क्यों तनावग्रस्त रहती हैं वर्किंग वूमैन?

कामकाजी महिलाओं का तनाव से गहरा रिश्ता है। जब यह तनाव उन पर हावी होने लगता है। तो अक्सर वे अवसादग्रस्त हो जाती हैं जिससे उनका काम तो प्रभावित होता ही है, साथ ही पर्सनल लाइफ भी डिस्टर्ब होती है।
कारण-

  •  काम का अत्यधिक बोझ होना
  •  कम्युनिकेशन गैप-अक्सर वे कोई समस्या होने पर बॉस से डिस्कस नहीं करती, उस समस्या से अकेली जूझती हैं तो मन व दिमाग दोनों ही कभी फ्रैश नहीं हो पाते।
  •  कई बार इसके विपरीत वे ‘ओवररिएक्ट’ करती हैं। बॉस उनकी प्रतिक्रिया पर नाराज होते हैं तो वे तनावग्रस्त हो जाती हैं।
    अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. संदीप वोहरा के अनुसार चूंकि कामकाजी महिलाओं पर काम का दोहरा बोझ होता है, ऐसे में परिवारजनों का सहयोग न मिलने से वे तनावग्रस्त हो जाती हैं साथ ही घर का वातावरण, परिवार की उनसे बढ़ती उम्मीदें इत्यादि कारण भी उनके तनाव को बढ़ाते हैं।
  •  कुलीग्स के साथ वे अच्छे संबंध मैंटेन नहीं कर पाती हैं तो भी ऑफिस का माहौल बोझिल हो जाता है, जिससे तनाव उत्पन्न होता है।
  •  स्वंय पर जरूरत से ज्यादा भरोसा होना या काम के प्रति लापरवाही, गलतियों का मुख्य कारण है। जब गलती सीनियरस के सामने आती है तो वे परेशान हो उठती हैं।
  •  कुछ महिलाओं में कांफिडेंस की कमी होती है जो उन्हें तनाव देता है।
  •  टाइम मैनेजमेंट की कमी, जिससे उन पर सदैव काम का प्रेशर रहता है।
  •  अपनी इच्छा व टेलेंट से हटकर जॉब करना भी उसके तनाव का कारण रहता है।
  •  काम को पूरी वफादारी से करने पर भी बॉस द्वारा कोई क्रेडिट न दिए जाने पर भी अक्सर वे तनाव की शिकार हो जाती हैं।
  •  पर्सनल व प्रोफेशनल लाइफ के बीच सही संतुलन न होने से भी वे इस समस्या से ग्रस्त रहती हैं।
  •  मीटिंग, प्रेजेंटेशन इत्यादी की सही प्रकार से तैयारी न कर पाने से जब वे अच्छी परफॉरमेंस नहीं दे पाती तो उन्हें स्वयं पर क्रोध आता है जिससे तनाव पनपता है।
  •  जब वे व्यस्तता के कारण पति या बच्चों के लिए कुछ कर नहीं पाती तो स्वयं को कोसती रहती हैं व अपराध भावना का शिकार हो कर तनावग्रस्त हो जाती हैं।
    परिणाम – डा. वोहरा के मुताबिक ऐसे में महिलाओं को कई मानसिक व शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं जैसे- सिरदर्द, बॉडी में दर्द
  •  सदैव थकान महसूस करना।
  •  भूख ज्यादा या कम लगना।
  •  चीजें रखकर भूल जाना।
  •  छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या रोने का मन करना
  •  एकाग्रचितता में कमी।
  •  स्वभाव में चिड़चिड़ापन पैदा होना।
  •  कभी-कभी जीवन में उत्साह की कमी के कारण उनकी जीने की चाह खत्म होने लगती है।
    कैसे पाएं छुटकारा-
  •  घर व काम के बीच संतुलन बिठाने हेतु जरूरी है कि अपने दिमाग में दो फाइल केबिनेट बनाएं, एक में ऑफिस की पूरी जिम्मेदारियां व समस्याएं रखें, दूसरे में घरेलू। इन दोनों को कभी मिक्स नहीं होने देंगी तो तनाव सदैव आपसे दूर रहेगा।
  •  आत्मविश्वासी बनें। अपनी फिटनेस, ड्रेय सेंस व खानपान पर ध्यान दें। सब तरह से फिट रहेंगी तो पूरे आत्मविश्वास के साथ लोगों का सामना कर पाएंगी जिससे अंदरूनी उत्साह में वृद्धि होगी। टेलेंट को सही शैप देने हेतु परिणाम जरूरी है। इससे आपकी परफॉरमेंस बेहतर होगी जो आपके आत्मविश्वास में वृद्धि करेगी व तनाव को दूर भगाएगी।
  •  पॉजिटिव बनें। नकारात्मक विचार अक्सर तनाव उत्पन्न करने में सहायक होते हैं।
  •  अच्छी प्लानर बनें। इससे आपका काम सही तरीके से व सही समय पर होगा तो आप तनाव से बची रहेंगी।
  •  जो बातें आपके लिए तनाव को कारण बनती है, उनसे दूर ही रहें। ऐसा संभव न हो तो उनके साथ किस तरह डील करना है, सीखें। किसी एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकती हैं।
  •  फोन पर दोस्तों या क्लाइंट्स से लंबी बातचीत करने से बचें। इससे आपका काम प्रभावित होगा जो आपको तनाव देगा। बेहतर है दोस्तों से बात करने हेतु टाइम फिक्स कर लें।
  •  स्वयं को मशीन न बनांए। अपने सामर्थ्य के अनुसार ही कार्य करें।
  •  ऐसे लोग जो आपको इरीटेट करते हों भले ही वे आपके कुलीग हों या क्लाइंट्स, उनसे सिर्फ काम के विषय में ही बात करें।
  •  नेटवर्किंग से जुड़े रहे। इससे आपमें स्मार्टनेस आएगी व ज्ञान बढ़ेगा पर ऑफिस टाइम में व्यर्थ की नेटसर्फिंग करने से बचें।
  •  सोशल बनें। लोगों से मिलना जुलना तनाव को कम करेगा।
  •  पति या बच्चों के समक्ष अपनी व्यस्तता का रोना न रोएं। उनसे मदद लेने हेतु उन्हें प्यार से डील करें वरना वे आपसे कतराने लगेंगे जिससे तनाव आना स्वाभाविक है।
  •  स्वयं को ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ न लें। अपनी इम्पॉर्टेंस समझें। तभी परिवारजन आपको महत्ता देंगे।
  •  घर के लिए कभी कुछ न कर पाएं तो स्वयं को कोसने की बजाय प्रयास करना बेहतर है।

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