जरीन खान शुक्रगुजार हैं सलमान खान की

बाॅलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री जरीन खान खुद को सलमान खान का शुक्रगुजार मानती हैं कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में ब्रेक दिया। जरीन खान ने बाॅलीवुड में अपने करियर की शुरुआत सलमान खान के अपोजिट फिल्म ‘वीर’ से की थी। जरीन की फिल्म ‘हेट स्टोरी 3’ अभी हाल ही में प्रदर्शित हुई है। फिल्म में जरीन बोल्ड अवतार में नजर आई हैं। जरीन ने कहा, ‘‘फिल्म में मैंने शरमन जोशी की पत्नी का किरदार निभाया है, जो अपने पति के लिए काफी प्रोटेक्टिव है। मैं किसी फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं हूं। मेरी पहली फिल्म की काफी आलोचना हुई थी। इसीलिये अब सोच समझकर ही फिल्मों का चयन करती हूं क्योंकि मन में ये रहता है कि कहीं कुछ ऐसा ना कर लूं जिसका मुझे अफसोस रहे। इसीलिए मैंने वक्त लिया और ‘हेट स्टोरी 3’ को चुना। उन्होंने कहा, ‘‘हेट स्टोरी में बोल्ड किरदार करने को लेकर मैं सच में काफी चिंतित थी क्योंकि ऐसा किरदार कभी किया नहीं था, पता भी नहीं था कि कैसे करते हैं, खास तौर से मेरी जैसी लड़की जिसकी हमेशा उसके शरीर और वजन को लेकर आलोचना होती रहती है। मैंने निर्देशक विशाल से पूछा तो उन्होंने कहा कि यह एक सस्ती फिल्म नहीं है, कंटेंट अच्छा है, फिर मैंने अपनी मां से भी पूछा, और उन्हें कोई तकलीफ नहीं थी। शूटिंग के दौरान भी सबने बहुत साथ दिया। मैंने जैसा सोचा था वैसा बिल्कुल नहीं था। जरीन खान ने कहा, ‘‘मैं खुश हूं और सलमान की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे इंडस्ट्री का एक हिस्सा बनाया। यदि वह नहीं होते तो मुझे नहीं लगता है कि मैं कभी भी एक्ट्रेस बनती। ब्रेक मिलने के बाद अब मेरी जिम्मेदारी है कि मेरा करियर आगे कैसे जाना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि बार बार सलमान खान को फिल्मों में काम के लिए परेशान किया जाए। अभिनेत्री जरीन खान का कहना है कि फिल्म जगत में पांच साल गुजारने के बाद अब आखिरकार उन्हें लगता है कि वह मशहूर हो गई है। जरीन खान ने फिल्म जगत में शुरुआत सलमान खान के अपोजिट वर्ष 2010 में प्रदर्शित फिल्म वीर से की थी। जरीन की फिल्म:हेट स्ओरी 3’ अभी हाल ही में प्रदर्शित हुई है। फिल्म ‘हेट स्टोरी 3’ में बोल्ड परफाॅर्मेंस के लिए उन्हें तारीफ मिल रही है। जरीन ने कहा, ‘‘हेट स्टोरी 3’’ को लेकर प्रतिक्रिया चैंकाने वाली रही है। हर कोई फिल्म के बारे में जानता था और हर कोई इसके बारे में बात कर रहा है। आखिरकार इंडस्ट्री में इतने साल रहने के बाद मुझे अब महसूस हो रहा है कि मैं मशहूर हो गई हूं।’’ जरीन अपने करियर को लेकर संतुष्ट है। जरीन ने कहा, ‘‘में अपने करियर से संतुष्ट हूं। जब मैं अपनी यात्रा को देखती हूं तो मेरी नजर में यह शानदार लगती है। मुझे कोई आइडिया नहीं था कि यह इंडस्ट्री कैसे काम करती है। मैं एक आउटसाइडर थी जिसका यहां कोई कनेक्शन नहीं था लेकिन अब मैंने एक अलग पहचान हासिल कर ली है।

