चमत्कारी देव, महामहिम, चुरू नरेश श्री बाबोसा भगवान के चरणों में कोटिशः नमन्।

चूरू धाम। दिल्ली-बीकानेर रेल लाइन पर दिल्ली से लगभग 275 कि.मी. नी अवस्थित यह छोटा शहर आज असंख्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। इसका मुख्य कारण है यहाँ पर स्थापित बालारूप श्री बाबोसा भगवान का मंदिर जहाँ आकर व्यक्ति अपने मन की मुरादें पूरी होने का विश्वास हासिल करता है।
बाबोसा नाम है एक ऐसे देव का जिनके उनकेे श्रद्धालु अनेक रूपों में देखते है। किसी ने उन्हे कृष्ण के रूप में देखा है किसी ने उन्हें विष्णु के रूप में देखा है तो किसी ने उन्हें बजरंगबली का रूप मानते है। ”जाकि रही भावना जैसी, प्रभु मूरत तिनि देखी वैसी“ की उक्ति को चरितार्थ करते हुए बाबोसा भगवान भी अपने भक्तों को उनकी भावना के अनुरूप दर्शन देते हैै। भक्त सर्वाधिक बाला रूप में ही उनका पूजन एवं स्मरण करते है।
बाबोसा भगवान के चमत्कारों के किस्से आज हर किसी की जुबान पर है। इनके समक्ष सच्चे मन, अखंड आस्था एवं अविचल विश्वास के साथ उपस्थित होने वाले हर भक्त का कष्ट निवारण हुआ है।
लोकमत एवं प्रचलित मान्यता के अनुसार चुरू में श्री बाबोसा भगवान के मंदिर में नारियल बाँधने से व्यक्ति की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है। इसलिए यहाँ प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर भक्ति भावना से अरदास लगातें है। बाबोसा भगवान की चमत्कारी देव शक्ति से असाध्य रोगों का इलाज हो जाता है। भूत पिशाच एवं ऊपरी विघ्न बाधाओं का निवारण हो जाता है।
बाबोसा भगवान के दरबार की सबसे बड़ी विशेषता एवं आकर्षण का केंद्र है-परम अराधिका मंजू बाईसा में समाहित होती है तो श्रद्धालु नतमस्तक होकर बाबोसा भगवान की जय-जयकार करते हुए धन्य हो जाते है। उस समय उनका दिव्य रूप देखकर यही अहसास होता है मानों साक्षात बजरंगबली हमारे बीच पधार गये हों। इस दृश्य को देखने के लिए भक्त घंटो इंतजार करते रहते है।
भक्तो के कष्टों के निवारण हेतु ताँती जल एवं भभूति का वितरण किया जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबोसा भगवान ने इन अवदानों से उनके जीवन में अनेक चमत्कारी घटनाएं घटित हुई है।
बाबोसा भगवान के तीन मुख्य समारोह मनाये जाते है। इनका वर्षिकोत्सव मिंगसर शुक्ला पंचमी को चूरू में धूमधाम से मनाया जाता है। यह दिन बाबोसा भगवान के राजतिलकोत्सव यानि देव शक्ति धारण रूप में मनाया जाता है। इसमें शामिल होने के लिए देश के कोने कोने से हजारों श्रद्धालु चूरू पहुंचते है। मिंगसर शुक्ला चतुर्थी के दिन दोपहर को चूरू में विशाल शोभायात्रा एवं रात्रि में अखंड जागरण का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। हजारों भक्त भक्ति भावना से ओत प्रोत होकर इस कार्यक्रम में सारी रात शामिल होकर अपने आराध्य का स्मरण करते है। इस आयोजन को लोग मिंगसर मेला के नाम से भी जानते है। इसमें हजारों व्यक्ति छप्पन भोग एवं सवामणि प्रसाद बाबोसा भगवान के चरणों में अर्पित करते है।
बाबोसा भगवान का जन्मोत्सव माघ शुक्ला के दिन कोलकाता में धूम धाम से मनाया जाता है। बाबोसा भगवान का निर्वाण महोत्सव भाद्रव शुक्ला पंचमी को मनाया जाता है।
बाबोसा भगवान के तीनों मुख्य दिन शुक्ल पक्ष की पंचमी के ही आते है। इसलिए बाबोसा भगवान के भक्त इस दिन जगह-जगह पर अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति से भजन कीर्तन एवं भंडारे का आयोजन करते है। बाबोसा भगवान के दरबार में हर व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मंदिर में परम आराधिका मंजु बाईसा एवं श्रद्धेय श्री प्रकाश भाई जी तन मन धन से श्री बाबोसा भगवान के भ्क्तिमय कार्यक्रमों में मग्न है। श्री बाबोसा भगवान की लीला को घर-घर पहुँचाने में इन्होनें अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है।
श्री बाबोसा भगवान की चमत्कारी ताँतीः
कैसे बनती है? कैसे मिलती है? क्या उपयोग है?
