‘जट्ट एंड जूलिएट’ का रीमेक बनायेंगे सलमान खान

बाॅलीवुड में चर्चा है कि सलमान खान पंजाबी फिल्म ‘जट्ट एंड जूलिएट’ का रीमेक बनाने जा रहे हैं। इस फिल्म के रीमेक राइट्स वह पहले ही से ले चुके हैं। इसका निर्देशन सलमान के पसंदीदा कोरियोग्राफर अहमद खान करेंगे। इस फिल्म को नए कलाकारों के साथ बनाया जाएगा। बाॅलीवुड के दबंग स्टार सलमान खान पंजाबी सुपरहिट फिल्म ‘जट्ट एंड जूलियट’ का रीमेक बना सकते हैं। सलमान कई नए लड़कों को ट्रेनिंग दे रहे हैं और इन्हीं में से किसी एक को लेने की चर्चा है। अपने बाॅडीगार्ड शेरा के बेटे टाइगन को भी लाॅन्च करने की बात सलमान कह चुके हैं। चर्चा है कि सलमान की बहन अर्पिता के पति आयुष शर्मा के लिए यह फिल्म प्लान हो सकती है। लीड हीरोइन के लिए भी नए चेहरे की तलाश जारी है। सलमान फिल्म की कहानी और अन्य विभागों में क्रिएटिव रूप से जुड़े रहेंगे। फिल्म का संगीत वह ही तय करेंगे।

स्त्री के जीवन में पुरूष का महत्त्व

रामचरित्र मानस में तुलसीदास ने लिखा है- बिन जल बादल सूना है, वैसे ही पुरूष बिन नारी का जीवन।
लेकिन आज समय बदल चुका है। संयुक्त परिवारों की परंपरा बीते समय की बाते हैं। नौकरियों ने देश विदेश की सीमाएं खत्म की दी हैं। एक जमाना था औरत घर की चैखट पार नहीं करती थी, पर आज वे नौकरियों की तालाश में वे एक अच्छे कैरियर की चाह लिए घरों से दूर, दूसरे शहरों में अकेले नौकरी करने में भी नहीं हिचकती हैं। यही नहीं, अब वे मनचाहे रिश्तों का बोझ भी नहीं उठाती है और तालाक के बाद अकेले जीवनयापन कर रहीं है।
वैवाहिक संबंधो की असफलता को देख अविवाहित रहने के निर्णय भी लिये जा रहें हैं। यही नही, पति की मृत्यु के बाद औरत अपने जीवन को बड़े व्यवस्थित तरीके से जी कर दिखा रहीं है। कुछ अरसे पहले लंदन में लगभग साढ़े चार हजार स्त्री-पुरूषों पर हुए एक सर्वेक्षण से यह सिद्ध हुआ कि अकेले रहने वाली महिलाएं उतनी ही खुश रहती हैं जितनी कि शादी के बाद परिस्थितियां व संबंध विच्छेद का दुख झेल चुकी महिलाएं वे मानसिक तौर पर कहीं ज्यादा स्वस्थ होती है। यानि स्त्री के जीवन में पुरूष न हो तो भी वे खुश रह सकती है।
सर्वेक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि पुरूषों को रिश्ते मानसिक रूप से ज्यादा बेहतर रख पाते है। एक के बाद दूसरे संबंध जहां पुरूषों के मानसिक स्वस्थ के लिए अच्छे साबित होते हैं, वहीं महिलाएं उनसे टूटती ज्यादा है।
लंदन विश्वविद्यालय के सोधकर्ताओं ने 35 वर्ष से कम उम्र के लोगों से किए गए सवाल-जवाब के आधार पर एपिडिमियोलाॅजी एंड कम्युटि हेल्थ के जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन मे यह पाया कि पहले संबंधो के टूटने पर नए संबंध बनाने पर पुरूषों की मानसिक स्थिति ज्यादा बेहतर होती है और स्त्रियों की मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। नेशनल फैमिली एंड पैरैंटिंग इंस्टीयूट के सर्वे से भी इसी बात को समर्थन मिलता है कि शादीशुदा मर्दों की मानसिक स्वास्थ महिलाओं के मुकाबले ज्यादा बेहतर होता है। जबकि महिलाएं इन संबंधो से बाहर निकल कर बेहतर जिंदगी जी सकती हैं, क्योंकि उनमें भावनात्मक संबल ज्यादा होता है। लंदन विश्वविद्यालय का यह अध्ययन अकेले लंदन में रहने वाले स्त्री-पुरूषों की मानसिकता को ही उजागर नहीं करता, बल्कि हर समाज में रहने वाले स्त्री पुरूषों पर लागू होता है।

जर्मन ग्रियर ने ‘द फीमेल यूनेक‘ में करीब सौ साल पहले एक पति-पत्नीके आपसी संवाद का जिक्र किया है, जिसमें पत्नी पति से पूछती है कि तुम क्या मानते हो, मेरा सबसे पवित्र कर्तव्य क्या है..? तो पति ने जवाब दिया, ‘अपने पति और बच्चों के प्रति तुम्हारा कत्र्तव्य‘।
इस पर पत्नी असहमत हुई और बोली, ”मेरा एक और कत्र्तव्य है, उतना ही पवित्र अपने प्रति मेरा कत्र्तव्य“। मैं मानती हूँ कि सबसे पहले मैं मनुष्य हूँ। उतनी ही, जितने कि तुम या हर सूरत में मैं वह बनने की कोशिश तो करूंगी ही। पुरूषों द्वारा धर्म गं्रथों, उनके विचारों से मै संतुष्ट नहीं रह पाउंगी। मुझे चीजों पर खुद सोच विचार करना होगा और उन्हें समझने की कोशिश करनी होगी”