बाॅक्स आफिस पर हिट ‘नीरजा’ ने मनाया  कामयाबी का जश्न

कंगना रनौत की बहुचर्चित फिल्म को कमाई के मामले में पछाड़ती जा रही है सोनम कपूर की फिल्म ‘नीरजा’। ऐसे में फिल्म की टीम जश्न मना रही है। फिल्म नीरजा ने पहले दो हफ्तों में ही 52.24 करोड़ का कलेक्शन भारतीय बाॅक्स आॅफिस पर कर लिया है। विदेशी बाॅक्स आॅफिस का कलेक्शन अलग है। ऐसे में फिल्म ‘नीरजा’ की टीम ने मुम्बई में कामयाबी का जश्न मनाया। इस मौके पर ‘नीरजा’ को रिलीज करने वाली कंपनी स्टारफाॅक्स के सी.ओ. विजय सिंह ने कहा कि फिल्म क्वीन की कुल कमाई 60 करोड़ के आसपास हुई थी मगर नीरजा ने पहले दो हफ्ते में ही भारत में 52 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है और विदेश में भी अच्छा कारोबार कर रही है। फिल्म नीरजा को दर्शक बेहद पसंद कर रहे हैं और बाॅक्स आॅफिस पर उम्मीद से बड़ा कारोबार है। हमारी पूरी टीम बेहद खुश है। नीरजा फिल्म को महाराष्ट्र, दिल्ली जैसे कई राज्यों में टैक्स फ्री भी किया जा चुका है। फिल्म नीरजा की कमाई को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि वाकई में ये फिल्म बाॅक्स आॅफिस पर फिल्म क्वीन को पछाड़ने जा रही है। साथ ही क्वीन को जिस तरह सराहना मिली थी वैसी ही सराहना नीरजा को भी मिल रही है। सोनम कपूर की नीरजा की भूमिका के लिए जिस तरह सराहना हो रही है, उम्मीद है कि इनकी भी काया पलटेगी। फिल्म नीरजा के बाद सोनम के अभिनय की बेहद तारीफ की जा रही है। साथ ही कमाई के मामले में भी नीरजा ने क्वीन को भी पछाड़ दिया है। यह भी मुमकिन है कि अगले अवाॅर्ड सीजन में नीरजा और सोनम का जादू चले क्योंकि फिल्म की सराहना और सफलता साथ-साथ हो रही है।

सलमान भाई अरबाज और भाभी मलाइका के रिश्ते को बचाने में जुटे

बाॅलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा खान और अरबाज खान के बीच तलाक की नौबत आ चुकी है और दबंग सलमान खान भईया और भाभी के रिश्ते को बचाने के लिए बीच में कूद पड़े हैं। सलमान ने भाभी को समझाते हुए कहा कि 18 साल शादी के रिश्ते में रहने के बाद इसे तोड़ना सही फैसला नहीं होगा। इस दौरान सलमान ने भाभी से गुजारिश की वे टूट रहे रिश्ते को बचा ले। इधर अभिनेता-फिल्मकार अरबाज खान का कहना है कि वह अपनी पत्नी मलाइका अरोड़ा खान के प्रति काफी संवेदनशील हैं और उन्हें डर लगता है कि कहीं वह उन्हें खो न दें।