ताँती का निमार्ण प्रारंभ होता है रेशम की डोर से। कोरे रंग की रेशम की डोरी को लाल, केसरिया या पीत रंगों में रंगाया जाता है फिर इसे छोटे-छोटे टुकडों में काटा जाता है। इन टुकडों में पाँच गाँठे थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बाँधी जाती है। प्रत्येक गांठ पर ”¬ बाबोसा“ महामंत्र की पूरी 108 मनको की पूरी माला फेरी जाती है। श्री बाबोसा भगवान के कीर्तन की पावन ज्योति में यह ताँती पूर्ण रूप से सवे शुद्धि तेज प्राप्त करती है।
परम आराधिका मंजु बाईसा कीर्तन में एवं धाम में यही ताँती भक्तों को अपने पावन हाथो से प्रदान करती है। इस तांती के बारे में भक्तो को विश्वास है कि ”आपद संकट दूर रहे और विपदा पास न आती, हर पल हर क्षण रक्षा करती बाबोसा की तांती“ इस तांती को अपने शरीर पर श्रद्धापूर्वक धारण करने से यह सुरक्षा कवच का कार्य करती है। इसलिए बाबोसा भगवान के हर भक्त इसे पूरे विश्वास के साथ अपने शरीर पर धारण करते है।
श्री बालाजी बाबोसा मंदिर चूरू में नारियल बाँधने की महिमाः
श्री बाबोसा भगवान के दरबार में कई विधियों जैसे तांती, जल के छीटें, भभूत इत्यादि से कष्टों का निवारण होता है। इसी प्रकार मनोकामनाएँ पूर्ण करने के लिए भक्तगण श्री बाबोसा भगवान के मंदिर में नारियल बाँधते हैै। भक्तों को विश्वास है कि श्री बाबोसा भगवान के चूरू धाम के मंदिर में नारियल बाँधने से मनोकामनायें अवश्य पूर्ण होती है। इसलिए प्रतिवर्ष हजारों भक्त श्री बाबोसा भगवान के मंदिर में नारियल बाँधते है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर बाँधे गये हजारों नारियल इस बात की गवाही देते है भक्तों का यह विश्वास अकारण नही है।
नारियल बाँधने की विधिः
मंदिर के कार्यालय में भक्तों को नारियल उपलब्ध करवाये जाते है। इसके साथ एक पर्ची एवं मोली का धागा भी दिया जाता है। अपना नाम एवं पता उस पर्ची पर लिखकर उस मोली से नारियल के साथ बाँधना होता है। फिर इस नारियल को श्री बाबोसा की प्रतिमा के समक्ष अपने हाथों में रखकर मन ही मन अपनी मनोकामना बोलनी चाहिए। इसके बाद नारियल को यथा स्थान बाँध देना चाहिए एवं संकल्प लेना चाहिए कि मनोकामना पूर्ण होने पर चूरू धाम में श्री बाबोसा भगवान के दर्शन करने आवश्य आएंगे।
” बाबोसा“ महामंत्र की महिमा
हमारे शस्त्रो में ध्वनि का अत्यंत महत्व है। हमारे द्वारा उच्चारित प्रत्येक का अलग महत्व है। ध्वनि का अपना अलग विज्ञान है। हर अक्षर एवं हर शब्द अपना विशेष अर्थ रखता है। अक्षर का सुव्यवस्थित संयोजन उन्हें मंत्र का रूप प्रदान करते है। कुछ शब्द स्वयं ही अपने विशेष अर्थ के कारण मंत्र का रूप धारण कर लेते है। ऐसे ही ¬ बाबोसा महामंत्र आज सभी भक्तों के लिए श्रद्धा एवं आस्था का केंद्र बन गया है। ”¬“ यानि ओंकार। इस मंत्र के उच्चारण से सारे वायुमंडल में एक विशेष प्रकार का कंपन होता है।  को सृष्टि का आदि मंत्र माना गया है। ”बाबोसा“ नाम के तीनों अक्षर विशेष अर्थ रखते है। प्रथम ”ब“ यानि ब्रह्मा, द्वितीय ”ब“ यानि विष्णु एवं तृतीय “स” यानि शंकर। बीच के “ब” में ओ की मात्रा जुड़ने से उसमें ओउम की ध्वनि भी शमिल हो गई। इस प्रकार ”¬“ ब्रह्मा, विष्णु, महेश का सार लेकर “बाबोसा” का नाम एक महामंत्र का रूप धारण चुका है। इसलिए इस महामंत्र का जाप भक्तो के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। भक्तो का विश्वास है कि शुद्ध मन से श्रद्धा के साथ किया गया यह जाप अपना असर अवश्य दिखाता है।
श्री बाबोसा दिव्य स्थलः
मिंगसर वार्षिक 2007 के अवसर पर श्री बाबोसा दिव्य स्थल पर श्री बाबोसा भगवान की विशाल मूर्ति का अनावरण हुआ था। इस मूर्ति की ऊँचाई 65 फुट है। यह मूर्ति राजस्थान की सबसे ऊँची और देश की चंद ऊंची प्रतिमाओं में से एक है।
इसका निमार्ण 8 महीने की रिकार्ड अवधि में पूरा हुआ। मूर्तिकार श्री मातुराम वर्मा के शब्दों में इतने कम समय में इतनी बड़ी मूर्ति का निर्माण स्वयं में एक आश्चर्यकारी घटना है। इसके अनुसार इस मूर्ति के निर्माण में समय उन्हें हर पल यह महसूस हो रहा था कि कोई दिव्य शक्ति उनसे यह कार्य करवा रही है। मूर्ति के भूतल में एक अत्यंत सुंदर चित्र विथिका (फोटो गैलरी) भी बनाई गई जिसके माध्यम से श्री बाबोेसा भगवान से संबंधित कई महत्वपूर्ण घटनाओं की झलक पेश की गई है। राजस्थान के पर्यटक स्थलों में एक नया नाम जुड़ गया है श्री बाबोसा दिव्य स्थल प्रतिदिन बड़ी संख्या में दर्शक व पर्यटक श्रद्धापूर्वक इस स्थल पर आकर श्री बाबोसा भगवान के चरणों में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते है।
भक्तों का विश्वास है कि इस विशाल प्रतिमा के चरणों के दोनो अंगूठों को एक साथ स्पर्श कर माँगी गई मन्नत अवश्य पूर्ण होती है

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