बदलते वक्त की पहचान हेयर कलरिंग

यदि आप पाना चाहती हैं आकर्षक व स्टाइलिश लुक तो हेयर कलरिंग बेहद आसान व प्रभावी तरीका है अपनी पर्सनैलिटी में चार चांद लगाने का। आप चाहे तो अच्छे सैलून में जाकर हेयर कलर करवा सकती हैं पर यदि आप घर में हेयर कलर कर रही हैं।

मार्केट में दो तरह के हेयर कलर एवेलेबल है बेसिक कलर, जो बढ़ती उम्र के साथ सफेद होते बालों को रंगीन बनाने के लिए किये जाते हैं। इन्हें हर 15 से 20 दिन बाद दोबारा एप्लाई करने की जरूरत होती हैं। बेसिक कलर में खास शेड हैं ब्लैक, ग्रै, बरगंडी व ब्राउन। दूसरे कलर हैं हाइलाइटिंग कलर, जिन्हें काले व सिम्पल बालों को हाईलाइट करने के लिए किया जाता है। युवाओं में आजकल इनका खासा क्रेज देखा जाता है। इनमें बरगंडी, गोल्डेन, ब्राउन, काॅपर, रेड, ग्रीन, चाॅकलेटी, स्लेटी व गोल्डेन बाउन खास है।

हाईलाइट कलर को आप अपनी सुविधानुसार किसी भी ट्रेंड में चुन सकती हैं

टेम्परेरी कलर- शैम्पू करने के बाद ये शैम्पू के साथ ही धुल जाते है और आपके बाल वापिस अपने ओरिजनल कलर में आ जाते हैं। यदि आप सिर्फ किसी फंक्शन में जाने के लिए लुक चेंज करना चाहती हैं तो टेम्परेरी ककलर एक अच्छा ऑप्शन है।

सेमी टेम्परेरी कलर- अगर आप कुछ ही दिनों के लिए कलर्ड हेयर चाहती हैं तो इसे चुन सकती हैं। इनके असर की अवधि 5-6 शैम्पू करने तक रहती हैं।

सेमी परमानेन्ट कलर- यदि आप बदलते ट्रेंड व फैशन के अनुसार बालों का कलर भी बदलती रहना चाहती हैं तो सेमी परमानेन्ट कलर चुन सकती हैं। ये कलर लगाने के 5 से 6 हफ्तों तक रहते हैं।

परमानेन्ट कलर- परमानेन्ट कलर आपको बालों के ओरिजनल कलर को पूरी तरह नए कलर में बदल देता हैं। हां आपको बालों की जो नई ग्रोथ होगी वह आपके बालों के ओरिजनल रंग में बढ़ेगी। यह कलर मार्केट में कई शेड में उपलब्ध हैं। परमानेन्ट की सलाह अवश्य लें। यह कलर मार्केट में क्रीमी, जेल व शैम्पू फाॅर्म में भी एवेलेबल हैं।

हेयर कला का सेलेक्शन

1  बालों को कलर करने के लिए सबसे पहले जरूरी है, आपके चेहरे के रंग-रूप उम्र व पर्सनैलिटी के आधार पर कलर का सेलेक्शन ताकि आपका व्यक्तित्व और ज्यादा उभर कर सामने आ सके।

2  यदि आपका रंग गोरा है तो आप बरगंडी, ब्राउन, गोल्डन व ग्रीन कलर चुन सकती हैं।

3  हल्के सांवले रंग पर लाइट गोल्डेन ब्राउन, काॅपर, स्लेटी रंग अधिक फबते हैं।

4   गेहुंए रंग पर चाॅकलेटी, बरगंडी व खाकी रंग खिलते हैं।

5   अधिक उम्र में मेंहदी का अधिक प्रयोग बालों को रूखा बनाता है।

सफेद होते बालों को छिपाने के लिए आप काला, भूरा व ब्राउन हेयर कलर चुन सकती है। फैशन व बदलते ट्रेंड के अनुसार भी हेयर कलर चुन सकती हैं बशर्ते वह कलर आपकी पर्सनैलिटी से मैच करता हो। पिछले दिनों ग्रीन कलर अधिक पसंदद किया जा रहा था, आजकल गोल्डेन ब्राउन कलर चलन में हैं। बरगंडी कलर हर उम्र, रंग व मौसम में फबता हैं।

हेयर कलर करने से पहले

1  हेयर कलर करने से 48 घंटे पहले एलर्जी टेस्ट करें इसके लिए बालों के रूखे व बेजान हिस्से पर कलर लगाएं और आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से धो लें। अगर 48 घंटे के अंदर त्वचा में जलन, खुजली आदि होती है या आपको लगे यह कलर आप पर सूट नहीं कर रहा तो हेयर स्पेशलिस्ट की सलाह से नया कलर व ब्रांड इस्तेमाल करें।

2 कलर चुनते समय अमोनिया फ्री कलर चुनें। ये बालों को रूखा बनाते हैं। तो हेयर कलर के दो पाउच खरीदें ताकि सारे बालों पर हेयर कलर अच्छी तरह लगा सकें।

3 हेयर कलर सीधे व सिल्की बालों पर ही अच्छे लगते है। अगर आपके बाल घुंघराले हैं तो आप उन्हें स्ट्रेट करवा कर हेयर कलर कर सकती है।

4 आप चाहे तो सारे बालों को हाईलाइट कर सकती है या सिर्फ आगे की कुछ लेयर। यदि कनफ्यूज है तो आप पेपर पर बालों का स्केच बनाकर, जिस पैटर्न में आप बाल हाइलाइट करना चाहती हैं, ड्रा करें। यदि पैटर्न पसंद आता है तो उसे अप्लाई कर सकती हैं।

5 अब बालों को किसी अच्छे शैम्पू से धोएं। जिससे बालों में उपस्थित धूल-मिट्टी के कण बाहर निकल जाए।

हेयर कलर करने से पहले माथे के ऊपरी हिस्से व गर्दन के पिछले हिस्से पी क्रीमी जेल या वैसलीन लगा ले। इससे हेयर कलरिंग के दौरान त्वचा पर दाग पड़ने का डर नहीं रहेगा।

हेयर कलर

1 हेयर कलर को एक बाउल में अच्छी तरह मिक्स करें और घोलने के तुरंत बाद बालों पर लगाएं, कलर को अधिक देर तक रखना बालों को नुकसान पहुंचा सकता है।

2 हाथों में गलव्स पहनकर बालों को कलर करें। सबसे पहले बालों की जड़ों में कलर लगाएं फिर ब्रश की सहायता से सारे बालों में फैला दें।

3 45 मिनट बाद बालों को गुनगुने पानी से गीला करके 3 मिनट तक झाग बनाए फिर अच्छी तरह पानी से धो लें ताकि हेयर कलर कर कोई कण बालों में न रहे।

4 24 घंटे तक बालों में शैम्पू न करें। अन्यथा शैम्पू के साथ बालों में लगा कर भी बह जाएगा।

5 बाल धोने के बाद बालों में नींबू युक्त सोल्यूशन लगाएं अगर सिर की त्वचा पर कलर लगा गया होगा तो यह उसे हटाने में मदद करेगा।

6 यदि माथे की त्वचा पर कलर लग गया है तो गीले कपड़े को शैम्पू में भिगोकर दाग पर लगाएं, फिर साफ कपड़े से रगड़ कर पोंछ दें। दाग हट जाएगा।

7 बालों को हेयर ड्रायर से सुखाने की बजाए नैचुरल रूप से सुखने दें।

8 बालों को तौलिये में लपेट कर न रखें, न ही तौलिये से रगड़े या झाड़े, इससे बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं।

कलर्ड बालों की देखभाल

1 कलर्ड बाल तभी खूबसूरत लगते हैं जब वे सिल्की, साॅफ्ट व मुलायम हों, रूखे-बेजान, बाल आपके सौन्दर्य को बढ़ाने की बजाय कम कर सकते हैं। इसलिए इन्हें जरूरत होती है विशेष देखभाल की। आइयेे देखें ये टिप्स-

2 कलर्ड बालों के लिए खास बनाए गए शैम्पू व कंडीशनर का इस्तेमाल करें।

3 बालों को हफ्ते में 2 बार डीप कंडीशनिंग दें। चाहे तो पार्लर में जाकर हेयर स्पा भी ले सकती है।