‘जट्ट एंड जूलिएट’ का रीमेक बनायेंगे सलमान खान

बाॅलीवुड में चर्चा है कि सलमान खान पंजाबी फिल्म ‘जट्ट एंड जूलिएट’ का रीमेक बनाने जा रहे हैं। इस फिल्म के रीमेक राइट्स वह पहले ही से ले चुके हैं। इसका निर्देशन सलमान के पसंदीदा कोरियोग्राफर अहमद खान करेंगे। इस फिल्म को नए कलाकारों के साथ बनाया जाएगा। बाॅलीवुड के दबंग स्टार सलमान खान पंजाबी सुपरहिट फिल्म ‘जट्ट एंड जूलियट’ का रीमेक बना सकते हैं। सलमान कई नए लड़कों को ट्रेनिंग दे रहे हैं और इन्हीं में से किसी एक को लेने की चर्चा है। अपने बाॅडीगार्ड शेरा के बेटे टाइगन को भी लाॅन्च करने की बात सलमान कह चुके हैं। चर्चा है कि सलमान की बहन अर्पिता के पति आयुष शर्मा के लिए यह फिल्म प्लान हो सकती है। लीड हीरोइन के लिए भी नए चेहरे की तलाश जारी है। सलमान फिल्म की कहानी और अन्य विभागों में क्रिएटिव रूप से जुड़े रहेंगे। फिल्म का संगीत वह ही तय करेंगे।

सनी लियोन के लिये बिकनी बन गई मुसीबत

‘मस्तीजादे’ में सनी लियोन ने काफी बोल्ड सीन दिये। सनी लियोन ने अपने कैरेक्टर के लिए खासी तैयारियां की थीं जिसमें फिटनेस पर खास ख्याल रखा गया था। सनी को फिट दिखने के लिए कुछ ज्यादा ही कसरत करनी थी लेकिन जोर से झटका उन्हें सेट पर पहुंचकर उस समय लगा जब उनके स्टाइलिस्ट ने बताया कि उन्हें अपनी फिटनेस को नए लेवल पर ले जाना होगा क्योंकि फिल्म की उनकी वार्डरोब में सिर्फ 2 ड्रेसेज, शाॅर्ट्स और क्राॅप टाॅप का एक जोड़ा और 27 बिकनी होंगी। सनी की हालत लगभग रोने वाली हो गई क्योंकि उन्हें इसके लिए पसंदीदा पिज्जा को छोड़ना पड़ा। फिल्म के डायरेक्टर मिलाप झावेरी, रंगीता नंदी, वीर दास और तुषार कपूर ने सनी को मनाया। यह फैसला हुआ कि सेट पर मौजूद सभी लोग इसी तरह की डाइट लेंगे। सनी लियोन की डिग्नीटी को लेकर राखी सावंत का कहना है कि वह सनी से कम नहीं और वह भी बहुत कुछ कर सकती है। पाॅर्न स्टार बनने के लिए राखी सावंत सनी लियोनी को चुनौती देना चाहती है। राखी का यह भी कहना है कि अगर कुछ सोचना या करना है तो बड़ा करूंगी। मैं आमिर, शाहरुख और सलमान के साथ काम कर चुकी हूँ। पाॅर्न स्टार बनने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और मोदी के साथ वह खाना खाना चाहती है। उसका कहना है कि मैं देश और विदेश में पाॅर्न फिल्म बनाऊंगी और इसमें काम करूंगी।

फिल्म ‘लव गेम्स’ का ट्रेलर लगा देगा आग सीने में

विक्रम भट्ट की फिल्म ‘लव गेम्स’ के ट्रेलर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह फिल्म हद से ज्यादा बोल्ड होने वाली है। इसमें ‘लव गेम्स’ में रमोना पत्रलेखा बन अपने पार्टनर पर दूसरे कपल्स के साथ लव गेम खेलने के लिए दबाव डालती है जिससे किसिंग सीन की भरमार होती है। माॅडल से एक्टर बने गौरव अरोड़ा इस फिल्म से बाॅलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं। फिल्म में तारा अलिशा बेरी का भी अहम किरदार है। सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म में बोल्ड सीन की भरमार होने की वजह से 18 कट लगाने को कहा है। इस बारे में भट्ट ब्रदर्स का कहना है कि वह फिल्म में किसी भी प्रकार की कट नहीं चाहते हैं। उन्होंने ‘ए’ सर्टिफिकेट की मांग की है। महेश भट्ट की प्रोड्क्शन की यह फिल्म 8 अप्रैल को रिलीज होगी।

