आस्थाओं से गंगा का सफर

पटना में गंगा पर बना महात्मा गाधी सेतु दुनिया के सबसे लंबे पुलों में से एक गिना जाता है। यहाँ गंगा मे घाघरा, गडक, पुनपुन और सोन नाम की चार नदियाँ मिलती है। यहाँ आने पर वैशाली, राजगीर, बौद्ध गया और नालंदा भी घूमने जा सकते है, जो जैन व बौद्ध धर्मों के प्रमुख केंद्र हैं।
गंगा बिहार की पवित्र भूमि की ओर बढ़ती है। हालांकि इससे पहले उत्तर प्रदेश का उसका आखिरी पड़ाव गाजीपुर आता है।
गाजीपुरः
गंगा किनारे बसा गाजीपुर काफी प्राचीन शहर माना जाता है। इलाहाबाद-कोलकाता जल मार्ग पर गाजीपुर एक महत्त्वपूर्ण शहर है। कहा जाता है कि रामायण काल के दौरान इसके जंगलों में ऋषि परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि रहा करते थे। गाजीपुर के निकट ही स्थित ओरिहर इलाका बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थान है। यहाँ कई बौद्ध स्तूप और स्तंभ मौजूद है। चीनी यात्री ह्वेन साॅन्ग ने भी यहां की यात्रा की थी। गाजीपुर के लोगों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी प्रमुख भुमिका निभाई थी। माना जाता है कि 1857 के गदर की शुरूआत करने वाले अमर शहीद मंगल पाँडे गाजीपुर में ही जन्में थे। परम वीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद भी इसी मिट्टि के पैदाइश थे। शहर के दक्षिणी इलाके में एक पुराने किले जैसे खंडहर है, जिसे राजा गांधी का किला कहा जाता है। इसके अलावा यहां गंगा किनारे स्थित महादेव घाट और कलेक्टर घाट देखे जा सकते है।
कैसे जाएं, कहाँ ठहरेः
गाजीपुर की गिनती पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में होती है नैशनल हाइवे पर स्थित होने की वजह से यह सड़क मार्ग से भी आया जा सकता है। यहाँ का नजदीक एयरर्पोट वाराणसी है यहां ठहरने के लिए आपको धर्मशाला के अलावा तमाम होटल भी मिल जाएंगे।
बक्सरः
गाजीपुर से आगे गंगा बौद्ध धर्म के पवित्र स्थान बिहार में प्रवेश करती है और यहां इसका पहला पड़ाव है बक्सर, जो भारतीय रेलवे का एक प्रमुख रेलवे स्टेशन भी है। वैसे यह जगह 1764 में हुई एक बड़ी लड़ाई के लिए भी जानी जाती है। गौरतलब है कि मीर कासिम ने अवध के नवाब शुजाउद्यौला और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितिय के साथ मिलकर गंगा किनारे अंग्रेजो से बंगाल लेने की लड़ाई लड़ी थी। लेकिन 23 अक्टूबर 1764 को अंगे्रज मेजर हैक्टर मोनरो ने मीर कासिम की सेनाओं को हरा दिया। यह ऐतिहासिक शहर काफी हद तक खेती पर निर्भर है।
कैसे जाएँ, कहां ठहरेः
बक्सर सड़क और रेल मार्ग से देश के प्रमुख नगरों से जुड़ा हुआ है। बिहार की राजधानी पटना इसके नजदीक ही है, इसलिए सड़क या रेल या हवाई मार्ग से पहले पटना जाकर फिर बक्सर जाया जा सकता है। यहाँ ठहरने के लिए होटल और गैस्ट हाउस भी उपलब्ध है।
पटलाः