4 बालों को साॅफ्ट सिल्की बनाए रखने के लिए नैचुरल हेयर प्रोटीन व विटामिन-ई युक्त तेल से अच्छी तरह मालिश करें। आधे घंटे बाद शैम्पू से धोकर कंडीशनिंग करेंगे, हेयर कलर भी बालों पर अप्लाई होगा। 5 मिनट बाद धो दें।

5 कलर्ड बाल को सुखा छोड़ना या हाफ क्लच करना आकर्षक लगने के साथ-साथ सेक्स अपील भी बढ़ाता है। यदि आपके बाल ज्यादा लम्बे हैं तो सिर्फ आगे से लेजर कंटिग करवा कर कलर्ड हेयर को हाईलाइट कर सकती है।

6 यदि बाल ऑयली हैं तो फ्राइड फूड व फैट कम लें।

7 कंडीशनर हमेशा बालों के सिरे पर ही उपयोग करें। जड़ों पर कंडीशनर लगाना बालों को नुकसान पहुंचाना है।

8 बालों को हेयर ड्रायर से सुखाती हैं तो 8 इंच की दूरी बना कर रखें व बालों को ठंडा होने के बाद ही सेट करें, अन्यथा बाल रूखे हो सकते हैं।

9 बालों के लिए चैडे, दांतों वाले कंघे इस्तेमाल करें, प्लास्टिक के साधारण कंघे बालों को तोड़ते व रूखा बनाते हैं।

10 अगर अप स्वीमिंग करती हैं तो बालों को बचाकर रखें। स्वीमिंग पूल के पानी में क्लोरीन होती है जो बालों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

अक्षर भी बताते है कितने सटीक है प्रेम संबंध

ज्योतिष की मानें तो व्यक्ति के नाम का उसके जीवन पर बहुत प्रभाव होता है। यही नहीं, बल्कि नाम का पहला अक्षर संबंधित व्यक्ति के व्यक्त्वि और भाग्य के बारे में भी काफी कुछ जानकारी देता है।
(ए) अक्षर वाले वक्ति देखने में आकर्षण होते है। इसके इर्द-गिर्द लोगों की भीड़ रहती है तो इनके सम्मोहक व्यवहार से बंधे रहते है।
(ए) अक्षर वाले प्यार और रिश्तों का काफी महत्व देते हैं परन्तु स्वभाव से ये रोमांटिक नहीं होते है। ये लोग सही निर्णय लेते है।
(बी) अक्षर वाले अक्सर प्रेम विवाह करते है। स्वभाव से मूडी तथा हिम्मत वाले होते है। (बी) अक्षर वाले लोग काफी रोमांटिक होते है और किशोरावस्था में ही फ्लर्ट शुरू कर देते है।
(सी) अक्षर वालों को दोस्ती करना पसंद होता है। ऐसे लोगो अपने पहले प्यार को याद रखना चाहते हैं। बिना लाग लपेट के बोलना इनकी आदत होती है। भावुक होने के कारण ऐसे लोग अक्सर प्रेम संबंधो में धोखा खाना पड़ता है।
(ड़) अक्षर वाले लोग अपने आप पर भरोसा करते है। इनके पास जाना अक्सर आपको कुछ न कुछ नया सिखाया है। ये जिस चीज को पाना चाहते हैं, किसी भी तरह से उसे पा ही लेते हैं। एक हद तक इन्हें जिद्दी भी कहा जा सकता है।
(ई) अक्षर वाले लोगों का स्वभाव फ्लर्ट करने का होता है। ऐसा ये मजाकिया स्वभाव के चलते करते है लेकिन कई बार ये बहुत ज्यादा बोलने के कारण खतरों को आमंत्रित कर लेते है। ये जिंदगी को जिंदादिली के साथ जीने की चाहत रखते है।
(एफ) अक्षर से जिनका नाम शुरू होता है वह रचनात्मक होते हैं। ये अपनी प्रोफेशनल लाइफ और पर्सनल लाइफ को अलग-अलग रखते हैं। ऐसे लोगों को अच्छा लाइफ पार्टनर मिलता है।
(जी) नाम के लोग साफ दिल होते है। ये अपने मन में कुछ नहीं रखते और न ही किसी के खिलाफ कोई साजिश रखने में विश्वास रखते हैं। ऐसे लोग स्वभाव से अंर्तमुखी होते हैं और बेवजह किसी को परेशान नहीं करते।
(एच) अक्षर वाले लोग अपनी बातें दूसरों से शेयर करने में डरते हैं। इनको समझना मुश्किल होता हैं लेकिन दिल से ये बेहद अच्छे और सच्चे होते है। आप इन पर आंख बंद कर विश्वास कर सकते है। हालांकि ये दूसरे से झंझट में पड़ने से बचते है।
(आई) अक्षर वाले दिमाग से ज्यादा दिल से सोचते हैं। बेहद भावुक होने और सिर्फ दिल की सुनने के कारण इन्हें आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता हैं हालांकि इनका प्यार सच्चा ही होता है। अपनी भावुकता के चलते इन्हें अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है।
(जे) अक्षर वाले स्वभाव से ईमानदार और वफादार होते है। खुशनुमा दूसरे लोग इनके दुश्मन बन जाते है और इनसे ईष्र्या करने लगते है। अगर आपका पार्टनर का नाम (जे) अक्षर से शुरू होता है तो आप बहुत भाग्यशाली हैं।
(के) अक्षर वाले मुंहफट होते है। बिना कुछ सेचे समझे ये किसी को भी कुछ भी कह सकते हैं। अपने फायदे के लिए ये कुछ भी कर सकते है। इन्हे अपनी इज्जत से ज्यादा पैसे से प्यार होता है। प्रोफेशनली सफल होने के बावजूद भी इनके जीवन में अपनेपन का अभाव रहता है।
(एल) अक्षर वाले कभी किसी को दुखी नहीं देख सकते हैं। ऐसे लोग जीवन में बड़ी कामनाएं नहीं रखते लेकिन अपने से मिलने वाले हर आदमी को खुश रखना इनकी आदत होती हैं। स्वभाव से कल्पनाशील होने के कारण ये स्वप्नदर्शी तथा हरदिल अजीज होते हैं।
(एम) अक्षर वाले स्वभाव से काफी भावुक, जिद्दी और संकोची होते हैं। अक्सर ये छोटी-छोटी बातों को दिल से लगा लेते है। इनके साथ दिल से लगा लेते हैं। इनके साथ दिल लगाना काफी खतरनाक हो सकता है। ये कब किस चीज पर गुस्सा हो जाए और कब किसी बात पर प्यार दिखाने लगे, कहा नहीं जा सकता।
(एन) अक्षर वाले खुले विचारों को समर्थन देने वाले होते हैं और बहुत जल्दी बोर हो जाते है। ऊपर से ये शांत दिखाई देते लेकिन अंदर ही अंदर बेहत आक्रामक होते हैं। इन्हें अपनी आलोचना जरा भी नहीं सुहाती।
(ओ) अक्षर वाले बहुत आकर्षक, ऊर्जावान तथा प्रतिभाशाली होती हैं। अक्सर इस नामाक्षर वाले लोग प्रेम विवाह करत है और परिवार को साथ लेकर चलते हैं। ऊपर से ये शर्मीले दिखाई देते है। लेकिन वक्त आने पर ये ऐसे काम कर जाते हैं जिन्हें करना हर किसी के बस की बात नहीं नहीं होती है।
(पी) अक्षर वाले घर, देश, दुनिया को साथ लेकर चलने में विश्वास करते है। ये उसूलपसंद होते हैं तथा अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। लेकिन साथ ही ये कुछ हद तक तानाशाली सोच रखने वाले होते हैं।
(क्यू) अक्षर वाले स्वभाव से रचनाशील और क्रिएटिव होते है। हर काम को बेहद सलीके से करते हैं। (क्यू) अक्षर वाले अपने आप में खोए रहते हैं और दूसरों से इन्हें गुस्सा भी कम ही आता हैं।
(आर) अक्षर वाले मनमौजी होते हैं उन्हें दुनिया से कोई लेना देना नहीं नहीं होता। ये कम बोलते हैं, अपनी दुनिया में ही खोए के साथ-साथ इनकी मित्रता लेखकों, दोस्तों और अपनी ही तरह के लोगों के साथ होती हैं।
(एस) अक्षर वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं। इनका स्वभाव सहज ही समझ में नहीं आता हैं। ये अपने आप में सिमटे होते है और अपने चारों ओर एक रहस्यमय वातावरण बनाए रखते है। ये कंजूस होते हैं लेकिन दानी होने का दिखावा भी करते हैं।
(टी) अक्षर वाले मेहनती और बुद्धिमान होते हैं। आमतौर पर इस नामाक्षर वाले लोग मीडिया और प्रशासिनक क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे लोग रिश्तों और भावनाओं को लेकर बेहद भावुक होते हैं, हालांकि ये उसे अभिव्यक्त नहीं कर पाते हैं।
(यू) अक्षर वाले बेहद जोशीले होशियार और दिल के साफ होते हैं। ये छोटी-छोटी चीजों में ही खुशियों को ढूंढने का प्रयास करते हैं और दूसरों को भी खुशियां बांटने में विश्वास रखते हैं। ये किस्मत के भी धनी होते हैं।
(वी) अक्षर वाले आजाद ख्याल वाले होते है, ये न तो किसी की सुनते है और न ही किसी का कहा करते हैं, लेकिन यदि उनके मन को कोई बा तजम जाए तो ये उसे करने से भी नहीं चूकते। साफ दिल होन के साथ ये दूसरों की भावनाओं की भी कद्र करते हैं।
(डब्ल्यू) अक्षर वालों में दूसरों को दबा कर अपना रौब जमाने की आदत होती हैं। अनकी इस आदत के चलते लोग ऐसे लोगों से दूर ही रहते हैं। ये बहुत अभिमानी होते है और हमेशा लोगों की आलोचनाओं के निशाने पर रहते हैं।
(एक्स) अक्षर वाले स्वभाव से बेहद अस्थिर होते है और हर चीज से इनका मन बड़ी जल्छी उचट जाता है। इन्हें खुद ही पता नहीं होता कि ये अगले पल क्या करेंगे। इन लोगों में एक खास आदत होती है कि ये जिसको पाने की इच्छा रखते है, उसे पाकर ही दम लेते है फिर चाहे उससे लिए जान ही दावं पर लगानी पड़े।
(वाई) अक्षर वाले बोलते स्वभाव से ईमानदार, स्पष्टवादी और मेहनती होते है लेकिन लोगों के साथ मिलना-जुलना इन्हें पसंद नहीं होता। जिनका नाम (वाई) अक्षर से शुरू होता हैं वे समझौता भी पसंद नही करते ओर इसके चले उन्हें संघर्षमय जीवन जीना पड़ता हैं।
(जेड़) अक्षर वाले धीर-गंभीर लेकिन सरल प्रवृति के मालिक होते हैं। स्वभाव से बेहद सीधे और भावुक होते है। ये बड़ी से बड़ी कठिनाई को भी हंसते-हंसते झेल जाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि सीधे होते हुए भी इन्हें बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता।