संभवतः सौ साल पहले की स्त्री अपने सुख की तालाश पुरी नहीं कर पाई और अपने गृहस्थ कत्र्तव्य के प्रति अत्यधिक जागरूक थी, लेकिन आज की महिला अपने ‘स्व‘ के स्थान के लिए प्रयास कर रही है।

ऐशली मांटेग ने ‘द‘ नेचुरल सुपीरियाॅरिटि आॅफ विमेन में लिखा है कि स्त्रियां अपनी भावनाओं को वे काम करने देती हैं जिनके लिए वे बनी हैं, इसलिए मानसिक रूप से वे पुरूषों की अपेक्षा अधिक स्वस्थ रहती है।

आज की स्त्री ने अपनी अभिव्यक्तियों को सुखद करने के प्रयास किए हैं। घर की चार दिवारी की कैद या लंबे घूंघटों को उसने छोड़ने के प्रयास तो किए हैं। कहते हैं कि भय, अपर्यापत्ता और दुश्चिंता जैसे भाव व्यक्ति के वे सबसे कमजोर हिस्से हैं। जिनके कारण सुरक्षा की तालाश की जाती है हमारे समाज की अवधारणा अब तक की यही रही है कि स्त्री का जीवन विवाह करके ही सुरक्षित हो सकता है। इस कारण माता- पिता बेटियों को ब्याह कर गंगा नहा लेते हैं।
आर्थिक रूप से सुरक्षित स्त्री जैसे-तैसे बोझ बन चुके संबंधो को ढोने के लिए विवश रहती है। ऐसे में स्त्री जब अपने पैरों पर खड़ी होना सीख चुकी है, तो विवशता वाली बात अब उसके साथ नहीं है। रोज-रोज पति की मार सहने, उसके तानो को चुपचाप सहने के स्थान पर वह अपने बच्चों को अपने साथ लेकर अलग गृहस्थी बसाने के अपने फैसले ले पाती हैं और पहले से बेहतर जिंदगी जी लेती हैं।
यही नहीं, पुरूष के लिए जिस साथ के लिए स्त्री विवाह करती है, जिन सुखों की चाह वह रखती है, विवाह के बाद भी वह सब अधूरे रहते हैं, वह अकेलेपन को दूर करने के लिए वह करती है, किंतु जब उसे यह लगने लगता है कि घर और पति के बावजूद वह अकेली है, तो उसका उन सभी के साथ छूटने लगता है।
शायद कुछ इन्हीं कारणों से विवाह संबंधों में जिस सुरक्षा के कारणों का उल्लेख होता है, भावनात्मक स्तर पर वे मूल्यवान साबित होते हैं जिसके अभाव में दांपत्य संबंधो में खुशियों का पक्ष नदारद होता चला जाता है। इसी कारण मनोचिकित्सक डाॅ. विनोद प्रसाद सिन्हा कहते हैं कि अगर स्त्रियां अपनी स्थिति को प्रभावी रूप से ठीक करना चाहती हैं तो यह साफ जाहिर होता है कि उन्हें विवाह करने से इन्कार नहीं होगा। सभी स्त्रियां प्रेम पाने के लिए विवाह करती हैं। सेक्स से भी महत्त्वपूर्ण प्रेम है, लेकिन जब आज समाज में प्रेम पाने के लिए विवाह करना जरूरी नहीं समझा जाता है तो स्त्री ने भी अपनी सुविधानुसार सोचना शुरू कर दिया है। यहीं नहीं पुरूषों की ज्यादतियों को भी उसने चुपचाप सहना बंद कर दिया है।
डाॅ. सिन्हा का मनोविश्लेषण सही है, क्योंकि आज शादी के किए बगैर महिलाएं बच्चे गोद ले रहीं है। स्वाभिमानी बन सिंगल पैरेंट बनकर वे अपने बच्चों की परवरिश कर रहीं है। भारत की ही सुप्रसिद्ध अभिनेत्री सुसमिता सेन एक लड़की को गोद लेकर उसका लालन-पालन कर रही है। स्त्रियों के लिए विशेष पब, बियर बार, डिस्को की बढ़ती संख्या यह सूचित करती है कि वह अब पति के इंतजार में बैठना पसंद नहीं करती बल्कि अपने हिसाब से अपनी खुशी ढूंढ लेती है।