बक्सर के बाद गंगा बिहार की राजधानी और प्रसिद्ध शहर पटना पहुंचती है। पटना को भारत का तेजी से तरक्की करता शहर माना जाता है। वल्र्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिजनेस शुरू करने के लिए पटना दिल्ली के बाद सबसे अच्छा शहर है। वैसे इस शहर का ऐतिहासिक शहर भी बहुत है। माना जाता है कि मगध के राजा अजातशत्रु अपनी राजधानी राजगृह को किसी ऐसी जगह ले जाना चाहते थे, जहां से वह वैशाली के लिच्छवियों का आसानी से मुकाबला कर सकें। इसी वजह से उन्होनें गंगा किनारे पाटलिपुत्र नगर बसाया, जिसे आज हम पटना नाम से जानते है। वैसे भगवान गौतम बुद्ध ने भी अपने जीवन का अंतिम वक्त यहां बिताया। उसके बाद पाटलिपुत्र सिकंदर को हराने वाले महान राजा चंद्रगुप्त मौर्य की राजधानी बनी। वैसे पटना सिखों के दसवें गुरू गोविंद सिंह जी का जन्म स्थान भी है। पटना में गंगा में बना महात्मा गांधी सेतु दुनिया के सबसे लंबे पुलों में से एक गिना जाता है। यहाँ गंगा मे घाघरा, गडक, पुनपुन और सोन नाम की चार नदियाँ मिलती है। यहाँ आने पर वैशाली, राजगीर, बौद्ध गया और नालंदा भी घूमने जा सकते है, जो जैन व बौद्ध धर्मों के प्रमुख केंद्र हैं।
कैसे जाएं, कहां ठहरेंः
पटना सड़क, रेल और वायु मार्ग से देश भर के प्रमुख नगरों से जुड़ा हुआ है। यहां ठहरने के लिए लग्जरी और बजट तमाम तरह के होटल, गैस्ट हाउस और धर्मशालाएँ उपलब्ध है।
भागलपुरः
भागलपुर का जिक्र रामायण, महाभारत और पंचतंत्र में भी किया गया है। माना जाता है कि यह जगह पांडवों के बड़े भाई कर्ण की राजधानी थी। यह शहर रेशम और आमों के लिए मशहूर है। पटना और कोलकाता की बीच होने की वजह से यह शहर पुराने समय से ही व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ हर साल विष हरि पूजा नाम का त्यौहार भी मनाया जाता है। जिससे लाखों लोग सांपो के जोड़ों को दूध पिलाने के लिए उमड़ते है। भागलपुर के पास ही सम्राट अशोक के शासनकाल के कुछ अवशेष मिलें है, वहीं शहर से 20 किलोमीटर दूर एक पुराना मंदिर गुप्त काल का बताया जाता है। भागलपुर में मुगल सम्राट औरंगजेब के भाई शुजा का मकबरा भी मौजूद है। माना जाता है कि शहर से थोड़ी दूर स्थित मंदर पर्वत को देवताओं और दानवों ने समुद्र मंथन के लिए इस्तेमाल किया था। इस पहाड़ पर कई हिन्दू देवताओं के जैसी आकृतियां बनी हुई हैं।
कैेसे जाएँ, कहाँ ठहरेः
भागलपुर एक बड़ा रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा यह शहर सड़क मार्ग से भी देश भर के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। यहाँ ठहरने के लिए होटल और धर्मशालाएँ उपलब्ध है।
कोलकाताः
भागलपुर के बाद गंगा दो भागों में बंट जाती है, जिनमें से एक धारा हुगली नाम से पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के किनारे से गुजरती है। यह शहर ब्रिटिश राज के दौरान भारत की राजधानी रह चुका है। यहाँ का फोर्ट विलयम किसी जमाने में अंगे्रजी फोजों को बेस हुआ करता था, जो अब इंडियन आर्मी का सेंटर है। कोलकाता भारतीय का स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा एक महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। ब्रिटिश गवर्नर जनरल लार्ड वेलेजली ने इस शहर में काफी निर्णय कार्य कराया, जिस वजह से यह ”सिटी आफ पैलेस“ कहलाता है। यह शहर व्यापार का भी बड़ा केंद्र है। कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल, टीपू सुल्तान की मस्जिद, दक्षिणेश्वर काली मंदर, ईडन गार्डन और चिडि़याघर दर्शनीय जगहे हैं। कोलकाता भारत का अकेला शहर है, जहाँ ट्राॅम चलती है। इसके अलावा कोलकाता और हावड़ा ब्रिज भी दर्शनीय है।