जब पति हो उम्र में छोटा

ना उम्र की सीमा हो, ना जन्मों का हो बंधन जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन, कुछ रिश्तें हमें जन्म के साथ ही प्राप्त है जिनमें हम चाहकर भी परिवर्तन नहीं कर सकते है। जैसे माता-पिता, भाई बहन इत्यादि। किंतु जो रिश्ते जीवन के दौरान बनते है उनमें हमें चुनाव की स्वतंत्रता होती हैं जैसे पति पत्नी, बहु, दामाद, मित्र, सखा, संबंधी इसी तरह शादी ब्याह ऐसा ही एक संबंध है जिसमें हम चुनाव कर सकते है। आयु, परिवार, जाति, राज्य सभी मामलों में नियम न होने के बाद भी हम समाज द्वारा बनाये गए नियमों पर ही चलते आ रहे है। जिसमें तय है विवाह अपनी जाति में हो, बराबर के परिवार में हो, पति उम्र में बड़ा हो और दोनों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में ज्यादा अंतर न हो। बदलते परिवेश में समय के साथ साथ इन मान्यताओं पर ध्यान तो दिया जाता है परंतु पालन नहीं। अब लड़के लड़कियां अपनी पसंद और इच्छानुसार शादी विवाह करने लगे तो जाति, धर्म, आयु, गोत्र, परिवार के बंधन भी ढीले पड़ने लगे है। दरअसल जब दिल का मामला हो ताो फिर अन्य सारी बातें गौण हो जाती है। ऐसे कई मामलों में लड़कियों उम्र में अपने से छोटे लड़के से शादी कर लेती है। कुछ जोड़े तो उम्र भर सफलता पूर्वक साथ निभाते है। परंतु कुछ मामलों में ये सफर दो चार कदम चल कर अलग राह पकड़ लेता है।
हमारे समाज में विवाह मात्र दो प्रणियों का मिलन न होकर दो परिवारों का समन्वत होता है। जहां परिवार की मर्यादा बचाए रखने के लिए कई बार लोग न चाहते हुए भी मजबूरन एक दूसरे से निभा लेते है। ऐसी स्थिति में पति पत्नी के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों से भी परिपक्वता की उम्मीद की जाती है। आमतौर पर स्त्री, पुरूष की अपेक्षा अधिक सहनशील और परिपक्व मानी जाती है। इसी कारण आमतौर पर वर वधु से अधिक उम्र का ही ढूंढा जाता हैं यही परंपरा बन गयी हैं कि विवाहित जीवन के सुख पूर्ण होने के लिए पति को पत्नी से उम्र में बड़ा होना चाहिए। एक समय था जब बालविवाह कर दिए जाते थे, कुलीन परिवार में कन्या का विवाह करने की चाह में बेमेल विवाह भी कर दिए जाते थे। कई बार तो मात्र तेरह व चैदह वर्ष की कन्या का विवाह उसके पिता की आयु के बराबर व्यक्ति से कर दिया जाता था। पत्नी जब यौवन की दहलिज पर पहुंचती पति के पैर कब्र में पहुंचने लगते। समय के साथ परिवर्तन आए और स्त्रियों को स्वतंत्रता जागी। वैचारिक स्वतंत्रता प्रमुख थी। उसमें। अब वे शादी विवाह के मामले में मुखर हो गई थी। यदि कोई युवती अपने से छोटे उम्र के युवक को पति बनाना चाहे तो कोई समाज का बंधन या कानून का बंधन उसे नहीं रोक सकता। वैवाहिक मतभेद तो समान आयु वाले जोड़ों में या पत्नी के छोटी उम्र्र के होने पर भी होते हैं, फिर उम्र का फासला इतना महत्वपूर्ण क्यों हो? समय के साथ-साथ शिक्षा का प्रचार होन से स्त्रियां जागरूक हुई है। अधिकांश छोटी उम्र में घर बसा कर पति और बच्चों में व्यस्त होने के बजाय कैरियर बनाने को प्राथमिकता देने लगी है। घर परिवार में उनका निर्णय भी महत्व रखने लगा है। जिसके चलते वैवाहिक संबंधो में उम्र की दूरियां भी घटने लगी है। कुछ साल का ही अंतर रह गया है पति पत्नी के बीच कभी-कभी एकाध साल या कभी तो लगभग समान आयु वालों में भी संबंध होने लगे है। अब विवाह संबंध के लिए पति का उम्र में बड़ा होना अति आवश्यक नहीं माना जाता बल्कि बहुत सी जोड़ियों में पति कम उम्र के भी होते है और पत्नी उम्र में उनसे बड़ी।
समाज शास्त्रियों के अनुसार लड़कियां जल्दी परिवक्व और समझदार हो जाती है। जबकि लड़को को विकसित होने में कुछ देर लगता है। यह भी एक कारण है कि विवाहित युगल में लडके की उम्र अधिक होना समाज की दृष्टि में ठीक माना जाता है। यही कारण है कि कानूनन भी लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु अठारह वर्ष है और लड़कों के लिए इक्कीस वर्ष। मगर आज की सोच के अनुसार उम्र बड़ी या छोटी होना समझदारी का पैमाना नहीं है। कहा भी गया है कि अक्ल का होता नहीं है वास्ता कुछ उम्र से, अगर नहीं आती तो सौ बरस तक भी नहीं आती। अब तो शादी ब्याह दिल का मामला हो गया है। जिस पर दिल आ जाए उसी से शादी की जाएं।
लड़कियों का अपने से कम उम्र के लड़के से शादी का प्रचलन नया नहीं है, इससे पहले भी यह होता आया है और ऐसी शादियां सफल भी इुई है। कुछ प्रसिद्ध हस्तियां जैसे सुनील दत्त, सचिन तेंदुलकर। व्यवाहिक जीवन के लिए जो बात मायने रखती हैं वह है अंडरस्टैडिंग जो इन जोड़ों में और जैसे और बाकि सफल जोड़ो में रही। विरोधाभास कहां नहीं हैं? हर सिक्के के दो पहलु होते है। कई बार पति के उम्र में छोटे होने पर समस्याएं खड़ी हो जाती है जैसे- जिम्मेदारियों के बोझ से पत्नी की उम्र कुछ वक्त बाद परिपक्कता के चलते बड़ी दिखने लगती है और दूसरी तरफ पति देव की उम्र बढ़ने के साथ उसमें रंगीन मिजाजी चरम सीमा पे पहुंच जाती है। अपनी पत्नी प्रौढ़ा लगने लगती है। ऐसे में प्यार सामिप्य कम होने लगता है और रिश्तों में विरोधाभास बढ़ता चला जाता है।
कोई भी परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चले तो वह वैचारिक सत्वता बन जाती है। जिसे तोड़ना समाज में उथल पुथल को जन्म देता है। विवाह में भी इसी लिए पुरूष को बड़ा होना माननीय है क्योंकि लीक से हटकर किए गए फैसले दंपति में फासले ही लाएंगे।
हमारे पूर्वजों ने जो नियम बनाएं उन में वैज्ञानिक सोच भी शामिल थी। नियम तो सही है कि लड़के और लड़की की उम्र में दो पांच साल का फासला होना ही आदर्श अंतर है। क्यूंकि लड़कियां अपने अचेतन पति में पिता का सामथ्र्य खोजती है जो उन्हें छोटी उम्र की पति में नहीं मिलता और लड़के पत्नी में मां की छवि अपेक्षा करते है। यानि सहचर्या के साथ ममता भी चाहते है।
आज पति का उम्र में पत्नी से छोटी होना कोई समस्या नही लगता कुछ समय से यह चलन बढ़ा है, दोना तरफ से वफादारी और प्रेम स इस रिश्ते को सिंचा जाएं तो छोटे उम्र का पति भी सफल पति साबित होगा, बड़ी उम्र की पत्नी भी पति की प्रिय बनी रहेगी। उम्र का अंतर पृष्ठभूमि की भिन्नता तथा यहां तक की कुछ मामलों में वैचारिक मतभेद भी उनके सुखद वैवाहिक जीवन में अर्चन नहीं बन पांए।

