अनिंद्रा के है अनेक प्रकार

अनिंद्रा के है अनेक प्रकार

आज के बढ़ते औद्योगिक तथा भौतिक दौर में अनिंद्रा एक आम बीमारी हो गयी है। तरह-तरह की नींद की गोलियां भी पूरी तरह आराम नहीं दे पाती। इनकी आदत पड़ने पर प्रायः गोलियों की मात्रा बढ़ाते रहने से ही नींद आती है और इसका परिणाम होता है अनेक रोगों से घिर कर अपने जीवन को कंटकीय बना डालना। अनिंद्रा के अनेक प्रकार होते है।
इनीटार्डियाः- जिसकी वजह से तुरंत सो सकना संभव न हो, उसे इनीटार्डिया कहा जाता है। यह एक प्रकार की वैयक्तिक अक्षमता है, जो अक्सर उन लोगों में पायी जाती है जो शो बिजनेस से संबंध रखते हैं। इस वर्ग में सिनेमा, दूरदर्शन, प्रकाशन, फैशनों के आविष्कारक व प्रचार से संबंधित लोग आते हैं। ऐसे व्यक्तियों को प्रायः अकेले रहना पड़ता है तथा अत्यधिक व्यस्तता के कारण वे समय पर खा पी और सो नहीं पाते। वे जब भी अपने काम से लौटकर सोने के लिए बिस्तर पर जाते हैं, उनके अंदर दूसरे दिन की कार्य योजना बनने लगती है और वे तुरंत नहीं सो पाते।
स्कर्जोम्नियाः- यह अनिंद्रा का दूसरा प्रकार है। इसमें नींद तो तुरंत आ जाती है किंतु दो-तीन घंटे बाद ही स्वयं टूट जाती है। इसके बाद रोगी रातभर दुबारा नहीं सो पाता। परिणामस्वरूप अगले दिन उन्हें थकावट महसूस होती है। रोगी की मांसपेशियों में दर्द होता रहता है तथा आंखे लाल-लाल रहती हैं। आंखों में जलन होती है और जम्हाइयाँ आती रहती हैं। यह अवस्था उनमें आती हैं जो मानसिक तनावों से युक्त होते हैं। अधिकतर महिलांए स्कर्जोम्निया के शिकारी होते हैं। डा. एस. के. रावत के अनुसार यौन अतृप्ति, अत्यधिक चिंता, नशीले पदार्थो का सेवन, सुबह जल्दी उठने की चिंता, किसी बात का भय आदि अनेक कारणों से लोग स्कर्जोम्निया के शिकार हो जाते हैं।
हाईपर-लिक्सियाः- यह नींद न आने का तीसरा प्रकार होता है। इसमें अक्सर अनिंद्र व्यक्ति यही सोचता रहता है कि वह रात भर ठीक से नहीं सो सका है। वास्तविकता भी यह होती है कि नींद का आना-जाना सम्पूर्ण रात लगा रहता है। हल्की नींद के दौरान हमेशा जागते रहने का आभास रोगी को होता रहता है। रोगी को इस स्थिति से जब अनेक रातें गुजारनी पड़ जाती है तो वह झुंझला जाता है। हाईपर-लिक्सिया के रोगी रात के अलावा दिन में भी सोने का प्रयास करते हैं किंतु उन्हें गहरी नींद कभी नहीं आती। यह अवस्था उन लोगों में अधिक आती है जो नशीले एंव मादक पदार्थो का सेवन अधिक करते हैं। मांसाहार एंव अधिक चटपटे पदाथो्र को खाते रहने से यह अवस्था आती है। फास्ट-फूड खाने वाले लोग भी प्रायः हाईपरलिक्सिया के शिकार हो जाया करते हैं।
प्लाइसोम्नियाः- यह अवस्था प्रायः चालीस की उम्र पार करने के बाद आती है। इसमें ऐसी नींद आती है जिसमें बार-बार जागने का व्यवधान आ पड़ता है। अधिक उम्र वालों में जागने की मियाद (समय) बढ़ने लगती है और दुबारा सो पाने की क्षमता नहीं रह जाती। प्लाइसोम्निया से ग्रसित व्यक्ति बिस्तर पर लेटे-लेटे करवटें बदलता रहता है। इस बीमारी की वजह सिर्फ बुढ़ापा ही नहीं होती। उत्तरदायित्व में कमी, अकर्मण्यता, पहले जैसी पूछ न रह जाना, मान-मर्यादा घट जाना आदि स्थितियां ज्यादा वक्त बिस्तर पर बिताने को बाध्य कर देती हैं। जवानी में भी अगर कोई गहरा विषाद, ग्लानि, उदासी या मायूसी का शिकार हो जाता है तो उसे भी यह बीमारी हो सकती है।
इन्सोम्निया टर्बुलाः- डरावने एंव बुरे दुःस्वप्न भी अनिंद्रा का एक स्वरूप है। ऐसी अनिंद्रा जो दुःस्वप्नों से भरी रहती है उसे ‘इन्सोम्निया टर्बुला’ कहा जाता है। यह अवस्था बहुत ही तकलीफदेह होती है। ये दुःस्वप्न बड़े घने-गहरे और अलग-अलग वक्त पर अचानक नींद तोड़ने वाले होते हैं। किसी व्यक्तिगत हानि या कष्टकर स्थिति में प्रायः दुःस्वप्न दिखते हैं और नींद टूट जाती है। शरीर पसीने से लथपथ हो जाता हैं। दुबारा सोने की कोशिश करने पर भी रोगी सो नहीं पता। कभी-कभी तो दुःस्वप्न की अवस्था में घिग्धी तक बंध जाती है। रोगी का शरीर पीला हो जाता है। इस तरह अनेक प्रकार की अनिंद्रा आकर परेशान करती रहती है। अनिंद्रा के शिकार लोगों को चाहिए कि वे आत्म परिक्षण कर अनिंद्रा की वजह जान कर उसे दूर करने का प्रयास करें। अच्छी नींद लाने के लिए इन उपायों को अपनायें- बिस्तर पर जाने से पहले अच्छी तरह हाथ-पांवों को धो लें तथा बिस्तर पर आने के बाद अपने इष्ट का स्मरण करते हुए सोने का प्रयास करें। सोते समय दूसरे दिन की योजनाओं पर विचार न करें तथा सभी चिंता, भय का त्याग करके सोने का उपक्रम करें। रोज एक निश्चित समय पर ही अपने बिस्तर पर पहुंच जायें। बेड रूम में तीव्र प्रकाश वाला बल्ब न जलायें तथा उस रूम में सुगन्धित अगरबत्ती या इत्र का छिड़काव कर दें। सुविधापूर्ण स्थिति में सोयें। तकिया, उचित बिछावन, चादर आदि को यथा स्थान रखें। सोने वाले बिछावन पर बैठकर पढ़ना-लिखना या खाना खाना वर्जित करें। सभी काम करने के बाद सिर्फ सोने के उद्देश्य से ही बिस्तर पर जायें। अनिंद्रा की औषधियों से अपने आपको बचाने का हर संभव प्रयास करें क्योकि यह एक बुरी आदत बनती चली जाती है।

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