आमिर खान की फैन रहूंगीः सनी लियोनी

अभिनेता आमिर खान का कहना है कि उन्हें ‘दबंग’ सलमान खान की आगामी फिल्म ‘सुलतान’ से बहुत उम्मीदें हैं और वह इसकी रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आमिर ने सोनम कपूर की फिल्म ‘नीरजा’ की स्क्रीनिंग के मौके पर कहा, सलमान की फिल्में हमेशा ही अच्छी होती हैं, इसलिए मुझे उनकी ‘सुलतान’ से बहुत उम्मीदें हैं। बाकी लोगों की तरह ही में भी दिल थामकर इसका इंतजार कर रहा हूं। यकीनन यह एक बहुत अच्छी फिल्म होगी। ‘सुलतान’ में सलमान हरियाणा के कुश्तीबाज की भूमिका में हैं। फिल्म में अनुष्का शर्मा भी हैं। इधर बाॅलीवुड अभिनेत्री सनी लियोनी का कहना है कि उन्हें आमिर खान के साथ किसी फिल्म में काम करने का मौका मिले या नहीं, वह हमेशा उनकी प्रशंसक रहेगी। आमिर ने भारतीय मूल की सनी लियोनी की बेहद गरिमामय तरीके से सहजता से प्रश्नों के जवाब देने के लिए प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें सनी के साथ काम करने में कोई परेशानी नहीं है और उनके साथ काम कर उन्हें खुशी होगी। इधर विवादों में रहने वाले बाॅलीवुड डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा भी सुर्खियों में रहना पसंद करते हैं। रामू ने देश के पीएम नरेंद्र मोदी और पोर्न स्टार से बाॅलीवुड एक्ट्रेस बनी सनी लियोन की तुलना कर डाली है। उनका कहना है कि भारत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ज्यादा एडवांस सनी लियोन बनाएंगी। उन्होंने कहा कि मैं सनी लियोन की डिग्निटी देख रहा हूं। अब तो आमिर खान भी उन्हें एंडोर्स कर रहे हैं। मुझे लगता है कि वे नरेंद्र मोदी से ज्यादा एडवांस इंडिया बनाएंगी।

फिल्म अभिनेता मनोज कुमार को मिलेगा दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक मनोज कुमार को हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान भारतीय सिनेमा में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए वर्ष 2015 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया है। फिल्मों में उनके अहम योगदान को देखते हुए जूरी मैंबर्स लता मंगेशकर, आशा भौंसले, सलीम खान, नितिन मुकेश और अनूप जलोटा ने 47वें दादा साहेब अवार्ड के लिए मनोज कुमार का नाम सुझाया है। इसके बाद सूचना और प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने उनसे बात की और अवाॅर्ड के लिए बधाई दी। भारत सरकार के इस फैसले पर मनोज कुमार (78) का कहना है कि यह सुखद अनुभव हैरान कर देने वाला है। भारतीय सिनेमा के विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले इस पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपये नकद और एक शाॅल प्रदान किया जाता है। उन्होंने ‘उपकार’ ‘हरियाली और रास्ता’, ‘वो कौन थी’, ‘हिमालय की गोद में’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ और ‘क्रांति’ जैसी फिल्मों से अपने अभिनय की छाप छोड़ी। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और पद्मश्री से सम्मानित मनोज कुमार ने ‘रोटी कपड़ा और मकान’ सहित पांच से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया है। मनोज कुमार बड़े पर्दे पर आखिरी बार 1995 की फिल्म ‘मैदान-ए-जंग’ में दिखाई दिए थे। उन्होंने कहा कि अब वह फिल्म उद्योग में और अधिक सक्रिय होने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हां, मैं सुर्खियों से गायब था और वह मेरी ही गलती है। मैं एक फिल्म बनाना और जल्द ही सक्रिय होना चाहता हूं।’’