अदाओं से कर सकती हैं महिलाएं पुरुषों को आकर्षित

पुरुषों को अट्रैक्ट करना महिलाओं के लिए कोई बड़ी बात नहीं होती। ऐसी बहुत सारी चीजें होती हैं जिनसे महिलाएं आसानी से पुरुषों को अपना दीवाना बना सकती हैं। अगर आप भी किसी के साथ रिलेशनशिप की शुरुआत करने के बहाने ढूंढ रही हैं, तो इन टिप्स को अपनाएं। पुरुष खुद-ब-खुद आपसे बातचीत की शुरुआत करेंगे।
सादगी पसंद महिलाएं
पुरुष भले ही महिलाओं के आंखों के काजल से लेकर होंठों की लिपस्टिक तक और वैक्सड हेयर से लेकर नेल पेंट लगाए हुए नेल्स को नोटिस करते हों लेकिन असलियत में उन्हें सादगी पसंद महिलाएं ही भाती हैं।
फ्लर्ट नेचर
महिलाएं फ्लर्ट करना कम ही पसंद करती हैं ये जिम्मेदारी पुरुषों की होती है लेकिन अगर आप किसी पुरुष के साथ रिलेशनशिप की शुरुआत करना चाहती हैं तो थोड़ा-सा फ्लर्टी बनना पड़ेगा। महिलाओं की फ्लर्टी नेचर उन्हें बहुत पसंद आता है इससे वो आसानी से आपकी ओर अट्रैक्ट हो जाएंगे। बालों में हाथ फेरना, खुद के लिप्स बाइट करना और आईब्रो मूवमेंट फ्लर्ट और अट्रैक्ट करने के कुछ ईजी एक्सरसाइज होती है।
स्टाइलिश होना
महिलाओं के वेल मेंटेन ड्रेस में उनकी थोड़ी-सी बाॅडी दिखती रहे पुरुषों को बहुत अच्छा लगता है। जीन्स और टाॅप के बीच की फाइन लाइन, ब्राॅंड नेक टाॅप, स्कर्ट्स वाली महिलाएं हमेशा से ही पुरुषों का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रही हैं।
अच्छी आवाज
महिलाएं पुरुषों को अपनी आवाज से भी अपना दीवाना बना सकती हैं। बहुत तेज और कर्कश आवाज वाली महिलाओं को वो दोस्ती तक ही झेल सकते हैं। उनके साथ रिलेशनशिप में पड़ने से वो कतराते हैं।
मदद मांगना
महिलाएं पुरुषों को अपनी ओर अट्रैक्ट करने के लिए उनकी हेल्प ले सकती हैं। ये हेल्प एक पेन मांगने से लेकर लिफ्ट मांगने तक कुछ भी हो सकती है। दरअसल पुरुषों को हीमैन बनना बहुत अच्छा लगता है। खासतौर से महिलाओं के सामने। अगर आप किसी पुरुष को अट्रैक्ट करना चाहती हैं तो बिना किसी संकोच के उनसे हेल्प मांगें।
फीलिंग्स समझना
पुरुषों को अपना दीवाना बनाने के लिए एक जरूरी कदम उनकी फिलिंग्स को समझना भी है। संकोची स्वभाव होने के कारण पुरुष बहुत सी बातों को जाहिर नहीं कर पाते। उनकी बाॅडी लैंग्वेज, आंखों के इशारे आपसे बहुत कुछ कहना चाहते हैं, जिसे खामोशी से समझने की जरूरत है।

आंखों आंखों में बात होने दो

जब आप किसी से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं तो उसे जताना भी उतना ही जरूरी होता है। ज्यादातर पुरुष महिलाओं की इजहार-ए-मुहब्बत के इशारों को समझे इसलिए उनसे अपने दिल की बात कहने के लिए महिलाएं ये आसान तरीके अपना सकती हैं।

आई काॅन्टेक्ट
जब आप दोनों साथ हों तो एक-दूसरे से आंखे चुराने के बजाय, एक-दूसरे के आंखों में आंखें डालकर बात करें। इससे सामने वाले को लगता है कि आप उनकी बातों पर गौर कर रहे हैं साथ ही उन्हें आपकी तरफ से आने वाले इशारे का अहसास होता है।
काॅल करके बात
उन्हें काॅल करके बात करें, लेकिन हर वक्त उन्हें अपनी काॅल से परेशान न करें। कई बार पुरुष किसी मीटिंग या पार्टी में बिजी होते हैं और उस दौरान आपका फोन करना उनकी झुंझलाहट को बढ़ा सकता है। अगर आप दोनों डेट पर गए हों तो लौटने के बाद एक थैंक्यू काॅल जरूरी करके बताएं कि आपने एक बहुत ही अच्छा वक्त उनके साथ गुजारा।
प्यार भरा स्पर्श
पार्टनर का टच टेंशन से लेकर किसी बात को लेकर हो रही इरीटेशन तक को दूर कर देता है। इसलिए चाहे शाॅपिंग हो, मूवी हो या बात, इन सबके दौरान उन्हें बीच में प्यार से टच कर सकती हैं। कंधे पर हाथ रखना, हाथों को पकड़कर बात करना, गले लगना, ये सारी चीजें उन्हें आपके करीब लाने में मदद करेगी।
हर समय अवेलेबल होना
उन्हें जताएं कि आपको उनकी जरूरत है लेकिन हर वक्त उनके लिए अपनी अवेलेबिलिटी को जाहिर न करें। कई बार पुरुष आपकी इस फीलिंग को नहीं समझते और तवज्जो नहीं देते। जो आपको हर्ट कर सकती है।
मौजूदगी का अहसास कराना
कभी अपनी लिपस्टिक तो कभी अपना काॅम्ब। अपनी कोई न कोई चीजें उनके फ्लैट में बेफिक्र होकर छोड़ दें। उन्हें फील कराएं जैसे वो आपका घर हो। ऐसा करने से उन्हें अपनेपन का अहसास होगा साथ ही वो आपकी ओर से मिल रहे इनडाॅयरेक्टली इशारों को डायरेक्टली समझेंगे।
राय-मशविरा लेना
जब किसी परेशानी या उलझन में हो तो सजेशन मांगें। ऐसा करने से उन्हें बहुत अच्छा लगेगा और वो आपके फीलिंग की कद्र भी करेंगे।
ईमानदारी है जरूरी
आप जिसे पसंद करी हैं उन्हें ये यकीन दिलाना बहुत जरूरी है कि आप सिर्फ उनके साथ हैं उनकी कंपनी एन्जाॅय करती हैं और उनके साथ अपना फ्यूचर देख रही हैं। पुरुषों को हमेशा ही ईमानदार और प्यार करने वाले पार्टनर की तलाश होती है और ये भरोसा उन्हें जिस पर कायम होता दिखता है वो उसी को अपना फ्यूचर पार्टनर बनाना चाहते हैं।
उनकी चीजों को स्वीकार करना
उनके साथ अगर अपनी लाइफ को बिताने का सपना देख रही हैं तो जरूरी है कि उनके हर सुख-दुःख का साथी बनें। उनकी अच्छी आदतें सीखें तो बुरी आदतों पर टोकें। पुरुष हो या महिला दोनों शादी के बाद भी अपने फ्रेंड के साथ मौज-मस्ती को एन्जाॅय करना चाहते हैं तो आप पहल करें। उनके दोस्तों के साथ घुले-मिलें। इससे उन्हें भी अच्छा लगेगा।

