बच्चों को दोस्तों के प्रति रखें आगाह

किशोरावस्था जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस उम्र में बच्चों में बहुत बदलाव आते हैं। बच्चों को इस उम्र में समझ पाना जितना जटिल काम है उतना कभी नहीं। बच्चों के विकास में उनके परिवार के साथ-साथ मित्रों का भी सहयोग होता है। किशोरावस्था में तो परिवार से भी ज्यादा उनके दोस्तों और सहेलियों का उन पर प्रभाव पड़ता है। इसी से उनका व्यक्तित्व बनता या बिगड़ता है। उस उम्र में वे सिर्फ दोस्तों के सम्पर्क में ही रहना चाहते हैं। उनसे ही मोहब्बत करना चाहते हैं। उनके साथ ही हर जगह घूमना और जाना पसंद करते हैं। उनके साथ पार्टियों में शराब-सिगरेट पीना पसंद करते हैं। वे उनके साथ सारे अनुभव बटोरने को तैयार रहते हैं। अनुभव लेने के चक्कर में वे खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाते। वे चाहें तो इस सबका सेवन करने के लिए अपने दोस्तों को मना कर सकते हैं। उन्हें रोक सकते हैं। जब उनके दोस्त उन्हें गलत चीजें खाने-पीने के लिए उत्सुक कर सकते हैं तो क्या वे अपने दोस्तों को इन गलत चीजों के सेवन से नहीं रोक सकते? उन्हें रोकने की हिम्मत तो उन्हें दिखानी ही होगी। यह उम्र इसलिए कच्ची भी कही जाती है क्योंकि इस उम्र में नादानियों में किशोर-किशारी ऐसे कदम उठा लेते हैं जो उन्हें जीवन भर के लिए अपराधी बना देते हैं। इस उम्र के लड़के लड़कियों का एक दूसरे के प्रति आकर्षित होना स्वाभाविक है। जरूरी नहीं कि आपकी बेटी लड़को से दोस्ती करती है तो उसके प्रति प्रेम व्रेम जैसा भी कुछ मन में रखती है। इस उम्र की दोस्ती में भावनात्मक जुड़ाव पैदा होना लाजिमी है मगर अपने बच्चों को इस हद से आगे न बढ़ने की हिदायत दें। इस उम्र में लड़के-लड़कियों का आपस में दोस्ती रखना कोई गलत बात नहीं किंतु सोचने वाली बात यह है कि उनकी दोस्ती का स्वरूप क्या है? कहीं इस दोस्ती के कारण वे पढ़ाई में तो नहीं पिछड़ रहे हैं। जो आपको पढ़ने के लिए प्रेरित न करें, वे आपके अच्छे दोस्त नहीं हो सकते। अगर वे आपके सच्चे दोस्त होते तो आपको पढ़ने से नहीं रोकते। अपने दोस्तों को पहचानना सीखें। बच्चों को प्यार और सेक्स की जानकारी दें। इस उम्र में सबसे जरूरी है पढ़ाई। बाकी बाद की चीजें है। सबसे पहले अपना कैरियर बनायें। उसके बाद कुछ और हो। हर घर के कुछ कायदे-कानून होते हैं। बच्चों को भी अपने घर के कायदे-कानून मानने चाहिए। उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि यदि वे अपने घर के नियमों को नहीं मानेंगे तो उनके माता पिता यह बर्दाश्त नहीं करेंगे। किस समय क्या चीज जरूरी है, उन्हें उसे ध्यान में रखना होगा? पढ़ाई के समय पढ़ाई ही जरूरी है। जरूरी नहीं कि आपके बच्चे सारा दिन पढ़ाई करें किंतु दिन में तीन-चार घंटे तो उन्हें पढ़ाई को देने होंगे। पढ़ाई के समय यदि उनके मित्र उन्हें परेशान करते हैं तो वे उनके अच्छे दोस्त नहीं हैं। आप भी ऐसे दोस्तों को अपने बच्चों के साथ मिलने न दें। अगर आपको अपने बच्चों के किसी दोस्त से परेशानी है या उसे आप पंसद नहीं करते तो अपने बच्चे के साथ बैठकर उससे इस विषय में बात करें। यदि वह आपको उसकी कुछ अच्छाई बताता है तो उसे स्वीकार करें किंतु उसे यह भी बता कि यदि आपने उसके दोस्त में कोई झूठी या गलत बात देखी तो आप उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। आप तुरंत उसे उससे दूर कर देंगे। अपने बच्चें का स्कूल बदलवा देंगे। अगर आपके बच्चों को यह पता है कि आप जो कहते हैं वो करते जरूर हैं तो आपके बच्चें अपनी हद पार नहीं करेंगे।

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