स्त्री के जीवन में पुरूष का महत्त्व

रामचरित्र मानस में तुलसीदास ने लिखा है- बिन जल बादल सूना है, वैसे ही पुरूष बिन नारी का जीवन।
लेकिन आज समय बदल चुका है। संयुक्त परिवारों की परंपरा बीते समय की बाते हैं। नौकरियों ने देश विदेश की सीमाएं खत्म की दी हैं। एक जमाना था औरत घर की चैखट पार नहीं करती थी, पर आज वे नौकरियों की तालाश में वे एक अच्छे कैरियर की चाह लिए घरों से दूर, दूसरे शहरों में अकेले नौकरी करने में भी नहीं हिचकती हैं। यही नहीं, अब वे मनचाहे रिश्तों का बोझ भी नहीं उठाती है और तालाक के बाद अकेले जीवनयापन कर रहीं है।
वैवाहिक संबंधो की असफलता को देख अविवाहित रहने के निर्णय भी लिये जा रहें हैं। यही नही, पति की मृत्यु के बाद औरत अपने जीवन को बड़े व्यवस्थित तरीके से जी कर दिखा रहीं है। कुछ अरसे पहले लंदन में लगभग साढ़े चार हजार स्त्री-पुरूषों पर हुए एक सर्वेक्षण से यह सिद्ध हुआ कि अकेले रहने वाली महिलाएं उतनी ही खुश रहती हैं जितनी कि शादी के बाद परिस्थितियां व संबंध विच्छेद का दुख झेल चुकी महिलाएं वे मानसिक तौर पर कहीं ज्यादा स्वस्थ होती है। यानि स्त्री के जीवन में पुरूष न हो तो भी वे खुश रह सकती है।
सर्वेक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि पुरूषों को रिश्ते मानसिक रूप से ज्यादा बेहतर रख पाते है। एक के बाद दूसरे संबंध जहां पुरूषों के मानसिक स्वस्थ के लिए अच्छे साबित होते हैं, वहीं महिलाएं उनसे टूटती ज्यादा है।
लंदन विश्वविद्यालय के सोधकर्ताओं ने 35 वर्ष से कम उम्र के लोगों से किए गए सवाल-जवाब के आधार पर एपिडिमियोलाॅजी एंड कम्युटि हेल्थ के जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन मे यह पाया कि पहले संबंधो के टूटने पर नए संबंध बनाने पर पुरूषों की मानसिक स्थिति ज्यादा बेहतर होती है और स्त्रियों की मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। नेशनल फैमिली एंड पैरैंटिंग इंस्टीयूट के सर्वे से भी इसी बात को समर्थन मिलता है कि शादीशुदा मर्दों की मानसिक स्वास्थ महिलाओं के मुकाबले ज्यादा बेहतर होता है। जबकि महिलाएं इन संबंधो से बाहर निकल कर बेहतर जिंदगी जी सकती हैं, क्योंकि उनमें भावनात्मक संबल ज्यादा होता है। लंदन विश्वविद्यालय का यह अध्ययन अकेले लंदन में रहने वाले स्त्री-पुरूषों की मानसिकता को ही उजागर नहीं करता, बल्कि हर समाज में रहने वाले स्त्री पुरूषों पर लागू होता है।

जर्मन ग्रियर ने ‘द फीमेल यूनेक‘ में करीब सौ साल पहले एक पति-पत्नीके आपसी संवाद का जिक्र किया है, जिसमें पत्नी पति से पूछती है कि तुम क्या मानते हो, मेरा सबसे पवित्र कर्तव्य क्या है..? तो पति ने जवाब दिया, ‘अपने पति और बच्चों के प्रति तुम्हारा कत्र्तव्य‘।
इस पर पत्नी असहमत हुई और बोली, ”मेरा एक और कत्र्तव्य है, उतना ही पवित्र अपने प्रति मेरा कत्र्तव्य“। मैं मानती हूँ कि सबसे पहले मैं मनुष्य हूँ। उतनी ही, जितने कि तुम या हर सूरत में मैं वह बनने की कोशिश तो करूंगी ही। पुरूषों द्वारा धर्म गं्रथों, उनके विचारों से मै संतुष्ट नहीं रह पाउंगी। मुझे चीजों पर खुद सोच विचार करना होगा और उन्हें समझने की कोशिश करनी होगी”