क्यों बचती हैं महिलाएं  पुरुषों के साथ रिलेशनशिप बनाने में

महिलाओं को इम्प्रेस करने के लिए कुछ खास रूल्स नहीं होते, बस कुछ ऐसी बातों का ख्याल रखना होता है, जिससे उन्हें किसी बात को बुरा भी न लगे और आपका काम भी हो जाए। बहुत से ऐसे पुरुष हैं, जिनसे न तो कोई महिला फ्रैंडशिप करना चाहती हैं और न ही रिलेशनशिप रखना चाहती हैं। आखिर क्या वजहें हो सकती हैं।

बात करने में शर्म

आप कभी महिलाओं के बीच नहीं रहे इसलिए शायद आपको उनके साथ बात करने का तौर-तरीका नहीं पता। उनसे बात करते समय क्या बोला है और क्या नहीं, इन सबसे आप अंजान हैं। तो इसे एक वजह माना जा सकता है जिससे महिलाएं आपसे दूर रहती हैं।

बात का गलत मतलब निकालना

आप महिलाओ द्वारा की जाने वाली बातों और इशारों का तुरंत कोई गलत मतलब निकाल लेते हैं। जब वे आपसे हंसकर बातें करती है। बातों-बातों में आपको फ्रेंड्स वाला टच करती हैं तो इसका मतलब ये कतई नहीं कि वो आपसे इंटरस्टेड हैं। अगर ऐसी किसी बात की भनक महिलाओं को लग जाती है तो वो आपके साथ डेट पर तो क्या, मिलने से भी कतराती हैं।

बेवक्त काॅल और मैसेज न करें

आपको इस बात की जानकारी नहीं कि कब, कौन-सी बात करनी हैे और आप लगातार बेवक्त के काॅल और मैसेज किए जा रहे हैं तो इससे साफ जाहिर है कि उनका गुस्सा बढ़ेगा और वे आपसे बात नहीं करना चाहेंगी। तो महिला की आउटिंग पर पूछने से पहले उसे कोई ऐसा मौका न दें जिससे आपके लिए परेशानी का सबब बने।

रिलेशनशिप बनाना सिर्फ जरूरत के लिए
आपकी बातें औप आपकी आदतों से जरा सा भी अंदाजा लग गया कि आपको गलफ्रंेड की जरूरत बस दोस्तो के सामने अपनी इमेज बनाने और टशन मारने से है तो महिलाएं कभी भी ऐसे किसी पुरुष के साथ रिलेशनशिप में पड़ने से बचती हैं।

अजीबो-गरीब लुक अपनाना

आपने अजीबो-गरीब लुक अपनाया हुआ है, बिना शेव और आयरन किए हुए कपड़े पहनकर कहीं भी निकल जाते हैं सिगरेट-पान खाकर कही भी स्पिट कर देते हैं तो याद रखिए महिलाओं को ये सारी आदतें बिल्कुल नहीं भाती। ये उम्मीद जरूर करती है कि उनके फ्रेंड्स में ये सारी आदतें न हों, उन्हें ड्रेसिंग पहनने का स्टाइल हो।

छूने की आदत

बात-बात में महिलाओं को छूने की आदत आपका फ्रेंडली नेचर नहीं बल्कि आपकी नर्वसनेस को बयां करती है और कई बार तो किसी गलत मकसद को भी। महिला चाहे आपकी मित्र हो या कलीग हो बातों के दौरान बहुत फ्रेंडली होने की कोशिश न करें।