जब एक रिश्ते में होते हुए भी हो जाए किसी और से प्यार

रिश्ते बेहद नाजुक होते है, हमारे देश में तो ये और भी नाजुक हो जाते हैं। दो लोगों के बीच प्यार का रिश्ता सारे रिश्तों में सबसे ऊपर होता हैं। लेकिन जब क्या जब आपका दिन एक नहीं बल्कि दो लोगों के लिए एक साथ धड़कने लगें। क्या ये मुमकिन हैं? जी हां ये पूरी तरह ममुकिन हैं कि एक रिश्ते में होते हुए भी आपको किसी दूसरे इंसान से बेइंतहा मोहब्बत हो जाए और आपका दिन उसके लिये भी आहें भरने लगे। तो क्या आप चीटर कहलाएंगे? समाज तो यही कहता है। खैर मामला जितना सच है उतना पेचीदा भी, तो बजाए सही गलत की बहस में पड़ते हुए जानने की कोशिश करते हैं कि जब एक रिश्ते में होते हुए भी हो जाए किसी और से प्यार तो क्या है इसका कोई उपचार। सेलेब्रिटीज़ की राय हाल ही में हाॅलीवुड की चर्चित अभिनेत्री कीरा नाइटली ने कहा था कि किसी महिला के लिए एक साथ दो लोगों से प्यार करना संभव है। किसी महिला के मन में एक समय में दो पुरूषों के लिए रोमांटिक भाव हो सकते हे। और यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप किससे प्यार कर रहें हैं और आपकी जिंदगी किन चीज़ों से होकर गुजर रही है। अगर ऐसे हालात आपके सामने भी है, तो आपके लिए यह फैसला कर पाना वाकई बेहद मुश्किल हो जाता है कि आपको प्यार हुआ है या यह महज एक आकर्षण मात्र है। ऐक्टर व माॅडल मिलिंद सोमन का नाम भी बहुत-सी लड़कियों से जुड़ा है। मिलंद का इस बारे में कहना है कि ‘आप कई लोगों को देखकर रोमांटिक महसूस करते है, लेकिन रिलेशनशिप केवल दो लोगों के बीच ही मुमकिन है। आप एक साथ दो लड़कियों से प्यार कैसे महसूस करे सकते है! अगर आप ऐसा करे हैं तो यह प्यार नहीं, बल्कि चीटिंग होगी। एक्सपर्ट की राय तो क्या वाकई एक समय में दो लोगों से प्यार करना मुमकिन नहीं हैं? इस बारे में साइकायट्रिस्ट सुनील मित्तल थोड़ी अलग राय रखते हैं। उनका कहना है, कि अगर आप अपने दोनों बच्चों को प्यार कर सकते हैं, तो फिर दो लोगों से प्यार क्यों नहीं कर सकते? हालांकि ज्यादा हिसाब-किताब कर देखा जाए तो यह सही नहीं है। आप एक समय में दो लोगों की ठीक से केयर कर सकते हैं, जैसे अपने फ्रेंड्स को लेकर चिंतित होना। लेकिन एक समय में दो लोगों से प्यार करने के मामले बहुत कम मामले देखे गए हैं।
आप बीती सुनें- वहीं दूसरी ओर इस तरह के दौर से गुज़र चुके लोगों का कहना है कि दो लोगों के लिए स्पेशल फीलिंग रखने पर वे खुद ही नहीं समझ पाते है कि यह प्यार है या फिर आकर्षित होना या उसे प्यार करना, दो अलग-अलग चीजें हैं और इसकी वजह से आपका अच्छा-खासा रिलेशन खत्म हो सकता है। साइकाॅलजिस्ट समीर कलानी कहे हैं, ‘ऐसी भावनाएं अटैचमेंट दिखाती है। वैसे, एक व्यक्ति दो लोगों की तरफ अट्रैक्ट हो सकता है। लेकिन आप हमेशा दो लोगों के साथ नहीं रह सकते और आखिर में आपको अपने दिल की आवाज सुनकर अपने प्यार का फैसला लेना ही पड़ेगा। वहीं इस तरह की भावनाओं से गुज़र चुकी कल्पना (बदला हुआ नाम) के अनुसार एक समय में दो लड़कों से प्यार की भावनाएं महसूस करने की कुछ वजह होती है, आप किसी से प्यार तो करते हैं, लेकिन उसी दौरान आपसे कोई दूसरा लड़का टकराता है जो आपके प्रेमी से प्यादा हैंडसम व अट्रैक्टिव है, तो ऐसे में आपका रूझान उसकी ओर भी हो सकता हे। वाकई यह पूरी तरह मुमकिन है कि आप एक समय में दों लोगों के बारे में एक जैसी भावनाएं महसूस करें, लेकिन दोनो में से एक के साथ जिंदगी बिताने का फैसला जल्दी न करने पर आप बड़ी परेशानी में भी पड़ सकते हैं।