कैसे जाएँ, कहां ठहरेः
यहां हवाई, रेल और सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। ठहरने के लिए आपको फाइव स्टार से लेकर गेस्ट हाउस तक की आप्शन मिल जाएगी।
गंगा सागरः
कोलकाता के बाद हुगली बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। हुगली और समुद्र के संगम को गंगा सागर कहा जाता है, लो हिंदुओं का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। कहा भी जाता है कि ”सारे तीर्थ बार-बार, गंगा सागर एक बार“। हर साल मकर संक्रांति के दौरान यहां लगने वाले मेले के दौरान दूर-दूर से लोग यहां स्नान करने के लिए आते है।
पद्माः
गंगा की ट्रिब्यूटरी हुगली तो कोलकाता होते हुए गंगा सागर चली जाती है, लेकिन गंगा बांगला देश पहुंच जाती है, यहां ये पद्मा कहलाती है। बांग्लादेश में गंगा ब्रह्मपुत्र की सबसे बड़ी डिस्ट्रीब्यूटरी मेघना से मिलती है। इसके बाद पद्मा का नाम मेघना हो जाता है और ये अपना डेल्टा बनाती हुई बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है। इस गंगा डेल्टा को ही सुंदर डेल्टा कहा जाता है, जो यूनेस्को द्वारा घोषित एक वल्र्ड हैरिटेज साइट है।
गंगोत्रीः
उत्तराखंड के उत्तराकाशी जिले में स्थित गंगोत्री ग्लेशियर गंगा की प्रमुख उपनदी भगीरथी का उद्गम स्थल है। यह आगे देव प्रयाग में अलकनंदा समेत दूसरी नदियों के साथ गंगा का निर्माण करती है। यह जगह चीन के बाॅर्डर के नजदीक पड़ती है। गंगा के उद्गम स्थल के गाय के मुख की तरह दिखने की वजह से इसे गोमुख भी कहा जाता है। गंगोत्री हिंदुओं का एक प्रमुख धार्मिक स्थल और चार धामों में से एक है। धार्मिक स्थल होने के साथ गंगोत्री ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए भी बड़ी अच्छी जगह है यहाँ ट्रैकिंग के बेहतरीन रूट मौजूद है।
सतोपंथः
गंगा की दूसरी प्रमुख सहायक नदी अलकनंदा का जन्म उत्तराखंड स्थित सतोपंथ और भागीरथ खड़क ग्लेशियर पर होता है। उसके बाद यह नदी अपने साथ धौलीगंगा, मंदाकनी, पिंडर व नंदाकिनी नदियों को मिलाकर भागीरथी से मिलती है और गंगा का निर्माण करती है। हिंदुओं का पुसिद्ध तीर्थ और चार धामों में से एक बद्रीनाथ भी अलकनंदा के किनारे पर ही स्थित है। अलकनंदा नदी का उद्गम स्थल सतोपंथ ग्लैशियर सैलानियों के बीच खासतौर मर फेमस है। यह जगह भारत तिब्बत बाॅर्डर पर स्थित है।
विष्णु प्रयागः
नैश्नल हाइवे संख्या 58 पर स्थित विष्णु प्रयाग में धौलीगंगा नदी अलकनंदा में मिलती है। इसे गंगा का पहला प्रयाग माना जाता है, क्योंकि यहां पहली बार कोई नदी अलकनंदा से मिलती है। माना जाता है कि यहां देवर्षि नारद ने भगवान विष्णु की आराधना करके अपने लिए वरदान प्राप्त किया था। तब से इस जगह को विष्णु प्रयाग कहा जाने लगा। यहा हिमालय की हरियाली, सुंदर पहाडि़यों और नदी के सुरम्य किनारे का लुप्फ एक साथ उठाया जा सकता है।