संभवतः सौ साल पहले की स्त्री अपने सुख की तालाश पुरी नहीं कर पाई और अपने गृहस्थ कत्र्तव्य के प्रति अत्यधिक जागरूक थी, लेकिन आज की महिला अपने ‘स्व‘ के स्थान के लिए प्रयास कर रही है।

ऐशली मांटेग ने ‘द‘ नेचुरल सुपीरियाॅरिटि आॅफ विमेन में लिखा है कि स्त्रियां अपनी भावनाओं को वे काम करने देती हैं जिनके लिए वे बनी हैं, इसलिए मानसिक रूप से वे पुरूषों की अपेक्षा अधिक स्वस्थ रहती है।

आज की स्त्री ने अपनी अभिव्यक्तियों को सुखद करने के प्रयास किए हैं। घर की चार दिवारी की कैद या लंबे घूंघटों को उसने छोड़ने के प्रयास तो किए हैं। कहते हैं कि भय, अपर्यापत्ता और दुश्चिंता जैसे भाव व्यक्ति के वे सबसे कमजोर हिस्से हैं। जिनके कारण सुरक्षा की तालाश की जाती है हमारे समाज की अवधारणा अब तक की यही रही है कि स्त्री का जीवन विवाह करके ही सुरक्षित हो सकता है। इस कारण माता- पिता बेटियों को ब्याह कर गंगा नहा लेते हैं।
आर्थिक रूप से सुरक्षित स्त्री जैसे-तैसे बोझ बन चुके संबंधो को ढोने के लिए विवश रहती है। ऐसे में स्त्री जब अपने पैरों पर खड़ी होना सीख चुकी है, तो विवशता वाली बात अब उसके साथ नहीं है। रोज-रोज पति की मार सहने, उसके तानो को चुपचाप सहने के स्थान पर वह अपने बच्चों को अपने साथ लेकर अलग गृहस्थी बसाने के अपने फैसले ले पाती हैं और पहले से बेहतर जिंदगी जी लेती हैं।
यही नहीं, पुरूष के लिए जिस साथ के लिए स्त्री विवाह करती है, जिन सुखों की चाह वह रखती है, विवाह के बाद भी वह सब अधूरे रहते हैं, वह अकेलेपन को दूर करने के लिए वह करती है, किंतु जब उसे यह लगने लगता है कि घर और पति के बावजूद वह अकेली है, तो उसका उन सभी के साथ छूटने लगता है।
शायद कुछ इन्हीं कारणों से विवाह संबंधों में जिस सुरक्षा के कारणों का उल्लेख होता है, भावनात्मक स्तर पर वे मूल्यवान साबित होते हैं जिसके अभाव में दांपत्य संबंधो में खुशियों का पक्ष नदारद होता चला जाता है। इसी कारण मनोचिकित्सक डाॅ. विनोद प्रसाद सिन्हा कहते हैं कि अगर स्त्रियां अपनी स्थिति को प्रभावी रूप से ठीक करना चाहती हैं तो यह साफ जाहिर होता है कि उन्हें विवाह करने से इन्कार नहीं होगा। सभी स्त्रियां प्रेम पाने के लिए विवाह करती हैं। सेक्स से भी महत्त्वपूर्ण प्रेम है, लेकिन जब आज समाज में प्रेम पाने के लिए विवाह करना जरूरी नहीं समझा जाता है तो स्त्री ने भी अपनी सुविधानुसार सोचना शुरू कर दिया है। यहीं नहीं पुरूषों की ज्यादतियों को भी उसने चुपचाप सहना बंद कर दिया है।
डाॅ. सिन्हा का मनोविश्लेषण सही है, क्योंकि आज शादी के किए बगैर महिलाएं बच्चे गोद ले रहीं है। स्वाभिमानी बन सिंगल पैरेंट बनकर वे अपने बच्चों की परवरिश कर रहीं है। भारत की ही सुप्रसिद्ध अभिनेत्री सुसमिता सेन एक लड़की को गोद लेकर उसका लालन-पालन कर रही है। स्त्रियों के लिए विशेष पब, बियर बार, डिस्को की बढ़ती संख्या यह सूचित करती है कि वह अब पति के इंतजार में बैठना पसंद नहीं करती बल्कि अपने हिसाब से अपनी खुशी ढूंढ लेती है।