शादी के पहले के संबंधो को ऐसे करें मैनेज

शादी से पहले संबंध को डेटिंग के रूप में दो व्यक्यिों की इच्छा से प्यार और अपनी संभावनाओं का पता लगाने के लिए वैवाहिक प्रतिबद्धता की जगर रखे गये संबंध के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह आमतौर पर विभिन्न सुसंगत मुद्दे जैसे, उम्मीदें और प्रेम, विश्वास, और समझौते के सवालों के साथ होता है। शादी से पहले के संबंध जरूरी नही की शादी में बदलेंगे या उसमें माता पिता का अनुमोदन रहेगा। जोड़े सही मायने में स्वतंत्र होते हैं, और एक दूसरे के हित ध्यान में रख कर अपने निर्णय लेते हैं, उनके निर्णयो में समाज को महत्व नहीं दिया जाता हैं। इससे उनको, वो एक दुसरे के लिए अनुरूप् हैं या नहीं इसका पता लगाने में मदद मिलती हैं। इस तरह के रिश्ते में शारीरिक संबंधी भी हो सकते हैं। इसका मतलब यह है कि वो यकीन करना चाहते है, कि वे न केवल भावनात्मक रूप से अनुरूप है, बल्कि शारिरिक रूप से भी अनुरूप हैं। आप अधिकतर जोड़े इसको एक मौलिक सिद्धांत मानते है, जो यह मानते है, की यह वास्तव में उनकी अनुरूपता को परिभाषित कर सकता है। आप क्या सोचते है? वास्तव में बंधन में बंधने से पहले रिश्ता रखना यह एक अच्छा तरीका है। शादी से पहले संबंध को माता-पिता के द्वारा योजित नही किया जा सकता है। बहरहाल, दोनों अपने माता पिता को अपने संबंधो के बारे में सूचित कर सकते है। व्यक्ति आम तौर पर अपने दम पर अपना साथी चुनते हैं। साथी चुनने के संभव तरीके में हैंः सामाजिक नेटवर्किग साइट, या अन्य स्थान जहां दो व्यक्ति लगातार मिलने की संभावना होती है या किसी दोस्त के दोस्त को डेट कर सकते है। एक साथ रहने का निर्णय लेना शादी से पहले संबंध की और बढ़ने का एक कदम हैं। डेटिंग के इस उन्नत चरण में वो एक दूसरे के साथ रहने के इस प्रयोग से कितने सहज है यह मुख्य सवाल होता है। वे एक दूसरे को डेट कर सकते हैं, लेकिन अभी तक रिश्ते में नहीं हो सकते हैं। यह कदम एक उन्नत स्तर पर आता है जब जोड़े जानना चाहते हैं, की उनके नये रिश्ते की प्रतिबद्धता कहा तक हैं। आमतौर पर, उनको एक दूसरे से क्या अपेक्षाएं हैं और उनके भविष्य की योजनाओं के बारे में उनको पता होता हैं, और उन्होनें बंधन में बंधने के लिए एक समय अवधि तय किया जाता है। शादी से पहले संबंध रखकर अक्सर जोड़ें अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते है और संभावित दर्दनाक और संपूर्ण तलाक की प्रक्रियाओं से बच सकते हैं।
दूसरे शब्दों में, शादी से पहले संबंध या डेटिंग से शादी हो चुके बेजोड दंपती में तलाक होना कम हो सकता है। कई जोड़ें संबंधों को मजबूत बनाने और रिश्ते की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शादी से पहले परामर्श हो चुनते हैं।

