी से रात में पति पत्नी जागने का नियम बना लें। अपनी योग्यता के आधार पर बच्चे को बढाएं। जिसके पास समय है वो, टीचर्स मीटिंग में जाकर टीचर्स से विचार विमर्श करें वैसे कोशिश करें कि दोनों एक साथ ही स्कूल जाएं। इससे बच्चे का मनोबल सुदृढ़ होने के साथ ही अभिभावक भी सम्मान के भागी बनेंगे।
बाहरी दायित्व- बिजली पानी, गैस कनैक्शन, बच्चों की फीस आदि से सम्बन्धित कई काम है जिन्हें सम्पन्न करने में समय लगता है। सरकारी दफ्तरों की लंबी लाइनों में खड़ें रहना पड़ सकता है। ऐसे में पति पत्नी के बीच ठन जाती है। पति अक्सर अपने काम को महत्वपूर्ण समझते हुए पत्नी को आदेश दे डालते हैं, ‘‘जाते समय फलां-फलां काम करती जाना। मैं तो जा नहीं सकता क्योंकि मुझे दफ्तर पहुंचने में देर हो जाएगी।’’ जरा सोचिए, यदि आप को देर तो क्या पत्नी दफ्तर के लिए लेट नहीं होगी? अपना वाहन निकालिए और कर डालिए ये सारे काम। पत्नी को भी सुकून मिलेगा।
रिश्ते-नातेदारी का निर्वहन- शादी ब्याह, मुंडन, जन्मदिन, शोक आदि के मौकों पर पास पड़ोस, परिचितों, रिश्तेदारों के पास जाना पड़ता है। अगर पति-पत्नी, मिलजुल कर ऐसे मौकों पर जाए तो सही है। लेकिन पुरूष वर्ग यदि हर समय सोचे कि पत्नी ही चली जाए, मुझे न जाना पड़े, यह गलत हैं।
बीमारी और परेशानी- घर में कोई सदस्य अचानक बीमार पड़ जाए या कोई परेशानी पैदा हो जाए तो उससे निपटने की जिम्मेदारी भी कामकाजी महिला पर ही थोप दी जाती है। पुरूष अक्सर छुट्टी न मिलने का बहाना बना कर अपने दायित्व से विमुख हो जाते है। जब पढ़े लिखे सुसस्ंकृत परिवारों में ऐसी विसंगतियां देखने को मिलती है तो अजीब सा लगता है। आपस में सामंजस्य बनाएं।
शहर से बाहर जाना- कामकाजी महिलाएं यदि देर तक किसी मीटिंग में बैठ गयीं, शहर से बाहर दौर पर जाने की बात हुई तो परिवार और पति की तीखी नजरों का सामना करना पड़ता है। लोग उनके बारे में धारणा बना लेते हैं कि काम कुछ भी नहीं है घूमने का बहाना चाहिए। कुछ पति यह जानते हुए कि पत्नी को काम के अनुसार उसका बाहर जाना निहायत ही जरूरी है उसका समर्थन करने के बजाय उसका विरोध करते है। ऐसी बातें पत्नी के कैरियर को आगे बढ़ाने में बाधक सिद्ध होती है।
पत्नी के प्रमोशन होने पर- जिस तरह पति के प्रमोशन पर पत्नी प्रसन्न होती है उसी तरह पत्नी के प्रमोशन पर पति को प्रसन्न होना चाहिए। पत्नी का मनोबल तो बढ़ेगा ही उसे प्रसन्नता भी मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं होता है पत्नी की तरक्की देखते ही पति का अहं जागृत हो जाता है हीन भावना प्रबल हो उठती है। पति का कर्तव्य है कि वो पत्नी की सराहना करते हुए उसे प्रोत्साहित करें। इससे दाम्पत्य जीवन तो सुखी होगा ही, पत्नी का कैरियर भी शीर्ष पर पहुंचेगा।
घुमने के सवाल पर- बच्चों को सैर कराने या फिल्म दिखान का सवाल आता है तो बहुत पति यह कहते हैं ‘‘मैं जा ही रहा हूं, तुम जाकर क्या करोगी?’’ पति, पत्नी को मन बहलाव के हक से वंचित कर देते हैं।
यदि पति सहयोग दें तो सारी कठिनाईयां काफी हद तक हल हो सकती हैं। पत्नी थकी हारी दफ्तर से घर लौटे और पति चाय की प्याली के साथ मुस्कुरा कर उसका स्वागत करें। छोटी-छोटी बातें ही दाम्पत्य में रस घोलती हैं।

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