पोषक से भरपूर अमरूद और आंवला

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विटामिन-सी की मात्रा बढ़ाने के लिए यह जरूरी है कि आप अमरूद व आंवला का सेवन करें। क्योंकि विटामिन-सी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और कई तरह के संक्रमण से भी दूर रखता है।

अमरूद
अमरूद में फाइबर की अधिकता आंतों की सफाई के लिए जरूरी होती है। अमरूद में एस्टिंजेंट का होना पेट व आंतों में संक्रमण करने वाले बैक्टीरिया की उत्पत्ति को रोकता है। यह एसिडिटी की समस्या को कम करता है। एक 50 ग्राम के अमरूद में 40 कैलोरी होती है। अमरूद मधुमेह पीडि़तों के लिए भी फायदेमंद है। यह फल रक्त शर्करा को धीरे-धीरे ग्रहण करता है। अमरूद में विटामिन-सी की प्रचुरता होती है। एक औसत अमरूद में संतरे से चार गुणा अधिक विटामिन सी होता है। विटामिन सी इम्युनिटी यानी रोगों से लड़ने की क्षमता को मजबूत बनाता है। अमरूद के छिलके व उसकी निचली परत में सबसे अधिक गूदा होता है। अमरूद कैंसररोधी गुणों से भरपूर होता है। इसमें बी काॅम्प्लेक्स, विटामिन और मैग्नीशियम और तांबा आदि मिनरल होते हैं। इसमें पोटैशियम की प्रचुरता होती है। इसे कच्चा व पकाकर दोनों तरह से खाया जाता है।

आंवला
विटामिन सी की प्रचुरता के अलावा आंवले का सेवन शरीर की आयरन व कैल्शियम को ग्रहण करने की क्षमता को बढ़ाता है। ऐसे में आंवले को किशमिश, अखरोट, तिल और डेयरी उत्पाद के साथ खाने से फायदा पहुंचता है। आंवला पाचन को दुरुस्त करने के साथ ही यह खांसी में भी राहत देता है। आंवला एल्केलाइन यानी क्षारीय प्रकृति का फल है। ये पेट के रसायनों के स्तर को संतुलित रखता है। आंतों को भी स्वस्थ रखता है।आंवले का सेवन अपच में राहत देता है, लिवर को दुरुस्त रखता है और फैफड़ों व शरीर की सफाई करता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आंवले का सेवन शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या को बढ़ाता है। सफेद रक्त कोशिकाएं ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जिम्मेदार होती है। आयरन और केरोटीन की अधिकता के कारण आंवला बालों व त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटीआॅक्सीडेंट्स त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को काबू में रखते हैं। इस फल का सेवन आंखों के लिए भी अच्छा होता है। आंवले में क्रोमियम नामक खनिज होता है, जिसकी जरूरत शरीर को कम मात्रा में होती है, पर यह खनिज शारीरिक प्रक्रियाओं को दुरुस्त रखता है। मधुमेह रोगियों के लिए भी आंवला फायदेमंद है। आप इसे कद्दूकस कर सलाद के साथ भी खा सकते हैं।