कैसे बनें एक माॅडल

माॅडल बहुत सारे लोग बनना चाहते हैं क्योंकि यह ग्लैमरस और आकर्षक है। माॅडलिंग अत्यंत प्रतिस्पर्धी हैं, और इंडस्ट्री रिजेक्शन्स से भरी हुई हैं, लेकिन एक सक्सेसफुल माॅडल वो है, जो अपना ज्यादा समय वह करने में बिताते है, जो उन्हें पसंद है। यह जानना कि माॅडलिंग की दुनिया में प्रवेश करने पर आपसे क्या आशा रखी जाती है। एक माॅडल बनने में आपकी मदद कर सकता है।
अंदर से स्वस्थ बनें:- स्वस्थ खाद्य पदार्थ खाएँ और पीएँ और बहुत सा व्यायाम करें। एक स्वस्थ शरीर के बाद आपको अपना सबसे बेहतर लुक देखने मिलेगा।
फिटनेस महत्वपूर्ण हैः- विशेष रूप से माॅडल्स के साथ काम करने पर विचार करें। अपने माॅडलिंग के लक्ष्य के बारे में और आप कैसे दिखना चाहते हैं, बताएँ और एक व्यायाम आहार के लिए पूछें जो उन लक्ष्यों का समर्थन करेगा।
सही आहार लेंः- भले ही जो लोग आपको बता रहे हैं उसके विपरीत हो, आप स्वस्थ आहार लें, साथ ही भोजन की स्वस्थ मात्रा लेनी चाहिए। सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज, स्वस्थ वसा और प्रोटीन आपके आहार के मूल पदार्थ होने चाहिए। शर्करा, स्टार्च खाली कार्बोहाइड्रेट, और अस्वास्थ्यकर वसा से जितना संभव हो सके बचना चाहिए।
अपनी रूपरेखा व्यवस्थित रखें- अपनी त्वचा को साफ और चमकदार बनाने पर ध्यान दें। अपना चेहरा सुबह और रात में धोएँ, एक सप्ताह में एक बार स्क्रब करें और सोने से पहले अपने मेकअप को धोना याद रखें। अपने बालों को चमकदार और स्वस्थ रखें। कुछ एजेंसियाँ और प्रबंधक ‘‘नेचुरल शाहनी लुक’’ पसंद करते है, तो इसलिए आपका कम से कम शाॅवर लेना ठीक हो सकता है। आपको शरीर के प्रकार के हिसाब से अपने माॅडलिंग लक्ष्यों को मैच करेंः तकनीकी तौर पर, कोई भी माॅडल बन सकता है। हालांकि अगर आप कुछ आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं, तो आप के लिए उपलब्ध काम अविश्वासनीय रूप से सीमित हो जाएगा या आपको अन्य क्षेत्रों(विश्वासनीयता, तकनीक, आदि) में क्षतिपूर्ति करने के लिए कार्य दिया जा सकता है।
प्लस साइज्ड माॅडलः- अगर आपका शरीर पूर्ण और कर्वीयस है तो आप एक प्लस-साइज्ड माॅडल बनने में सक्षम हो सकती है।
एक रनवे माॅडलः- कैटवाॅक पर ज्यादातर महिलाएँ कम से कम 5’8 और आमतौर पर छोटी छाती की होती है।। पुरूष ज्यादातर 5’11 और 6’2 के बीच होते है।
एक प्रिंट माॅडलः- अधिकांश संपादकीय महिला माॅडल्स कम से कम 5’7 होती हैं, लेकिन बढ़िया व्यक्त्वि के साथ एक खूबसूरत चेहरा, प्रिंट माॅडल के लिए सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं।
एक अल्टरनेटिव माॅडलः- कुछ एजेंसियाँ वेकल्पिक माॅडल किराये पर लेती है। जो माॅडल सुंदरता, ऊंचाई और वजन के इंडस्ट्री ‘स्टैंडर्ड’ के अनुरूप नहीं है। इसके अतिरिक्त, एक विशिष्ट जुनून या कारण होना जिसकी दिशा में आप काम कर रहे हैं, दरवाजे खोलने में मदद कर सकते हैं, जो शरीर के आकार की वजह से बंद थें, जो ‘‘इंडस्ट्री स्टैंडर्ड में फिट’’ नहीं होते।
माॅडलिंग के अन्य प्रकारः अगर आप चेहरे या शरीर के किसी भी विवरण में फिट नहीं है, तो शायद आप एक पैर, बाल, या हाथ के माॅडल हो सकते हैं।
स्थितिजन्य माॅडलिंग पर विचार करेंः अगर आपको नहीं लगता कि रनवे या पत्रिकाएँ आप के लिए जगह हैं, तो माॅडलिंग के अन्य प्रकार देखें। कंपनियाँ विशेष आयोजनों के लिए या विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए माॅडल का उपयोग करते है। इन माॅडलिंग की नौकरियों में शरीर के प्रकार पर कम प्रतिबंध और व्यक्त्वि पर अधिक जोर दिया जाता है।
एक प्रोमोशनल माॅडलः कुछ कंपनियां आम तौर अपने ब्रांड को बढ़ावा देने के लिए अपने ग्राहक आधार को माॅडल के साथ सीधे बातचीत करने के लिए आकर्षित करना चाहते है, जो आकर्षक व्यक्त्वि के हों। आप किराने की दुकानों, घटनाओं, या भोजन एल्कोहल, या नए उत्पादों की चीजों को बढ़ावा देने के क्लब में इन माॅडलों को देख सकते है।
एक स्पोक्स माॅडलः स्पाॅक्स माॅडल लगातार एक विशेष ब्रांड के साथ जुड़े होने के लिए काम पर रखे जाते है। एक लोकप्रिय सोच के विपरीत, स्पोक्स माॅडल को हमेशा मौखिक रूप से ब्रांड को बढ़ावा देने की जरूरत नही होती।
एक बिजनेस शो माॅडलः इस प्रकार के माॅडल कंपनियों या ब्रांड द्वारा एक बिजनेस शो टेंट या बूथ पर उपस्थित होने वालों के सम्मुख विज्ञापन करने के लिए काम पर रखा जाता है। इन माॅडलों को आम तौर पर कंपनी द्वारा नियोजित इवेंट के लिए ‘‘फ्रीलेंस’’ माॅडल के रूप में काम पर रखा जाता है।
इंडस्ट्री के बारे में खुद को शिक्षित करेंः जानें जितना ज्यादा आप जान सकते है, किताबें, लेख, ओर माॅडलिंग के बारे में ब्लाॅग्स पढ़ें। गुणवता गाइड, लेख और किताबें पढ़ना आप के लिए महत्वपूर्ण कौशल (पोसिंग और पोस्चर) में सुधार करने में मदद करेगा और यह भी समझाएगा कि कैसे (जैसे किस तरह से एक एजेंट को खोजें) इंडस्ट्री में काम करते है। इसके अलावा सम्मानित एजेंसी अनुसंधानो को खोजें जो कि माॅडल्स को हाई प्रोफाइल स्थानों में जगह देते हैं, जैसे पत्रिकाओं और फैशन शो में।
एक मुश्किल रास्ते के लिए तैयार रहेंः माॅडलिंग की दुनिया सुंदर चेहरों के साथ खचाखच भरी है। अच्छे दिखने की वजह से एक माॅडल के रूप में स्क्सेसफुल होना जरूरी नहीं है। माॅडलिंग कारोबार सिर्फ बहुत अच्छा दिखने के बारे में नही हैं; आपको एक मौका पाने के लिए विशिष्ट नौकरियों की जरूरत के अनुरूप होना पड़ेगा। माॅडलिंग केवल उन गंभीर लोगों के लिए है जो अद्वितीय लुक और विशेषताओं के साथ होते है। इतने सारे लोग आज की दुनिया में माॅडल बनने की कोशिश कर रहे हैं कि इंडस्ट्री में शामिल होना बहुत ही चुनौतीपूर्ण हैं। सफलता धैर्य और दृढ़ता के साथ ही आएगी।
शरमाएँ नहींः आपको अपने आपको बढ़ावा देने और अवसरों को तलाश कर कदम बढ़ाने और अपनी क्षमताओं को साबित करने की जरूरत है। पीछे खड़े रहने और ‘‘विनम्र’’ बनने से आपको जहां जाना है वहां नही जा पांएगें। अपनी पहचान बनाएँ, अपने व्यक्तिव को निखारें और एक विश्वासनीय एटीटयूट रखें। आप आत्मविश्वास महसूस नही करते हैं, तो दिखावा करें; माॅडलिंग में अक्सर इस रूप के कौशल और अभिनय की आवश्यकता है।
आपके पोर्टफोलियों की तस्वीरें लेंः आपको प्रोफेशनल दिखने के लिए हेडशाॅट शामिल करना चाहिएः आप के कलोजअप शाॅट्स बहुत मेकअप के बिना और एक सादे बैकग्रांउड पर लें। आपको बढ़िया प्राकृतिक प्रकाश में (लेकिन प्रत्यक्ष सूरज की रोशनी में नहीं) व्याकुलता के बिना तस्वीरें लेनी चाहिए। एजेंसियों को आपका एक नेचूरल लुक चाहिए होता है। एक हेड शाॅट लें, एक शरीर का शाॅट लें, और प्रोफ़ाइल शाॅट्स लें।
प्रोफेशनल तस्वीरें लेने पर विचार करेंः प्रोफेशनल फोटोग्राफी महंगी हो सकती हैं, यह पास होने और इंटरव्यू के काॅल मिलने जितना अंतर कर सकती है। अपने कैरियर में एक महत्वपूर्ण निवेश के लुक में प्रोफेशनल फोटोग्राफी के लिए सोचें। अपने पसंदीदा प्रोफेशनल शाॅट्स प्रिंट कराएँ। अगर आपको इंटरव्यू से पहले या बाद में एक तस्वीर छोड़ने के लिए कहा जाता है, उस मामले के लिए इन्हें सेव करके रखें। अगर आपको कुछ अच्छी प्रोफेशनल तस्वीरें मिल गयी हैं, एक पोर्टफोलियों में उन्हें संकलन पर विचार करें। कास्टिंग या एजेंसियों में अपने साथ इस पोर्टफोलियों को लेकर जाएँ।
अपना माप लें और अपने आँकड़ो का पता करेंः यह जानकारी माॅडलिंग एजेंसियो में आपको जगह देने में मदद कर सकती है। अपने स्तर से ऊपर की जानकारी रखने से आप प्रोफेशनल लगेंगे जब आप एक एजेंसी या संभावित ग्राहक के साथ बात कर रहे हैं। सबसे बुनियादी माप अपनी ऊंचाई, वनज, और जूते के आकार का पता लगाएँ। आपको अपने कपड़ों के माप का भी पता होना चाहिए, जैसे पोशाक का आकार, हिप्स, कमर, छाती/बस्ट, आदि। आपके व्यक्तिगत आँकड़ो में बालों का रंग, आंखों का रंग, और स्किन टोन ऐसी जानकारी शामिल है।
एक माॅडलिंग एजेंसी जाएँः लगभगर हर बड़े शहर में कई माॅडलिंग एजेंसियाँ हैं, और लगभग हर एजेंसी में नई प्रतिभाओं के लिए ‘‘ओपन काॅल्स’’ हैं। आपनी तस्वीरें या पोर्टफोलियों ले जाएँ। अच्छी तरह से अपने (स्टीक) माक का ध्यान रखें। आपको एक ओपन इंटरव्यू के दौरान चलने या एक हेडशाॅट या अन्य तस्वीरों के लिए खड़े होने को कहा जा सकता है। एक एजेंसी आप को खारिज कर देती है, तो निराश ना हों; अक्सर एक एजेंसी एक माॅडल की विविध सेट की तलाश में होती हैं, तो आप सिर्फ फिट नहीं हो सकते।
अपने माप के बारे सच्चे रहेंः आप अपना गलत माप ना दें, फिर आपको एक शूट के लिए जाना हों। एक बार वहाँ जाएंगे, और स्टाइलिस्ट के साथ आपको फिटिंग समस्याओं का सामना करना होगा। आप मुंह के वचन के कारण संभवित भविष्य की नौकरी खो सकते है।
प्रोफेशनल, विनम्र, और शिष्ट रहेंः याद रखें, हालांकि अगर आप एक कार्यालय में काम नहीं कर रहे हैं, तो भी आपको प्रोफेशनल होने की जरूरत हैं। सम्मान के साथ अपने काम के लोगों के साथ पेश आएँ। हमेशा किसी भी शूट के लिए समय पर जाएँ। आप देर से जाते है तो आपकी प्रतिष्ठा खराब हो सकती है और कोई भी आप के साथ काम करना नहीं चाहेगा। संयोजित रहें। माॅडल अक्सर आखिरी समय में स्थानों पर बुलाए जाते है और बहुत व्यस्त दिन पाते हैं। यदि आप सक्सेसफुल होना चाहते हैं, तो आपको चीजों के शीर्ष पर रहने की जरूरत है। एक दिन में एक दिन की योजना करना वास्तव में मदद कर सकता है। फोटोग्राफरों के साथ व्यावसायिक संबंधों का विकास करें। आप फोटोग्राफर को अच्छे लगने में मदद करेंगे। यह दोनों के लिए सही स्थिति हैं, इसलिए सम्मान के साथ फोटोग्राफरों के साथ पेश आने के लिए सुनिश्चित रहें।
माॅडलिंग को एक असली नौकरी की तरह समझेंः वे व्यक्ति, जो गंभीरता से अपने माॅडलिंग कैरियर को नहीं लेते उनकी सक्सेसफुल होने की संभावना कम होती है। एहसास करें यह जितना प्रतीत होता है उससे कहीं कठिन है ओर चकाचैंध और ग्लैमर के पीछे फैशन शो में आप जो देखेते हैं, उससे कहीं ज्यादा काम होता है। माॅडलिंग एक पूर्णकालिक पेशा है और इस पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
साइट पर एक मेकअप कलाकार होगा या नहीं, इस बात की पुष्टि करेंः कभी-कभी आपसे अपने साथ कुछ चीजें लाने के लिए आशा की जाएगी (जैसे फाउंडेशन) और माना जाएगा कि एक मेकअप कलाकार की जरूरत है। आप अपना खुद का मेकअप फिट रखना चाहिए। माॅडलिंग घोटालें बहुत ही वास्तविक और शिकार को गिराने में बहुत आसान होते हैं। वे आशाओं और मासूमों के सपनों के साथ खेलते हैं। आप जिस पर भरोसा करें उनसे सावधान भी रहें।