बद्रीनाथ के काफी पास स्थित विष्णु प्रयाग में बहुत बड़ा हाइड्रो इलैक्ट्रोनिक प्रोजेक्ट भी लगाया गया है।
नंद प्रयागः
उत्तराखंड के चमोली जिले मे स्थित नंद प्रयाग एक नगर पंचायत है, अलकनंदा नदी और नंदाकिनी का संगम होता है। माना जाता है कि यहा के राजा नंद को भगवान विष्णु को बेटे के रूप में पाने का वरदान प्राप्त था। इसी तरह का वरदान कंस की बहन देवकी को भी प्राप्त था। इसलिए भगवान ने देवकी की कोख से जनम लिया, लेकिन उसका पालन पोषण राजा नंद की पत्नी यशोदा ने किया। यह जगह ट्रैकिंग करने वालों के बीच काफी पाॅपुलर है।
कर्णप्रयागः
चमोली जिले के कर्ण प्रयाग म्यूनिसिपल बोर्ड में अलकनंदा नदी पिंडारी ग्लेशियर से निकली पिंडर नदी से मिलती है। यह पंच प्रयागों में से एक है, जहां गंगा की पांचो सहायक नदियां उससे मिलती है। माना जाता है कि पांडवों के बड़े भाई कर्ण ने यहां भगवान सूर्य की अराधना की थी, जिससे इस जगह को कर्ण प्रयाग कहा जाता है। यहा एक प्राचीन मंदिर भी है। स्वामी विवेकानंद ने भी यहा करीब 18 दिनों तक मेडिटेशन किया था।
रूद्र प्रयागः
उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले मे चार धामों में से एक केदारनाथ के निकट चारबारी ग्लेशियर से निकली मंदाकिनी नदी अलकनंदा नदी से मिलती है। इससे पहले सोन प्रयाग में मंदाकिनी में वासुकिगंगा नदी भी मिलती है। रूद्रप्रयाग को रूद्र यानि भगवान शिव का स्थान माना जाता है। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव ने नारद मुनि को दर्शन दिए थे।
देव प्रयागः
उत्तराखंड पौड़ी गढ़वाल जिले की नगर पंचायत देव प्रयाग में गंगा की दोनों प्रमुख सहायक नदियों, भागीरथी और अलकनंदा का मिलन होता है। इसी जगह दोनों नदियां अपने विशाल रूप में आती है और उसे गंगा कहा जाने लगता है। पंच प्रयागों में से एक देव प्रयाग हिंदुओं का प्रमुख धार्मिक स्थल है। मान जाता है कि यहां देव शर्मा ने भगवान के दर्शन किए थे। इसी वजह से इसी जगह को देव प्रयाग कहा जाता है।
ऋषिकेशः
देव प्रयाग के बाद हिमालय की घाटियों का लंबा सफर तय करके गंगा देहरादून जिले में स्थित ऋषिकेश पहुंचती है। यहां हिमालय की पहाडि़यां खत्म हो जाती है और मैदानी इलाकी की शुरूआत होती है। माना जाता है कि यहां भगवान विष्णु ने एक ऋषि को दर्शन दिए थे। यहां गंगा नदी पर बना लक्ष्मण झूला पुल प्रसिद्ध है। मंदिरों के शहर ऋषिकेश को ”वल्र्ड कैपिटल आॅफ योगा“ भी कहा जाता है।
हरिद्वारः
माना जाता है कि गंगोत्री से 253 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद हरिद्वार आकर गंगा पूरी तरह मैदानी इलाके में पहुच जाती है। इस जगह को हरि का द्वार यानि हरिद्वार कहा जाता है। माना जाता है कि समुद्र मंथन में अमृत की बूंदे जिन चार जगहो पर छलकी थी, हरिद्वार उनमें से एक है। यही वजह है कि यहां कुंभ के मेेले का आयोजन होता है। हर की पौड़ी यहां का सबसे प्रसिद्ध घाट है, जिसके बारे में माना जाता है कि अमृत इसी जगह छलका था। शाम के समय होने वाली आरती काफी प्रसिद्ध है।

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