काॅम्फिडेंट न होना

पुरुषों में काॅन्फिडेंट होना बहुत ही जरूरी है। बातों के दौरान आंखें मिलाकर बात न करना, बार-बार पानी पीना, चेहरे को छुपाने की कोशिश करना। ये सारी चीजें आपके लो काॅन्फिडेंट को बयां करती हैं और ऐसे पुरुषों के साथ महिलाएं किसी तरह का कोई रिलेशनशिप रखना पसंद नहीं करतीं, फिर चाहे वो प्यार हो या शादी।

गलत लैंग्वेज का इस्तेमाल

बातों के दौरान गाली देना, जिससे सामने वाला शर्मिंदा हो जाए। सड़कों पर चलने के दौरान हो या कहीं रेस्टोरंेट में बैठकर आराम से खाने के दौरान। इस बात की ओर बिल्कुल भी ध्यान न देना कि आपके साथ कोई महिला है।

अकेलापन बढ़ता जा रहा है

आज का ज्वलंत समस्या है व्यक्ति का बढ़ता अकेलापन। आज भीड़ भरी सड़को पर भी हर शख्स अपने को नितांत अकेला पाता है। किसी को आज किसी के सुख-दुख से कोई सरोकार ही नहीं। पैसा कमाने व सुख सुविधा के साधन जुटाने में हर व्यक्ति तल्लीन हो गया है कि उसका मर्म, उसका उद्येश्य तथा उसक अस्तित्व के बारे में उसे सोचने की उसे फुरसत ही नहीं।
पारिवारिक संदर्भ में देखें तो आज संयुक्त परिवार का विचार ही समाप्त हो चुका है। संयुक्त परिवार के विघटन का मुख्य कारण है पारिवारिक कलह। आधुनिक स्थितियां इस तरह से बन रही हैं, जिसमें एक साथ, एक ही जैसी बनकर संभव नहीं रहा। अपने उम्दा, मुकम्मल व्यक्तित्व की ओर राजग स्त्री पुरूष पूर्णत्व की चाह में ज्यादा से ज्यादा खुदगर्ज और आत्मकेंद्रित हो चले हैं। संवाद की कमी वे टी.वी. सिनेमा जैसी बेजान वस्तु से पूरी कर लेते हैं। टी.वी. सिनेमा आज क्या परोस रहे हैं, इससे कोई भी समझदार व्यक्ति नावाकिफ नहीं। यह एक ऐसा दुष्चक्र है जिसमें आज का व्यक्ति बुरी तरह फंस चुका है।
यह सब पुरानों उसूलों को पूरी तरह नकार देने का परिणाम है। आज हर क्षेत्र में मूल्यों का पतन जिस तरह से मुखर हो रहा है इसके मूल्य में पारिवारिक संस्थाओं का निरंतर टूटना है क्योंकि संयुक्त परिवार के कारण ही व्यक्ति में त्याग, बलिदान, आज्ञापालन के गुणों का विकास होता है।
सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो संयुक्त परिवार में बच्चे और स्त्रियां अपने को काफी सुरक्षित पाते हैं। पैसे से शारीरिक आराम प्राप्त किया जा सकता है लेकिन मन की संतुष्टि व अपनेपन का सुख नहीं। आज व्यक्ति इसी के लिए तरस कर रह गया है। आज की पीढ़ी जिस तरह अटेंशन और डिप्रेशन लफ्जों का इस्तेमाल करती है पहले संयुक्त परिवार के सदस्यों की जुबान पर ये लब्ज कभी आते ही नहीं थे क्योंकि वे जानते ही न थे कि ये कैसी मानसिक स्थितियां होती है।
यह सब कुछ इतना आसान तो नहीं लेकिन प्रगति और आधुनिकता के बहाव में बहते हुए हम आज जिस मुकाम पर पहुचे हैं वहां मानव की सबसे अमूल्य चीज मन का चैन, सूकून और प्रसन्नता कहीं दूर तक नजर नहीं आती।

क्या आप घूमने जा रहे हैं?