पानी के महत्व से जुड़े सवाल और उनके जवाब

कहते है जल ही जीवन है। जल के बिना धरती पर मानव जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती। मनुष्य चांद से लेकर मंगल तक की सतह पर पानी तलाशने की कवायद में लगा है, ताकि वहां जीवन की संभावनायें तलाशी जा सकें। लेकिन क्या धरती पर रहने वाले हम पानी के वास्तविक मूल्य को समझते है। कहते है पानी तो जितना पियो उतना कम है। लेकिन, क्या यह बात पूरी तरह से सही है। शायद नहीं!
जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। अति हर चीज की बुरी होती और पानी भी कोई अपवाद नहीं। पानी कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन और वसा की तरह ही पोषण का काम करता है। पानी हमारे घुटनों, कलाई और सभी अंतरंग भागों की चिकनाई के साथ-साथ जोड़ों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस लेख में पानी के महत्व और उससे जुड़ी कुछ बातों को जानेगें
क्या ज्यादा पानी से नुकसान होता है? हां, आप अपने शरीर से पसीने, मलमूत्र और सांसों आदि के जरिए जितना पानी निकालते हैं उससे ज्यादा पानी पीना नुकसानदेह हो सकता है। पानी का ओवरडोज किडनी पर आवश्यकता से अधिक दबाव डालता है।
क्या जिम जाने वालों को ज्यादा पानी पीने की जरूरत होती है? आपकी गतिविधियां आपकी पानी पीने की क्षमता को निर्धारित करती है। प्रति 100 कैलोरी सेवन पर आपको आधा गिलास या 100 मिमि. पानी पीना चाहिए। इसी के हिसाब से थोड़ा ऊपर नीचे हो सकता हैं। अगर आप ज्यादा दौड़ भाग करते हैं या चलते-फिरते है, तो उसमें 500 से 1000 तक कैलोरी जाते हैं तो ऐसे में आपको अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए।
महिलाओं और पुरूषों को कितना पानी पीना चाहिए? महिलाओं और पुरूषों के पानी पीने की आवश्यकता उनके बीएमआर और एक्टिविटी लेवल पर निर्भर करती है।
साधारणतयाः जिम न जाने वाले व्यक्ति को 500 कैलोरी और जिम जाने वाले को 1000 कैलोरी के हिसाब से पानी पीना चाहिए। बहरहाल, 100 कैलोरी के लिए 100 एमएल पानी पीना जरूरी है। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन भर में 12-13 गिलास पानी पीना प्र्याप्त होता है।
क्या पानी पीने से चेहरे की झुर्रियां दूर हो जाती हैं? हां, कुछ हद तक तो तो यह सही है। पानी पीने से चेहरे पर नमी रहती है। वैसे भी एक निश्चित अंतराल के बाद स्किन को ठीक रहने और हेल्दी बनाने के लिए पानी पीने की सलाह दी जाती है।
क्या कम पानी पीने से एसिड यूरिन आता है। यह सही है कि पानी ब्लैड कैंसर को रोकता है। लेकिन बच्चों को ऊर्जा के लिए पानी पीना चाहिए। सिर्फ व्यस्कों को ही ब्लैड कैंसर से बचाव के लिए अधिक पानी पाने की सलाह दी जाती है। यूरिन में एसिड का हाई लेवल होना नुकसानदायक नहीं हैं लेकिन कोई व्यक्ति चाहे वह महिला हो या पुरूष का गलत खान-पान और अधिक वजन होने पर समस्या पैदा होती है। ऐसे में अधिकतम पानी पीकर यूरिन एसिड लेवल कम करने की सलाह दी जाती है।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिला को कितना पानी पीना चाहिए? पानी गर्भवती के लिए भी बहुत अहम न्यूट्रिशन है। गर्भधारण के समय इसके अलग-अलग रूपों में प्रभाव पड़ते हैं। यह मिसकैरिज, कब्ज और रक्त स्राव को रोकता है। महिला को गर्भ के तीसरे महीने में दोगुने रक्त की जरूरत होती हैं क्योंकि किडनी का काम ऐसे में अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में फ्लूड की जरूरत भारी मात्रा में पड़ती है। गर्भवती महिला को दिन में जूस व अन्य पेय पदार्थो के साथ कम से कम 13 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को तरल पदार्थो पर खासा ध्यान देना चाहिए। जब भी वे फीड कराएं उससे पहले एक गिलास पानी पीना काफी लाभदायक होता हैं, यह फीडिंग के दौरान हुई फ्लूड की कमी को भरता हैं। खाने से पहले और बाद में क्या पानी पीना चाहिए? हमारे शरीर में एन्जाइंम से पानी का कार्य नही पूरा होता क्योंकि यह हमारे पाचन तंत्रों में मिक्स नहीं हो पाता। पानी तो शरीर में जाने वाले पौष्टिक आहार को टुकड़ों में विभाजित करता है। इसीलिए भोजन करने से कुछ समय पहले पानी पीने की सलाह दी जाती है।