गर्मियो आ गई हैं। आप कहीं घूमने जा रहे हो तो जहां तक हो सके इन बातोें का ध्यान रखें जिससे आपका सफर सुखमय तथा यादगार हो सके।
पहले आप अपने साथ अनेक प्रकार क आरामदायक कपड़े रखें। अपने कपड़ों में सूट-सलवार, जींस-टाॅप, स्कर्ट आदि रखें तथा बच्चों के भी कपड़े आरामदायक ही रखें ताकि भागने दौड़ने और सफर करने में आसानी हो। आप चुन्नी गले में डालकर न पहनें जिससे हवा में या दौड़ने में आपके गले में फस सकती है। आप सूट में अंदर जेबें लगा लें जिससे उसमें रूपये पैसे आराम से रख सकें।
जहां तक हो सके किसी अच्छे होटल में ही रूकने का कार्यक्रम बनाएं। होटल के कमरे पहले से ही बुक करा लें क्योंकि बड़े होटलों में आपको हर सुविधा मिल जाएगी। एक बड़ा बैग सफर के लिए हमेंशा साथ रखें ताकि उसमें बच्चों की छोटी-मोटी चीजें और सेफ्टीपिन का पैकैट, फस्ट एड का सामान रखें। उसमें सिरदर्द की टेबलेट, उल्टी जुकाम की दवाई, कोई एंटीसेप्टीक क्रीम, बैंडेड चोट की दवाई इत्यादि, कुछ अपने मेकअप का सामान, कुछ खुल्ले पैसे और कुछ चोकलेट, टाफी नमकीन के पैकैट भी साथ रखें ताकि बच्चे जब तब मांगे तो पैकिंग रास्तें में न खोलनी पड़े। पर्स में एक फोल्डेबल चाकू और टार्च इत्यादि रखें। टार्च छोटी वाली रखें। साथ में एक थर्मस भी रखें।
घूमने जाने से पहले उस शहर का नक्शा भी साथ में होना चाहिए। जिससे उस शहर की सभी सड़कें, स्टेशन, पुलिस स्टेशन, होटल तक के रास्ते के बारे में जानकारी मिल सके। वहां के पुलिस स्टेशन के फोन नम्बर तथा अपने अपने घर का फोन नम्बर अवश्य याद रखें ताकि जरूरत पड़ने पर आप फोन कर सकें। पड़ोसी का फोन नम्बर भी रखें।
अपना पता जहां आप रह रही हैं और आपका स्थाई पता, दोनों पतों को अपने पास रखना चाहिए। पता दो जगह रखना चाहिए, एक अपने बैग में, दूसरे अपने सूटकेस में ताकि कोई भी ट्रेजेडी होने पर आपको घर पहुंचने में दिक्कत न हो। पता एकदम साफ लिखा होना चाहिए जिससे दूसरा व्यक्ति आराम से पड़ सके। सूटकेस एक ही रखें। शेष बैगों का प्रयोग करें। घूमने जाएं तो सारा सामान को न ले जाएं। अगर आपका सामान चोरी हो जाए तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
खाना उस होटल में न खाएं जिस होटल में आप रूके हैं। खाना आम रेस्तरा में या ढाबे में ही खाएं क्योंकि वहां होटल की अपेक्षाकृत सस्ता खाना मिलेगा। हो सके तो साथ लड्डू, मठरी, मट्ठी इत्यादि बनाकर ले जायें।
जहां आप भ्रमण के लिए जा रहीं है वहां पर समान न खरीदें क्योंकि दूसरी जगह आपको नया जानकर पैसे अधिक वसूलते हैं। अगर कोई मजबूरी हो तो अलग बात है।
भ्रमण पर जाते समय अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगी तथा अपने तौर पर सावधानियां बरतेंगी तों आप अपनी यात्रा को सुखद बना सकती हैं।

सभी को भाए सर्दी

सर्दी शुरू हो गई है। ग्लोबल वार्मिंग आदि कारणों से ठंड के महीने भले कुछ कम हुए हों लेकिन अब भी दिसंबर-जनवरी के महीनें में भारत विशेषकर समूचे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ती है। सर्दियाँ काफी लोकप्रिय मौसम जो सभी को भाता है। सर्दियों में मानो समूची प्रकृति निखर जाती है। ठंड का एहसास मन में उमंग पैदा करता है। जोश भर देता है। गर्मी, उमस न होने से थकान भी गायब हो जाती है। चेहरे पर रौनक लौटा देती है। मन में उत्साह का संचार होने लगता है । यह उत्साह बसंत तक बना रहता है। सर्दियों में भरपूर जीने को मन करता है। तभी ये मौसम सभी को पसंद है। शादी, पार्टी भी इन दिनों ज्यादा होते है। घूमने फिरने को मन करता है।फैशन का मजा भी इन दिनों में ही होता है।
लेडिज स्पेशल
सर्दियों का मौसम महिलाओं में ज्यादा फेवरेट होना चाहिए। कम से कम सजने-सवरने के मामले में फेशन के मामले में तो पुरूष भी किसी से कम नही है। लेकिन इस मामले में महिलाए हमेशा बदनाम रही है। वैसे तो महिलाएं हर मौसम में संवरती है लकिन उन्है फैशन करने के मामले में सर्दियों का मौसम भाता है। गर्मियों में पसीना व उमस से मेकअप का मजा खराब होता है, इसलिए ठंड में ओढने-पहनने, मेकअप का अलग ही आनंद है। यह कहना गलत न होगा कि सर्दियों में महिलाए ज्यादा खूबसूरत दिखती है। सर्दियों में तन और मन दोनों ही निखरते है।
बुनाई
सर्दियां आ गई है तो इससे बचने के लिए स्र्वेटर भी चाहिए। रेडिमेड कपड़ों के जमाने में भी घर पर ही स्वेटर की बुनाइ। आज भी लोकप्रिय है। वैसे घर पर ही रहने वाली महिलाओं के लिए यह एक अच्छा टाइम पास भी है। बुनाई एक अच्छी गृहणी की एक फायदेमंद कला कह सकते है।
शाॅपिंग टाइम
शाॅपिंग करना, घूमना, फिरना किसे अच्छा नही लगता। सर्दियों में तो इसका मजा दुगना हो जाता है। सर्दियों में महिलाए भी घर से बाहर निकलना ज्यादा पसंद करती है। इस दौरान बाजारों, माॅल्स आदि में चहल-पहल बढ़ जाती है। गर्म कपड़ों के बाजार भरे रहते है और इनकी बिक्री भी खूब होती है।
शादी-पार्टी का मजा
सर्दियों मे शादियां भी खूब होती है। जाहिर है कि कई घरों में न्यौते पहुचते है। शादियों के कारण ठंड के मौसम में ब्यूटी पार्लर, बैंक्विट हाॅल, होटल, टेंट, घोड़े वाले आदि सभी को फायदा होता है शादी ही नही पार्टी की मौज मस्ती भी सर्द मौसम में खूब होती है। क्रिसमस, न्यूईयर जैसी पार्टियों के अलावा आम स्तर पर पार्टियां आयोजित करने में लोग इन दिनों पसंद करते हैै। महिलाओं की मशहूर किटी पार्टियां भी इसमें शामिल है।
घूमना-फिरना
छुट्टी मनानी हो, पिकनिक पर जाना हो, फिल्म देखने का मन हो, किसी पर्यटन स्थल जाना हो या फिर डेट पर जाना हो। सैर-सपाटे के लिए सर्दियो का मौसम बेहद अनुकूल है। इन दिनों शहर से बाहर जाने का मन करता है। सर्दियों में रोमांस का भी अलग मजा है। तभी तो पार्कों या अन्य स्थलों पर प्रेमियों की चहल-पहल दिन भर बनी रहती है।
खाना-पीना
सजना संवरना होगा। शापिंग होगी। शादियों पार्टियों का मजा लिया जाएगा। घूमना-फिरना होगा। इतना कुछ होगा तो भूख भी तो लगेगी। सर्दियों में खाने को भी ज्यादा मन करता है। इन दिनों भूख अच्छी लगती है। पीने वाले भी सर्दियों में पीने का खूब लुप्फ उठाते है।

होश न खो दे प्यार में

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प्यार केवल मौज मस्ती के लिए न करें इससे दूसरे की भावना को चोट पहुच सकती है। युवापीढ़ी के लोग अधिकतर प्यार मौज मस्ती के लिए करते है और बाद में निराशा के सिवा कुछ हासिल नहीं होता।
कच्ची उम्र का प्यार-प्यार न होकर महज आकर्षण होता है। कच्ची उम्र के प्यार से बचें। प्यार में परिपक्व होना आवश्यक है। कच्ची उम्र में लड़के लड़कियों को सब्जबाग दिखाकर, मीठी-मीठी बातों में बहकातें हैं और लड़की के साथ शारीरिक सुख का पूरा आनंद लेते हैं और फिर छोड़ देतें हैं। ऐसे में पछतावे के सिवा कुछ हाथ नहीं लगता।
प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है, यह कहावत सुनने में अच्छी और सच्ची लगती है। पर फिर भी प्यार करते समय जोश में होश न खोएं, तो अच्छा होगा। अब यह तो प्रकृति कि देन है कि विपरित लिंग की ओर आकर्षण ज्यादा होता है। पर किसी से प्रेम करते समय सोच समझ कर करें तों ज्यादा अच्छा होगा। प्यार का हाथ सोच समझकर बढ़ाएं तो दोनों के लिए हितकारी होगा।

  • लड़का हो या लड़की, प्यार करने से पहले सोचें कि आप जिससे प्यार करने लगे हैं, कहीं ये प्यार एक तरफा तो नहीं। एक तरफा प्यार दुखः ही दुख देता है। दूसरे की भावना को जानकर ही कदम बढ़ाएं तो अच्छा होगा।
    केवल प्यार मौज मस्ती के लिए न करें। इससे दूसरे की भावना को चोट पहुंच सकती है। युवापीढ़ी के लोग अक्सर प्यार मौज मस्ती के लिए ही करते हैं और बाद में उन्हे निराशा के अलावा कुछ नहीं मिलता।
    कच्ची उमर का प्यार-प्यार न होकर महज आकर्षण होता है। कच्ची उमर के प्यार से बचें। प्यार में परिपक्व होना आवश्यक है।
  • यह ध्यान रखें कि आपका मित्र आपका फायदा तो नहीं उठा रहा। आपके प्रति सीरियस है या दोस्तों के सामने बस तड़ी जमाने के लिए दोस्ती तो नहीं कर रहा है।
    अकसर प्यार में युवा पीढ़ी अपने कैरियर को भूल जाते हैं। जो भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। अपना अमूल्य समय घूम फिर के बर्बाद न करें। समझदार प्रमी-प्रमिका को अपने कैरियर को प्राथमिकता देनी चाहिए। ख्यालों में डूबे नहीं रहना चाहिए।
  • सच्चा प्रेम करें। सच्चा प्यार जीवन भर सुखद अहसास करवाता रहता है। ध्यान दे कि आपका साथी प्यार का नाटक तो नहीं कर रहा। कुछ लोग अपने प्रेमी को इस तरह बदलते हैं जैसे वस्त्र। ऐसे प्रेमियों से सावधान रहें। प्रेमी के आर्थिक मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी ध्यान दें। ऐसा न करें कि पछताना पड़े। प्रेमी के सामने अपना स्टेटस दिखाने के चक्कर में न पड़े। जितना चादर हो, उतना ही पैर फैलाएं। सच्चे और लंबे प्यार के लिए ये जरूरी है। ज्यादा खर्च करके कब तक आप झूठी शान का सहारा लेंगे। भेद खुलने पर तो शर्मिंदा होना ही पड़ेगा।
    अपने प्रेमी के साथ अकेले स्थान पर न जाएं जिससे आपका प्रेमी आपका लाभ उठा सके। ग्रुप में ही रहें। अपनी समस्या अपनी दोस्ती के आड़े न आने दें ताकि प्रेमी आपकी मजबूरी का फायदा न उठा सके। संभल कर चले तो प्यार की राह में फूल ही मिलेंग। जरा सा डगर से हटे तो कांटो का सामना करना पड़ेगा। किसी ने ठीक ही कहा हैः- बाबू जी धीरे चलना, प्यार में जरा संभलना, बड़े धोखें हैं इस राह में।
स्लीवलैस ड्रैस पहनने से पहले