भाई-बहन में होती है लड़ाई तो ऐसे तलाशें समाधान

भाई-बहन में छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा होना आम बात है। अभी तक हर मां यही समझती थी। लड़ाई के बाद बच्चों ने अपने कमरे तक बदल लिए, जबकि बचपन के दिनों में रिश्तों में जो मिठास घुलती है वो बड़े होकर एक साथ घुलती है वो बड़े होकर एक साथ बने रहने में मदद करती है। इसी बात को सोचते हुए उसको एक निर्णय लेना है कि वह अब अपने बच्चों की लड़ाई में अपनी भूमिका बदलेगी। वो बच्चों के बीच लगातार हो रहे छोटे-बड़े झगड़ो को पूरी तरह से खत्म करना चाहती है।
अक्सर माता-पिता बच्चों के झगड़े में रेफरी भर बनकर रह जाते हैं। इससे वे तनाव भी बहुत महसूस करते है। उनकी बहुत सारी ऊर्जा इस काम में खत्म होती हैं सो अलग। इसके बाद भी यह बात मन में आती हैं कि बच्चों के सामने हमारी छवि खराब तो नहीं हो रही। यह सब कुछ बहुत ही खराब अनुभव के तौर पर मन में बैठ जाता है। अगर बच्चों के इस आपसी झगड़े से छुटकारा पाना चाहती है तो सबसे पहले इस बात को दिमाग से निकाल दीजिए कि बच्चे क्या सोचेंगे। आपका काम बच्चों को सही बात सिखाना है और तय है कि इसके लिए आपको कुछ सही तरीके सिखाने होंगे। बच्चों पर क्या असर होगा, यह सोचने की जगर उनसे जुड़ी इस समस्या को खत्म करने की दिशा में कोशिश करना शुरू कर दीजिए।
एक-दूसरे की खासियत लिखेंः- अपने बच्चों से कहें कि वो एक-दूसरे की खासियतों को एक पेपर पर लिखें। जब एक बच्चा ये जानेगा कि दूसरा उसके बारे में कितना अच्छा सोच रहा है तो वो जरूर अपने मन से उसके बारे में गलत बातें निकाल देगा। इस तरह की गतिविधियों बच्चों में अपने भाई बहनों का हर हालात में साथ देने के लिए प्रेरित करेंगी। इस तरह के प्रयास से भाई-बहन के बीच रिश्ते की नींव बचपन सें ही मजबूत पड़ेगी जो जिंदगी भर उनके काम आएगी।
वो तुम्हारी मदद करता है। बच्चे जब आपसे भाई या बहन की गलती बताएं तो उनकी बात खुल कर सुनें, पर उन्हें यह जरूर समझाएं कि उनके भाई या बहन ने उनकी कैसे, कब और कितनी मदद की है। जैसे कई बार बड़े भाई-बहन अपने से छोटे भाई-बहनों की होमवर्क में मदद करते है। या फिर उनके साथ खेलते है। मूल रूप से आपको अपने बच्चों को यह सिखाना होगा कि उनमें से कोई भी एक-दूसरे के बिना नहीं रह पाएगा। इसलिए बेहतर यही है कि वे साथ-साथ खुश होकर रहें न कि लड़ाई करके।
पक्षपात न करेंः- कई बार माता-पिता बड़े बच्चों से चुप हो जाने की अपेक्षा रखते है। उन्हें कहते है, ‘तुम बडे़ हो तुम्हें सोचना चाहिए था।’ बच्चों को समझाने का यह तरीका एकदम गलत है। बच्चे को उसकी उम्र और जरूरत के हिसाब से आपको समझाना होगा और व्यवहार करना होगा। वो बड़ा जरूर है, पर उसकी उम्र कितनी है इस बात को भी आपको ध्यान में रखना होगा।
जब न संभल रहा हो झगड़ाः- ऐसा कई बार होता है, जब बच्चों का झगड़ा संभलता ही नही है। बच्चे आपस में चिल्लाकर बात कर रहे होते है। दोनों में से कोई आपकी बात सुनने के लिए तैयार नही होता। आपके डांटने और चिल्लाने पर भी अगर बच्चों का झगड़ा शांत न हो तो दोनों को एक-दूसरे की नजरों से कुछ देर के लिए दूर कर दें। दोनों बच्चों को खेलने के लिए बाहर भेज दें। जब उनका ध्यान और ऊर्जा कहीं और केंद्रित होने लगेगा तो आपसी लड़ाई को वे तुरंत भूल जाएंगे। संभव है कि बाहर अगर कोई तीसरा बच्चा उन्हें परेशान करने लगे तो वे दोनों ही टीम बनकर उसका मुकाबला करने लगें। बच्चे का ध्यान लड़ाई की जगर कहीं और लगाकर आप उनके झगड़े पर लगाम लगा सकती हैं।
अब झगड़ा खत्म करने के बारे में सोचोः- बच्चों को यह भी बताना जरूरी है कि झगड़ा बढ़ाने का फायदा नहीं होता, बल्कि झगड़ा खत्म करने के कई फायदे होते है। अपनी बात शांति से सामने रख कर परेशानी का हल निकल सकता है।
चीख-चिल्लाकर नहीं। उन्हें यह भी समझाएं कि एक-दूसरे की जो बातें उन्हें पसंद नहीं हैं, उन बातों को स्पष्ट बता दें। ऐसा नहीं करने पर मन में बात बैठी रहेगी और आगे चल कर यह उनके लिए आपस में बैर का कारण भी बन सकती है।

मस्ती में बनाएं रखें खुद को फिट

व्यायाम न सिर्फ बाॅडी को चुस्ती देता है, बल्कि कोलेस्ट्राॅल को घटाने, दबाव दूर करने, शरीर को लचीला बनाने के साथ-साथ फिट और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाने में भी सहायक है। यह व्यक्तित्व को निखारने में भूमिका निभाता है और स्वस्थ बनाता है। दौर फ्जूजन का है, लिहाजा फिटनेस कलासेज और जिमखानों में भी आजकल खूब चलन हैं।
मसाला भांगडा-इसमें भांगडा के साथ एरोबिक्स को मिलाया गया है यह बडे शहरों में खूब पाॅपुलर हो रहा है। आजकल कई जिम ट्रेनर भांगडा व बाॅलीवुड स्टेप्स और बीट्स के साथ भी मिला रहे है। फ्यूजन का असर आजकल की बिजी लाइफस्टाइल के लिए फ्यूजन वर्कआउट बेहतर ऑप्शन है। इसमें एरोबिक्स के साथ ग्लैमर भी जुडा है। ये मूविंग एक्सरसाइजेस हैं, जिनसे भी लयबद्धता मिलती है। खासतौर पर पेट और बांहो के आसपास सैल्यूलाइट घटाने में मदद मिलती है। और बाॅडी शेप में आती है। योगालेटीज यह पूर्व और पश्चिम का मेल है। इसमें पूरे शरीर की स्ट्रेचिंग होती है। सांस पर नियंत्रण संतुलन और सही पाॅश्चर सिखाया जाता है। इसे शरीर के हर हिस्से का वर्कआउट हो जाता है।
बाॅलीरोबिक्स अगर बाॅलीवुड के गानों पर थिरक सकते है। तो वर्कआउट में परेशानी नहीं होगी। इसे एंटरटेनमेंट के साथ-साथ पूरे शरीर का वर्कआउट हो जाता है। स्ट्रेस या डिप्रेशन दूर करने के लिए भी यह परफेक्ट वर्कआउट है। आजकल महिलाएं इन के जरिये स्वस्थ जीवनशैली अपना रही है।

बिंदी का महत्व

माथे पर लगी बिंदी महिलाओं का सौंदर्य बढ़ाती है ये तो हम सभी जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये बिंदी सिर्फ सौंदर्य ही नही बढ़ाती बल्कि स्वास्थ्य के लिये भी बहुत लाभकारी होती है
1. चेहरे के मसल्स को मजबूत करती है जिससे की झुर्रियों का आना कम होता है। बिन्दी लगाने से ये चेहरे के मसल्स में रक्त का प्रवाह बढ़ता है इससे मसल्स लचीले होते हैं और झुर्रियां कम होती हैं।
2. भौंह के बीच की लाइन को कम करती है- इसको लेकर बहुत सारे प्रॉबल्म होते हैं जो मसाज करने पर कम हो जाते हैं। मसाज से ब्लड सरकुलेशन बढ़ जाता है।
3. एकाग्रता के केंद्र- बिंदी को दो भौंह के बीच लगाया जाता है। जहां शरीर के सभी नसें एक जगह मिलते हैं। इसको अग्नि चक्र कहते हैं। इस जगह को तृतीय नेत्र भी कहते हैं। बिन्दी लगाने से मन शांत और तनाव कम होता है।
4. सिरदर्द से राहत- एक्यूप्रेशर के अनुसार माथे के इस बिन्दु को मसाज करने से सिरदर्द से तुरन्त राहत मिलती है, क्योंकि इससे नसों और रक्त कोशिकाओं को आराम मिलता है।
5. साइनस से आराम- इस प्वाइंट को मसाज करने पर रक्त का संचालन नाक के आस-पास अच्छी तरह से होने लगता है जिससे साइनस के कारण सूजन कम हो जाता है और बंद नाक खुल जाता है। इससे बहुत आराम मिलता है।
6. मन को शांत करती है- भौंह के बीच का ये हिस्सा बेहद संवेदनशील होता है तनाव होने पर हमारा यही हिस्सा दुखने लगता है। बिंदी इसको शांत करके क्षति को पूर्ण करने में मदद करती है।
7. अनिद्रा से राहत- बिंदी लगाने से चेहरा, गर्दन, पीठ और शरीर के ऊपरी भाग के मसल्स को आराम मिलता है जिससे अनिद्रा की बीमारी से राहत मिलती है।
8. एक तरफ के चेहरे का पक्षाघात के लक्षण से दिलाती है राहत- इस प्वाइंट को मसाज करने से चेहरे के नसें उत्तेजित हो जाती हैं और इस बीमारी के लक्षणों से राहत मिलती है।
आयुर्वेद में इसको ’शिरोधरा’ कहते हैं। इसमें 40-60 मिनट तक मेडिकेटेड ऑयल को कपाल के इस बिन्दु में मसाज किया जाता है।
9. आँखों के मसल्स के लिए अच्छा होता है- माथे के मध्य का ये केंद्रबिन्दु की नसें आँखों के मांसपेशियों से संबंधित होते हैं जो अगल-बगल देखने और स्पष्ट देखने में मदद करती हैं।
10. श्रवणशक्ति बेहतर होती है- जो नस चेहरे के मसल्स को उत्तेजित करती है वह कान के भीतर के मसल्स से सुदृढ़ करके कान को स्वस्थ रखने में मदद करती है।