आधुनिक युग की महिलाओं में स्लीवलैस परिधानों का आकर्षण बढ़ गया है मगर कई बार देखा जाता है कि महिलाएं स्लीवलैस परिधान पहन तो लेती हैं मगर पूर्ण समझ न होने के कारण स्वयं को हंसी का पात्र बना लेती है। अतः स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व कुछ बातों की जानकारी का होना अति आवश्यक हैः

  • सर्वप्रथम अपनी देहयष्टि का आंकलन कर लेना बेहतर है। यदि आप बहुत पतली व बहुत अधिक लंबी है तो स्लावलैस परिधान आप पर नहीं जंचेगा, क्योंकि इससे आपकी बाजुओं का पतलापन व अविकसित वक्ष साफ नजर आएंगे व आप पहले से भी अधिक दुबली दिखाई देंगी।
  • इसके पश्चात अपने पीठ वाले भाग गर्दन और कुहनियों पर ध्यान दें। यदि आपकी गर्दन पीठ का रंग अन्य भागों से गहरा है तो स्लीवलैस परिधान आपके तन के अन भागों के रंग की गहराई को उभारने में सहायक होगा, अतः ऐसा होने पर स्लीवलैस परिधान पहनने का ख्याल बिल्कुल छोड़ दें।
  • स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व शरीर के इन भागों की सफाई की तरफ पूरा ध्यान दे। बांहों की सफाई के साथ साथ कुहनियों की सफाई भी करें। कामकाजी महिलाओं के लिए तो यह और भी आवश्यक है क्योंकि अक्सर ये काम करते समय अपनी कुहनी को कुर्सी के बाजू या मेज पर टिका लेती है। जिससे कुहनी की त्वचा काली मोटी व खुरदरी हो जाती है। यदि आप स्लीवलैस परिधान पहनेंगी तो आपकी कुहनियां दूर से ही बाजू में काला पैबंद नजर आएंगी।
  • काली मोटी व खुरदरी त्वचा की सफाई के लिए सर्वप्रथम वहां गुनगुने पानी से साबुन लगाएं और लगभग पांच मिनट तक धोएं नहीं। इसके पश्चात् वहां की त्वचा को नहाने वाले किसी 10 बादाम गिरी को पीस लें व एक अंडा फेंटे लें। इसमें एक नींबू का रस मिलाकर लेप बनाकर त्वचा पर लगाएं। 15-20 मिनट के बाद गुनगुने पानी की बूंदें डालें व रगड़ कर साफ करें। सप्ताह में 3 बार ऐसा करें बाहों की त्वचा खिल उठेगी।
  • बाहों को दाग धब्बों से मुक्त करने व कोमलता प्रदान करने हेतु एक छोटा चम्मच चीनी ताजा मलाई और नींबू का आधा हिस्सा लेकर बांह पर चीनी के दाने पिघलाने तक मलें, फिर 5-7 मिनट बाद गुनगुने पानी से धोएं। इस उपाय से आपकी बांहों की त्वचा को जीवंतता प्रदान होगी।
    जैतून के तेल की कुछ बूंदें नींबू का रस व एक अंडे का पीला भाग मिलकर बाहों पर लगाएं इससे अवश्य लाभ होगा।
  • स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व बाहों व बगलों पर से अवांछित बाल हटा लें। इसके लिए सबसे उत्तम उपाय है वैक्स करना। इससे बांहों की त्वचा पूर्णरूप से बालों रहित हो जाती है जो देखने में अच्छी लगती है।
  • घर से बाहर निकलते समय खुले भागों पर सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग अवश्य करें। यथासंभव छाता भी लेकर चलें।
    यदि आप स्लीवलैस ब्लाउज पहनना चाहती हैं तो यह ध्यान रखें कि यह आपकी साड़ी के शेड से मेल खाता हो। प्रिंटिड साड़ी हेा तो बेस कलर का ब्लाउज पहनें। अगर साड़ी प्लेन हो तो मैच करते कंट्रास्ट रंग के ब्लाउज पहनें।
  • इसके साथ ही बाहों की सुडौलता की तरफ भी अवश्य ध्यान दें। थुलथुली बांहों पर स्लीवलैस परिधान अच्छे नहीं लगते इसका ध्यान रखें।
    स्लीवलैस परिधान पहनने से पूर्व बगलों मे सुगंधयुक्त टेलकम पाउडर अथवा डिओडोरेंट का प्रयोग अवश्य करें।
  • यदि सूट या ब्लाउज के रंग को ध्यान में रखते हुए मैच करते कंगन अथवा सिल्वर या सुनहरे रंग का बावजूद भी पहन सकती है। इसके अलावा सुंदर कलाई घड़ी भी पहन लें तो बांहों की शोभा और भी बढ़ जाएगी।